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411 समाचार
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चुनार

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चुनार Chunar Ganges near Chunar - panoramio.jpg चुनार के समीप गंगा नदी चुनार India Uttar Pradesh 25.13 82.90 inline, title उत्तर प्रदेश में स्थिति देश राज्य उत्तर प्रदेश ज़िला मिर्ज़ापुर ज़िला 37185 2011 भाषाएँ प्रचलित हिन्दी भारतीय मानक समय +5:30 thumb|280px|चुनार में ब्रिटिश कब्रिस्तान thumb|280px|चुनार में सन् 1591 में कृत रागमाला में भैरव राग का पृष्ठ चुनार (Chunar) भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के मिर्ज़ापुर ज़िले में स्थित एक नगर है।"Uttar Pradesh in Statistics," Kripa Shankar, APH Publishing, 1987, ISBN 9788170240716"Political Process in Uttar Pradesh: Identity, Economic Reforms, and Governance https://web.archive.org/web/20170423083533/https://books.google.com/books?id=S46rbUL6GrMC 23 अप्रैल 2017," Sudha Pai (editor), Centre for Political Studies, Jawaharlal Nehru University, Pearson Education India, 2007, ISBN 9788131707975 विवरण चुनार का इतिहास बहुत पुराना है। यहाँ का किला बहुत प्रसिद्ध है। विंध्याचल पर्वत की गोद में बसे होने के कारण चुनार में पत्थर और पत्थर के इमारती सामान का प्रमुख उद्योग है। चुनार के मिट्टी के खिलौने, मूर्तियाँ और वरतन सस्ते, लाख की पालिश के कारण अत्यत चमकदार और सुंदर होते हैं। यहाँ चना, चावल, गेहूँ, तेलहन और जौ की मंडी है। वाराणसी से मिर्जापुर जानेवाली बसों के लिये यह अच्छा स्टेशन है। चुर्क सीमेंट फैक्टरी के लिये यहाँ से रेलवे लाइन जाती है। चुनार के पास अनेक रम्य और प्राकृतिक दृश्यों के स्थान हैं इनमे से एक जरगो बांध है जिसमे 27 नदी और 77 नालो का जल एकत्र किया जाता है जो मछली पालन और सिचाई के काम आता है। यहाँ सैर सपाटे के लिये लोग आते रहते हैं। चुनार क्षेत्र के पत्थर और चीनी मिट्टी की कलाकृतियाँ प्रसिद्ध हैं। राजा-रजवाड़ों के समय चुनार के पत्थरों की काफी माँग थी। राजाओं द्वारा बनवाये गये किले व घाट इसके प्रमाण हैं। लगभग 3000 वर्ष पूर्व मौर्य साम्राज्य में भी इन पत्थरों का जमकर प्रयोग हुआ। चक्रवर्ती सम्राट अशोक द्वारा निर्मित ”अशोक स्तम्भ“ इसका उदाहरण है जिसका एक भाग सारनाथ (वाराणसी) के संग्रहालय में आज भी रखा हुआ है। काशी (वाराणसी) व मीरजापुर के घाटों व मन्दिरों का निर्माण भी यहीं के पत्थरों से हुआ है। सारनाथ बौद्ध मन्दिर, भारत माता मन्दिर व सम्पूर्णानन्द विष्वविद्यालय भी इसके प्रमाण हैं। भारत का संसद भवन, रामकृष्ण मिशन का बेलूड़ मठ का मन्दिर व लखनऊ में बन रहे अनेक स्मारक चुनार के पत्थरों से ही बने हैं। क्षेत्र में जे.