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लाला हनुमन्त सहाय
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लाला हनुमन्त सहाय चित्र:L.H.Sahay1397.gif लाला हनुमन्त सहाय का चित्र 'लाला जी' दिल्ली, ब्रिटिश भारत दिल्ली, ब्रिटिश भारत भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम भारत माता सोसाइटी
लाला हनुमन्त सहाय एक भारतीय क्रान्तिकारी थे। वे 1907 में सूफी अम्बा प्रसाद के नेतृत्व में बनी भारत माता सोसायटी के सक्रिय सदस्य थेजगेश जगदीश कलम आज उनकी जय बोल 1989 हिन्दी प्रचारक संस्थान वाराणसी hi 77 । चाँदनी चौक दिल्ली में अंग्रेज वायसराय लार्ड हार्डिंग पर बम फेंकने के षड्यन्त्र में उन्हें भी सह-अभियुक्तजगेश जगदीश कलम आज उनकी जय बोल 1989 हिन्दी प्रचारक संस्थान वाराणसी hi 103 बनाया गया। न्यायालय ने उन्हें आजीवन कालेपानी की सजा दी जो बाद में अपील किये जाने पर सात वर्ष के कठोर कारावास में बदल दी गयी।http://www.hindu.com/mp/2004/08/02/stories/2004080200420200.htm The revolutionary of Chandni Chowk द हिन्दू 2004-08-02 2012-06-15 https://web.archive.org/web/20121025215013/http://www.hindu.com/mp/2004/08/02/stories/2004080200420200.htm 25 अक्तूबर 2012 live वे जाति के कायस्थ थे जिसके कारण सभी लोग उन्हें "लाला जी" कहकर सम्बोधित करते थे। उन्हें अन्तिम बार चाँदनी चौक, दिल्ली में देखा गया था। वे अपनी पैतृक हवेली में रहते थे। दो पुत्रों के परिवार के साथ रहते हुए भी वे पारिवारिक जीवन से प्रायः विरक्त रहते थे ।परिजन और गणमान्य लोग उनसे मिलने आते रहते थे और घंटों विविध विषयों पर चर्चा करते थे।उनका अधिकांश समय पुस्तकें पढ़ने में बीतता।शाम को एक घंटे सैर करते थे ।अपने बगीचे की देखरेख वे स्वयं करते थे।ज्ञान के अपार भंडार थे ।राजनीति,इतिहास लेकर दर्शन तक में गहरी पैठ थी ।जेल जीवन की लोमहर्षक यातनाएँ सुननेवालों पर अमिट प्रभाव डालती थीं।लार्ड गार्डिंग पर फेंका गया बम उन्हीं की हवेली के तहख़ाने में बनाया गया था ।
संक्षिप्त जीवन वृत्त
लाला हनुमन्त सहाय चाँदनी चौक दिल्ली में विदेशी माल के थोक व्यापारी थे। किन्तु जैसे ही वे अपने बाल सखा लाला हरदयाल के पुन: सम्पर्क में आये उनका रुझान भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम की ओर दिन-प्रतिदिन बढ़ता ही गया उन्होंने चैलपुरी मोहल्ले में स्थित अपनी हवेली में राष्ट्रीय विद्यालय खोल दिया और उसमें मास्टर अमीर चन्द को मुख्य अध्यापक नियुक्त कर दियागुप्त मन्मथनाथ भारतीय क्रान्तिकारी आन्दोलन का इतिहास 7 1993 आत्माराम एण्ड सन्स दिल्ली hi 81-7043-054-2 62 । उनकी हवेली का यह विद्यालय व