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411 समाचार
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लद्दाख़

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{{Infobox settlement | name = लद्दाख़ | official_name = | native_name = Ladakh | native_name_lang = | other_name = | settlement_type = केन्द्र-शासित प्रदेश | image_s = | nickname = | image_map = IN-LA.svg | map_caption                     = भारत में लद्दाख | map_alt = | pushpin_map = | pushpin_label_position = | pushpin_map_alt = | pushpin_map_caption = | coordinates = 34 10 12 N 77 34 48 E | image = J,K and L - Indian Union Territories.jpg | subdivision_type = देश | subdivision_name = भारत | subdivision_type1 = | subdivision_type2 = | subdivision_name1 = | subdivision_name2 = | established_title = केन्द्र-शासित प्रदेश | established_date = 31 अक्तूबर 2019http://egazette.nic.in/WriteReadData/2019/210412.pdf संग्रहीत प्रति 31 अक्तूबर 2019 https://web.archive.org/web/20190809153916/http://egazette.nic.in/WriteReadData/2019/210412.pdf 9 अगस्त 2019 dead | seat_type = राजधानी | seat = लेहhttps://kashmirobserver.net/2019/10/17/ladakh-gets-civil-secretariat/ संग्रहीत प्रति 31 अक्तूबर 2019 https://web.archive.org/web/20191019123828/https://kashmirobserver.net/2019/10/17/ladakh-gets-civil-secretariat/ 19 अक्तूबर 2019 dead करगिल | parts_type = ज़िले | parts_style = para | p1 = 7 | founder = | named_for = | government_type = | governing_body = लद्दाख प्रशासन उपराज्यपाल -बी डी मिश्रा | leader_title = उपराज्यपाल|leader_name ब्रिगेडियर (रिटायर्ड)बी डी मिश्रा] | leader_title1 = सांसद | leader_name1 = मोहम्मद हनीफ़ा | leader_title2 = उच्च न्यायालय | leader_name2 = जम्मू और कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय | unit_pref = Metric | area_footnotes = http://mha.nic.in/uniquepage.asp?Id_Pk=306 MHA.nic.in MHA.nic.in 21 June 2012 dead https://web.archive.org/web/20081208212815/http://mha.nic.in/uniquepage.asp?Id_Pk=306 8 December 2008 Ladakh has 59146 km2 of area controlled by India and 72971 km2 of area controlled by Pakistan under Gilgit-Baltistan, which is claimed by India as part of Ladakh. Additionally, it has 5180 km2 of area controlled by the People's Republic of China under Trans-Karakoram Tract and 37555 km2 of area controlled by the People's Republic of China under Aksai Chin, which is claimed by India as part of Ladakh. | area_rank = | area_total_km2 = 59146 | elevation_footnotes = | elevation_m = | elevation_max_footnotes = | elevation_max_m = 7,742 | elevation_max_ft = | elevation_max_point = साल्तोरो कांगरीhttps://www.peakbagger.com/peak.aspx?pid=10533 Saltoro Kangri, India/Pakistan peakbagger.com 2019-08-09 dmy-all https://web.archive.org/web/20190509201854/https://www.peakbagger.com/peak.aspx?pid=10533 9 मई 2019 dead | elevation_max_rank = | elevation_min_footnotes = | elevation_min_m = 2550 | elevation_min_ft = | elevation_min_point = सिन्धु नदी | elevation_min_rank = | population_total = 274289 | population_as_of = 2011 | population_rank = | population_density_km2 = auto | population_demonym = लद्दाख़ी | population_footnotes = | demographics_type1 = भाषाएँ | demographics1_title1 = आधिकारिक | demographics1_info1 = हिन्दी, लद्दाख़ी, तिब्बती | timezone1 = भामस | utc_offset1 = +5:30 | postal_code_type = | postal_code = लेह: 194101; कर्गिल: 194103 | registration_plate = LA | blank1_name_sec1 = मुख्य नगर | blank1_info_sec1 = लेह, कर्गिल | blank3_name_sec1 = | blank3_info_sec1 = | website = https://ladakh.nic.in/ | footnotes = | leader_name = बी॰डी॰ मिश्रा | leader_title3 = स्वायत्त पर्वतीय विकास परिषद | leader_name3 = LAHDC LehLAHDC Kargil | image_skyline = Road Padum Zanskar Range Jun24 A7CR 00818.jpg }} लद्दाख़ (अंग्रेज़ी: Ladakh) भारत का एक केन्द्र शासित प्रदेश है, जो उत्तर में काराकोरम पर्वत और दक्षिण में हिमालय पर्वत के बीच में स्थित है। यह भारत के सबसे विरल जनसंख्या वाले भागों में से एक है। भारत गिलगित बलतिस्तान और अक्साई चिन को भी इसका भाग मानता है, जो वर्तमान में क्रमशः पाकिस्तान और चीन के अवैध कब्जे में है। यह पूर्व में तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र, दक्षिण में भारतीय राज्य हिमाचल प्रदेश, पश्चिम में जम्मू और कश्मीर केन्द्र शासित प्रदेश और पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बल्तिस्तान से घिरा है। सुदूर उत्तर में क़ाराक़ोरम दर्रा पर शिंजियांग। यह काराकोरम रेंज में सियाचिन ग्लेशियर से लेकर उत्तर में दक्षिण में मुख्य महान हिमालय तक फैला हुआ है।Jina, Ladakh 1996 http://news.bbc.co.uk/1/hi/in_depth/south_asia/2002/kashmir_flashpoint/default.stm In Depth – Kashmir Flashpoint http://news.bbc.co.uk/2/shared/spl/hi/south_asia/03/kashmir_future/html/default.stm Kashmir options. Maps showing the options and pitfalls of possible solutions. The Future of Kashmir? बीबीसी न्यूज़ 19 May 2011 16 April 2013 पूर्वी छोर, जिसमें निर्जन अक्साई चिन मैदान शामिल हैं, भारत सरकार द्वारा लद्दाख के हिस्से के रूप में दावा किया जाता है, और 1962 से चीनी नियन्त्रण में है।