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411 समाचार
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वसन्त पञ्चमी

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वसन्त पंचमी हिन्दू Raja Ravi Varma, Goddess Saraswati.jpg देवी सरस्वती (राजा रवि वर्मा द्वारा चित्रित) वसन्त पंचमी श्रीपंचमीसरस्वती पूजा हिन्दू पीला माघ माघ शुक्ल पंचमी 26 जनवरी 14 फरवरीhttps://www.aajtak.in/religion/festivals/story/basant-panchami-2023-date-basant-panchami-kab-hai-know-saraswati-puja-shubh-muhurat-pujan-vidhi-tlifdg-1616941-2023-01-19 Basant Panchami 2023: 25 जनवरी या 26? कब है बसंत पंचमी, जानें शुभ मुहूर्त और पूजन विधि 2023-01-19 आज तक hi 2023-01-22 पूजा व सामाजिक कार्यक्रम आम का पत्ता बसंत पंचमी या श्री पंचमी एक हिन्दू त्यौहार है। इस दिन विद्या की देवी सरस्वती, कामदेव और विष्णु की पूजा की जाती है। यह पूजा विशेष रूप से भारत, बांग्लादेश, नेपाल और अन्य कई देशों में बड़े उल्लास से मनायी जाती है। इस दिन पीले वस्त्र धारण करते हैं। शास्त्रों में बसंत पंचमी को ऋषि पंचमी से उल्लेखित किया गया है, तो पुराणों-शास्त्रों तथा अनेक काव्यग्रंथों में भी अलग-अलग ढंग से इसका चित्रण मिलता है। प्राचीन भारत और नेपाल में पूरे साल को जिन छह ऋतुओं में बाँटा जाता था उनमें वसंत लोगों का सबसे मनचाहा मौसम था। जब फूलों पर बहार आ जाती, खेतों में सरसों का फूल मानो सोना चमकने लगता, जौ और गेहूँ की बालियाँ खिलने लगतीं, आमों के पेड़ों पर मांजर (बौ.र) आ जाता और हर तरफ रंग-बिरंगी तितलियाँ मँडराने लगतीं। भर-भर भंवरे भंवराने लगते। वसंत ऋतु का स्वागत करने के लिए माघ महीने के पाँचवे दिन एक बड़ा उत्सव मनाया जाता था जिसमें विष्णु और कामदेव की पूजा होती हैं। यह वसंत पंचमी का त्यौहार कहलाता था। वसन्त पंचमी कथा 250px|thumb|right|कोलकाता में पूजा के लिये निर्मित देवी सरस्वती की प्रतिमा (वर्ष २०००) उपनिषदों की कथा के अनुसार सृष्टि के प्रारंभिक काल में ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की। लेकिन अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे, उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है। हालाकि उपनिषद व पुराण ऋषियो को अपना अपना अनुभव है, अगर यह हमारे पवित्र सत ग्रंथों से मेल नही खाता तो यह मान्य नही है। तब ब्रह्मा जी ने इस समस्या के निवारण के लिए अपने कमण्डल से जल अपने हथेली में लेकर संकल्प स्वरूप उस जल को छिड़कर भगवान श्री विष्णु की स्तुति करनी आरम्भ की। ब्रम्हा जी के किये स्तुति को सुन कर भगवान विष्णु तत्काल ही उनके सम्मुख प्रकट हो गए और उनकी समस्या जानकर भगवान विष्णु ने आदिशक्ति दुर्गा माता का आव्हान किया। विष्णु जी के द्वारा आव्हान होने के कारण भगवती दुर्गा वहां तुरंत ही प्रकट हो गयीं तब ब्रम्हा एवं विष्णु जी ने उन्हें इस संकट को दूर करने का निवेदन किया। ब्रम्हा जी तथा विष्णु जी बातों को सुनने के बाद उसी क्षण आदिशक्ति दुर्गा माता के शरीर से स्वेत रंग का एक भारी तेज उत्पन्न हुआ जो एक दिव्य नारी के रूप में बदल गया। यह स्वरूप एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था जिनके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ में वर मुद्रा थे । अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। आदिशक्ति श्री दुर्गा के शरीर से उत्पन्न तेज से प्रकट होते ही उन देवी ने वीणा का मधुरनाद किया जिससे संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया। पवन चलने से सरसराहट होने लगी। तब सभी देवताओं ने शब्द और रस का संचार कर देने वाली उन देवी को वाणी की अधिष्ठात्री देवी "सरस्वती" कहा।http://www.aryasamajjamnagar.org/vedang.htm संग्रहीत प्रति 29 जनवरी 2020 https://web.archive.org/web/20100106153131/http://www.aryasamajjamnagar.org/vedang.htm 6 जनवरी 2010 live फिर आदिशक्ति भगवती दुर्गा ने ब्रम्हा जी से कहा कि मेरे तेज से उत्पन्न हुई ये देवी सरस्वती आपकी पत्नी बनेंगी, जैसे लक्ष्मी श्री विष्णु की शक्ति हैं, पार्वती महादेव शिव की शक्ति हैं उसी प्रकार ये सरस्वती देवी ही आपकी शक्ति होंगी। ऐसा कह कर आदिशक्ति श्री दुर्गा सब देवताओं के देखते - देखते वहीं अंतर्धान हो गयीं। इसके बाद सभी देवता सृष्टि के संचालन में संलग्न हो गए। सरस्वती को वागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। ये विद्या और बुद्धि प्रदाता हैं। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की देवी भी हैं। बसन्त पंचमी के दिन को इनके प्रकटोत्सव के रूप में भी मनाते हैं। ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है- प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु। अर्थात ये परम चेतना हैं। सरस्वती के रूप में ये हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं। हममें जो आचार और मेधा है उसका आधार भगवती सरस्वती ही हैं। इनकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है। पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने सरस्वती से प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया था कि वसंत पंचमी के दिन तुम्हारी भी आराधना की जाएगी और तभी से इस वरदान के फलस्वरूप भारत देश में वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की भी पूजा होने लगी जो कि आज तक जारी है।http://www.rashtriyasahara.com/NewsDetailFrame.aspx?newsid=48471&catid=39&vcatname=%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE-%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8 पर्व/बसंत पंचमी (11 फरवरी) : विघा और बुद्धि प्रदाता मां शारदा 8 मार्च 2008 राष्ट्रीय सहाराजून 2020 InternetArchiveBot पतंगबाज़ी का वसंत से कोई सीधा संबंध नहीं है। लेकिन पतंग उड़ाने का रिवाज़ हज़ारों साल पहले चीन में शुरू हुआ और फिर कोरिया और जापान के रास्ते होता हुआ भारत पहुँचा।http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/story/2004/02/040213_pakistan_kite.shtml वसंत पर पतंग की उड़ान 8 मार्च 2008 एसएचटीएमएल बीबीसी https://web.archive.org/web/20050413090102/http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/story/2004/02/040213_pakistan_kite.shtml 13 अप्रैल 2005 live पर्व का महत्व वसंत ऋतु आते ही प्रकृति का कण-कण खिल उठता है। मानव तो क्या पशु-पक्षी तक उल्लास से भर जाते हैं। हर दिन नयी उमंग से सूर्योदय होता है और नयी चेतना प्रदान कर अगले दिन फिर आने का आश्वासन देकर चला जाता है।