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तिब्बत की पाँच अंगुलियाँ
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"तिब्बत की पाँच अंगुलियाँ" माओ से-तुंग द्वारा दी गई एक चीनी रणनीति है जिसमें तिब्बत को चीन के दाहिने हाथ की हथेली माना गया है जिसकी पाँच अंगुलियाँ है: लद्दाख, नेपाल, सिक्किम, भूटान, और अरुणाचल प्रदेश। इस रणनीति के अनुसार इन क्षेत्रों को "स्वाधीन करना" चीन का उत्तरदायित्व है। इस रणनीति का चीन के आधिकारिक सार्वजनिक बयानों में वर्णन नहीं है, परंतु इसके वर्तमान अस्तित्व और संभव पुनरुत्थान को लेकर चिंता व्यक्त कि गई है।
thumb|तिब्बत का पांच उंगलियों वाला नक्शा
पृष्ठभूमि
साम्राज्यशाही चीन तिब्बत पर अपने दावे के विस्तार के तौर पर नेपाल, सिक्किम, और भूटान पर आधिपत्य का दावा करता था।जैन गिरिलाल गिरिलाल जैन Panchsheela and After: A Re-Appraisal of Sino-Indian Relations in the Context of the Tibetan Insurrection 1960 एशिया पब्लिशिंग हाउस १५८ Threat to India's Integrity en इन दावों को तिब्बत में चीन के शाही निवासी ने १९०८ में दृढ़तापूर्वक रखा जब उन्होंने नेपाली प्राधिकरण को यह लिखा कि नेपाल और तिब्बत को "चीनी तत्त्वावधान के अंतर्गत, भाइयों के समान संयुक्त होकर आपसी हित हेतु सामंजस्य में कार्य करना चाहिए।" ब्रिटिश विरोध के सामने चीनी दावों को बल देने के लिए उन्होंने चीन, तिब्बत, नेपाल, सिक्किम, और भूटान के रूप में "पाँच रंगों के सम्मिश्रण" का सुझाव दिया।जैन गिरिलाल India meets China in Nepal 1959 एशिया पब्लिशिंग हाउस १०५-१०६ Consequences of Tibet en १९३९ में चीनी साम्यवादी दल के संस्थापक अध्यक्ष माओ से-तुंग ने भूटान और नेपाल को चीन का करद राज्य करार दिया था।
चीन पर सैन्य क्षति पहुँचा कर साम्राज्यशाही देशों ने उससे उसके कई करद राज्य और उसके क्षेत्र के हिस्से जबरदस्ती ले लिए। जापान ने कोरिया, ताइवान, रयुक्यु द्वीपसमूह, पेस्काडोर्स, और पोर्ट आर्थर को हड़प लिया; इंग्लैंड ने बर्मा, भूटान, नेपाल, और हाँग काँग को ले लिया; फ़्रांस ने अनाम को जब्त कर लिया; यहाँ तक कि पुर्तगाल जैसे छोटे और तुच्छ देश ने भी हमसे मकाओ ले लिया। जिस समय वे उसके क्षेत्र का हिस्सा ले गए, साम्राज्यशाहियों ने चीन को भारी क्षतिपूर्ति देने पर विवश किया। अतः चीन के विशाल सामंती साम्राज्य पर भारी प्रहार किए गए।श्चराम स्टुअर्ट र. स्टुअर्ट र. श्चराम The Political Thought of Mao Tse-tung १९६९ परेगेर प्रकाशक २५७-२५८ China and the Underdeveloped Countries en माओ से-तुंग
मूल
व्यापक धारणा यह है की "तिब्बत की पाँच अंगुलियों" की रणनीति माओ के १९४० के दशक के भाषणों से उत्तपन हुई,मुनि एस। डी. India's Foreign Policy: The Democracy Dimension २००९ फाउंडेशन बुक्स 9788175968530 ३१ https://www.cambridge.org/core/books/indias-foreign-policy/F1F04841C04EEB6E509ACC3680D65FA9 The Nehruvian Phase: Ideology Adjusts with Realpolitik en 20 जून 2020 https://web.archive.org/web/20180615013529/https://www.cambridge.org/core/books/indias-foreign-policy/F1F04841C04EEB6E509ACC3680D65FA9 15 जून 2018 live हैदर सुहासिनी