Fantasy frontiers https://www.economist.com/blogs/dailychart/2011/05/indian_pakistani_and_chinese_border_disputes 24 September 2014 The Economist 8 February 2012http://www.globalsecurity.org/military/world/war/india-china_conflicts.htm India-China Border Dispute GlobalSecurity.orghttps://www.businesstoday.in/current/economy-politics/jammu-and-kashmir-crisis-live-updates-governor-reviews-security-situation-in-state/story/370856.html Article 370 revoked Updates: Jammu & Kashmir is now a Union Territory, Lok Sabha passes bifurcation bill Business Today (India) 6 August 2019 27 July 2020 अगस्त 2019 में, भारत की संसद ने जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 पारित किया जिसके द्वारा 31 अक्टूबर 2019 को लद्दाख एक केन्द्र शासित प्रदेश बन गया। लद्दाख क्षेत्रफल में भारत का सबसे बड़ा केन्द्र शासित प्रदेश है। लद्दाख केन्द्र शासित प्रदेश में 7 जिले बनाये गये हैं।लेह, जांस्कर, नुब्रा,शाम, चांगथांग, द्रास और कारगिल। केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख के अन्तर्गत पाक अधिकृत गिलगित बलतिस्तान ,चीन अधिकृत अक्साई चिन और शक्सगम घाटी का क्षेत्र भी शामिल है । सन 1963 में पाकिस्तान द्वारा 5180 वर्ग किलोमीटर का शक्सगम घाटी क्षेत्र चीन को उपहार में दिया गया ,जो लद्दाख का हिस्सा है । इसके उत्तर में चीन तथा पूर्व में तिब्बत की सीमाएँ हैं। सीमावर्ती स्थिति के कारण सामरिक दृष्टि से इसका बड़ा महत्व है। लद्दाख, उत्तर-पश्चिमी हिमालय के पर्वतीय क्रम में आता है, जहाँ का अधिकांश धरातल कृषि योग्य नहीं है। यहाँ की जलवायु अत्यन्त शुष्क एवं कठोर है। वार्षिक वृष्टि 3.2 इंच तथा वार्षिक औसत ताप 5 डिग्री सें. है। नदियाँ दिन में कुछ ही समय प्रवाहित हो पाती हैं, शेष समय में बर्फ जम जाती है। सिंधु मुख्य नदी है। केन्द्र शासित प्रदेश लद्दाख की राजधानी एवं प्रमुख नगर लेह है, जिसके उत्तर में कराकोरम पर्वत तथा दर्रा है। अधिकांश जनसंख्या घुमक्कड़ है, जिसकी प्रकृति, संस्कार एवं रहन-सहन तिब्बत से प्रभावित है। पूर्वी भाग में अधिकांश लोग बौद्ध हैं तथा पश्चिमी भाग में अधिकांश लोग मुसलमान हैं। बौद्धों का सबसे बड़ा धार्मिक संस्थान है। जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के पारित होने के बाद 31 अक्टूबर 2019 को लद्दाख को भारत के केंद्र शासित प्रदेश के रूप में स्थापित किया गया। इससे पहले, यह जम्मू और कश्मीर राज्य का हिस्सा था। लद्दाख भारत का सबसे बड़ा और दूसरा सबसे कम आबादी वाला केंद्र शासित प्रदेश है।2022-10-04 OECD/G20 Inclusive Framework on BEPS: Progress Report September 2021-September 2022 https://doi.org/10.1787/be3a31f1-en 10.1787/be3a31f1-en Rangdum village grazing fields.jpg Likir Monastery. 