https://khabar.ndtv.com/news/faith/basant-panchami-2021-basant-panchami-date-puja-timing-significance-shubh-muhurat-saraswati-puja-vidhi-and-mantra-2369852 Basant Panchami 2021: 16 फरवरी को है बसंत पंचमी, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, महत्‍व और मान्‍यताएं NDTVIndia 2021-02-14 16 फ़रवरी 2021 https://web.archive.org/web/20210216040854/https://khabar.ndtv.com/news/faith/basant-panchami-2021-basant-panchami-date-puja-timing-significance-shubh-muhurat-saraswati-puja-vidhi-and-mantra-2369852 dead right|thumb|300px|हाते ख़डी : बंगाल में बच्चों की औपचारिक शिक्षा का आरम्भ वसन्त पंचमी से किया जाता है। यों तो माघ का यह पूरा मास ही उत्साह देने वाला है, पर वसंत पंचमी (माघ शुक्ल ) का पर्व भारतीय जनजीवन को अनेक तरह से प्रभावित करता है। प्राचीनकाल से इसे ज्ञान और कला की देवी मां सरस्वती का जन्मदिवस माना जाता है। जो शिक्षाविद भारत और भारतीयता से प्रेम करते हैं, वे इस दिन मां शारदे की पूजा कर उनसे और अधिक ज्ञानवान होने की प्रार्थना करते हैं। कलाकारों का तो कहना ही क्या? जो महत्व सैनिकों के लिए अपने शस्त्रों और विजयादशमी का है, जो विद्वानों के लिए अपनी पुस्तकों और व्यास पूर्णिमा का है, जो व्यापारियों के लिए अपने तराजू, बाट, बहीखातों और दीपावली का है, वही महत्व कलाकारों के लिए वसंत पंचमी का है। चाहे वे कवि हों या लेखक, गायक हों या वादक, नाटककार हों या नृत्यकार, सब दिन का प्रारम्भ अपने उपकरणों की पूजा और मां सरस्वती की वंदना से करते हैं। right|thumb|450px|वसन्त पञ्चमी के समय सरसों के पीले-पीले फूलों से आच्छादित धरती की छटा देखते ही बनती है। पौराणिक महत्व इसके साथ ही यह पर्व हमें अतीत की अनेक प्रेरक घटनाओं की भी याद दिलाता है। सर्वप्रथम तो यह हमें त्रेता युग से जोड़ती है। रावण द्वारा सीता के हरण के बाद श्रीराम उनकी खोज में दक्षिण की ओर बढ़े। इसमें जिन स्थानों पर वे गये, उनमें दण्डकारण्य भी था। यहीं शबरी नामक भीलनी रहती थी। जब राम उसकी कुटिया में पधारे, तो वह सुध-बुध खो बैठी और चख-चखकर मीठे बेर राम जी को खिलाने लगी। प्रेम में पगे जूठे बेरों वाली इस घटना को रामकथा के सभी गायकों ने अपने-अपने ढंग से प्रस्तुत किया।https://hindi.news18.com/news/dharm/basant-panchami-2021-date-mythological-significance-puja-muhurat-astrosage-bgys-3465354.html Basant panchami 2021: बसंत पंचमी कब है? जानें तिथि, पौराणिक महत्व एवं शुभ मुहूर्त News18 Hindi hi 2021-02-14 21 फ़रवरी 2021 https://web.archive.org/web/20210221215359/https://hindi.news18.com/news/dharm/basant-panchami-2021-date-mythological-significance-puja-muhurat-astrosage-bgys-3465354.html dead दंडकारण्य का वह क्षेत्र इन दिनों गुजरात और मध्य प्रदेश में फैला है। गुजरात के डांग जिले में वह स्थान है