History, the standoff, and policy worth rereading https://www.thehindu.com/opinion/lead/history-the-stand-off-and-policy-worth-rereading/article31854822.ece १९ जून २०२० द हिन्दू १८ जून २०२० en-IN https://web.archive.org/web/20200619122929/https://www.thehindu.com/opinion/lead/history-the-stand-off-and-policy-worth-rereading/article31854822.ece 19 जून 2020 live श्रीवास्तव संजय India-China Face-off : क्या है चीन की 'फाइव फिंगर्स ऑफ तिब्बत स्ट्रैटजी', जिससे भारत को रहना होगा अलर्ट https://hindi.news18.com/news/knowledge/what-is-china-dangerous-five-fingers-of-tibet-strategy-to-india-should-alert-3155525.html १९ जून २०२० न्यूज१८ इंडिया १९ जून २०२० 8 फ़रवरी 2021 https://web.archive.org/web/20210208113639/https://hindi.news18.com/news/knowledge/what-is-china-dangerous-five-fingers-of-tibet-strategy-to-india-should-alert-3155525.html dead लेकिन इसका चीन के आधिकारिक सार्वजनिक बयानों में वर्णन नहीं है।ग्रोवर बी. एस. के. Sikkim and India: Storm and Consolidation १९७४ जैन ब्रदर्स १५२-१५३ en इस निर्माण में तिब्बत को चीन के दाहिने हाथ की हथेली माना गया और लद्दाख, नेपाल, सिक्किम, भूटान, और नेफ़ा (वर्तमान अरुणाचल प्रदेश) को इसकी पाँच अंगुलियाँ। १९५४ में तिब्बत में चीनी अधिकारियों ने दावा किया कि वे "भारतीय साम्राज्यशाहियों द्वारा अधिकृत सिक्किम, भूटान, लद्दाख, और नेफ़ा को आज़ाद करेंगे।"PhD बेलफिग्लिओ वेलेंटाइन जॉन The Foreign Relations of India with Bhutan, Sikkim and Nepal Between 1947-1967: An Analytical Framework for the Study of Big Power-Small Power Relations १९७० ओक्लाहोमा विश्वविद्यालय अंग्रेजी५५ उसी वर्ष चीनी सरकार ने विद्यालय के छात्रों के लिए "आधुनिक चीन का संक्षिप्त इतिहास" नामक पुस्तक प्रकाशित कि। इस पुस्तक में एक नक्शा था जिसमें १८४० से १९१९ तक "साम्राज्यशाही शक्तियों" द्वारा कथित तौर पर लिए गए क्षेत्र थे। इन क्षेत्रों को चीन का हिस्सा बताया गया जिनको पुनः-प्राप्त किया जाना है। इस नक्शे में लद्दाख, नेपाल, सिक्किम, भूटान, और समस्त पूर्वोत्तर भारत शामिल थे। यह तथ्य भारतीय राजदूत त्रिलोकी नाथ कौल के संस्मरण में भी लिखित है जो उस समय पेकिंग (जो कि अब बीजिंग के नाम से जाना जाता है) में तैनात थे। बुद्धिजीवी बी. एस. के. ग्रोवर के अनुसार यह नक्शा "पेकिंग की महत्वाकांक्षाओ का एक गंभीर प्रतिबिंब" था, ना कि मात्र प्रचार-प्रसार।
१९५८ से १९६१ तक "पाँच अंगुलियों" पर चीन के दावों को पेकिंग और ल्हासा के रेडियो पर "ज़ोर-ज़ोर से और बार-बार" प्रसारित किया जाता था।९६ जुलाई १९५९ में ल्हासा में एक सामूहिक बैठक के दौरान चीनी लेफ्टिनेंट जनरल चांग गुओहुआ ने कहा कि "भूटानी, सिक्कीमीज़ और लद्दाखी तिब्बत में एक संयुक्त परिवार है। वह हमेशा तिब्बत और महान मातृभूमि चीन के अधीन रहे है। उन्हे एक बार फिर एकीकृत करके साम्यवादी सिद्धांत पढ़ाया जाना चाहिए।"