2010.jpg Karakoram-West Tibetan Plateau alpine steppe.jpg Leisure Leh Ladakh.jpg #000000 0 2 320 ऊपर से दक्षिणावर्त: रंगदुम ग्राम, त्सो मोरीरी, लेह और लिकिर मठ इतिहास लद्दाख का इतिहासthumb|left|ए. एच. फ्रेंक, 1907 द्वारा वर्णित पश्चिमी तिब्बत का इतिहास के अनुसार न्यिमागॉन (975 ई. -1000 ई.) के शासनकाल में लद्दाख का विस्तार thumb|left| 1560 से 1600 ई. के लगभग राजा सेवांग रनाम रग्याल 1 और राजा जामयांग रनाम रग्याल का साम्राज्य thumb|फ्यांग गोम्पा, लद्दाख, नेपाल thumb|हेमिस मठ, सन 1870 में लद्दाख में कई स्थानों पर मिले शिलालेखों से पता चलता है कि यह स्थान नव-पाषाणकाल से स्थापित है। लद्दाख के प्राचीन निवासी मोन और दार्द लोगों का वर्णन हेरोडोट्स, नोर्चुस, मेगस्थनीज, प्लीनी, टॉलमी और नेपाली पुराणों ने भी किया है। पहली शताब्दी के आसपास लद्दाख कुषाण राज्य का हिस्सा था। बौद्ध धर्म दूसरी शताब्दी में कश्मीर से लद्दाख में फैला। उस समय पूर्वी लद्दाख और पश्चिमी तिब्बत में परम्परागत बोन धर्म था। सातवीं शताब्दी में बौद्ध यात्री ह्वेनसांग ने भी इस क्षेत्र का वर्णन किया है। आठवीं शताब्दी में लद्दाख पूर्व से तिब्बती प्रभाव और मध्य एशिया से चीनी प्रभाव के टकराव का केन्द्र बन गया। इस प्रकार इसका आधिपत्य बारी-बारी से चीन और तिब्बत के हाथों में आता रहा। सन 842 में एक तिब्बती शाही प्रतिनिधि न्यिमागोन ने तिब्बती साम्राज्य के विघटन के बाद लद्दाख को कब्जे में कर लिया और पृथक लद्दाखी राजवंश की स्थापना की। इस दौरान लद्दाख में मुख्यतः तिब्बती जनसंख्या का आगमन हुआ। राजवंश ने उत्तर-पश्चिम भारत खासकर कश्मीर से धार्मिक विचारों और बौद्ध धर्म का खूब प्रचार किया। इसके अलावा तिब्बत से आये लोगों ने भी बौद्ध धर्म को फैलाया। और पश्चिम में तिब्बतियों का सामना एक विदेशी राज्य शुंग शांग से हुआ जिसकी राजधानी क्युंगलुंग थी। कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील इस राज्य के भाग थे। इसकी भाषा हमें प्रारम्भिक आलेखों से पता चलती है। यह अभी भी अज्ञात है, लेकिन यह इण्डो-यूरोपियन लगती है। ... भौगोलिक रूप से यह राज्य भ्रत व कश्मीर दोनों के रास्ते नेपाल से मिलता है। कैलाश नेपालीयों के लिये पवित्र स्थान है। वे यहां की तीर्थयात्रा पर आते हैं। कोई नहीं जानता कि वे ऐसा कब से कर रहे हैं, लेकिन वे तब से पहले से आते हैं जब शांगशुंग तिब्बत से आजाद था। शांगशुंग कितने समय तक उत्तर, पूर्व और पश्चिम से अलग रहा, यह नहीं मालूम।... हमारे पास यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि पवित्र कैलाश पर्वत के कारण यहां हिन्दू धर्म से मिलता-जुलता धर्म रहा होगा। सन 950 में, काबुल के हिन्दू राजा के पास विष्णु जी की तीन सिर वाली एक मूर्ति थी जिसे उसने भोट राजा से प्राप्त हुई बताया था। 17वीं शताब्दी में लद्दाख का एक कालक्रम बनाया गया, जिसका नाम ला ड्वाग्स रग्याल राब्स था। इसका अर्थ होता है लद्दाखी राजाओं का शाही कालक्रम। इसमें लिखा है कि इसकी सीमाएं परम्परागत और प्रसिद्ध हैं। कालक्रम का प्रथम भाग 1610 से 1640 के मध्य लिखा गया और दूसरा भाग 17वीं शताब्दी के अन्त में। इसे ए. एच. फ्रैंक ने अंग्रेजी में अनुवादित किया और “नेपाली प्राचीन तिब्बत” के नाम से 1926 में कलकत्ता में प्रकाशित कराया। इसके दूसरे