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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

मनसा देवी

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फ़रवरी 2015 हिंदू , बुद्ध , जैन , सिख Manasa 25 Palli.JPG मनसा देवी { विषहर माता } भगवान शिव और माता पार्वती की पुत्री , मनसा देवी, विषहर मां अपने चतुर्भुज रूप में मनसा देवी Mānasā नागकन्या, शिव और पार्वती की पुत्री रूद्रांशी , भगवती नागों ,वंश, मातृत्व और विष की देवी ; सभी इच्छापूर्ण करने वाली देवी , शिव और पार्वती की पुत्री कैलाश , नाग लोक त्रिशूल, चक्र, पाश, खड्ग, नाग , शंख, वर मुद्रा, अभय मुद्रा जरत्कारु जगदगौरी, मनसा, सिद्धयोगिनी, वैष्णवी, नागभगिनी, शैवी, नागेश्वरी, जरत्कारुप्रिया, आस्तीकमाता विषहरीती, ‎महाज्ञानयुता , शिवसुता , गौरीनन्दिनी आदि कमल , हंस , सिंहासन आस्तिक मनसा देवी, विषहर महारानी देवी , शक्ति शिव पुराण, देवी भागवत पुराण, विष्णु पुराण, ऋग वेद, साम वेद, यजुर वेद, अथर्व वेद शिव (जन्म दाता पिता ), कश्यप (पालक पिता) आस्तिक पार्वती (जन्म दायिनी माता ), कद्रु (पालक माता) नाग और नागिन का जोड़ा गणेश , अशोकसुन्दरी , कार्तिकेय , अय्यपा ॐ श्री मनसा देवीयाय नम: मनसा देवी को भगवान शिव और माता पार्वती की सबसे छोटी पुत्री माना जाता है । इनका प्रादुर्भाव मस्तक से हुआ है इस कारण इनका नाम मनसा पड़ा। महाभारत के अनुसार इनका वास्तविक नाम जरत्कारु है और इनके समान नाम वाले पति महर्षि जरत्कारु तथा पुत्र आस्तिक जी हैं। इनके भाई बहन गणेश जी, कार्तिकेय जी , देवी अशोकसुन्दरी , देवी ज्योति और भगवान अय्यपा हैं ,इनके प्रसिद्ध मंदिर एक शक्तिपीठ पर हरिद्वार में स्थापित है।मनसा देवी मंदिर हरिद्वार https://web.archive.org/web/20140606224341/http://www.prabhasakshi.com/ShowArticle.aspx?ArticleId=111202-114134-141000 6 जून 2014 मनसा देवी नागों की देवी हैं, उनका मुख्य मंदिर हरिद्वार में है जो शक्तिपीठ पर स्थापित है। नवरात्रि को यहाँ बहुत भीड़ लगती है तथा तीर्थ के साथ ही यह पर्यटन स्थल भी है जो मन में शांति का अनुभव कराने वाला है। समय आने पर भगवान शिव ने अपनी पुत्री का विवाह जरत्कारू के साथ किया और इनके गर्भ से एक तेजस्वी पुत्र हुआ जिसका नाम आस्तिक रखा गया। आस्तिक ने नागों के वंश को नष्ट होने से बचाया। राजा नहुष और नात्सय इनके बहनोई हैं। इनके बड़े भाई भगवान कार्तिकेय और भगवान अय्यपा हैं तथा इनकी बड़ी बहन देवी अशोकसुन्दरी, और देवी ज्योति हैं। भगवान गणेश इनके छोटे भाई हैं। इस कथा का पूरा साथ इस लेख में दिया गया है जो कि मां मनसा देवी की पौराणिक कथा है। माँ मनसा देवी अपने भक्तो को बहुत प्रेम करती है और इनकी उपासना अनेक प्रकार से की जा सकती है। मनसा देवीजी का मन्त्र है - ॥ ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं एं मनसा दैव्ये स्वाहा॥ और माँ को प्रसन्न करने के लिए हम श्री मनसा चालीसा का भी पाठ कर सकते है।https://www.ayurvedji.com/%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b2%e0%a5%80%e0%a4%b8%e0%a4%be-mansa-chalisa-pdf-lyrics/ देवी माँ मनसा चालीसा पाठ : Mansa Chalisa Pdf Lyrics Ayurvedji Ayurvedji January 10, 2023 AyurvedJi 2023-04-06 6 अप्रैल 2023 https://web.archive.org/web/20230406060824/https://www.ayurvedji.com/%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%B8%E0%A4%BE-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%B8%E0%A4%BE-mansa-chalisa-pdf-lyrics/ dead मूल thumb|300px|मनसा देवी ग्रीस में भी मनसा नामक देवी का प्रसंग आता है।