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411 समाचार
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एक कहानी यह भी

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एक कहानी यह भी Ekkahaniyehbhi.jpg 150px मुखपृष्ठ मन्नू भंडारी राधाकृष्ण प्रकाशन २००८ हिंदी भारत साहित्य उपन्यास २१६ ८१८३६११०६० व्यास सम्मान से सम्मानित एक कहानी यह भी पुस्तक में लेखिका मन्नू भंडारी ने अपने लेखकीय जीवन की कहानी उतार दी है। यह उनकी आत्मकथा तो नहीं है, लेकिन इसमें उनके भावात्मक और सांसारिक जीवन के उन पहलुओं पर भरपूर प्रकाश पड़ता है जो उनकी रचना-यात्रा में निर्णायक रहे। एक ख्यातनामा लेखक की जीवन-संगिनी होने का रोमांच और एक जिद्दी पति की पत्नी होने की बाधाएँ, एक तरफ अपनी लेखकीय जरूरतें (महत्त्वाकांक्षाएँ नहीं) और दूसरी तरफ एक घर को सँभालने का बोझिल दायित्व, एक मधुर आम आदमी की तरह जीवन की चाह और महान उपल्ब्धियों के लिए ललकता, आसपास का साहित्यिक वातावरण—ऐसा कई-कई विरोधाभासों के बीच से मन्नूजी लगातार गुजरती रहीं, लेकिन उन्होंने अपनी जिजीविषा, अपनी सादगी, आदमीयत और रचना-संकल्प को नहीं टूटने दिया। आज भी जब वे उतनी मात्रा में नहीं लिख रही हैं, ये चीजें उनके साथ हैं, उनकी सम्पत्ति हैं। यह आत्मस्मरण मन्नूजी की जीवन-स्थितियों के साथ-साथ उनके दौर की कई साहित्यिक-सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर भी रोशनी डालता है और नई कहानी दौर की रचनात्मक बेकली और तत्कालीन लेखकों की ऊँचाइयों-नीचाइयों से भी परिचित करता है। साथ ही उन परिवेशगत स्थितियों को भी पाठक के सामने रखता है जिन्होंने उनकी संवेदना को झकझोरा। http://pustak.org/bs/home.php?bookid=6103# एक कहानी यह भी ३१ जनवरी २००९ पी.एच.पी भारतीय साहित्य संग्रह https://web.archive.org/web/20100121094606/http://pustak.org/bs/home.php?bookid=6103 21 जनवरी 2010 dead मन्नू जी की यह कहानी, उनकी लेखकीय यात्रा के कोई छोटे मोटे उतार चढ़ावों की ही कहानी नहीं है, अपितु जीवन के उन बेरहम झंझावातों और भूकम्पों की कहानी भी है, जिनका एक झोंका, एक झटका ही व्यक्ति को तहस नहस कर देने के लिए काफ़ी होता है। मन्नू जी उन्हें भी झेल गईं। कुछ तड़की, कुछ भड़की -फिर सहज और शान्त बन गईं। आज उन्हीं संघर्षों के बल पर वे उस तटस्थ स्थिति में पहुँच गई हैं, जहाँ उन्हें न दुख सताता है, न सुख ! एक शाश्वत सात्विक भाव में बनीं रहती हैं और शायद इसी कारण वे फिर से लेखन के क्षेत्र में सक्रिय हो गई हैं।http://www.sahityakunj.net/LEKHAK/D/DeeptiGupta/ek_kahani_yah_bhee_SahityaCharcha.htm एक कहानी यह भी समीक्षात्मक अभिव्यक्ति ३१ जनवरी २००९ एच.टी.एम साहित्य कुंज https://web.archive.org/web/20080522080853/http://www.sahityakunj.net/LEKHAK/D/DeeptiGupta/ek_kahani_yah_bhee_SahityaCharcha.htm 22 मई 2008 dead विशेषताएँ इसमें मन्नू भंडारी ने अपनी विभिन्न रचनाओं के स्रोतों का उल्लेख किया है। सन् १९६२ के चीनी आक्रमणमन्नू भंडारी एक कहानी यह भी २०१६ राधाकृष्ण पेपरबैक्स नई दिल्ली 978-81-8361-239-5 ७० की झलक भी इसमें दिखाई देती है। इन्हें भी देखें मन्नू भंडारी सन्दर्भ श्रेणी:पुस्तकें श्रेणी:हिन्दी विकि डीवीडी परियोजना श्रेणी:आत्मकथाएँ श्रेणी:मन्नू भंडारी