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गुलामी पर इस्लाम के विचार
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right|thumb|300px|यमन के ज़ाबिद शहर में गुलामों की खरीद-फरोख्त । यह चित्र याह्या इब्न महमूद अल-वासिती ने बनाया था जो १३वीं शताब्दी में इराक का महान चित्रकार था। (फ्रांसीसी राष्ट्रीय पुस्तकालय)
right|thumb|300px|काहिरा (मिस्र) में गुलामों के बाजार का डेविड रॉबर्ट्स द्वारा चित्रण
गुलामी पर इस्लाम के विचार क्या रहे हैं, इस पर अनेक विचार हैं। ब्रोकॉप, जोनाथन ई॰, “Slaves and Slavery”, in: Encyclopaedia of the Qurʾān, General Editor: Jane Dammen McAuliffe, Georgetown University, Washington DC.Brunschvig, R., “ʿAbd”, in: Encyclopaedia of Islam, Second Edition, Edited by: P. Bearman, Th. Bianquis, C.E. Bosworth, E. van Donzel, W.P. Heinrichs.इस विषय पर विभिन्न इस्लामी समूहों एवं विचारकों के ऐतिहासिक रूप से भिन्न-भिन्न रहे हैं। Lewis 1994, Ch.1 https://web.archive.org/web/20010401012040/http://www.fordham.edu/halsall/med/lewis1.html 2001-04-01
अरब में इस्लाम के आने के पहले से ही अरब एवं आसपास के क्षेत्रों में गुलामी प्रचलित थी।Brockopp, Jonathan E., "Slaves and Slavery", in: Encyclopaedia of the Qurʾān, General Editor: Jane Dammen McAuliffe, Georgetown University, Washington DC. एक अनुमान के अनुसार अरब की पूरी जनसंख्या का लगभग एक-तिहाई गुलाम थे। कुरान और हदीस में गुलामी का बहुतायत में उल्लेख हुआ है और माना गया है कि उस समाज में गुलाम रखने की प्रथा थी, लेकिन इसे अपवाद के रूप में ही माना जाता था। इस्लामिक स्रोतो से पता चलता है कि खुद मुहम्मद साहब ने अपने पास गुलाम रखे थे जो खरीदकर, उपहार में या युद्ध में जीतकर प्राप्त किये गये थे। यद्यपि कई हदीसों में गुलामों के साथ दया करने को कहा गया है किन्तु इस्लाम के आलोचकों का तर्क है कि मुहम्मद साहब का गुलाम रखने एवं गुलामों की खरीद-फरोख्त करने में स्वयं लिप्त रहना यह प्रमाणित करता है कि इस्लाम में गुलामी को प्रश्रय था।Brown 2019, पृष्ठ 10–77. अरब देशों के मुसलमानों ने पूर्वी अफ्रीका के लाखों लोगों को गुलाम बनाया था।कैसे भुला दी गई अफ्रीकी लोगों की गुलामी की दास्तां
इस्लाम में गुलामी के बारे में वर्तमान स्थिति क्या है, इस विषय पर भी मतैक्य नहीं दिखता। बहुत से लोगों का तर्क है कि इस्लाम ने गुलामी की प्रथा को कभी समाप्त नहीं किया। Reason #45: Did Islam ban slavery? कुछ का विचार है कि इस्लाम ने मुहम्मद साहब के समय में गुलामी नहीं समाप्त बल्कि उसे धीरे-धीरे कई शताब्दियों में समाप्त किया।Why didn’t Islam abolish slavery immediately? कुछ का विचार है कि सैद्धान्तिक तौर पर इस्लाम में आज भी गुलामी को समाप्त नहीं किया गया है, किन्तु व्यवहार में गुलामी की प्रथा समाप्त हो गयी है।Slavery in Islam