The Knossos Labyrinth https://web.archive.org/web/20140702170754/http://books.google.com/books?id=GupJUn_xqkkC&pg=PA112&lpg=PA112&dq=Ma-na-sa+minaon&source=bl&ots=gLCRjj9h2_&sig=af-BXFWq8JHIK7NqrddWF_oW0ew&hl=en&sa=X&ei=n78RULbZDai36wGXt4AQ&ved=0CE8Q6AEwAQ#v=onepage&q=Ma-na-sa&f=false 2 जुलाई 2014 A New View of the Palace of Minos at Knossos इन्हें शिव और पार्वती की पुत्री तथा विष की देवी के रूप में भी माना जाता है। 14 वी सदी के बाद इन्हे शिव के परिवार की तरह मंदिरों में आत्मसात किया गया। यह मान्यता भी प्रचलित है कि इन्होने शिव को हलाहल विष के पान के बाद बचाया था, परंतु यह भी कहा जाता है कि मनसा का जन्म समुद्र मंथन के बाद हुआ।https://www.punjabkesari.in/national/news/do-you-know-the-history-of-mata-mansa-devi-temple-598542 माता मनसा देवी मंदिर का इतिहास क्या आप जानते हैं, पौने दो सौ साल पहले हुआ मंदिर का निर्माण 2017-03-28 punjabkesari 2021-07-31 विष की देवी के रूप में इनकी पूजा झारखंड बिहार और बंगाल में बड़े धूमधाम से हिन्दी और बंग्ला पंचांग के अनुसार भादो महीने मे पूरी माह इनकी स्तुति होती है ।। 108 दैवीय स्थल टेट, कारेन 2005 CCC प्रकाशन 1-888729-11-2 194 https://archive.org/details/sacredplacesofgo0000tate इनके सात नामों के जाप से नाग का भय नहीं रहता। ये नाम इस प्रकार है जरत्कारु, जगद्गौरी, मनसा, सिद्धयोगिनी, वैष्णवी, नागभगिनी, शैवी, नागेश्वरी, जरत्कारुप्रिया, आस्तिकमाता और विषहरी। रूप thumb|मनसा देवी आस्तिक को गोद में लिए हुए, 10वीँ सदी पाल वंश, बिहार। मनसा देवी मुख्यत: नाग से आच्छादित तथा कमल पर विराजित हैं 7 नाग उनके रक्षण में सदैव विद्यमान हैं। कई बार देवी के चित्रों तथा भित्ति चित्रों में उन्हें एक बालक के साथ दिखाया गया है जिसे वे गोद में लिये हैं, वह बालक देवी का पुत्र आस्तिक है।मुनि आस्तिक https://web.archive.org/web/20150923175221/http://www.ashram.org/HealthyLiving/GeneralTips/tabid/1341/articleid/2278/Default.aspx?dnnprintmode=true&mid=4303&SkinSrc=%5BG%5DSkins%2F_default%2FNo+Skin&ContainerSrc=%5BG%5DContainers%2F_default%2FNo+Container 23 सितंबर 2015 इन्होनें ही जन्मेजय के सर्पेष्ठी यज्ञ से सर्पों की रक्षा की थी तथा ये मनसा के पुत्र थे। उपाख्यान महाभारत पाण्डुवंश में पाण्डवों में से एक धनुर्धारी अर्जुन और उनकी द्वितीय पत्नी सुभद्रा जो श्री कृष्ण और श्री बलराम की बहन हैं, उनके पुत्र अभिमन्यु हुआ जो महाभारत के युद्ध में मारा गया। अभिमन्यु का पुत्र परीक्षित हुआ, जिसकी मृत्यु तक्षक नाग के काटने से हुई।परीक्षित https://web.archive.org/web/20140606212055/http://hi.brajdiscovery.org/index.php?title=%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%A4 6 जून 2014 ब्रजडिस्कवरी परीक्षित पुत्र जन्‍मेजय ने अपने छ: भाइयों के साथ प्रतिशोध में नाग जाति के विनाश के लिये नागेष्ठी यज्ञ किया। शिव ने अपनी पुत्री मनसा का विवाह किया तथा उसके पुत्र आस्तिक नें नागों को यज्ञ से बचाया।नागकुल https://web.archive.org/web/20140606221332/http://www.dharmsansar.com/2012_09_01_archive.html 6 जून 2014 , इस पृष्ठ में नागकुल का वर्णन है तथा द्वितीय कुल में वासुकि का वर्णन है राजा युधिष्ठिर ने भी माता मानसा की पूजा की थी जिसके फल स्वरूप वह महाभारत के युद्ध में विजयी हुए। जहाँ युधिष्ठिर ने पूजन किया वहाँ सालवन गाँव में भव्य मंदिर का निर्माण हुआ।