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411 समाचार
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अयोध्या विवाद

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अंगूठाकार|विवदित स्थल का नक्शा अयोध्या विवाद एक राजनीतिक, ऐतिहासिक और सामाजिक-धार्मिक विवाद है जो नब्बे के दशक में सबसे ज्यादा उभार पर था। इस विवाद का मूल मुद्दा राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद की स्थिति को लेकर है।https://www.bbc.com/hindi/india/2009/06/090630_ayodhya_timeline_ad_tc2 अयोध्या में कब-कब क्या हुआ? 19 जुलाई 2018 https://web.archive.org/web/20180722003853/https://www.bbc.com/hindi/india/2009/06/090630_ayodhya_timeline_ad_tc2 22 जुलाई 2018 live विवाद इस बात को लेकर था कि क्या हिंदू मंदिर को ध्वस्त कर वहां मस्जिद बनाया गया या मंदिर को मस्जिद के रूप में बदल दिया गया। बाबरी मस्जिद को एक राजनीतिक रैली के दौरान नष्ट कर दिया गया था, जो 6 दिसंबर 1992 को एक दंगे में बदल गया था। जो संगठन राम मंदिर के निर्माण का समर्थन कर रहे थे, उन्होंने 1992 के दिसंबर में एक कारसेवा का आयोजन किया वे राम मंदिर के निर्माण में श्रमदान के लिए संगठित हुए थे, बाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय में भूमि शीर्षक का मामला दर्ज किया गया था, जिसका फैसला 30 सितंबर 2010 को सुनाया गया था। फैसले में, तीन न्यायाधीशों इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने फैसला दिया कि अयोध्या की 2.77 एकड़ (1.12 हेक्टेयर) भूमि को तीन भागों में विभाजित किया जाएगा, जिसमें 1⁄3 राम लला या हिन्दू महासभा द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाना था, 1⁄3 सुन्नी वक्फ बोर्ड और शेष 1⁄3 निर्मोही अखाड़ा को दिया जाना था। 9 नवंबर, 2019 को, मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट ने पिछले फैसले को हटा दिया और कहा कि भूमि सरकार के कर रिकॉर्ड के अनुसार है। इसने हिंदू मंदिर के निर्माण के लिए भूमि को एक ट्रस्ट को सौंपने का आदेश दिया। इसने सरकार को मस्जिद बनाने के लिए सुन्नी वक्फ बोर्ड को वैकल्पिक 5 एकड़ जमीन देने का भी आदेश दिया। साथ ही पीएम ने घोषणा की कि सरकार द्वारा अधिग्रहित 67 एकड़ जमीन भी ट्रस्ट को दी जावेगी। इतिहास मुग़ल शासक बाबर 1526 में भारत आया। 1528 तक वह अवध वर्तमान अयोध्या तक पहुँच गया। बाबर के सेनापति मीर बाकी ने 1528-29 में एक मस्जिद का निर्माण कराया था। 134 साल पुराने अयोध्या मंदिर-मस्जिद विवाद पर शनिवार को सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से यह फैसला सुनाया। इसके तहत अयोध्या की 2.77 एकड़ की पूरी विवादित जमीन राम मंदिर निर्माण के लिए दे दी। शीर्ष अदालत ने कहा कि मंदिर निर्माण के लिए 3 महीने में ट्रस्ट बने और इसकी योजना तैयार की जाए। चीफ जस्टिस ने मस्जिद बनाने के लिए मुस्लिम पक्ष को 5 एकड़ वैकल्पिक जमीन दिए जाने का फैसला सुनाया, जो कि विवादित जमीन की करीब दोगुना है। चीफ जस्टिस ने कहा कि ढहाया गया ढांचा ही भगवान राम का जन्मस्थान है और हिंदुओं की यह आस्था निर्विवादित है। 6 अगस्त से 16 अक्टूबर तक इस मामले पर 40 दिनसुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।संविधान पीठ द्वारा शनिवार को45 मिनट तक पढ़े गए 1045 पन्नों के फैसले ने देश के इतिहास के सबसे अहम और एक सदी से ज्यादा पुराने विवाद का अंत कर दिया। चीफ जस्टिस गोगोई, जस्टिस एसए बोबोडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पीठ ने स्पष्ट किया कि मंदिर को अहम स्थान पर ही बनाया जाए। रामलला विराजमान को दी गई विवादित जमीन का स्वामित्व केंद्र सरकार के रिसीवर के पास रहेगा। फैसले के मुख्य बिंदु रामलला विराजमान/मंदिर चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा- राम जन्मभूमि स्थान न्यायिक व्यक्ति नहीं है, जबकि भगवान राम न्यायिक व्यक्ति हो सकते हैं। ढहाया गया ढांचा ही भगवान राम का जन्मस्थान है, हिंदुओं की यह आस्था निर्विवादित है। विवादित 2.77 एकड़ जमीन रामलला विराजमान को दी जाए। इसका स्वामित्व केंद्र सरकार के रिसीवर के पास रहेगा। 