पी. समूह का सीमेण्ट फैक्ट्री भी स्थित है।उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक चुनारगढ़ किला कई राजाओं और सम्राटों के अतीत में सत्तारूढ़ भारत के हाथों में पारित कर दिया गया। चुनारगढ़ फोर्ट मुगल शासक बाबर के रूप में अच्छी तरह के रूप में अफगानिस्तान राज्यपाल शेरशाह सूरी द्वारा पास किया गया था। इतिहास से पता चलता है कि शेरशाह सूरी ताज आज भि खान की विधवा, इब्राहिम लोधी के राज्यपाल से शादी करने के बाद उत्तर प्रदेश में चुनारगढ़ किले के पास है। चुनार किला -किले में भर्तृहरि की समाधि, समाधि के सम्बन्ध में बाबर का हुक्मनामा, औरंगजेब का हुक्मनामा, सोनवा मण्डप, शेरशाह सूरी का शिलालेख, अनेक अरबी भाषा में लिखे शिलालेख, आलमगीरी मस्जिद, बावन खम्भा व बावड़ी, जहांगीरी कमरा, रनिवास, मुगलकालीन बारादरी, तोपखाना व बन्दी गृह, लाल दरवाजा, वारेन हेस्टिंग का बंगला, बुढ़े महादेव मन्दिर इत्यादि किले के उत्थान-पतन की कहानियाँ कहती हैं। चुनार नगर – चुनार किले से लगा हुआ ही चुनार नगर है जिसकी भौगोलिक स्थिति बड़ी आकर्षक है। नगर के चारों ओर नदी-नाले, पर्वत-जंगल, झरने, तालाब आदि की बहुतायत है। चुनार नगर उतना ही प्राचीन है जितना चुनार किला। दोनों की स्थापनाव विकास साथ-साथ चलता रहा है। चुनार नगर क्षेत्र के ऐतिहासिक स्थलों में रौजा इफतियार खां, गंगेश्वरनाथ, आचार्य कूप, कदमरसूल, शाह कासिम सुलेमानी का दरगाह, गदाशाह, मुहम्मदशाह, बच्चूशाह, नवलगीर, सूरदास, बालूघाट के भगवान बामन अवतार, भैरो जी,चक्र देवी, आनन्दगिर का मठ, राघो जी के महाबीर, गंगाराम का स्थल, गुरू नानक की संघत, आचार्य कूप और विट्ठल महाप्रभु, सतीवाड़, हजारी की हवेली, गंगा-जरगो संगम, टेकउर के टिकेश्वर महादेव का श्रीचक्र त्रिकोण, अंग्रेजो का कब्रिस्तान इत्यादि के अपने-अपने इतिहास हैं। चुनार क्षेत्र – चुनार क्षेत्र के अन्तर्गत जमालपुर, नरायनपुर, सीखड़, राजगढ़ का क्षेत्र और एक नगरपालिका क्षेत्र अहरौरा आता है। सम्पूर्ण चुनार क्षेत्र का ऐतिहासिक, प्राकृतिक, धार्मिक व आध्यात्मिक महत्व अति विशाल और समृद्ध है। इनमें से कुछ ये हैं- जरगो बाँध, बेचूवीर धाम, भण्डारी देवी, लखनियाँ दरी, चूना दरी, गुरूद्वारा बाग सिद्धपीठ दुर्गा खोह,परमहंस स्वामी अड़गड़ानन्द आश्रम, सिद्धनाथ की दरी, सिद्धनाथ धाम ”धुईं बाबा“, शिवशंकरी धाम, गोपालपुर, सीखड़, शिव मंदिर रामगढ़, माँ शीतला धाम, राम सरोवर इत्यादि। भूगोल चुनार किला और नगर के पश्चिम में गंगा, पूर्व में पहाड़ी जरगो नदी उत्तर में ढाब का मैदान तथा दक्षिण में प्राकृतिक सुन्दरता का विस्तार लिए विन्ध्य पर्वत की श्रृंखलाएँ हैं जिसमें अनेक जल प्रपात, गढ़, गुफा और घाटियाँ हैं। इतिहास चुनारगढ़ किला उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में वाराणसी से 45 किलोमीटर की दूरी पर चुनार शहर मे स्थित है। चुनारगढ़ फोर्ट 56 ई.