http://www.jagran.com/haryana/karnal-9777681.html सालवन का प्रसिद्ध मंदिर 6 जून 2014 https://web.archive.org/web/20140606220818/http://www.jagran.com/haryana/karnal-9777681.html 6 जून 2014 live पुराण अलग अलग पुराणों में मनसा की अलग अलग किंवदंती है। पुराणों में बताया गया है कि इनका जन्म शिव के मस्तिष्क से हुआ तथा मनसा किसी भी विष से अधिक शक्तिशाली थी इसलिये ब्रह्मा ने इनका नाम विषहरी रखा। विष्णु पुराण विष्णु पुराण के चतुर्थ भाग में एक नागकन्या का वर्णन है जो आगे चलकर मनसा के नाम से प्रचलित हुई। ब्रह्मवैवर्त पुराण ब्रह्मवैवर्त पुराण के अंतर्गत एक नागकन्या थी जो शिव तथा कृष्ण की भक्त थी। उसने कई युगों तक तप किया तथा शिव से वेद तथा कृष्ण मंत्र का ज्ञान प्राप्त किया जो मंत्र आगे जाकर कल्पतरु मंत्र के नाम से प्रचलित हुआ। उस कन्या ने पुष्कर में तप कर कृष्ण के दर्शन किए तथा उनसे सदैव पूजित होने का वरदान प्राप्त किया। मंगलकाव्य thumb|मनसा की प्रतिमा सुन्दरवन। मंगलकाव्य बंगाल में 13वीं तथा 18वीं शताब्दी में लिखित काव्य है जो कई देवताओं के संदर्भ में लिखित हैं। विजयगुप्त का मनसा मंगल काव्य और विप्रदास पिल्ले का मनसाविजय (1495) मनसा के जन्म का वृत्तांत बताते हैं। मनसाविजय के अनुसार वासुकि नाग की माता नें एक कन्या की प्रतिमा का निर्माण किया जो शिव वीर्य से स्पर्श होते ही एक नागकन्या बन गई, जो मनसा कहलाई। जब शिव ने मनसा को देखा तो वे मोहित हो गए, तब मनसा ने बताया कि वह उनकी बेटी है, शिव मनसा को लेकर कैलाश गए। माता पार्वती नें जब मनसा को शिव के साथ देखा तब चण्डी रूप धारण किया और मनसा को नष्ट करने के लिए उन्हें क्रोध आया किंतु भगवान शंकर ने जब उन्हें बताया कि मनसा उनकी और पार्वती ही बेटी हैं तो माता पार्वती का वात्सल्य मनसा पर उमड़ आया। मनसा ने ही शिव को हलाहल विष से मुक्त किया था। मंदिर मनसा देवी मंदिर, हरिद्वार thumb|300px|मनसा देवी मंदिर, हरिद्वार। यह मंदिर अत्यंत ही प्रसिद्ध है तथा हरिद्वार से 3 किमी की दूरी पर स्थित है।मनसा देवी मंदिर हरिद्वार https://web.archive.org/web/20140607091708/https://plus.google.com/app/basic/local/103680883109748834428/about?gl=in&hl=en 7 जून 2014 गूगल प्लस यहाँ पर माता शक्तिपीठ पर स्थापित दुख दूर करतीं हैं। यहाँ 3 मंदिर हैं। यहाँ के एक वृक्ष पर सूत्र बाँधा जाता है परंतु मनसा पूर्ण होने के बाद सूत्र निकालना आवश्यक है। यह मंदिर सुबह ८ बजे से शाम ५ बजे तक खुला रहता है। दोपहर में 2 घंटे के लिए १२ से २ तक मंदिर के पट बंद कर दिए जाते है जिसमे माँ मनसा का श्रृंगार और भोग लगता है। मंदिर परिसर में एक पेड़ है जिसपे भक्त मनोकामना पूर्ति के लिए एक पवित्र धागा बांधते है। मनसा देवी मंदिर, पंचकूला right|250px|thumb|300px|मनसा देवी मंदिर के पास पटियाला मंदिर। माता मनसा चंडीगढ़ के समीप पंचकूला में विराजमान होकर दुख दूर करतीं हैं। यहाँ नवरात्रि में भव्य मेले का आयोजन प्रतिवर्ष होता है, यह 100 एकड़ में फैला विशाल मंदिर है। यह मंदिर सन् 1811-1815 के मध्य राजा गोलासिह द्वारा बनवाया गया था।पंचकुला, चंडीगढ़ https://web.archive.org/web/20140606235719/http://hindi.nativeplanet.com/panchkula/attractions/mansa-devi-temple/ 6 जून 2014 मनसा मंदिर यातायात सुविधा चंडीगढ़ बस स्टैंड से लगभग 10 किमी तथा पचकुला बस स्टैंड से 4 किमी की दुरी पर स्तिथ , मनसा देवी मंदिर में बसों या ऑटो रिक्शा से पहुंचा जा सकता है । नवरात्री के दिनों में यह  यात्रियों के आने जाने का विशेष प्रबंध चंडीगढ़ परिवहन द्वारा किया जाता है यदि आप लोग रेल से यात्रा के बारे में सोच रहे है तो यह उसका भी उचित व्यवस्था है । चंडीगढ़ -कालका रेल लाइन यह आपको हमेशा ही उपलब्ध मिलेगी । इन्हें भी देखें शिव पार्वती कश्यप सन्दर्भ 30em बाहरी कड़ियाँ मनसादेवी डॉट एनआइसी डॉट इन यात्रा माता श्री मनसा देवी जी की। मुकुट मुखारविंद। श्रेणी:हिन्दू देवियाँ श्रेणी:हिन्दू धर्म