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देश विदेश की होली
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thumb|right|280px|यूनिवर्सिटी ऑफ़ न्यू मेक्सिको में रंग खेलते विद्यार्थी
भारत के विभिन्न क्षेत्रोंजनवरी 2021 InternetArchiveBot में भले ही विविध प्रकार से होली का उत्सव मनाया जाता है परंतु सबका उद्देश्य एवं भावना एक ही है- भक्ति, सच्चाई के प्रति आस्था और मनोरंजन। इसके अतिरिक्त अनेक देश ऐसे हैं जहाँ या तो होली से मिलता जुलता कोई पर्व मनाया जाता है या किसी अन्य अवसर पर रंग या सादे पानी से खेलने की परंपरा है।https://www.thehinduopinion.com/2020/03/happy-holi.html THE Hindu The Hinduजनवरी 2021 InternetArchiveBot
विदेशों में होली
thumb|right|280px|सामूहिक होली धूलिवंदन|कड़ी=Special:FilePath/Holi_with_colors.jpg
भारत ही नहीं विश्व के अन्य अनेक देशों में भी होली अथवा होली से मिलते-जुलते त्योहार मनाने की परंपराएँ हैं। नेपाल में होलीhttp://www.nepalhomepage.com/society/festivals/fagupurnima.html Holi 6 मार्च 2008 एचटीएमएल नेपालपृष्ठ en https://web.archive.org/web/20070816051832/http://www.nepalhomepage.com/society/festivals/fagupurnima.html 16 अगस्त 2007 dead के अवसर पर काठमांडू में एक सप्ताह के लिए प्राचीन दरबार और नारायणहिटी दरबार में बाँस का स्तम्भ गाड़ कर आधिकारिक रूप से होली के आगमन की सूचना दी जाती है। पाकिस्तान, बंगलादेश, श्री लंका और मरिशस में भारतीय परंपरा के अनुरूप ही होली मनाई जाती है। प्रवासी भारतीय जहाँ-जहाँ जाकर बसे हैं वहाँ वहाँ होली की परंपरा पाई जाती है। कैरिबियाई देशों में बड़े धूमधाम और मौज-मस्ती के साथ होली का त्यौहार मनाया जाता है। यहाँ होली को फगुआ के नाम से जाना जाता है और लोग परंपरागत तरीके से इसे मनाते हैं। १९वीं सदी के आखिरी और २०वीं सदी के शुरू में भारतीय लोग मजदूरी करने के लिए कैरिबियाई देश गए थे। इस दरम्यान गुआना और सुरिनाम तथा ट्रिनीडाड जैसे देशों में बड़ी संख्या में भारतीय जा बसे। भारतीय लोगों के साथ उनके त्यौहार और रस्मों-रिवाज भी इन देशों में पहुँचे। धीरे-धीरे फगुआ गुआना और सूरीनाम के सबसे महत्वपूर्ण त्यौहारों में एक हो गया। गुआना में होली के दिन राष्ट्रीय अवकाश रहता है। इस देश की कुल आबादी में हिंदुओं का प्रतिशत लगभग ३३ हैं। यहाँ की लड़कियों और लड़कों को रंगीन पाउडर और पानी के साथ खेलते हुए बड़े आराम से देखा जा सकता है। गुआना के गाँवों में इस अवसर पर विशेष तरह के समारोहों का आयोजन किया जाता है। कैरिबियाई देशों में कई सारे हिंदू संगठन और सांस्कृतिक संगठन सक्रिय हैं। ये संगठन नृत्य, संगीत और सांस्कृतिक उत्सवों के ज़रिए फगुआ मनाते हैं। ट्रिनीडाड एंड टोबैगो में होली को काफ़ी कुछ उसी तरह से मनाया जाता है, जैसे भारत में मनाया जाता है। हाल के वर्षों में इसकी रौनक में वृद्धि हुई है।http://sify.com/hindi/religion/fullstory.php?id=14402251 कैरेबियाई देशों में होली 5 मार्च 2008 सिफ़ी.कॉमजून 2020 InternetArchiveBot विदेशी विश्वविद्यालयों में भी होली का आयोजन होता रहा है। भले ही वह किसी संस्था के लिए चंदा जमा करने के उद्देश्य से ही क्यों न हो। विलबर फ़ोर्ड के स्टैनफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी कैंपस पर होली के कुछ सुंदर दृश्य देखे जा सकते हैं।http://www.ashanet.org/library/articles/rediff.mar.27.2001/27holi1.htm अ स्टैनफ़ोर्ड होली 5 मार्च 2008 आशानेट.ऑर्ग en https://web.archive.org/web/20080515194532/http://www.ashanet.org/library/articles/rediff.mar.27.2001/27holi1.htm 15 मई 2008 dead इसी प्रकार रिचमंड हिल्स में होली के कुछ दृश्य भी हैं।http://queens.about.com/od/holidays/p/phagwah.htm Phagwah Parade in Richmond Hill Celebrating Holi 5 मार्च 2008 अबाउट.कॉम en https://web.archive.org/web/20071109165736/http://queens.about.com/od/holidays/p/phagwah.htm 9 नवंबर 2007 dead