इस्लामिक कानून केवल उन गैर-मुस्लिमों को कानूनी गुलाम मानता था जिन्हें इस्लामी शासन की सीमाओं से परे कैद या खरीदा गया था, या गुलामों के बेटे और बेटियों को पहले से ही कैद में रखा गया था। बाद के शास्त्रीय इस्लामी कानून में, गुलामी के विषय को बहुत विस्तार से कवर किया गया है। दास, चाहे वे मुस्लिम हों या किसी अन्य धर्म के, धार्मिक मामलों में अपने साथी के बराबर थे।Dror Ze’evi Slavery The Oxford Encyclopedia of the Islamic World John L. Esposito Oxford University Press Oxford 2009 http://bridgingcultures.neh.gov/muslimjourneys/items/show/214 2017-02-23 https://web.archive.org/web/20170223125519/http://bridgingcultures.neh.gov/muslimjourneys/items/show/214 2017-02-23 dead https://web.archive.org/web/20170223125519/http://bridgingcultures.neh.gov/muslimjourneys/items/show/214 23 फ़रवरी 2017 http://bridgingcultures.neh.gov/muslimjourneys/items/show/214 संग्रहीत प्रति 8 दिसंबर 2022 23 फ़रवरी 2017 https://web.archive.org/web/20170223125519/http://bridgingcultures.neh.gov/muslimjourneys/items/show/214 dead इस्लामी दुनिया में ग़ुलामों ने आगे चलकर ग़ज़नवी साम्राज्य, ख्वारिज्मी साम्राज्य, दिल्ली ग़ुलाम वंश, ममलूक राजवंश (इराक) और मामलुक साम्राज्य बड़ी सल्तनतें क़ायम कीं या उनका आधार रखा।
ग़ुलाम शब्द
प्रोफेसर जियाउर्रहमान आज़मी के अनुसार ग़ुलाम अरबी भाषा में 'अब्द' कहते हैं और 'अब्द' का प्रयोग कुरआन तथा हदीसों में 'स्वतंत्र मनुष्य' तथा दास दोनों के लिए आया है।
प्रोफेसर जियाउर्रहमान आज़मी कुरआन मजीद की इन्साइक्लोपीडिया ग़ुलाम https://archive.org/details/1.2_20211230_202112/page/n269/mode/2up www.archive.org पृष्ठ 272 20 दिसम्बर 2021 जैसे:
'निश्चय ही इसमें हर उस 'अब्द' के लिए निशानी है जो (अल्लाह की ओर) रूजू करने वाला है' (कुरआन 34:9)
'निश्चय ही वह एक कृतज्ञ अब्द (बन्दा) था' (कुरआन 17:3) नबी को भी अच्छा अर्थात बन्दा कहा गया है।
अब्द का दूसरा अर्थ दास या हिन्दुस्तानी भाषा में गुलाम के हैं। जैसे कि कुरआन में है - 'ऐ ईमानवालो, मारे गए लोगों के बारे में किसास अनिवार्य ठहराया गया है। स्वतंत्र का बदला स्वतंत्र, अब्द (गुलाम) का बदला अब्द (गुलाम), स्त्री का बदला स्त्री......' (कुरआन 2:178)
क्या तुमने देखा नहीं उस व्यक्ति को जो एक बन्दे को रोकता है जब वह नमाज़ पढ़ता है'' (सूरा- 96, अल-अलक, आयतें -9, 10) यह संकेत इस्लाम विरोधियों के सरदार अबू-लहब की ओर है जो नबी को नमाज पढ़ने से रोका करता था।
मुशरिक पुरुषों से अपनी स्त्रियों का विवाह न करो जब तक कि वे ईमान न लाएँ। ईमानवाला एक अब्द एक मुशरिक पुरुष से अच्छा है चाहे वह तुम्हें कितना ही अच्छा लगे (सूरा-2, अल-बकरा, आयत-221)
कुरआन में ग़ुलाम संबंधित आयतें
गुलामी की प्रथा के बीज कुरान में ही उपलब्ध हैं। इसे इस्लाम के कई आलोचक विस्तार से सामने रखते हैं।Qur'an, Hadith and Scholars:SlaverySlavery in Islam
ऐ ईमान लानेवालो! मारे जानेवालों के विषय में हत्यादंड (क़िसास) तुमपर अनिवार्य किया गया, स्वतंत्र-स्वतंत्र बराबर है और ग़़ुलाम-ग़ुलाम बराबर है और औरत-औरत बराबर है। फिर यदि किसी को उसके भाई की ओर से कुछ छूट मिल जाए तो सामान्य रीति का पालन करना चाहिए; और भले तरीके से उसे अदा करना चाहिए। यह तुम्हारें रब की ओर से एक छूट और दयालुता है। फिर इसके बाद भो जो ज़्यादती करे तो उसके लिए दुखद यातना है (2:178)