3 महीने के भीतर ट्रस्ट का गठन कर मंदिर निर्माण की योजना बनाई जाए। सुन्नी वक्फ बोर्ड अदालत ने कहा- उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड विवादित जमीन पर अपना दावा साबित करने में विफल रहा। मस्जिद में इबादत में व्यवधान के बावजूद साक्ष्य यह बताते हैं कि प्रार्थना पूरी तरह से कभी बंद नहीं हुई। मुस्लिमों ने ऐसा कोई साक्ष्य पेश नहीं किया, जो यह दर्शाता हो कि वे 1857 से पहले मस्जिद पर पूरा अधिकार रखते थे। बाबरी मस्जिद सुप्रीम कोर्ट ने कहा- "मीर बकी ने बाबरी मस्जिद बनवाई। धर्मशास्त्र में प्रवेश करना अदालत के लिए उचित नहीं होगा। बाबरी मस्जिद खाली जमीन पर नहीं बनाई गई थी। मस्जिद के नीचे जो ढांचा था, वह इस्लामिक ढांचा नहीं था।" बाबरी विध्वंस सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह एकदम स्पष्ट है कि 16वीं शताब्दी का तीन गुंबदों वाला ढांचा हिंदू कारसेवकों ने ढहाया था, जो वहां राम मंदिर बनाना चाहते थे। यह ऐसी गलती थी, जिसे सुधारा जाना चाहिए था। नई मस्जिद सुप्रीम कोर्ट ने कहा- अदालत अगर उन मुस्लिमों के दावे को नजरंदाज कर देती है, जिन्हें मस्जिद के ढांचे से पृथक कर दिया गया तो न्याय की जीत नहीं होगी। इसे कानून के हिसाब से चलने के लिए प्रतिबद्ध धर्मनिरपेक्ष देश में लागू नहीं किया जा सकता। गलती को सुधारने के लिए केंद्र पवित्र अयोध्या की अहम जगह पर मस्जिद के निर्माण के लिए 5 एकड़ जमीन दे। धर्म और आस्था सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "अदालत को धर्म और श्रद्धालुओं की आस्था को स्वीकार करना चाहिए। अदालत को संतुलन बनाए रखना चाहिए। हिंदू इस स्थान को भगवान राम का जन्मस्थान मानते हैं। मुस्लिम भी विवादित जगह के बारे में यही कहते हैं। प्राचीन यात्रियों द्वारा लिखी किताबें और प्राचीन ग्रंथ दर्शाते हैं कि अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि रही है। ऐतिहासिक उद्धहरणों से संकेत मिलते हैं कि हिंदुओं की आस्था में अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि रही है।" ए.एस.आई. की रिपोर्ट कहा, "मस्जिद के नीचे जो ढांचा था, वह इस्लामिक ढांचा नहीं था। ढहाए गए ढांचे के नीचे एक मंदिर था, इस तथ्य की पुष्टि आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) कर चुका है। पुरातात्विक प्रमाणों को महज एक ओपिनियन करार दे देना ए.एस.आई. का अपमान होगा। हालांकि, एएसआई ने यह तथ्य स्थापित नहीं किया कि मंदिर को गिराकर मस्जिद बनाई गई।' निर्णय के संकेतक सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "सीता रसोई, राम चबूतरा और भंडार गृह की मौजूदगी इस स्थान की धार्मिक वास्तविकता के सबूत हैं। हालांकि, आस्था और विश्वास के आधार पर मालिकाना हक तय नहीं किया जा सकता है। यह केवल विवाद के निपटारे के संकेतक।" सुप्रीम कोर्ट का निर्णय 2019 अयोध्या विवाद पर उच्चतम न्यायालय का निर्णय अयोध्या विवाद जो कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित था, उसका निर्णय पाँच जजों की मुख्य न्यायाधीश रजंन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच द्वारा ९ नवंबर २०१९ को दिया गया।https://www.bhaskar.com/national/news/ayodhya-ram-mandir-sc-verdict-faisla-live-updates-ram-janmabhoomi-babri-land-dispute-01682585.html सुप्रीम कोर्ट का फैसला- विवादित जमीन पर राम मंदिर बने, मुस्लिमों को मस्जिद के लिए जमीन मिले rohitashwa.mishra 2019-11-10 Dainik Bhaskar hi 2019-11-09 https://web.archive.org/web/20191109152338/https://www.bhaskar.com/national/news/ayodhya-ram-mandir-sc-verdict-faisla-live-updates-ram-janmabhoomi-babri-land-dispute-01682585.html 9 नवंबर 2019 live इसके अन्तर्गत उच्च न्यायालय के फैसले को पलटते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने शिया वक्फ बोर्ड, और निर्मोही अखाड़ा की याचिका को खारिज कर दिया, एवं सून्नी वक्फ बोर्ड को वाद लगाने का अधिकारी नहीं माना गया। तत्पश्चात सर्वोच्च न्यायालय की बेंच ने 5-0 से एकमत होकर विवादित स्थल को मंदिर का स्थल मानते हुए, फैसला रामलला के पक्ष में सुनाया। इसके अंतर्गत विवादित भूमि को राम जन्मभूमि माना गया और मस्जिद के लिये अयोध्या में 5 एकड़ ज़मीन देने का आदेश सरकार को दिया। अब वहां पर भव्य श्री राम मंदिर निर्माण होगा इन्हें भी देखें राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद शाहबानो प्रकरण लिब्रहान आयोग Sandarbha 2 बाहरी कड़ियाँ श्रेणी:अयोध्या श्रेणी:अयोध्या विवाद