मुगलकालीन होली
thumb|right|280px|शायस्ता खँ के दरबार में होलीप्राचीन काल से अविरल होली मनाने की परंपरा को मुगलों के शासन में भी अवरुद्ध नहीं किया गया बल्कि कुछ मुगल बादशाहों ने तो धूमधाम से होली मनाने में अग्रणी भूमिका का निर्वाह किया। अकबर, हुमायूँ, जहाँगीर, शाहजहाँ और बहादुरशाह ज़फर होली के आगमन से बहुत पहले ही रंगोत्सव की तैयारियाँ प्रारंभ करवा देते थे। अकबर के महल में सोने चाँदी के बड़े-बड़े बर्तनों में केवड़े और केसर से युक्त टेसू का रंग घोला जाता था और राजा अपनी बेगम और हरम की सुंदरियों के साथ होली खेलते थे। शाम को महल में उम्दा ठंडाई, मिठाई और पान इलायची से मेहमानों का स्वागत किया जाता था और मुशायरे, कव्वालियों और नृत्य-गानों की महफ़िलें जमती थीं।
जहाँगीर के समय में महफ़िल-ए-होली का भव्य कार्यक्रम आयोजित होता था। इस अवसर पर राज्य के साधारण नागरिक बादशाह पर रंग डालने के अधिकारी होते थे। शाहजहाँ होली को 'ईद गुलाबी' के रूप में धूमधाम से मनाता था। बहादुरशाह ज़फर होली खेलने के बहुत शौकीन थे और होली को लेकर उनकी सरस काव्य रचनाएँ आज तक सराही जाती हैं। मुगल काल में होली के अवसर पर लाल किले के पिछवाड़े यमुना नदी के किनारे आम के बाग में होली के मेले लगते थे। मुगल शैली के एक चित्र में औरंगजेब के सेनापति शायस्ता खाँ को होली खेलते हुए दिखाया गया है। दाहिनी ओर दिए गए इस चित्र की पृष्ठभूमि में आम के पेड़ हैं महिलाओं के हाथ में पिचकारियाँ हैं और रंग के घड़े हैं।http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/msid-1448831,prtpage-1.cms Who says Holi is only a Hindu festival? 5 मार्च 2008 टाइम्स ऑफ़ इंडिया en https://web.archive.org/web/20110316055718/http://timesofindia.indiatimes.com/articleshow/msid-1448831,prtpage-1.cms 16 मार्च 2011 live
भारत की विभिन्न होलियाँ
right|thumb|280px|बरसाने' की लठमार होली फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाई जाती है|कड़ी=Special:FilePath/LatthmarHoli_8916.jpg
बरसाने' की लठमार होली फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष की नवमी को मनाई जाती है। इस दिन नंद गाँव के ग्वाल बाल होली खेलने के लिए राधा रानी के गाँव बरसाने जाते हैं और जम कर बरसती लाठियों के साए में होली खेली जाती है। इस होली को देखने के लिए बड़ी संख्या में देश-विदेश से लोग 'बरसाना' आते हैं।http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2004/03/040306_holi_mathura.shtml नंदगाँव और बरसाने की लठमार होली 4 मार्च 2008 एसएचटीएमएल बीबीसी https://web.archive.org/web/20060308061256/http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2004/03/040306_holi_mathura.shtml 8 मार्च 2006 live मथुरा से 54 किलोमीटर दूर कोसी शेरगढ़ मार्ग पर फालैन गाँव है जहाँ एक अनूठी होली होती है। गाँव का एक पंडा मात्र एक अंगोछा शरीर पर धारण करके २०-२५ फुट घेरे वाली विशाल होली की धधकती आग में से निकल कर अथवा उसे फलांग कर दर्शकों में रोमांच पैदा करते हुए प्रह्लाद की याद को ताज़ा कर देता है।