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बख्तर साय
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बख्तर साय Bakhtar Say मृत्यु - 4 अप्रैल 1812 नवागढ़, ब्रिटिश भारत (अब गुमला जिला, झारखंड) कोलकाता, ब्रिटिश भारत (अब पश्चिम बंगाल) 1812 विद्रोह भारतीय
बख्तर साय एक भारतीय स्वतंत्रता सेनानी थे। उन्होंने ईस्ट इंडिया कम्पनी के विरुद्ध 1812 में विद्रोह किया था।https://timesofindia.indiatimes.com/city/Ranchi/Raghubar-honours-Simdega-patroits/articleshow/51869527.cms Raghubar honours Simdega patriots timesofindia.com
https://Jagran.com/jharkhand/simdega-mundal-singh-17777230.html सभ्यता व संस्कृती की सुरक्षा के लिए हों एकजुट : कुलदीप Jagran.com 15 जून 2020 https://web.archive.org/web/20190306044550/https://www.jagran.com/jharkhand/simdega-mundal-singh-17777230.html 6 मार्च 2019 dead
आरंभिक जीवन
बख्तर साय का जन्म ब्रिटिश भारत में गुमला जिले के रायडीह ब्लॉक के नवागढ़ में हुआ था। वे बासुदेव कोना के जागीरदार थे। उनका जन्म रौतिया परिवार में हुआ था।
विद्रोह
जब ब्रिटिश सरकार ने 1812 में छोटानागपुर के राजा गोबिंद नाथ शाहदेव को ईस्ट इंडिया कंपनी को 12000 रुपये का कर देने का आदेश दिया। बख्तर सई ने अत्यधिक कर के कारण नवागढ़ के किसानों की ओर से ईस्ट इंडिया कंपनी को कर देने से इनकार कर दिया। इसने लड़ाई को उकसाया जिसमें बख्तर सई ने रातू दरबारी हीरा राम को मार डाला जो कर लेने आए थे। तब रामगढ़ के मजिस्ट्रेट ने हजारीबाग से एक सेना भेजी। बख्तर सई की सेना में उस क्षेत्र के किसान शामिल थे। पहाड़ पनरी मुंडल सिंह के परगनेट नवागढ़ पहुंचे और बख्तर साय को युद्ध में मदद की। युद्ध दो दिनों तक चला और ब्रिटिश सेना की हार हुई। एक महीने बाद, रामगढ़ बटालियन के ई. रेफ्रीज ने एक बड़ी सेना के साथ नवागढ़ की ओर कूच किया। लड़ाई तीन दिनों तक चली। अंततः बख्तर सई और मुंडल सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया और 4 अप्रैल 1812 को कोलकाता में उन्हें फांसी दे दी गई।https://www.jagran.com/jharkhand/gumla-9096019.html वासुदेवकोना में लड़ी गई थी आजादी की पहली लड़ाई jagran 4 April 2012 17 October 2022 17 अक्तूबर 2022 https://web.archive.org/web/20221017075754/https://www.jagran.com/jharkhand/gumla-9096019.html dead
सन्दर्भ
श्रेणी:झारखंड का इतिहास