खण्ड में लिखा है कि राजा साइकिड-इडा-नगीमा-गोन ने राज्य को अपने तीन पुत्रों में विभक्त कर दिया और पुत्रों ने राज्य की सीमाओं को सुरक्षित रखा। पुस्तक के अवलोकन से पता चलता है कि रुडोख लद्दाख का अभिन्न भाग था। परिवार के विभाजन के बाद भी रुडोख लद्दाख का हिस्सा बना रहा। इसमें मार्युल का अर्थ है निचली धरती, जो उस समय लद्दाख का ही हिस्सा थी। दसवीं शताब्दी में भी रुडोख और देमचोक दोनों लद्दाख के हिस्से थे। 13वीं शताब्दी में जब दक्षिण एशिया में इस्लामी प्रभाव बढ रहा था, तो लद्दाख ने धार्मिक मामलों में तिब्बत से मार्गदर्शन लिया। लगभग दो शताब्दियों बाद सन 1600 तक ऐसा ही रहा। उसके बाद पड़ोसी मुस्लिम राज्यों के हमलों से यहां आंशिक धर्मान्तरण हुआ। thumb|ठिक्से मठ, लद्दाख राजा ल्हाचेन भगान ने लद्दाख को पुनर्संगठित और शक्तिशाली बनाया व नामग्याल वंश की नींव डाली जो वंश आज तक जीवित है। नामग्याल राजाओं ने अधिकतर मध्य एशियाई हमलावरों को खदेडा और अपने राज्य को कुछ समय के लिये नेपाल तक भी बढा लिया। हमलावरों ने क्षेत्र को धर्मान्तरित करने की खूब कोशिश की और बौद्ध कलाकृतियों को तोडा फोडा। सत्रहवीं शताब्दी के आरम्भ में कलाकृतियों का पुनर्निर्माण हुआ और राज्य को जांस्कर व स्पीति में फैलाया। फिर भी, मुगलों के हाथों हारने के बावजूद भी लद्दाख ने अपनी स्वतन्त्रता बरकरार रखी। मुगल पहले ही कश्मीर व बाल्टिस्तान पर कब्जा कर चुके थे। सन 1594 में बाल्टी राजा अली शेर खां अंचन के नेतृत्व में बाल्टिस्तान ने नामग्याल वंश वाले लद्दाख को हराया। कहा जाता है कि बाल्टी सेना सफलता से पागल होकर पुरांग तक जा पहुंची थी जो मानसरोवर झील की घाटी में स्थित है। लद्दाख के राजा ने शान्ति के लिये विनती की और चूंकि अली शेर खां की इच्छा लद्दाख पर कब्जा करने की नहीं थी, इसलिये उसने शर्त रखी कि गनोख और गगरा नाला गांव स्कार्दू को सौंप दिये जायें और लद्दाखी राजा हर साल कुछ धनराशि भी भेंट करे। यह राशि लामायुरू के गोम्पा तब तक दी जाती रही जब तक कि डोगराओं ने उस पर अधिकार नहीं कर लिया। सत्रहवीं शताब्दी के आखिर में लद्दाख ने किसी कारण से तिब्बत की लडाई में भूटान का पक्ष लिया। नतीजा यह हुआ कि तिब्बत ने लद्दाख पर भी आक्रमण कर दिया। यह घटना 1679-1684 का तिब्बत-लद्दाख-मुगल युद्ध कही जाती है। तब कश्मीर ने इस शर्त पर लद्दाख का साथ दिया कि लेह में एक मस्जिद बनाई जाये और लद्दाखी राजा इस्लाम कुबूल कर ले। 1684 में तिंगमोसगंज की सन्धि हुई जिससे तिब्बत और लद्दाख का युद्ध समाप्त हो गया। 1834 में डोगरा राजा गुलाब सिंह के जनरल जोरावर सिंह ने लद्दाख पर आक्रमण किया और उसे जीत लिया। 1842 में एक विद्रोह हुआ जिसे कुचल दिया गया तथा लद्दाख को जम्मू कश्मीर के डोगरा राज्य में विलीन कर लिया गया। नामग्याल परिवार को स्टोक की नाममात्र की जागीर दे दी गई। 1850 के दशक में लद्दाख में यूरोपीय प्रभाव बढा और फिर बढता ही गया। भूगोलवेत्ता, खोजी और पर्यटक लद्दाख आने शुरू हो गये। 