बेनेडिक्टस ब्रायन Bhutan and the Great Power Tussle द डिप्लमैट २ अगस्त २०१४ http://thediplomat.com/2014/08/bhutan-and-the-great-power-tussle/ live https://web.archive.org/web/20151222212344/http://thediplomat.com/2014/08/bhutan-and-the-great-power-tussle/ २२ दिसम्बर २०१५ dmy-all enस्मिथ पॉल जे. Bhutan–China Border Disputes and Their Geopolitical Implications ब्रूस एलेमान स्टीफन कोटकीं क्लाइव सकोफील्ड Beijing's Power and China's Borders: Twenty Neighbors in Asia https://books.google.com/books?id=CnDlcP6L8iEC&pg=PA31 २०१५ एम. इ. शार्पे 978-0-7656-2766-7 २७यह वक्तव्य तिब्बत में चीनी दूतावास के अध्यक्ष चांग गुओहुआ द्वारा १७ जुलाई १९५९ को ल्हासा में एक सार्वजनिक बैठक में दिया गया था। चाइना टूडै में प्रकाशित विवरण में यह अंश हटा दिया गया था, लेकिन इसे द डेली टेलग्रैफ के कालिंपोंग संवाददाता जॉर्ज पैटरसन द्वारा रिपोर्ट किया गया था।देसाई बी. के. India, Tibet and China https://books.google.com/books?id=yrU9AAAAMAAJ १९५९ डेमक्रैटिक रिसर्च सर्विस बॉम्बे ३० live https://web.archive.org/web/20170827223036/https://books.google.com/books?id=yrU9AAAAMAAJ २७ अगस्त २०१७ dmy-all enDelhi Diary, 14 August 1959 The Eastern Economist; a Weekly Review of Indian and International Economic Affairs, Volume 33, Issues 1–13 https://books.google.com/books?id=d90nAAAAMAAJ १९५९ २२८ live https://web.archive.org/web/20170827223036/https://books.google.com/books?id=d90nAAAAMAAJ २७ अगस्त २०१७ dmy-all en
पैटरसन की रिपोर्ट के अनुसार जब भारतीय प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने यह मामला चीन के समक्ष उठाया तो उन्हे "दो टूक कहा गया की इन सीमावर्ती क्षेत्रों पर चीन के दावे उसी दावे पर आधारित है जिसके तहत उसने तिब्बत पर आक्रमण किया।"जॉर्ज एन. पैटरसन http://www.georgepatterson.co.uk/Graphics/China'sRapeOfTibet.pdf China's Rape of Tibet https://web.archive.org/web/20170827223033/http://www.georgepatterson.co.uk/Graphics/China%27sRapeOfTibet.pdf २७ अगस्त २०१७ जॉर्ज एन. पैटरसन वेबसाईट २३ अगस्त २०१७ en
२१वीं शताब्दी की नीति में प्रासंगिकता
यह रणनीति अब आधारिक तौर पर निष्क्रिय है और चीनी दावा अब केवल भारतीय राज्य अरुणाचल प्रदेश और भारतीय केन्द्रीय-शासित प्रदेश लद्दाख के भाग अक्साइ चीन पर है। अक्साइ चीन को चीन शिंजियांग के ख़ोतान विभाग का भाग मानता है, लेकिन इसका एक छोटा हिस्सा तिब्बत के न्गारी विभाग के प्रशासन में है।ब्रैडशर हेनरी एस. Tibet Struggles to Survive फारन अफेरस् १९६९ ४७ ४ ७५२ 10.2307/20039413 0015-7120 परंतु इस रणनीति के संभव पुनरुत्थान को लेकर चिंता व्यक्त की गई है।झा पुरुषोत्तम China – A desperate state to change the narratives and contexts https://timesofindia.indiatimes.com/blogs/beyond-the-fact/china-a-desperate-state-to-change-the-narratives-and-contexts/ १९ जून २०२० द टाइम्स ऑफ इंडिया १९ जून २०२० केंद्रीय तिब्बती प्रशासन के प्रधानमंत्री लोबसांग सांगेय ने इसे डोकलाम में हुए २०१७ भारत-चीन गतिरोध से जोड़ कर देखा।