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जॉन मॉट
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जॉन रैलघ मॉट John Raleigh Mott.jpg १९१० में जॉन मॉट 1865 5 25 yes लिविंगस्टन मैनर, न्यूयॉर्क, संयुक्त राज्य अमेरिका 1955 1 31 1865 5 25 yes ऑरलैंडो, फ्लोरिडा, संयुक्त राज्य अमेरिका आध्यात्मिक नेता, समाज सेवक, लेखक, कूटनीतिज्ञ वाई.एम.सी.ए. का नेतृत्व, विश्व छात्र ईसाई संघ के संस्थापक नोबेल शांति पुरस्कार (१९४६)
जॉन रैलघ मॉट (अंग्रेज़ी: John Raleigh Mott; जन्म: २५ मई १८६५ – ३१ जनवरी १९५५) बीसवीं शताब्दी के एक मूर्धन्य समाज सेवक, दूरदर्शी आध्यात्मिक नेता और विश्वव्यापी युवा तथा पारस्परिकता आंदोलनों के अग्रदूत थे।https://www.britannica.com/biography/John-R-Mott John R. Mott - American religious leader Encyclopedia Britannica 1 जून 2026 उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन राष्ट्रों के मध्य सांस्कृतिक, शैक्षिक और आध्यात्मिक सेतुओं के निर्माण में समर्पित कर दिया। उनके इसी अप्रतिम योगदान और विश्व शांति को सुदृढ़ करने के सतत प्रयासों के फलस्वरूप, वर्ष १९४६ में उन्हें विश्व के सर्वोच्च सम्मान नोबेल शांति पुरस्कार से अलंकृत किया गया।https://www.nobelprize.org/prizes/peace/1946/mott/facts/ The Nobel Peace Prize 1946: John R. Mott Nobel Prize Outreach AB 1 जून 2026 मॉट को आधुनिक इतिहास में एक ऐसे महामानव के रूप में स्मरण किया जाता है, जिन्होंने भौगोलिक और राजनीतिक सीमाओं को लांघकर वैश्विक बंधुत्व की संकल्पना को साकार किया।Hopkins Charles Howard John R. Mott, 1865-1955: A Biography https://archive.org/details/johnrmott18651950000hopk 1979 Eerdmans
प्रारंभिक जीवन एवं बौद्धिक पृष्ठभूमि
जॉन मॉट का जन्म २५ मई १८६५ को संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूयॉर्क राज्य में स्थित लिविंगस्टन मैनर नामक एक अल्पज्ञात कस्बे में हुआ था।Mackie Robert C. Layman Extraordinary: John R. Mott, 1865-1955 https://archive.org/details/laymanextraordin0000mack 1965 Association Press उनके जन्म के कुछ समय पश्चात् ही उनका परिवार आयोवा प्रांत के पोस्टविले नामक स्थान पर स्थानांतरित हो गया, जहाँ उनकी प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा संपन्न हुई।https://www.nobelprize.org/prizes/peace/1946/mott/biographical/ John R. Mott - Biographical Nobel Prize Outreach AB 1 जून 2026
बचपन से ही उनकी कुशाग्र बुद्धि और अध्ययनशीलता अत्यंत प्रखर थी। उन्होंने 'अपर आयोवा विश्वविद्यालय' से अपनी उच्च शिक्षा का श्रीगणेश किया।Fisher Galen M. John R. Mott: Architect of Cooperation and Unity https://archive.org/details/johnrmottarchite00fish 1952 Association Press तत्पश्चात्, ज्ञानार्जन की उत्कट पिपासा उन्हें विख्यात कॉर्नेल विश्वविद्यालय ले गई।https://rmc.library.cornell.edu/EAD/htmldocs/RMM03046.html John R. Mott Papers Cornell University Library 1 जून 2026 कॉर्नेल में अध्ययन के दौरान, उनका संपर्क एक प्रख्यात वक्ता और दार्शनिक आर्थर पियर्सन से हुआ, जिनके ओजस्वी विचारों ने मॉट के जीवन की दिशा ही परिवर्तित कर दी। १८८८ में दर्शनशास्त्र और इतिहास में स्नातक की उपाधि प्राप्त करने के उपरांत, उन्होंने अपना जीवन मानवता की सेवा के लिए उत्सर्ग करने का दृढ़ संकल्प लिया।Cracknell Kenneth John R. Mott: A Christian Statesman 2001 Epworth Press