1885 में लेह मोरावियन चर्च के एक मिशन का मुख्यालय बन गया। 1947 में भारत विभाजन के समय डोगरा राजा हरिसिंह ने जम्मू कश्मीर को भारत में विलय की मंजूरी दे दी। पाकिस्तानी घुसपैठी लद्दाख पहुंचे और उन्हें भगाने के लिये सैनिक अभियान चलाना पडा। युद्ध के समय सेना ने सोनमर्ग से जोजीला दर्री पर टैंकों की सहायता से कब्जा किये रखा। सेना आगे बढी और द्रास, कारगिल व लद्दाख को घुसपैठियों से आजाद करा लिया गया। 1949 में चीन ने नुब्रा घाटी और जिनजिआंग के बीच प्राचीन व्यापार मार्ग को बन्द कर दिया। 1955 में चीन ने जिनजिआंग व तिब्बत को जोदने के लिये इस इलाके में सडक बनानी शुरू की। उसने पाकिस्तान से जुडने के लिये कराकोरम हाईवे भी बनाया। भारत ने भी इसी दौरान श्रीनगर-लेह सडक बनाई जिससे श्रीनगर और लेह के बीच की दूरी सोलह दिनों से घटकर दो दिन रह गई। हालांकि यह सडक जाडों में भारी हिमपात के कारण बन्द रहती है। जोजीला दर्रे के आरपार 6.5 किलोमीटर लम्बी एक सुरंग का प्रस्ताव है जिससे यह मार्ग जाडों में भी खुला रहेगा। पूरा जम्मू कश्मीर राज्य भारत, पाकिस्तान और चीन के बीच युद्ध का मुद्दा रहता है। कारगिल में भारत-पाकिस्तान के बीच 1947, 1965 और 1971 में युद्ध हुए और 1999 में तो यहां परमाणु युद्ध तक का खतरा हो गया था। 1999 में जो कारगिल युद्ध हुआ उसे भारतीय सेना ने ऑपरेशन विजय का नाम दिया गया। इसकी वजह पश्चिमी लद्दाख मुख्यतः कारगिल, द्रास, मश्कोह घाटी, बटालिक और चोरबाटला में पाकिस्तानी सेना की घुसपैठ थी। इससे श्रीनगर-लेह मार्ग की सारी गतिविधियां उनके नियन्त्रण में हो गईं। भारतीय सेना ने आर्टिलरी और वायुसेना के सहयोग से पाकिस्तानी सेना को लाइन ऑफ कण्ट्रोल के उस तरफ खदेडने के लिये व्यापक अभियान चलाया। right|thumb|ज़ोजिला दर्रा ‎. 1984 से लद्दाख के उत्तर-पूर्व सिरे पर स्थित सियाचिन ग्लेशियर भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद की एक और वजह बन गया। यह विश्व का सबसे ऊंचा युद्धक्षेत्र है। यहां 1972 में हुए शिमला समझौते में पॉइण्ट 9842 से आगे सीमा निर्धारित नहीं की गई थी। यहां दोनों देशों में साल्टोरो रिज पर कब्जा करने की होड रहती है। कुछ सामरिक महत्व के स्थानों पर दोनों देशों ने नियन्त्रण कर रखा है, फिर भी भारत इस मामले में फायदे में है। 1979 में लद्दाख को कारगिल व लेह जिलों में बांटा गया। 1989 में बौद्धों और मुसलमानों के बीच दंगे हुए। 1990 के ही दशक में लद्दाख को कश्मीरी शासन से छुटकारे के लिये लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेण्ट काउंसिल का गठन हुआ और अंततः ५ अगस्त २०१९ को यह भारत का नौवाँ केन्द्र शासित प्रदेश बन गया। NOTE:'तिबतन सिविलाइजेशन'' के लेखक रोल्फ अल्फ्रेड स्टेन के अनुसार शांग शुंग का इलाका ऐतिहासिकि रूप से तिब्बत का भाग नहीं था। यह तिब्बतियों के लिये विदेशी भूमि था। उनके अनुसार: भूगोल लद्दाख का भूगोल thumb|लद्दाख क्षेत्र उच्च पर्वतीय है। thumb||मध्य लद्दाख का मानचित्र thumb|right|लद्दाख का भू-दृश्य लद्दाख जम्मू कश्मीर राज्य के पूर्व में स्थित एक ऊंचा पठार है जिसका अधिकतर हिस्सा 3000 मीटर (9800 फीट) से ऊंचा है।