जहां शबरी मां का आश्रम था। वसंत पंचमी के दिन ही रामचंद्र जी वहां आये थे। उस क्षेत्र के वनवासी आज भी एक शिला को पूजते हैं, जिसके बारे में उनकी श्रध्दा है कि श्रीराम आकर यहीं बैठे थे। वहां शबरी माता का मंदिर भी है। ऐतिहासिक महत्व वसंत पंचमी पर्व का धार्मिक ही नहीं बड़ा ऐतिहासिक महत्व भी है। https://www.prabhasakshi.com/currentaffairs/vasant-panchmi-related-story वसंत पंचमी पर्व का धार्मिक ही नहीं बड़ा ऐतिहासिक महत्व भी है Prabhasakshi hi 2021-02-14 वसंत पंचमी हमें गुरू रामसिंह कूका की भी याद दिलाती है। उनका जन्म 1816 ई. में वसंत पंचमी पर लुधियाना के भैणी ग्राम में हुआ था। कुछ समय वे महाराजा रणजीत सिंह की सेना में रहे, फिर घर आकर खेतीबाड़ी में लग गये, पर आध्यात्मिक प्रवृत्ति होने के कारण इनके प्रवचन सुनने लोग आने लगे। धीरे-धीरे इनके शिष्यों का एक अलग पंथ ही बन गया, जो कूका पंथ कहलाया। गुरू रामसिंह, गोरक्षा, स्वदेशी, नारी उद्धार, अन्तरजातीय विवाह, सामूहिक विवाह आदि पर बहुत जोर देते थे। उन्होंने भी सर्वप्रथम अंग्रेजी शासन का बहिष्कार कर अपनी स्वतंत्र डाक और प्रशासन व्यवस्था चलायी थी। प्रतिवर्ष मकर संक्रांति पर भैणी गांव में मेला लगता था। 1872 में मेले में आते समय उनके एक शिष्य को अंग्रेजो ने घेर लिया ये सुनकर गुरू रामसिंह के शिष्य भड़क गये। उन्होंने उस गांव पर हमला बोल दिया, पर दूसरी ओर से अंग्रेज सेना आ गयी। अतः युद्ध का पासा पलट गया। इस संघर्ष में अनेक कूका वीर शहीद हुए और 68 पकड़ लिये गये। इनमें से 50 को सत्रह जनवरी 1872 को मलेरकोटला में तोप के सामने खड़ाकर उड़ा दिया गया। शेष 18 को अगले दिन फांसी दी गयी। दो दिन बाद गुरू रामसिंह को भी पकड़कर बर्मा की मांडले जेल में भेज दिया गया। 14 साल तक वहां कठोर अत्याचार सहकर 1885 ई. में उन्होंने अपना शरीर त्याग दिया। जन्म दिवस राजा भोज का जन्मदिवस वसंत पंचमी को ही आता हैं। राजा भोज इस दिन एक बड़ा उत्सव करवाते थे जिसमें पूरी प्रजा के लिए एक बड़ा प्रीतिभोज रखा जाता था जो चालीस दिन तक चलता था। http://delhipubliclibrary.in/cgi-bin/koha/opac-detail.pl?biblionumber=92037 संग्रहीत प्रति 22 जनवरी 2018 https://web.archive.org/web/20180122125720/http://delhipubliclibrary.in/cgi-bin/koha/opac-detail.pl?biblionumber=92037 22 जनवरी 2018 dead वसन्त पंचमी हिन्दी साहित्य की अमर विभूति महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्मदिवस (28.02.1899) भी है। निराला जी के मन में निर्धनों के प्रति अपार प्रेम और पीड़ा थी। वे अपने पैसे और वस्त्र खुले मन से निर्धनों को दे डालते थे। इस कारण लोग उन्हें 'महाप्राण' कहते थे। इस दिन जन्मे लोग कोशिश करे तो बहुत आगे जाते है। सन्दर्भ इन्हें भी देखें बसन्त सरस्वती पूजा बाहरी कड़ियाँ वसन्त सरस्वती चालीसा बसंत पंचमी क्यो मनाया जाता है जाने पूरा इतिहास https://web.archive.org/web/20220122141501/https://www.bntv.in/2022/01/Basant-panchami-2022.html 22 जनवरी 2022 श्रेणी:उत्सव श्रेणी:धार्मिक त्यौहार श्रेणी:भारतीय संस्कृति श्रेणी:हिन्दू धर्म श्रेणी:हिन्दू पर्व श्रेणी:भारत में त्यौहार