बासु नयनिमा ‘Doklam is part of China’s expansionist policy’ https://www.thehindubusinessline.com/news/world/doklam-is-part-of-chinas-expansionist-policy/article9912954.ece १९ जून २०२० बिजनस लाइन १७ अक्टूबर २०१७ en https://web.archive.org/web/20190528171007/http://www.thehindubusinessline.com/news/world/doklam-is-part-of-chinas-expansionist-policy/article9912954.ece 28 मई 2019 live इसे सांगेय,सिद्दीकी माहा Ladakh is the First Finger, China is Coming After All Five: Tibet Chief’s Warning to India https://www.news18.com/news/india/ladakh-is-the-first-finger-china-is-coming-after-all-five-tibet-chiefs-warning-to-india-2675887.html १९ जून २०२० सीएनएन-न्यूज१८ १८ जून २०२० en https://web.archive.org/web/20200624030144/https://www.news18.com/news/india/ladakh-is-the-first-finger-china-is-coming-after-all-five-tibet-chiefs-warning-to-india-2675887.html 24 जून 2020 live अधीर रंजन चौधरी (लोक सभा में भारतीय राष्ट्रीय काँग्रेस के नेता),चौधरी अधीर रंजन Chinese intrusion in Ladakh has created a challenge that must be met https://indianexpress.com/article/opinion/columns/resolve-and-prudence-india-china-border-dispute-galwan-valley-ladakh-6462309/ २० जून २०२० द इंडियन एक्स्प्रेस १७ जून २०२० en सेशाद्री चारी (भारतीय जनता पार्टी के विदेशी मामलों के सैल के पूर्व अध्यक्ष),चारी सेशाद्री 70 yrs on, India's Tibet dilemma remains. But 4 ways Modi can achieve what Nehru couldn't https://theprint.in/opinion/70-yrs-on-indias-tibet-dilemma-remains-but-4-ways-modi-can-achieve-what-nehru-couldnt/440055/ २० जून २०२० द प्रिन्ट १२ जून २०२० en https://web.archive.org/web/20200629043105/https://theprint.in/opinion/70-yrs-on-indias-tibet-dilemma-remains-but-4-ways-modi-can-achieve-what-nehru-couldnt/440055/ 29 जून 2020 dead और एम. एम. खजूरिया (भारत के भूतपूर्व राज्य जम्मू और कश्मीर के पुलिस महानिदेशक) द्वारा २०२० में हुए भारत-चीन के झड़पों से भी जोड़ा गया है।खजूरिया एम. एम. Maos’ open palm & its five fingers https://news.statetimes.in/maos-open-palm-its-five-fingers/ २० जून २०२० स्टेट टाइम्स ५ जून २०२० en https://web.archive.org/web/20200622181501/https://news.statetimes.in/maos-open-palm-its-five-fingers/ 22 जून 2020 live
टिप्पणीकार सौरव झा के अनुसार "पाँच अंगुलियों" की रणनीति के पीछे का कारण हिमालय का इतिहासिक भूगोल है जो तिब्बत और दक्षिणी क्षेत्रों के बीच द्विदिशिक दावों को अनुमति देता है। इससे हिमालय के दोनों तरफ़ की शक्तियों के बीच तनाव उत्तपन होता है जो की "अंत में सैन्य सामर्थ्य के संतुलन से शांत होता है", और यही लंबे समय से चल रहे चीन-भारतीय सीमा विवाद के पीछे का कारण है।झा सौरव India must stand firm https://www.deccanherald.com/opinion/first-edit/india-must-stand-firm-843477.html १९ जून २०२० डेक्कन हेराल्ड ३० मई २०२० en
इन्हें भी देखें
चीनी साम्राज्यवाद
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सन्दर्भ
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श्रेणी:साम्राज्यवाद