किसी ईमानवाले का यह काम नहीं कि वह किसी ईमानवाले का हत्या करे, भूल-चूक की बात और है। और यदि कोई क्यक्ति यदि ग़लती से किसी ईमानवाले की हत्या कर दे, तो एक मोमिन ग़ुलाम को आज़ाद करना होगा और अर्थदंड उस (मारे गए क्यक्ति) के घरवालों को सौंपा जाए। यह और बात है कि वे अपनी ख़शी से छोड़ दें। और यदि वह उन लोगों में से हो, जो तुम्हारे शत्रु हों और वह (मारा जानेवाला) स्वयं मोमिन रहा तो एक मोमिन को ग़ुलामी से आज़ाद करना होगा। और यदि वह उन लोगों में से हो कि तुम्हारे और उनके बीच कोई संधि और समझौता हो, तो अर्थदंड उसके घरवालों को सौंपा जाए और एक मोमिन को ग़ुलामी से आज़ाद करना होगा। लेकिन जो (ग़ुलाम) न पाए तो वह निरन्तर दो मास के रोज़े रखे। यह अल्लाह की ओर से निश्चित किया हुआ उसकी तरफ़ पलट आने का तरीक़ा है। अल्लाह तो सब कुछ जाननेवाला, तत्त्वदर्शी है(4:92)
तुममें जो बेजोड़े के हों और तुम्हारे ग़ुलामों और तुम्हारी लौंडियों मे जो नेक और योग्य हों, उनका विवाह कर दो। यदि वे ग़रीब होंगे तो अल्लाह अपने उदार अनुग्रह से उन्हें समृद्ध कर देगा। अल्लाह बड़ी समाईवाला, सर्वज्ञ है (24:32)
ग़ुलाम संबन्धित हदीस
मौलाना सैयद अबुल आला मौदूदी (1903-1979) ने लिखा:
इस्लाम ने स्पष्ट रूप से और स्पष्ट रूप से एक स्वतंत्र व्यक्ति को पकड़ने, उसे गुलाम बनाने या उसे गुलामी में बेचने की आदिम प्रथा को प्रतिबंधित कर दिया है। इस बिंदु पर मुहम्मद के स्पष्ट और स्पष्ट शब्द इस प्रकार हैं:
"लोगों की तीन श्रेणियां हैं जिनके खिलाफ मैं निर्णय के दिन खुद एक वादी बनूंगा। इन तीनों में से एक वह है जो एक स्वतंत्र व्यक्ति को गुलाम बनाता है, फिर उसे बेचता है और इस पैसे को खाता है" (अल-बुखारी और इब्न मज्जाह)From "Human Rights in Islam" by 'Allamah Abu Al-'A'la Mawdudi. Chapter 3, subsection 5 https://web.archive.org/web/20070203193405/http://www.central-mosque.com/fiqh/slav3.htm 2007-02-03
अब्दुल्लाह बिन उमर- रज़ियल्लाहु अन्हुमा- का वर्णन है कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "कोई दास जब अपने मालिक का शुभचिंतक रहे और अच्छी तरह अल्लाह की इबादत करे, उसे दोगुना प्रतिकार मिलेगा।" अबू मूसा अशअरी- रज़ियल्लाहु अन्हु- कहते हैं कि अल्लाह के रसूल- सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमायाः "जो ग़ुलाम अच्छी तरह अपने पालनहार की इबादत करे और अपने मालिक के अधिकार अदा करे, उसका शुभचिंतक रहे तथा उसकी बात मानकर चले, उसे दोगुना प्रतिकार मिलेगा।"
अबू हुरैरा -रज़ियल्लाहु अन्हु- से रिवायत है, वह कहते हैं कि नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया : “जो शख़्स किसी मुसलमान ग़ुलाम को आज़ाद करेगा, तो अल्लाह आज़ाद किए गए ग़ुलाम के शरीर के हर अंग के बदले उसके शरीर का एक अंग दोज़ख़ से आज़ाद करेगा।”अनूदित हदीस-ए-नबवी विश्वकोश https://hadeethenc.com/hi/browse/hadith/64703#:~:text=%E0%A4%97%E0%A4%BC%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%AE
उल्लेखनीय ग़ुलाम जो आज़ाद हुए
बिलाल इब्न रबाह
अम्मार बिन यासिर
सुहैब बिन सिनान
:en:Ata ibn Abi Rabah
वहशी इब्न हर्ब
मलिक अंबर
:en:Alam al-Malika
:सैफुद्दीन कुटज़
रुकनुद्दीन बेबर्स
कुतुब-उद-दीन ऐबक
इल्तुतमिश
मलिक काफ़ूर
इन्हें भी देखें
गुलामी की प्रथा
मुसलमानी विश्व में रखैल का इतिहास
इस्लाम की आलोचना
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
Slavery in Islam इस्लाम में गुलामी
बीबीसी डोक्यूमेंट्री, धर्म और नैतिकता - इस्लाम और गुलामी (Religion and Ethics - Islam and Slavery)
अरब गुलाम व्यापार
श्रेणी:इस्लाम से संबंधित विवाद
श्रेणी:इस्लाम