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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

जानकी अम्माल

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जानकी अम्माल ജാനകി അമ്മാൾ Botanist Janaki Ammal.jpg जानकी अम्माल 1897 11 4 yes तेल्लिचेरी, केरल फरवरी १९८४ (८७ वर्ष की आयु में) भारत भारतीय वनस्पति विज्ञान, कोशिका विज्ञान यूनिवर्सिटी बॉटनी लैबोरेटरी, मद्रास हिन्दुत्वएडावलेठ कक्कट जानकी अम्माल (Edavaleth Kakkat Janaki Ammal) (१८९७-१९८४) भारत की एक महिला वैज्ञानिक थीं। अम्माल एक ख्यातिनाम वनस्पति और कोशिका वैज्ञानिक थीं जिन्होंने आनुवांशिकी, उद्विकास, वानस्पतिक भूगोल और नृजातीय वानस्पतिकी के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया। पद्म श्री से सम्मानित जानकी अम्माल भारतीय विज्ञान अकादमी की संस्थापक फेलो रहीं हैं।C.V Subramanyan Janaki Ammal http://www.ias.ac.in/womeninscience/Janaki.pdf Indian Association of Scientists १४ सितम्बर २0१३ https://web.archive.org/web/20111226144738/http://www.ias.ac.in/womeninscience/Janaki.pdf 26 दिसंबर 2011 live आरंभिक जीवनी जानकी अम्माल का जन्म केरल के तेल्लीचेरी में वर्ष १८९७ में हुआ। एक सुसंस्कृत मध्यवर्गीय परिवार में जन्मी अम्माल के पिता तत्कालीन मद्रास सूबे में उप-न्यायाधीश थे। अम्माल के छः भाई और पाँच बहनें थीं। तेल्लीचेरी में आरंभिक शिक्षा के बाद उच्च शिक्षा के लिए अम्माल मद्रास चली गयीं जहाँ उन्होंने क्वींस मेरी'ज़ कॉलेज से स्नातक की और १९२१ में प्रेसीडेन्सी कॉलेज से ऑनर्स की उपाधि अर्जित की।Subramanian C V Edavaleth Kakkat Janaki Ammal — IAS Women in Science http://www.ias.ac.in/womeninscience/Janaki.pdf Indian Academy of Sciences १४ सितम्बर २0१३ https://web.archive.org/web/20111226144738/http://www.ias.ac.in/womeninscience/Janaki.pdf 26 दिसंबर 2011 live manali अकादमिक जीवन अम्माल ने वीमेन्स क्रिश्चियन कॉलेज, मद्रास में पढ़ाया। वे मिशिगन विश्वविद्यालय, अमेरिका में एक बार्बर स्कॉलर के तौर पर कुछ समय तक के लिए रहीं जहाँ से उन्होंने १९२५ में अपनी स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। भारत वापसी के पश्चात उन्होंने वी॰क्रि॰कॉ॰ में पढ़ाना जारी रखा। अम्माल, पहले ओरिएंटल बार्बर फेलो के तौर पर, पुनः मिशिगन चली गयीं जहाँ १९३१ में उन्होंने डी॰एससी॰ की उपाधि प्राप्त की। वे वानस्पतिकी की प्रोफेसर के रूप में लौटीं और महाराजा कॉलेज ऑफ साईंस, त्रिवेन्द्रम में १९३० से १९३४ तक पढ़ाया। पुरस्कार और सम्मान अम्माल को १९३५ में भारतीय विज्ञान अकादमी का तथा १९५७ में भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी का फेलो चुना गया। मिशिगन विश्वविद्यालय ने १९५६ में उन्हें एलएल॰डी॰ की मानद उपाधि प्रदान की। भारत सरकार ने १९५७ में उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया।http://mha.nic.in/sites/upload_files/mha/files/LST-PDAWD-2013.pdf Padma Shri Padma Shri 2015 June 23, 2015 https://www.webcitation.org/6U68ulwpb?url=http://mha.nic.in/sites/upload_files/mha/files/LST-PDAWD-2013.pdf 15 नवंबर 2014 live २००० में भारत सरकार के पर्यावरण और वन मंत्रालय ने उनके नाम पर वर्गीकरण विज्ञान के क्षेत्र में राष्ट्रीय पुरस्कार संस्थापित किया। सन्दर्भ Anil sharma अन्य स्रोत S Kedharnath, Edavaleth Kakkat Janaki Ammal (1897–1984), Biographical Memoirs of Fellows of the Indian National Science Academy, 13, pp. 90–101, with portrait (1988)। P Maheshwari and R N Kapil, Fifty Years of Science in India. Progress of Botany, भारतn Science Congress Association, Calcutta, pp. 110, 118 (1963)। श्रेणी:1897 में जन्मे लोग श्रेणी:१९८४ में निधन श्रेणी:पद्मश्री प्राप्तकर्ता श्रेणी:भारतीय महिला वैज्ञानिक श्रेणी:भारतीय वनस्पति वैज्ञानिक [[श्रेणी महिला जीव वैज्ञानिक]]