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नक्षत्र
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आकाश में तारा-समूह को नक्षत्र कहते हैं। साधारणतः यह चन्द्रमा के पथ से जुड़े हैं, पर वास्तव में किसी भी तारा-समूह को नक्षत्र कहना उचित है। ऋग्वेद में एक स्थान पर सूर्य को भी नक्षत्र कहा गया है। अन्य नक्षत्रों में सप्तर्षि और अगस्त्य हैं।
नक्षत्र सूची अथर्ववेद, तैत्तिरीय संहिता, शतपथ ब्राह्मण और लगध के वेदांग ज्योतिष में मिलती है।
भागवत पुराण के अनुसार ये नक्षत्रों की अधिष्ठात्री देवियाँ प्रचेतापुत्र दक्ष की पुत्रियाँ तथा चन्द्रमा की पत्नियाँ हैं।भागवत षष्ठ स्कंध षष्ठ अध्याय।
परिचय
तारे हमारे सौर जगत् के भीतर नहीं है। ये सूर्य से बहुत दूर हैं और सूर्य की परिक्रमा न करने के कारण स्थिर जान पड़ते हैं—अर्थात् एक तारा दूसरे तारे से जिस ओर और जितनी दूर आज देखा जायगा उसी ओर और उतनी ही दूर पर सदा देखा जायगा। इस प्रकार ऐसे दो चार पास-पास रहनेवाले तारों की परस्पर स्थिति का ध्यान एक बार कर लेने से हम उन सबको दूसरी बार देखने से पहचान सकते हैं। पहचान के लिये यदि हम उन सब तारों के मिलने से जो आकार बने उसे निर्दिष्ट करके समूचे तारकपुंज का कोई नाम रख लें तो और भी सुविधा होगी । नक्षत्रों का विभाग इसीलिये और इसी प्रकार किया गया है।
चंद्रमा २७-२८ दिनों में पृथ्वी के चारों ओर घूम आता है। खगोल में यह भ्रमणपथ इन्हीं तारों के बीच से होकर जाता है। इसी पथ में पड़नेवाले तारों के अलग-अलग दल बाँधकर एक-एक तारकपुंज का नाम नक्षत्र रखा गया है। इस रीति से सारा पथ इन २७ नक्षत्रों में विभक्त होकर 'नक्षत्र चक्र' कहलाता है। नीचे तारों की संख्या और आकृति सहित २७ नक्षत्रों के नाम दिए जाते हैं—
इन २७ नक्षत्रों के अतिरिक्त 'अभिजित्' नाम का एक और नक्षत्र पहले माना जाता था पर वह पूर्वाषाढ़ा के भीतर ही आ जाता है, इससे अब २७ ही नक्षत्र गिने जाते हैं। इन्हीं नक्षत्रों के नाम पर महीनों के नाम रखे गए हैं। महीने की पूर्णिमा को चंद्रमा जिस नक्षत्र पर रहेगा उस महीने का नाम उसी नक्षत्र के अनुसार होगा, जैसे कार्तिक की पूर्णिमा को चंद्रमा कृत्तिका वा रोहिणी नक्षत्र पर रहेगा, अग्रहायण की पूर्णिमा को मृगशिरा वा आर्दा पर; इसी प्रकार और समझिए।https://palmastrogems.com/27-nakshatra-names-by-list/ २७ नक्षत्र 2025-10-04 en-US 2025-10-04
28वें नक्षत्र का नाम
28वें नक्षत्र का नाम अभिजित (Abhijit)(α, ε and ζ Lyrae - Vega - उत्तराषाढ़ा और श्रवण मध्ये)
राशि
जिस प्रकार चंद्रमा के पथ का विभाग किया गया है उसी प्रकार उस पथ का विभाग भी हुआ है जिसे सूर्य १२ महीनों में पूरा करता है। इस पथ के १२ विभाग किए गए हैं जिन्हें राशि कहते हैं। जिन तारों के बीच से होकर चंद्रमा घूमता है उन्हीं पर से होकर सूर्य भी गमन करता है; खचक्र एक ही है, विभाग में अंतर है। राशिचक्र के विभाग बड़े हैं जिन में किसी-किसी के अंतर्गत तीन-तीन नक्षत्र तक आ जाते हैं। ज्योतिषियों ने जब देखा कि बारह राशियों से सारे अंतरिक्ष के तारों और नक्षत्रों का निर्देश नहीं होता है तब उन्होंने और बहुत सी राशियों के नाम रखे। इस प्रकार राशियों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती गई। पर भारतीय ज्योतिषियों ने खगोल के उत्तर और दक्षिण खंड में जो तारे हैं उन्हें नक्षत्रों में बाँधकर निर्दिष्ट नहीं किया।
नक्षत्र का भारत के साथ संबंध
वैदिक ज्योतिष में, 27 चंद्र नक्षत्र हैं जिनकी भारतीय संस्कृति और इतिहास में गहरी जड़ें हैं। ये खगोलीय चिह्न प्राचीन भारतीय खगोल विज्ञान, कालगणना और अनुष्ठानों का मार्गदर्शन करते थे। नक्षत्रों ने हिंदू त्योहारों, कृषि और यहाँ तक कि नामकरण परंपराओं को भी प्रभावित किया। ऋग्वेद और बृहत् संहिता जैसे ग्रंथ इनके महत्व पर प्रकाश डालते हैं। नक्षत्रों के साथ भारत का संबंध सहस्राब्दियों पुराना है, जो अध्यात्म, विज्ञान और परंपरा का सम्मिश्रण है, और सभ्यता के गहन ब्रह्मांडीय संबंध को दर्शाता है। ये आज भी ज्योतिष, पौराणिक कथाओं और सांस्कृतिक प्रथाओं में महत्वपूर्ण हैं।https://www.britannica.com/topic/nakshatra Nakshatra Hindu Astrology, Origin, List, & Meaning Britannica www.britannica.com en 2025-08-14
इन्हें भी देखें
तारामंडल
बाहरी लिंक
आज का पंचांग https://web.archive.org/web/20250930235659/https://aajkapanchang.co.in/ 30 सितंबर 2025
सन्दर्भ
श्रेणी:ज्योतिष
श्रेणी:हिन्दू धर्म
श्रेणी:नक्षत्र