http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainभारतीय जन मानस व संस्कृति में गाय का अपना विशेष महत्व है। होली पर भी गाय का महत्व देखने को मिलता है। होली पर बहनें अपने भाईयों की लम्बी आयु के लिए माला घोळती है। इस माला को अपने भाईयों के सिर के ऊपर से सात बार घूमा कर फेंक दिया जाता है। रात को होलिका दहन के समय यह माला होलिका के साथ जला दी जाती है। इसका यह आश्य है कि होली के साथ भाईयों पर लगी बुरी नजर भी जल जाए। यह जो माला भाईयों के सिर के ऊपर घुमाई जाती है वह गाय के गोबर की बनाई जाती है। इन माला को स्थानीय राजस्थानी भाषा में भरभोळिया कहते ह। भरभोळिया गोबर के ऊपलों की तरह ही बनता है फर्क इतना है कि इसके ठीक बीच मं छेद की दिया जाता है और इसी छेद में से मज की रस्सी पिरोई जाती है। भरभोळिये की एक माला में सात भरभोळिए होते हैं। किसी समय जब घर घर में गाए हुआ करती थी उस समय होली के दिनों में दोपहर में घर की महिलाऍं भरभोळिए बनाने का काम ही करती थी लेकिन बदलते परिवेश ने इसमें फर्क डाला है। आज भरभोळिए बहुत कम घरों में ही बनाए जाते हैं। इसी कारण इनकी बिक्री होना शुरू हो गई ह। बीकानेर के दम्माणियों के चौक व बारहगुवाड चौक में इन दिनों इन भरभोळियों की बिक्री परवान पर है। आज घर घर में गैस के चुल्हों ने जगह बना ली है और गाय का गोबर उपयोग में नहंी आता है। आज नही घर घर में गाय नजर आती है। ऐसी परिस्थिति में भरभोळियों को बेचकर पैसा कमाना लाजमी हैment/story/2007/03/070301_holi_falen.shtml जलती होली, निकलता पंडा 5 मार्च 2008 एसएचटीएमएल बीबीसीजून 2021 InternetArchiveBot मालवा में होली के दिन लोग एक दूसरे पर अंगारे फेंकते हैं। उनका विश्वास है कि इससे होलिका नामक राक्षसी का अंत हो जाता है। राजस्थान में होली के अवसर पर तमाशे की परंपरा है। इसमें किसी नुक्कड़ नाटक की शैली में मंच सज्जा के साथ कलाकार आते हैं और अपने पारंपरिक हुनर का नृत्य और अभिनय से परिपूर्ण प्रदर्शन करते हैं। तमाशा की विषय वस्तु पौराणिक कहानियों और चरित्रों के इर्दगिर्द घूमती हुई इन चरित्रों के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था पर भी व्यंग्य करती है।http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/story/2005/03/050324_holi_rajsthan.shtml राजस्थान में तमाशे से मनती है होली 5 मार्च 2008 एसएचटीएमएल बीबीसी https://web.archive.org/web/20060317223242/http://www.bbc.co.uk/hindi/entertainment/story/2005/03/050324_holi_rajsthan.shtml 17 मार्च 2006 live मध्य प्रदेश के भील होली को भगौरिया कहते हैं। भील युवकों के लिए होली अपने लिए प्रेमिका को चुनकर भगा ले जाने का त्योहार है। होली से पूर्व हाट के अवसर पर हाथों में गुलाल लिए भील युवक 'मांदल' की थाप पर सामूहिक नृत्य करते हैं। नृत्य करते-करते जब युवक किसी युवती के मुँह पर गुलाल लगाता है और वह भी बदले में गुलाल लगा देती है तो मान लिया जाता है कि दोनों विवाह सूत्र में बँधने के लिए सहमत हैं। युवती द्वारा प्रत्युत्तर न देने पर युवक दूसरी लड़की की तलाश में जुट जाता है।http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2005/04/050401_bhagoria_tribe.shtml 'भगोरिया' मेले में घुले प्रेम के रंग 5 मार्च 2008 एसएचटीएमएल बीबीसी https://web.archive.org/web/20050830071136/http://www.bbc.co.uk/hindi/regionalnews/story/2005/04/050401_bhagoria_tribe.shtml 30 अगस्त 2005 live
