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411 समाचार
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तामसिक आहार

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अप्रैल 2025 तामसिक आहार वह आहार है जो तामसिक तत्वों से युक्त, अशुद्ध और सड़ा हुआ आहार होता है।https://books.google.co.in/books?id=L5S9R6_xjkcC&pg=PA219&dq=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%95+%E0%A4%86%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0&hl=en&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwjkqYGysZ2BAxUyTWwGHdfLAaMQ6AF6BAgGEAM#v=onepage&q=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%86%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0&f=false Yoga Sampurna Sachitra Pustak Devananda Vishnu Motilal Banarsidass Publishers Pvt. Limited 2009 9788120832565 219 Hindi Paperback भगवद् गीता के अनुसार आहार तीन प्रकार का होता है : सात्विक ( शुद्ध आहार ) , राजसिक ( उत्तेजक आहार ) , और तामसिक आहार ( अशुद्ध और सड़ा हुआ आहार ) । जो आहार शरीर में पहुँचकर शरीर पर बोझ सिद्ध हो। निद्रा, बेहोशी, मतिभ्रम की स्थिति उत्पन्न करे, उत्तेजना में वृद्धि करे, ऐसा आहार तामसिक प्रकार का होता है। मदिरा , अत्यधिक मात्रा में चाय - कॉफी , तंबाकू , अफीम , गाँजा , चरस , कोकीन , ब्राउन शुगर आदि हमारी प्राकृतिक चेतना को उत्तेजना में ले जाते हैं । ये पदार्थ धीमी या तेज गति से हमारी आयु तथा जीवन - संपदा को क्षरित या विकृत कर देते हैं । ये आर्थिक , सामाजिक और वंशानुगत हानियाँ पहुँचाते हैं । जो लोग उपर्युक्त दोनों प्रकार के आहारों का समावेश अपने भोजन में करते हैं । फलस्वरूप ज्यादा से ज्यादा क्लिष्ट और जटिल रोगों के रोगी होकर जीवन भर कष्ट भोगते हैं ।https://books.google.co.in/books?id=vQdRDwAAQBAJ&pg=PT37&dq=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%95+%E0%A4%86%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0&hl=en&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwjkqYGysZ2BAxUyTWwGHdfLAaMQ6AF6BAgNEAM#v=onepage&q=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%86%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0&f=false Aahaar Chikitsa: Aahaar Chikitsa: The Healing Power of Food Akshaya Atmanand Swami Prabhat Prakashan 2021 9789351867708 Hindi कषाय , तिक्त रस वाले तथा बासी पदार्थ मन में तमोगुण को उत्तेजित करते हैं । प्याज व लहसुन , जैसे शाकाहारी पदार्थ तामसिक आहार के अन्तर्गत आते हैं ।https://books.google.co.in/books?id=c7VEcjWUlCQC&pg=PA379&dq=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%95+%E0%A4%86%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0&hl=en&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwjkqYGysZ2BAxUyTWwGHdfLAaMQ6AF6BAgKEAM#v=onepage&q=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%86%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0&f=false Ayurvedic ka Saidhantik Adhyan Dash Vaidya Bhagwan Gupta Ku Kanchan Concept Publishing Company 9788170225959 379 Hindi ebook तामसिक आहार : कषाय , तिक्त रस वाले तथा बासी पदार्थ मन में तमोगुण को उत्तेजित करते हैं । माँस , मछली आदि आमिष भोजन तथा प्याज व लहसुन , जैसे शाकाहारी पदार्थ तामसिक आहार के अन्तर्गत आते हैं । भारतीय दर्शन के अनुसार तामसिक आहार के कारण बुद्धि भी तामसिक होती है। इससे अच्छे और बुरे का फर्क करना नही आता । तामसिक आहार बुद्धि को दूषित करता है ।https://books.google.co.in/books?id=1Pm0EAAAQBAJ&pg=PT128&dq=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%95+%E0%A4%86%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0&hl=en&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwjkqYGysZ2BAxUyTWwGHdfLAaMQ6AF6BAgJEAM#v=onepage&q=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%86%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0&f=false Saral Shrimadbhagvatgita Jorwar Ramchandra 2023 Hindi आहार तामसिक होने के कारण इनकी बुद्धि भी तामसिक होती है । उन्हें अच्छे और बुरे का फर्क नहीं पता । तामसिक आहार बुद्धि को दूषित करता है । आयुर्वेद के अनुसार तामसिक आहार से मन सुस्त , भारीपन और भटकाव महसूस करता है । उपनिषदों में कहा गया है कि आहार शुद्ध होने से अंतःकरण शुद्ध होता है और अंतःकरण शुद्ध होने पर विवेक बुद्धि ठीक से काम करती है ।https://books.google.co.in/books?id=K8tcEAAAQBAJ&pg=PA53&dq=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%95+%E0%A4%86%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0&hl=en&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwjkqYGysZ2BAxUyTWwGHdfLAaMQ6AF6BAgMEAM#v=onepage&q=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%86%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0&f=false Manushya Jivan Ki Anokhi Kitab Sain Naresh Variya Pradip Naresh Sain & Pradip Variya 2022 53 Hindi ebook स्वास्थ्य संबंधी नुकसान तामसिक भोजन मांस - मदिरा , मानसिक स्वास्थ पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं ।https://books.google.co.in/books?id=nB3hDwAAQBAJ&pg=PA107&dq=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%95+%E0%A4%86%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0+%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A5%8D%E0%A4%AF&hl=en&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwj2jPHn-Z2BAxXFfGwGHdxxAewQ6AF6BAgNEAM#v=onepage&q=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%86%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%20%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A5%8D%E0%A4%AF&f=false Health Psychology (Swasth Manovigyan) Kumar Dr. Vikas Motilal Banarsidass 2020 9788120842663 107 Hindi ebook तामसिक भोजन मांस - मदिरा , मानसिक स्वास्थ पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं । मांसाहारियों का मृत्यु दर अधिक होता है । तामसी आहार हृदय , फेफड़े , और यकृत ( जिगर , लिवन ) पर दुष्प्रभाव डालते हैं , जिससे शरीर में अनेक प्रकार के रोग हो जाते हैं । धूम्रपान से कैंसर और वसा के अधिक प्रयोग से रक्तचाप तथा हार्ट अटैक होते हैं ।https://books.google.co.in/books?id=REZFwMFGIwAC&pg=PA103&dq=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%95+%E0%A4%86%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0+%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%B0&hl=en&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwjlx4S2_Z2BAxUrSWwGHQHpDQ0Q6AF6BAgLEAM#v=onepage&q=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%86%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0%20%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%82%E0%A4%B8%E0%A4%B0&f=false रेकी - स्पर्श - तरंग (वैकल्पिक चिकित्सा) सिंह डॉ ० मंजुलता पराग बुक्स 2007 9788187771289 महालक्ष्मी प्लाज़ा , राजेन्द्र नगर , साहिबाबाद , ग़ाज़ियाबाद 201005, ( उ ० प्र ० ) 103 Hindi मांसाहारियों का मृत्यु दर अधिक होता है । तामसी आहार हृदय , फेफड़े , और यकृत ( जिगर , लिवन ) पर दुष्प्रभाव डालते हैं , जिससे शरीर में अनेक प्रकार के रोग हो जाते हैं । धूम्रपान से कैंसर और वसा के अधिक प्रयोग से रक्तचाप तथा हार्ट अटैक होते हैं । डॉ. कोवन अपनी पुस्तक 'सायन्स ऑफ ए न्यू लाइफ' में लिखते हैं कि काम - वासना को उत्पन्न करने के कारणों में से दूषित भोजन मुख्य है । यह कल्पना करना कि बच्चे को भोजन में अण्डा , मांस , मिर्च , मसाला , मिठाई , अचार , चाय , कॉफ़ी और कभी - कभी शराब भी दी जाय और वह कामुकता से बचा रहे , एक असम्भव कल्पना करना है । यदि ५ या १० वर्ष की आयु वाले आस्मान के फरिश्ते को भी ये भोजन खाने को दिये जायँ तो उस में भी आत्म - व्यभिचार की वासना उत्पन्न हो जायगी ; मनुष्य के बालक का तो , जिस में हज़ारों पैत्रिक कुसंस्कार पहले ही बीज रूप से मौजूद होते हैं , कहना ही क्या !https://archive.org/details/in.ernet.dli.2015.343599/page/n113/mode/1up ब्रह्मचर्य - सन्देश सिद्धान्तालंकार प्रो. सत्यव्रत दी शर्मा ट्रेडिंग कम्पनी लाहौर चौल, बम्बई २ 108 Hindi application/pdf 2017-01-17 वैज्ञानिक शोध ब्रिटेन के मैनचेस्टर मेडिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने इस संबंध में गंभीरतापूर्वक अनुसंधान किया है और निष्कर्ष निकाला है कि आहार का मनुष्य और प्राणियों के स्वभाव , गुण तथा प्रकृति पर भारी प्रभाव पड़ता है । इसके लिए कई सारे परीक्षण किये गये जिनमें से एक चूहों पर था । चूहा स्वभावतः शांत प्रकृति का होता है , किसी से लड़ता - झगड़ता या आक्रमण नहीं करता । प्रयोगशाला में पाले गये चूहों में से कुछ को बाहर निकाला गया और उन्हें सामान्य आहार न देकर मिर्च - मसाले तथा मांस और नशीली चीजों से बना आहार दिया गया । इसे खाने से पूर्व वे चूहे बेहद शान्त थे , पर इसके कुछ ही घंटे बाद , उद्दण्ड और आक्रामक बन गये । उन्हें वापस पिंजरे में छोड़ा गया , तो वे आपस में ही लड़ - झगड़ कर लहूलुहान हो गये । इसके बाद उन्हीं चूहों को दूसरी बार सरल , शुद्ध और सात्विक भोजन दिया गया । इस पर भी पिछला प्रभाव तो बाकी था , किन्तु चूहे अपेक्षाकृत शांत थे । कई बार इस तरह का आहार लेने के बाद वे अपनी वास्तविक स्थिति में आ पाए । इस तरह के सैकड़ों प्रयोगों द्वारा वैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुंच पाए कि आहार से शरीर का पोषण ही नहीं होता बल्कि मनुष्य मन का प्रोग्रामिंग भी होता है ।https://books.google.co.in/books?id=K8tcEAAAQBAJ&pg=PA53&dq=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%95+%E0%A4%86%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0&hl=en&newbks=1&newbks_redir=0&source=gb_mobile_search&ovdme=1&sa=X&ved=2ahUKEwjkqYGysZ2BAxUyTWwGHdfLAaMQ6AF6BAgMEAM#v=onepage&q=%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%95%20%E0%A4%86%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0&f=false Manushya Jivan Ki Anokhi Kitab 7 Kadam Khud Ki Khoj Mein Naresh Sain & Pradip Variya 2022 53 Hindi ebookपण्ड्या डॉ. प्रणव February 1980 आहार के त्रिविधि स्तर, त्रिविधि प्रयोजन http://literature.awgp.org/akhandjyoti/1980/February/v2.24 अखंड ज्योति Hindi अखंड ज्योति संस्थान घीयामंडी, मथुरा 42 संदर्भ