पू. में उज्जैन के राजा महाराजा विक्रमादित्य द्वारा निर्मित किया गया है। चुनारगढ़ किला भारत के उन किलो मे से एक है जो आज भी जिवित है। काशी (वाराणसी) और विन्ध्य क्षेत्र के बीच स्थित होने के कारण चुनार क्षेत्र भी ऋषियों-मुनियों,महर्षियों, राजर्षियों, संत-महात्माओं, योगियों-सन्यासियों, साहित्यकारों इत्यादि के लिए आकर्षण के योग्य क्षेत्र रहा है। सोनभद्र सम्मिलित मीरजापुर व चुनार क्षेत्र सभी काशी के ही अभिन्न अंग थे। चुनार प्राचीन काल से आध्यात्मिक, पर्यटन और व्यापारिक केन्द्र के रूप में स्थापित है। गंगा किनारे स्थित होने से इसका सीधा व्यापारिक सम्बन्ध कोलकाता से था और वनों से उत्पादित वस्तुएँ का व्यापार होता था। चुनार किला और नगर के पश्चिम में गंगा, पूर्व में पहाड़ी जरगो नदी उत्तर में ढाब का मैदान तथा दक्षिण में प्राकृतिक सुन्दरता का विस्तार लिए विन्ध्य पर्वत की श्रृंखलाएँ हैं जिसमें अनेक जल प्रपात, गढ़, गुफा और घाटियाँ हैं। सतयुग में एक विचित्र स्थिति उत्पन्न हो गयी थी, हुआ यह था कि एक प्रतापी, धर्मपरायण, प्रजावत्सल, सेवाभावी, दानवीर, सौम्य, सरल यानी सर्वगुण सम्पन्न राजा बलि हुये। लोग इसके गुण गाने लगे और समाजवादी राज्यवादी होने लगे। राजा बलि का राज्य बहुत अधिक फैल गया। समाजवादियों के समक्ष यानी मानवजाति के समक्ष एक गम्भीर संकट पैदा हो गया कि अगर राज्य की अवधारणा दृढ़ हो गयी तो मनुष्य जाति को सदैव दुःख, दैन्य व दारिद्रय में रहना होगा क्योंकि अपवाद को छोड़कर राजा स्वार्थी होगें, परमुखपेक्षी व पराश्रित होगे। अर्थात अकर्मण्य व यथास्थिति वादी होगे, यह भयंकर स्थिति होगी परन्तु समाजवादी असहाय थे। राजा बलि को मारना संभव न था और उसके रहते समाजवादी विचारधारा का बढ़ना सम्भव न था। ऐसी स्थिति में एक पुरूष कीआत्मा अदृश्य प्राकृतिक चेतना द्वारा निर्मित परिस्थितियों में प्राथमिकता से वर्तमान में कार्य करना, में स्थापित हो गयी। वह राजा बलि से थोड़ी सी भूमि समाज या गणराज्य के लिए माँगा। चूँकि राजा सक्षम और निश्चिंत था कि थोड़ी भूमि में समाजया गणराज्य स्थापित करने से हमारे राज्य पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसलिए उस पुरूष को राजा ने थोड़ी भूमि दे दी। जिस पर उसने स्वतन्त्र, सुखी, स्वराज आधारित समाज-गणराज्य स्थापित किया और उसका प्रभाव धीरे-धीरे बढ़ता गया और वह राजा बलि के सुराज्य को भी समाप्त कर दिया और समाज या गणराज्य की स्थापना की गयी। चूँकि यह पुरूष बौना अर्थात् छोटे कद का तथा स्वभावऔर ज्ञान में ब्राह्मण गुणों से युक्त था इसलिए कालान्तर में इसे भगवान विष्णु