उसके पुस्तकालय का वाचनालय रास बिहारी बोस, मास्टर अवध बिहारी और बसन्त कुमार विश्वास सरीखे अनेकों क्रान्तिकारियों का अड्डा बन गया। लालाजी 1907 में सूफी अम्बा प्रसाद के नेतृत्व में बनी भारत माता सोसायटी के सक्रिय सदस्य हो गये। दिसम्बर 1912 में ब्रिटिश भारत के वायसराय लार्ड हार्डिंग ने कलकत्ता को छोडकर जब दिल्ली में राजधानी बनाने का निश्चय किया ठीक उसी समय रास बिहारी बोस ने उसे जान से मारने की योजना आनन-फानन में बना डालीसरल श्रीकृष्ण क्रान्तिकारी कोश 1 2 1998 प्रभात प्रकाशन नई दिल्ली hi 81-7315-233-0 209–212 ।
अंग्रेज लेखक स्मिथ को सन् 1965 में दिये गये एक इण्टरवियू में लालाजी ने स्वयं बतलाया था - "वायसराय की सवारी निकालने के लिये दिल्ली में शानदार इन्तजाम किये गये थे। चाँदनी चौक की मुख्य सड़क के दोनों ओर कुर्सियाँ लगायी गयी थीं जिनके टिकट ब्लैक मार्केट में 50 रुपये से लेकर 300 रुपये तक मिल रहे थे। उनकी सीट एस्प्लेनेड रोड तिराहे के पास थी। जैसे ही जुलूस मोती बाजार के पास पहुँचा, बड़े जोर का धमाका हुआ। हम लोग समझे शायद कोई तोप दागी गयी होगी। जैसे ही हम मौका-ए-वारदात पर पहुँचे तब पता चला कि वास्तव में हुआ क्या है? वायसराय बुरी तरह लहूलुहान हो गया था और उसके पीछे बैठे नौकर के परखचे उड़ गये थे। डर के मारे उसकी बीबी वेहोश हो गयी थी। उन दोनों को लाल किले ले जाया गया किन्तु जुलूस वदस्तूर जारी रहा।"
लालाजी ने पुलिस की गिरफ्तारी से बचने की गरज से दिल्ली छोड़ दी और शिमला की पहाड़ियों के नीचे बसे सोलन में अपने एक मित्र सुन्दर लाल के घर जा छिपे। पता तब चला जब पुलिस किसी और मामले में सुन्दर लाल को खोजने उनके घर पहुँचीसिंह अयोध्या भारत का मुक्ति संग्राम 3 2003 ग्रन्थ शिल्पी दिल्ली hi 81-7917-033-0 (PB) 225 .
षड्यन्त्र में सजा
दिल्ली बम काण्ड में लाला हनुमन्त सहाय, मास्टर अमीरचन्द, मास्टर अवध बिहारी, भाई बालमुकुन्द और बसन्त कुमार विश्वास को गिरफ्तार करके उन पर वायसराय की ह्त्या की साजिश का मुकदमा चला। लालाजी को उम्रकैद की सजा देकर अण्डमान भेज दिया गया जबकि अन्य चारो को फाँसी की सजा हुई। लालाजी ने इस फैसले के विरुद्ध अपील की जिसके परिणाम स्वरूप उनकी उम्र कैद को सात वर्ष के कठोर कारावास में बदल दिया गया। पुरानी दिल्ली में बहादुरशाह जफर रोड पर दिल्ली गेट से आगे स्थित वर्तमान खूनी दरवाजे के पास जिस जेल में दिल्ली बम काण्ड के इन चार शहीदों को फाँसी दी गयी थी उसके निशानात भी मिटा दिये गये। अब वहाँ जेल की जगह मौलाना आजाद मेडिकल कालेज बन गया है।
जेल से छूट कर घर वापस आने के बाद लालाजी ने काँग्रेस ज्वाइन कर ली और आजादी मिलने तक कई मर्तबा जेल की हवा खायी।.
