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411 समाचार
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जिव्या सोमा म्हसे

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जिव्य सोमा माशे Jivya Soma Mashe.jpg जिव्य सोमा माशे, २००९ तलासरी, ठाणे, महाराष्ट्र, भारत १९३४ १५ मई २०१८ (उम्र ८४) *आदिवासी कला के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार (१९७६) शिल्प गुरु पुरस्कार प्रिंस क्लाउस अवार्ड पद्मश्री वारली चित्रकला भारतीय डहाणू, पालघर, महाराष्ट्र, भारत श्रेणी:Articles with hCards अंगूठाकार| जिव्य सोमा माशे की एक वारली पेंटिंग जिव्या सोमा म्हसे (१९३४ - १५ मई २०१८) भारत में महाराष्ट्र राज्य के एक कलाकार थे जिन्होंने वारली आदिवासी कला रूप को लोकप्रिय बनाया।https://www.newindianexpress.com/nation/2018/may/15/warli-artist-jivya-soma-mashe-passes-away-1815028.html Warli artist Jivya Soma Mashe passes away The New Indian Express 6 October 2021 माशे का जन्म महाराष्ट्र के ठाणे जिले के तलासरी तालुका के धमनगांव गांव में हुआ था। ११ वर्ष की उम्र में वे ठाणे जिले के डहाणू तालुका के कलांबीपाड़ा गाँव में आ गए। १९७० के दशक में वारली पेंटिंग, जो उस समय तक मुख्य रूप से एक अनुष्ठान कला थी, ने एक क्रांतिकारी मोड़ लिया, और उसी समय जिव्य माशे ने वारली चित्र बनाने शुरू किए। वे किसी विशेष अनुष्ठान के लिए नहीं बनाते थे, लेकिन हर दिन बनाते थे। उनकी प्रतिभा को जल्द ही देखा गया, पहले राष्ट्रीय स्तर पर (उन्हें सीधे जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी जैसे भारत के वरिष्ठ राजनीतिक हस्तियों के हाथों से पुरस्कृत किया गया) फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर (मजिशन द ला तेर्र, सेंटर पोंपीदू), जिसके चलते उन्हें अभूतपूर्व पहचान मिली और कई अन्य लोगों को प्रेरित किया। इसके चलते उन्होंने व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए नियमित रूप से तस्वीरें बनाना शुरू कर दिया।http://cms.newindianexpress.com/cities/hyderabad/2018/may/16/noted-warli-artist-jivya-soma-mashe-passes-away-1815148.html Noted Warli artist Jivya Soma Mashe passes away- The New Indian Express cms.newindianexpress.com 2020-11-24 19 फ़रवरी 2022 https://web.archive.org/web/20220219083526/http://cms.newindianexpress.com/cities/hyderabad/2018/may/16/noted-warli-artist-jivya-soma-mashe-passes-away-1815148.html dead जीवन जिव्य सोमा माशे ने ७ वर्ष की कम उम्र में अपनी माँ को खो दिया और सदमे से उन्होंने कई वर्षों तक बोलना बंद कर दिया, और अपनी बातों को बिलने के लिए वे केवल धूल में चित्र बनाकर संवाद करते थे। इस अजीब रवैये ने जल्द ही उन्हें अपने समुदाय के भीतर एक विशेष दर्जा मिल गया। वारली चित्रकला को संरक्षित करने के लिए भेजे गए पहले सरकारी कर्मचारी उनकी कलात्मक क्षमताओं से चकित थे। जिव्य सोमा माशे एक उच्च संवेदनशीलता दिखाते थे और उनकी कल्पना असामान्य रूप से शक्तिशाली थी, जो उनके प्रारंभिक आत्मनिरीक्षण काल की विरासत प्रतीत होती है। कागज और किरमिच ने उन्हें उबड़-खाबड़, सरासर दीवारों पर काम करने की बाधाओं से मुक्त कर दिया और उन्होंने क्षणिक चित्रों के भंगुर रूप को एक आजाद, अत्यधिक संवेदनशील शैली में बदल दिया। उनकी तस्वीरों के हर विवरण में उनकी संवेदनशीलता दिखाई देती है। लकीरों, रेखाओं और बिंदुओं का एक समूह किरमिच पर झुंड और कंपन करता है, और वे एक साथ मिलकर अद्भुत रचनाएं बनाती हैं जो कंपन के सामान्य प्रभाव को सुदृढ़ करता है। विवरण और समग्र रचना, दोनों ही जीवन और गति की भावना में योगदान करते हैं। आदिवासी जीवन और वारली किंवदंतियों से आवर्ती विषय भी जीवन और गति का जश्न मनाना सिखाते हैं।https://www.firstpost.com/entertainment/jivya-soma-mashe-known-for-popularising-warli-tribal-art-form-passes-away-aged-84-4469929.html Jivya Soma Mashe, known for popularising Warli tribal art form, passes away aged 84 - Entertainment News, Firstpost 2018-05-15 Firstpost 2020-11-24 जिव्य सोमा माशे ने उस गहरी भावना को अभिव्यक्त किया जो वारली के लोगों को जान देती है, यह कहते हुए कि, "मनुष्य, पक्षी, जानवर, कीड़े आदि होते हैं। सब कुछ चलता है, दिन और रात। जीवन गति है।"