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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

ऐनॉर्थोसाइट

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thumb|सेलम, तमिल नाडु का ऐनॉर्थोसाइट ऐनॉर्थोसाइट एक फेनेराइट अंतर्भेदी आग्नेय शैल है जिसकी पहचान इसकी बनावट से होती है।ऐनॉर्थोसाइट https://www.britannica.com/science/anorthosite ब्रिटानिका 19 जून 2026 en इसमें ज़्यादातर प्लाजियोक्लेज़ फेल्डस्पार होता है और बहुत कम मात्रा में मैफिक अवयव मौजूद होता है। पाइरॉक्सीन, इल्मेनाइट, मैग्नेटाइट और ओलीवाइन सबसे ज़्यादा पाए जाने वाले मैफिक खनिज हैं। प्रोटेरोज़ोइक एनोर्थोसाइट का एक प्रकार है जो पृथ्वी पर सबसे ज़्यादा पाया जाता है। चंद्रमा की सतह के हल्के रंग वाले हिस्से लूनर ऐनॉर्थोसाइट्स से बने हैं और ये काफ़ी शोध का विषय रहे हैं।द ओल्डेस्ट मून रॉक्स http://www.psrd.hawaii.edu/April04/lunarAnorthosites.html www.psrd.hawaii.edu 17 जून 2026 निर्माण ऐनॉर्थोसाइट भू-वैज्ञानिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इनके बनने की प्रक्रिया अभी भी पूरी तरह से समझ में नहीं आई है। ज़्यादातर मॉडलों में प्लेगियोक्लेज़ क्रिस्टल को उनके घनत्व के आधार पर अलग किया जाता है। प्लाजियोक्लेज़ क्रिस्टल आमतौर पर मैग्मा से कम घने होते हैं इसलिए जब मैग्मा प्रकोष्ठ में प्लाजियोक्लेज़ क्रिस्टलीकृत होता है तो प्लाजियोक्लेज़ क्रिस्टल ऊपर तैरने लगते हैं और वहीं जमा हो जाते हैं।सेन गौतम ऐनॉर्थोसाइट्स एंड कोमाटाइट्स पेट्रोलॉजी: प्रिंसिपल्स एंड प्रैक्टिस 2014 261–276 10.1007/978-3-642-38800-2_12 https://link.springer.com/chapter/10.1007/978-3-642-38800-2_12 17 जून 2026 स्प्रिंगगर en उपस्थिति प्रोटेरोज़ोइक ऐनॉर्थोसाइट आमतौर पर बड़े स्टॉक और महास्कंध के रूप में पाए जाते हैं। ऐनॉर्थोसाइट महास्कंध का क्षेत्रफल अपेक्षाकृत कम से लेकर लगभग 20,000 वर्ग किलोमीटर (7,700 वर्ग मील) तक हो सकता है जैसा कि कनाडा के उत्तरी लैब्राडोर में नैन प्लूटोनिक सुइट या मिस्टास्टिन क्रेटर के मामले में देखा गया है। प्रोटेरोज़ोइक ऐनॉर्थोसाइट मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्वी अमेरिका, एपलाशियन पर्वतमाला, पूर्वी कनाडा, दक्षिणी स्कैंडिनेविया और पूर्वी यूरोप में पाए जाते हैं। भौतिक विशेषताएं ये मुख्य रूप से प्लाजियोक्लेज़ फेल्डस्पार से बने होते हैं इसलिए ज़्यादातर प्रोटेरोज़ोइक ऐनॉर्थोसाइट सतह पर स्लेटी या नीले रंग के दिखाई देते हैं। प्लेजिओक्लेस के अलग-अलग क्रिस्टल काले, सफेद, नीले या भूरे रंग के हो सकते हैं और इनकी ताज़ी सतहों पर इन्द्रधनुष जैसी चमक दिखाई दे सकती है जिसे लैब्राडोरेसेंस कहा जाता है। इन्हें भी देखें आर्कियाई इओन सन्दर्भ श्रेणी:प्राग्जीवी इओन श्रेणी:आर्कियाई इओन श्रेणी:प्लूटोनिक शैलें