गुप्त रहस्य
लार्ड हार्डिंग बम काण्ड के पीछे केवल राजधानी को कलकत्ता से हटाकर दिल्ली लाना ही कारण नहीं था अपितु एक अफवाह यह भी थी कि इस बहाने एक लाख से अधिक बंगालियों को दिल्ली में लाकर बसाया जायेगा। इस अफवाह ने आग में घी का काम किया। बहरहाल यह कारण गले नहीं उतरता क्योंकि यह अफवाह यदि सच भी मान लें तो रासबिहारी बोस और बसन्तकुमार विश्वास को इस साजिश में क्यों शामिल किया गया? आज तक यह भी एक रहस्य ही है। अस्तु, कुछ भी हो, "वायसराय पर बम किसने फेंका था?"- लाला जी ने यह रहस्य मरते दम तक गुप्त ही रक्खा और अपने इस वचन पर कायम रहे कि यह रहस्य उनके साथ ही दफ्न होगा।
वर्ष में केवल एक दिन
जब हिन्दुस्तान को 1947 में विभाजित होकर आजादी मिली लालाजी ने हवेली से बाहर निकलना छोड़ दिया। वे वर्ष में केवल एक दिन 15 अगस्त को सज-धज कर घर से बाहर निकलते थे, लाल किले तक जाते थे, प्राचीर पर फहरता हुआ तिरंगा देखते थे, नेहरू जी का भाषण सुनते थे और वापस आकर अपनी हवेली की उसी गुमनाम कोठरी में घुस जाते थे। एक बार उनसे इसका कारण जानना चाहा तो लालाजी ने बड़ी ही शिद्दत से उत्तर दिया था - "मैं यह देखने जाता हूँ कि जिन्होंने हिन्दुस्तान की आजादी की लड़ाई में क्रान्तिकारियों के साथ दगा किया वे लाल किले की प्राचीर से लच्छेदार भाषण देते हुए कैसे लगते हैं?"क्रान्त स्वाधीनता संग्राम के क्रान्तिकारी साहित्य का इतिहास http://www.worldcat.org/title/svadhinata-sangrama-ke-krantikari-sahitya-ka-itihasa/oclc/271682218 1 1 2006 प्रवीण प्रकाशन नई दिल्ली hi 81-7783-119-4 241 https://web.archive.org/web/20131014175453/http://www.worldcat.org/title/svadhinata-sangrama-ke-krantikari-sahitya-ka-itihasa/oclc/271682218 14 अक्तूबर 2013 live
लाला हनुमन्त सहाय एक भारतीय क्रान्तिकारी थे। वे 1907 में सूफी अम्बा प्रसाद के नेतृत्व में बनी भारत माता सोसायटी के सक्रिय सदस्य थेकलम आज उनकी जय बोल जगेश जगदीश हिन्दी प्रचारक संस्थान 1989 वाराणसी 77 hi। चाँदनी चौक दिल्ली में अंग्रेज वायसराय लार्ड हार्डिंग पर बम फेंकने के षड्यन्त्र में उन्हें भी सह-अभियुक्तजगेश जगदीश कलम आज उनकी जय बोल 1989 हिन्दी प्रचारक संस्थान वाराणसी hi 103 बनाया गया। न्यायालय ने उन्हें आजीवन कालेपानी की सजा दी जो बाद में अपील किये जाने पर सात वर्ष के कठोर कारावास में बदल दी गयी।http://www.hindu.com/mp/2004/08/02/stories/2004080200420200.htm The revolutionary of Chandni Chowk 2004-08-02 द हिन्दू https://web.archive.org/web/20121025215013/http://www.hindu.com/mp/2004/08/02/stories/2004080200420200.htm 25 अक्तूबर 2012 2012-06-15 live वे जाति से कायस्थ थे जिसके कारण सभी लोग उन्हें "लाला जी" कहकर सम्बोधित करते थे। उन्हें अन्तिम बार चाँदनी चौक, दिल्ली में देखा गया था। वे अपनी पैतृक हवेली में रहते थे। दो पुत्रों के परिवार के साथ रहते हुए भी वे पारिवारिक जीवन से प्रायः विरक्त रहते थे। परिजन और गणमान्य लोग उनसे मिलने आते रहते थे और घंटों विविध विषयों पर चर्चा करते थे।उनका अधिकांश समय पुस्तकें पढ़ने में बीतता।शाम को एक घंटे सैर करते थे ।अपने बगीचे की देखरेख वे स्वयं करते थे।ज्ञान के अपार भंडार थे । राजनीति, इतिहास से लेकर दर्शन तक में गहरी पैठ थी । जेल जीवन की लोमहर्षक यातनाएँ सुननेवालों पर अमिट प्रभाव डालती थीं। लार्ड गार्डिंग पर फेंका गया बम उन्हीं की हवेली के तहख़ाने में बनाया गया था ।
इन्हें भी देखें
लार्ड हार्डिंग
दिल्ली बम काण्ड
रास बिहारी बोस
बसन्त कुमार विश्वास
लाला हरदयाल
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
चाँदनी चौक का क्रान्तिकारी - द हिन्दू में लेख
क्रान्तिकारी कोश- श्रीकृष्ण सरल
श्रेणी:दिल्ली के लोग
श्रेणी:भारतीय स्वतंत्रता सेनानी