वैश्विक नेतृत्व एवं संगठनात्मक विस्तार
जॉन मॉट की संगठनात्मक क्षमता अद्वितीय थी। उन्होंने 'यंग मेन्स क्रिश्चियन एसोसिएशन' (वाई.एम.सी.ए.) के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सचिव के रूप में दशकों तक अपनी सेवाएँ प्रदान कीं।https://www.ymca.int/about-us/history/ History of the YMCA World YMCA 1 जून 2026 उनका स्वप्न युवाओं को एक ऐसे वैश्विक मंच पर एकत्रित करना था जहाँ वे वैचारिक संकीर्णता से मुक्त होकर मानवता के कल्याणार्थ कार्य कर सकें। इसी महान उद्देश्य की पूर्ति के लिए, १८९५ में उन्होंने 'विश्व छात्र ईसाई संघ' की स्थापना की।Shedd Clarence Prouty Two Centuries of Student Christian Movements https://archive.org/details/twocenturiesofst0000clar 1934 Association Press यह संगठन उस कालखंड में विश्व भर के बौद्धिक युवाओं का सबसे सशक्त समागम बन गया था।
वर्ष १९१० में एडिनबर्ग (स्कॉटलैंड) में आयोजित ऐतिहासिक 'विश्व मिशनरी सम्मेलन' की अध्यक्षता जॉन मॉट ने ही की थी।Stanley Brian The World Missionary Conference, Edinburgh 1910 https://archive.org/details/worldmissionary00stan 2009 Eerdmans इस सम्मेलन को आधुनिक युग के समन्वयवादी आंदोलन का उद्गम स्थल माना जाता है, जहाँ विभिन्न राष्ट्रों और संस्कृतियों के प्रतिनिधि एक साझा कल्याणकारी नीति निर्माण के लिए एकत्रित हुए थे।https://www.oikoumene.org/about-the-wcc/history History of the Ecumenical Movement World Council of Churches 1 जून 2026
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति तथा शांति के भगीरथ प्रयास
जॉन मॉट का कार्यक्षेत्र केवल धार्मिक अथवा सामाजिक सुधारों तक ही सीमित नहीं था, अपितु वे एक निपुण कूटनीतिज्ञ भी थे। प्रथम विश्व युद्ध (१९१४-१९१८) की विभीषिका के मध्य, जब संपूर्ण विश्व घृणा और रक्तपात की अग्नि में धधक रहा था, मॉट ने शांति दूत की भूमिका का निर्वहन किया।Olds Mason John R. Mott and the Peace Movement 1998 University Press of America
उन्होंने युद्ध-बंदियों के अधिकारों की रक्षा और युद्ध से विस्थापित हुए लाखों शरणार्थियों के लिए राहत कार्य संचालित करने हेतु अथक प्रयास किए।https://www.icrc.org/en/document/history-icrc-ww1 Humanitarian Relief in World War I International Committee of the Red Cross 1 जून 2026अगस्त 2026 InternetArchiveBot तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति वुडरो विल्सन उनके गहन चिंतन और वैश्विक प्रभाव से अत्यधिक प्रभावित थे। इसीलिए १९१७ में कूटनीतिक 'रूट मिशन' के एक महत्वपूर्ण सदस्य के रूप में उन्हें रूस भेजा गया, जिसका उद्देश्य प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका और रूस के मध्य सौहार्दपूर्ण संबंध स्थापित करना था।Kennan George F. Soviet-American Relations, 1917-1920 https://archive.org/details/sovietamericanre00kenn 1956 Princeton University Press इसके अतिरिक्त, मॉट ने शांति और शिक्षा का प्रसार करने के लिए अपने जीवनकाल में लगभग अस्सी देशों की यात्रा की, जो उस युग में एक अभूतपूर्व कीर्तिमान था।Mott John R. Addresses and Papers of John R. Mott (Vol. 1-6) 1946 Association Press
नोबेल शांति पुरस्कार (१९४६)