http://contemporary-tribal-folk-arts-india.blogspot.com/2006/09/jivya-soma-mashe-warli-tribe-english.html Jivya Soma Mashe "Warli Tribe" (english) 2020-11-24 वारली बनाने वाले आदिवासी हमसे प्राचीन काल की बात करते हैं और एक पुश्तैनी संस्कृति को उद्घाटित करते हैं। इस संस्कृति के गहन अध्ययन से आधुनिक भारत की सांस्कृतिक और धार्मिक नींव के बारे में और जानकारी मिल सकती है। १४ मई २०१८ को ८४ वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया और उनका राजकीय अंतिम संस्कार किया गया।https://www.thehindu.com/news/national/other-states/warli-artist-padmashree-jivya-soma-mashe-dies/article23896990.ece Warli artist Padmashree Jivya Soma Mashe dies 2018-05-16 The Hindu 2020-11-24 Press Trust of India en-IN 0971-751X जिव्य के दो बेटे, सदाशिव और बलू, और एक बेटी है। उनके बड़े बेटे सदाशिव का जन्म १९५८ में हुआ था। उनके दोनों बेटे इस कला के जाने-माने प्रतिपादक हैं। प्रदर्शनियाँ जिव्य की पहली प्रदर्शनी भास्कर कुलकर्णी की पहल पर १९७५ में मुंबई में जहांगीर आर्ट गैलरी गैलरी केमोल्ड में आयोजित की गई थी, जिन्होंने पहली बार इस गुरु को बाहरी दुनिया से परिचित कराया था।http://www.dnaindia.com/lifestyle/salon_talking-in-tribal-tones_1109736 Talking in Tribal Tones Banerjee Reema 13 July 2007 Daily News and Analysis 23 February 2010 भारत के बाहर उनकी पहली प्रदर्शनी १९७६ में फ्रांस के पालिस द मेंतं में थी। २००३ में जर्मनी के डसेलडोर्फ में संग्रहालय कुन्स्ट पलास्ट में रिचर्ड लॉन्ग के साथ उनकी एक संयुक्त प्रदर्शनी थी, और २००४ में इटली के मिलानो में पैडिग्लियोन डी'आर्टे कंटेम्पोरानिया में।https://www.britishmuseum.org/collection/term/BIOG230792 Collections Online British Museum britishmuseum.org 2020-11-24 इसके बाद २००६ में शिपेंसबर्ग विश्वविद्यालय, संयुक्त राज्य अमेरिका में और २००७ में हाले सेंट पियरे, पेरिस (संयुक्त रूप से नेक चंद के साथ) में प्रदर्शनियों का आयोजन किया गया। जुलाई, २००७ में उनके चित्रों की एक और प्रदर्शनी मुंबई के गैलरी शमोल्ड में आयोजित की गई थी।https://www.livemint.com/Leisure/VzevOLDy2rkUUKYF4uWUPO/Remembering-the-Other-Master-Jivya-Soma-Mashe.html Remembering the 'Other Master', Jivya Soma Mashe Iyengar Radhika 2018-05-25 mint en 2020-11-24 पुरस्कार और सम्मान १९७६ में उन्हें जनजातीय कला के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। २००२ में उन्हें शिल्प गुरु पुरस्कार मिला।http://pib.nic.in/archieve/lreleng/lyr2002/rnov2002/15112002/r1511200210.html President honours craft persons as Shilp Gurus 15 November 2002 Press Information Bureau Government of India 23 February 2010 २००९ में वे अपनी वारली चित्रकला के लिए प्रिंस क्लॉस अवार्ड के प्राप्तकर्ता थे।http://www.princeclausfund.org/en/what_we_do/awards/index.shtml 2009 Prince Claus Awards 2009 Prince Claus Awards https://web.archive.org/web/20100704163954/http://www.princeclausfund.org/en/what_we_do/awards/index.shtml 4 July 2010 23 February 2010 २०११ में उन्हें वारली पेंटिंग में उनके योगदान के लिए पद्म श्री मिला।Padma Awards Announced http://www.pib.nic.in/newsite/erelease.aspx?relid=69364 25 January 2011 26 January 2011 यह सभी देखें वारली पेंटिंग आदिवासी भारतीय कला भारत में अनुसूचित जनजातियों की सूची संदर्भ बाहरी कड़ियाँ जिव्या सोमा म्हासे का पृष्ट प्रागैतिहासिक शैलकला से उत्पन्न हुई,पश्चिम भारत की वार्ली कला के दिग्गज : जिव्या सोमा म्हासे जीव सोमा माशे ब्लॉग जिव्या सोमा माशे एक प्रसिद्ध वारली कलाकार नेक चंद - जिव्या सोमा माशे, हाले सेंट पियरे, पेरिस वार्ली कला होम पेज https://web.archive.org/web/20200616112906/https://www.folkartsindia.co.in/2020/05/warli-painting-jivya-soma-mashe.html 16 जून 2020 द वार्ली पेंटिंग आर्टिस्ट जिव्या सोमा माशे श्रेणी:कला में पद्मश्री के प्राप्तकर्ता श्रेणी:भारतीय पुरुष चित्रकार श्रेणी:२०१८ में निधन श्रेणी:1934 में जन्मे लोग