Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

फारूक़ी राजवंश

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

अंगूठाकार|280x280पिक्सेल| मध्य प्रदेश में बुरहानपुर जिले में असीरगढ़ (असीर) किला (पूर्व में फारूकी शासकों के अधीन खानदेश क्षेत्र का हिस्सा), भारत फारूकी राजवंश या खानदेश सल्तनत: जिसे फारूक शाही राजवंश के नाम से भी जाना जाता है, खानदेश सल्तनत (खानदेश क्षेत्र के नाम पर) का एक शासक अरब राजवंश था https://www.google.nl/books/edition/The_Imperial_Gazetteer_of_India/VtQMAAAAIAAJ?hl=nl&gbpv=1&dq=khandesh+arab&pg=PA152&printsec=frontcover The Imperial Gazetteer of India Hunter William Wilson 1886 Trübner & Company 152 en And from 1370 to 1600 the Arab dynasty of the Farukhis https://www.google.nl/books/edition/A_History_of_Modern_India_1480_1950/uzOmy2y0Zh4C?hl=nl&gbpv=1&dq=khandesh+arab+ancestry&pg=PA26&printsec=frontcover A History of Modern India, 1480-1950 Markovits Claude 2004-02-01 Anthem Press 978-1-84331-004-4 26 en Arab dynasties in Khandesh जो 1382 में इसकी स्थापना से लेकर 1601 में मुगल सम्राट अकबर द्वारा इसके विलय तक चला। इस राजवंश के संस्थापक मलिक अहमद (जिन्हें मलिक राजा के नाम से भी जाना जाता है) ने अपने प्रारंभिक वर्षों में बहमनी शासक मुहम्मद शाह प्रथम के खिलाफ विद्रोह में भाग लिया था। जब उन्हें दक्कन से भागने के लिए विवश होना पड़ा तो उन्होंने ताप्ती नदी के किनारे स्थित थालनेर (वर्तमान महाराष्ट्र के धुले जिले में) में अपना निवास स्थान बनाया। थलनेर और करांडा (वर्तमान कारवंद) की जागीरों का अनुदान प्राप्त करने के बाद1370 में फ़िरोज़ शाह तुगलक से थालनेर के उत्तर में किमी) क्षेत्र पर विजय प्राप्त की जिसे बाद में खानदेश (खानों की भूमि) के नाम से जाना गया। http://www.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/JALGAON/his_muslim.html Jalgaon district gazetteer – history, Muslim period https://web.archive.org/web/20070830182505/http://www.maharashtra.gov.in/english/gazetteer/JALGAON/his_muslim.html 2007-08-30 1382 तक उन्होंने स्वतंत्र रूप से शासन करना शुरू कर दिया था। मलिक राजा ने द्वितीय खलीफा उमर-अल-फारूक से अपनी वंशावली का दावा किया। अतः, उनके द्वारा स्थापित राजवंश को फारूकी राजवंश के नाम से जाना जाता था। इसके बाद शासक नासिर खान ने असीरगढ़ किले पर विजय प्राप्त की और उसे अपनी राजधानी बनाया। उन्होंने 1399 में बुरहानपुर को नई राजधानी के रूप में स्थापित किया। फारूकी वंश के सबसे प्रख्यात शासक आदिल खान द्वितीय को माना जाता है। उनके लंबे शासनकाल के दौरान बुरहानपुर व्यापार और वस्त्र उत्पादन के एक प्रमुख केंद्र में परिवर्तित हो गया। 1599 में अकबर की सेना ने बुरहानपुर पर कब्जा कर लिया और 17 जनवरी, 1601 को लंबी घेराबंदी के बाद असीरगढ़ का किला भी गिर गया। अंतिम शासक बहादुर शाह ने मुगलों के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। खानदेश मुगल सूबा बन गया। खानदेश सल्तनत के शासक अहमद खान फ़ारूकी (1382 - 1399) नासिर शाह फ़ारूकी (1399 - 1437) मीरान आदिल खान प्रथम (1437 -1441) मीरान मुबारक खान प्रथम (1441 -1457) मीरान आदिल खान द्वितीय (1457 -1501) दाऊद खान (1501 -1508) ग़ज़नी खान (1508) आलम खान (1508 -1509) मीरान आदिल खान तृतीय (1509 -1520) मीरान मुहम्मद शाह प्रथम (1520 -1535) मीरान मुबारक खान द्वितीय (1537 -1566) मीरान मुहम्मद शाह द्वितीय (1566 -1576) हसन खान (1576) राजा अली खान (1576 -1597) बहादुर खान (1597 -1601) यह भी देखें फारूकी तैमूरी राजवंश भारत के राजवंशों और सम्राटों की सूची संदर्भ The Delhi Sultanate 2006 Majumdar R.C. Bharatiya Vidya Bhavan, Mumbai. Shyam Radhey The Kingdom of Khandesh 1981 Idarah-i-Adabiyat-i-Delli, Delhi. श्रेणी:महाराष्ट्र का इतिहास श्रेणी:भारत के राजवंश श्रेणी:राजवंश श्रेणी:भारत का इतिहास