के पाचवें अवतार वामन अवतार का नाम दिया गया। चूँकि गणराज्य स्थापना का पहला चरण (आदि चरण) का क्षेत्र यह चुनार क्षेत्र ही था इसलिए इसका नाम चरणाद्रि पड़ा जो कालान्तर में चुनार हो गया। पहला चरण जिस भूमि पर पड़ा वह चरण के आकार का है। हमारे प्राचीन भूगोलविज्ञानियों ने अपने सर्वेक्षणों से यह पता लगा लिया कि विन्ध्य की सुरम्य उपत्यका में स्थित यह पर्वत मानव के चरण के आकार का है। विन्ध्य पर्वत शृंखला के इस पहाड़ी पर ही हरिद्वार से मैदानी क्षेत्र में बहने वाली गंगा का और विन्ध्य पर्वत की श्रृंखला से पहली बार संगम हुआ है जिस पर चुनार किला स्थित है। अनेक स्थानों पर वर्णन है कि श्रीराम यहीं से गंगा पार करके वनगमन के समय चित्रकूट गये थे। फादर कामिल बुल्के के शोध ग्रन्थ ”राम कथा: उद्भव और विकास“ के अनुसार कवि वाल्मीकि की तपस्थली चुनार ही है इसलिए कहीं-कहीं इसे चाण्डालगढ़ भी कहा गया है। इसे पत्थरों के कारण पत्थरगढ़, नैना योगिनी के तपस्थली के कारणनैनागढ़, भर्तृहरि के कारण इसे भर्तृहरि की नगरी भी कहा जाता है। वर्ष 1531 में बाबर के बेटे हुमायूं ने शेरशाह के कब्जे से चयक करने के लिए उत्तर प्रदेश में चुनारगढ़ किले का प्रयास किया। लेकिन वह बुरी तरह से हार गया था। काफी समय बाद 1574 में सम्राट अकबर ऩे चुनारगढ़ किले पर कब्जा कर लिया जब शेर शाह सूरी का निधन हो गया। उत्तर प्रदेश में चुनारगढ़ फोर्ट मुगल सम्राटों के कब्जे के तहत 1772 तक था लेकिन बाद में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी मुगलों से उत्तर प्रदेश में चुनारगढ़ किले पर कब्जा कर लिया। उत्तर प्रदेश में चुनारगढ़ किले के स्थापत्य शैली के ठीक एक मिश्रण को दर्शाता है। चुनारगढ़ किला उत्तर प्रदेश के अंदर प्रभावशाली संरचनाये आ गये है। वहाँ आज मृत धूपघड़ी, शायद राजा विक्रमादित्य के पर्यवेक्षण के अंतर्गत निर्माण किया है। चुनारगढ़ किला गंॱगा नदि के किनारे बसा हूआ है। शिक्षा तथा अन्य नागरिक सुविधाएं चुनार में दो इंटर कालेज, एक डिग्री कालेज तथा एक संस्कृत महाविद्यालय है। यहां पर एक रेलवे स्टेशन भी है। यातायात शहर में यातायात का मुख्य साधन इक्का, ताँगा (घोड़ा गाड़ी) था, लेकिन अब इसका स्थान ऑटो रिक्शा ने ले लिया है। सड़क ऊँची नीची होने के कारण साईकिल-रिक्शा यहाँ नहीं चलते। आदर्श स्थल चुनार के आसपास सबसे ज्यादा दर्शनीय स्थानों में से एक यहाँ का प्रसिद्ध माँ दुर्गा खोह मन्दिर है जो कि चुनार बस स्टैण्ड से मात्र दो किलोमीटर शक्तेशगढ़ रोड़ पर विंध पर्वत मालाओं के मध्य स्थित है। इन्हें भी देखें मिर्ज़ापुर ज़िला चुनार का किला बाहरी कड़ियाँ चुनार का गौरवशाली इतिहास जालस्थल चुनार सन्दर्भ श्रेणी:मिर्ज़ापुर ज़िला श्रेणी:उत्तर प्रदेश के नगर श्रेणी:मिर्ज़ापुर ज़िले के नगर