thumb|right|280px|बिहार की कुर्ता फाड़ होली होली खेलते समय सामान्य रूप से पुराने कपड़े पहने जाते हैं। मिथिला प्रदेश में होली खेलते समय लड़कों के झुंड में एक दूसरे का कुर्ता फाड़ देने की परंपरा है।http://maithilaurmithila.blogspot.com/2008/02/blog-post_21.html कुर्ता फाड़ होली के तैयारी म लालू 5 मार्च 2008 मैथिल और मिथिला भोजपुरीजून 2020 InternetArchiveBot होली का समापन रंग पंचमी के दिन मालवा और गोवा की शिमगो के साथ होता है जिस दिन धूम धाम से वसंत पंचमी से शुरू होने वाला वसंतोत्सव पूरा हो जाता है।
होली से मिलते जुलते विदेशी त्योहार
तेरह अप्रैल को ही थाईलैंड में नव वर्ष 'सौंगक्रान' प्रारंभ होता है इसमें वृद्धजनों के हाथों इत्र मिश्रित जल डलवाकर आशीर्वाद लिया जाता है। लाओस में यह पर्व नववर्ष की खुशी के रूप में मनाया जाता है। लोग एक दूसरे पर पानी डालते हैं। म्यांमर में इसे जल पर्व के नाम से जाना जाता है। जर्मनी में ईस्टर के दिन घास का पुतला बनाकर जलाया जाता है। लोग एक दूसरे पर रंग डालते हैं। हंगरी का ईस्टर होली के अनुरूप ही है। अफ्रीका में 'ओमेना वोंगा' मनाया जाता है। इस अन्यायी राजा को लोगों ने ज़िंदा जला डाला था। अब उसका पुतला जलाकर नाच गाने से अपनी प्रसन्नता व्यक्त करते हैं। अफ्रीका के कुछ देशों में सोलह मार्च को सूर्य का जन्म दिन मनाया जाता है। लोगों का विश्वास है कि सूर्य को रंग-बिरंगे रंग दिखाने से उसकी सतरंगी किरणों की आयु बढ़ती है। पोलैंड में 'आर्सिना' पर लोग एक दूसरे पर रंग और गुलाल मलते हैं। यह रंग फूलों से निर्मित होने के कारण काफ़ी सुगंधित होता है। लोग परस्पर गले मिलते हैं। अमरीका में 'मेडफो' नामक पर्व मनाने के लिए लोग नदी के किनारे एकत्र होते हैं और गोबर तथा कीचड़ से बने गोलों से एक दूसरे पर आक्रमण करते हैं। ३१ अक्टूबर को अमरीका में सूर्य पूजा की जाती है। इसे होबो कहते हैं। इसे होली की तरह मनाया जाता है। इस अवसर पर लोग फूहड वेशभूषा धारण करते हैं। चेक और स्लोवाक क्षेत्र में बोलिया कोनेन्से त्योहार पर युवा लड़के-लड़कियाँ एक दूसरे पर पानी एवं इत्र डालते हैं। हालैंड का कार्निवल होली सी मस्ती का पर्व है। बेल्जियम की होली भारत सरीखी होती है और लोग इसे मूर्ख दिवस के रूप में मनाते हैं। यहाँ पुराने जूतों की होली जलाई जाती है। इटली में रेडिका त्योहार फरवरी के महीने में एक सप्ताह तक हर्षोल्लास से मनाया जाता है। लकड़ियों के ढेर चौराहों पर जलाए जाते हैं। लोग अग्नि की परिक्रमा करके आतिशबाजी करते हैं। एक दूसरे को गुलाल भी लगाते हैं। रोम में इसे सेंटरनेविया कहते हैं तो यूनान में मेपोल। ग्रीस का लव ऐपल होली भी प्रसिद्ध है। स्पेन में भी लाखों टन टमाटर एक दूसरे को मार कर होली खेली जाती है। जापान में १६ अगस्त रात्रि को टेमोंजी ओकुरिबी नामक पर्व पर कई स्थानों पर तेज़ आग जला कर यह त्योहार मनाया जाता है। चीन में होली की शैली का त्योहार च्वेजे कहलाता है। यह पंद्रह दिन तक मनाया जाता है। लोग आग से खेलते हैं और अच्छे परिधानों में सज धज कर परस्पर गले मिलते हैं। साईबेरिया में घास फूस और लकड़ी से होलिका दहन जैसी परिपाटी देखने में आती है। नार्वे और स्वीडन में सेंट जान का पवित्र दिन होली की तरह से मनाया जाता है। शाम को किसी पहाड़ी पर होलिका दहन की भाँति लकड़ी जलाई जाती है और लोग आग के चारों ओर नाचते गाते परिक्रमा करते हैं। इंग्लैंड में मार्च के अंतिम दिनों में लोग अपने मित्रों और संबंधियों को रंग भेंट करते हैं ताकि उनके जीवन में रंगों की बहार आए।http://www.abhivyakti-hindi.org/parva/alekh/2006/desh_videsh_ki_holi.htm देश विदेश की होली 5 मार्च 2008 एचटीएम अभिव्यक्ति https://web.archive.org/web/20080514093529/http://www.abhivyakti-hindi.org/parva/alekh/2006/desh_videsh_ki_holi.htm 14 मई 2008 live
सन्दर्भ
श्रेणी:होली
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