विभिन्न राष्ट्रों, संस्कृतियों और युवाओं के मध्य भ्रातृत्व भाव एवं शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व की स्थापना के लिए किए गए उनके युगांतरकारी योगदान का विश्व स्तर पर संज्ञान लिया गया।https://www.nytimes.com/1946/11/01/archives/nobel-peace-prize-shared-by-dr-mott-and-emily-g-balch.html Nobel Peace Prize Shared by Dr. Mott and Emily G. Balch The New York Times 1 नवंबर 1946 1 जून 2026 वर्ष १९४६ में, नॉर्वेजियन नोबेल समिति ने जॉन मॉट को शांति के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया।https://www.nobelprize.org/prizes/peace/1946/award-video/ Award Ceremony Speech: The Nobel Peace Prize 1946 Nobel Prize Outreach AB 1 जून 2026 यह पुरस्कार उन्होंने विख्यात अमेरिकी शांतिवादी महिला एमिली ग्रीन बाल्च के साथ साझा किया था।https://www.nobelprize.org/prizes/peace/1946/balch/facts/ The Nobel Peace Prize 1946: Emily Greene Balch Nobel Prize Outreach AB 1 जून 2026 नोबेल समिति ने अपने प्रशस्ति पत्र में उल्लेख किया था कि मॉट ने राष्ट्रीय सीमाओं के पार एक ऐसा शांति-संवर्धक वैचारिक भ्रातृत्व स्थापित किया है, जो भविष्य की पीढ़ियों के लिए एक अनुकरणीय आदर्श है।Abrams Irwin The Nobel Peace Prize and the Laureates 2001 Science History Publications ३१ जनवरी १९५५ को फ्लोरिडा के ऑरलैंडो में अठासी वर्ष की आयु में इस महान मानवतावादी का देहावसान हो गया।https://www.washingtonpost.com/archive/local/1955/02/01/dr-john-r-mott-dies-at-89-ymca-leader-nobel-winner/ Dr. John R. Mott Dies at 89; YMCA Leader, Nobel Winner The Washington Post 1 फरवरी 1955 1 जून 2026
प्रमुख साहित्यिक कृतियाँ
जॉन मॉट केवल एक व्यावहारिक नेता ही नहीं, बल्कि एक उच्च कोटि के विचारक और सिद्धहस्त लेखक भी थे। उनकी रचनाएँ वैचारिक गहनता और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण का अनुपम उदाहरण प्रस्तुत करती हैं। उनकी कुछ सर्वाधिक प्रशंसित और कालजयी कृतियाँ निम्नलिखित हैं:
द इवेंजलाइजेशन ऑफ द वर्ल्ड इन दिस जनरेशन (इस पीढ़ी में विश्व का सुसमाचार प्रचार, १९००) - इस पुस्तक में मॉट ने वैश्विक संचार और त्वरित प्रसार की रूपरेखा प्रस्तुत की थी।Mott John R. The Evangelization of the World in This Generation https://archive.org/details/evangelizationof0000mott_p4r0 1900 Student Volunteer Movement for Foreign Missions
द पादरी एंड मॉडर्न मिशन्स (पादरी और आधुनिक मिशन, १९०४) - यह कृति आधुनिक संदर्भ में धार्मिक नेताओं के सामाजिक उत्तरदायित्वों को परिभाषित करती है।Mott John R. The Pastor and Modern Missions 1904 Student Volunteer Movement
द फ्यूचर लीडरशिप ऑफ द चर्च (चर्च का भावी नेतृत्व, १९०८) - इसमें युवाओं को नेतृत्व के लिए प्रशिक्षित करने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।Mott John R. The Future Leadership of the Church 1908 Student Department YMCA
द प्रेजेंट वर्ल्ड सिचुएशन (वर्तमान विश्व की स्थिति, १९१४) - प्रथम विश्व युद्ध की पूर्व संध्या पर प्रकाशित यह पुस्तक तत्कालीन भू-राजनीतिक परिदृश्य का सूक्ष्म विश्लेषण करती है।Mott John R. The Present World Situation 1914 Student Volunteer Movement
कंफ्रंटिंग यंग मेन विद द लिविंग क्राइस्ट (१९२३) - इस रचना में मॉट ने युवाओं के मनोवैज्ञानिक और आध्यात्मिक द्वंद्वों को स्वर प्रदान किया है।Mott John R. Confronting Young Men with the Living Christ https://archive.org/details/confrontingyoung00mott_0 1923 Association Press
इन्हें भी देखें
नोबेल शांति पुरस्कार
सन्दर्भ
2
बाहरी कड़ियाँ
नोबेलप्राइज़.ऑर्ग पर जॉन मॉट की आधिकारिक जीवनी
श्रेणी:१९५५ में निधन
श्रेणी:ईसाई मिशनरी