Rizvi Janet 1996 Ladakh — Crossroads of High Asia ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस यह हिमालय और कराकोरम पर्वत श्रृंखला और सिन्धु नदी की ऊपरी घाटी में फैला है। इसमें बाल्टिस्तान (वर्तमान में पाकिस्तान अधिकृत लद्दाख अर्थात् गिलगित बाल्टिस्तान), सिन्धु घाटी, जांस्कर, दक्षिण में लाहौल और स्पीति, पूर्व में रुडोक व गुले, अक्साईचिन और उत्तर में खारदुंगला के पार नुब्रा घाटी शामिल हैं। लद्दाख की सीमाएं पूर्व में तिब्बत से, दक्षिण में लाहौल और स्पीति से, पश्चिम में जम्मू कश्मीर व बाल्टिस्तान से और सुदूर उत्तर में कराकोरम दर्रे के उस तरफ जिनजियांग के ट्रांस कुनलुन क्षेत्र से मिलती हैं। विभाजन से पहले बाल्टिस्तान (अब पाकिस्तानी नियन्त्रण में) लद्दाख का एक जिला था। स्कार्दू लद्दाख की शीतकालीन राजधानी और लेह ग्रीष्मकालीन राजधानी हुआ करती थी। इस क्षेत्र में 45 मिलियन वर्ष पहले भारतीय प्लेट और यूरेशियन प्लेट के दबाव से पर्वतों का निर्माण हुआ। दबाव बढता गया और इस क्षेत्र में इससे भूकम्प भी आते रहे। जोजीला के पास पर्वत चोटियां 5000 मीटर से शुरू होकर दक्षिण-पूर्व की तरफ ऊंची होती जाती हैं और नुनकुन तक इनकी ऊंचाई 7000 मीटर तक पहुंच गई है। सुरु और जांस्कर घाटी शानदार द्रोणिका का निर्माण करती हैं। सूरू घाटी में रांगडम सबसे ऊंचा आवासीय स्थान है। इसके बाद पेंसी-ला तक यह उठती ही चली जाती है। पेंसी-ला जांस्कर का प्रवेश द्वार है। कारगिल जोकि सुरू घाटी का एकमात्र शहर है, लद्दाख का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण स्थान है। यह 1947 से पहले कारवां व्यापार का मुख्य स्थान था। यहां से श्रीनगर, पेह, पदुम और स्कार्दू लगभग बराबर दूरी पर स्थित हैं। इस पूरे क्षेत्र में भारी बर्फबारी होती है। पेंसी-ला केवल जून से मध्य अक्टूबर तक ही खुला रहता है। द्रास और मश्कोह घाटी लद्दाख का पश्चिमी सिरा बनाते हैं। सिन्धु नदी लद्दाख की जीवनरेखा है। ज्यादातर ऐतिहासिक और वर्तमान स्थान जैसे कि लेह, शे, बासगो, तिंगमोसगंग सिन्धु किनारे ही बसे हैं। 1947 के भारत-पाक युद्ध के बाद सिन्धु का मात्र यही हिस्सा लद्दाख से बहता है। सिन्धु हिन्दू धर्म में एक पूजनीय नदी है, जो केवल लद्दाख में ही बहती है। सियाचिन ग्लेशियर पूर्वी कराकोरम रेंज में स्थित है जो भारत पाकिस्तान की विवादित सीमा बनाता है। कराकोरम रेंज भारतीय महाद्वीप और चीन के मध्य एक शानदार जलविभाजक बनाती है। इसे तीसरा ध्रुव भी कहा जाता है। 70 किलोमीटर लम्बा यह ग्लेशियर कराकोरम में सबसे लम्बा है और धरती पर ध्रुवों को छोडकर दूसरा सबसे लम्बा ग्लेशियर है। यह अपने मुख पर 3620 मीटर से लेकर चीन सीमा पर स्थित इन्दिरा पॉइण्ट पर 5753 मीटर ऊंचा है। इसके पास के दर्रे और कुछ ऊंची चोटियां दोनों देशों के कब्जे में हैं। भारत में कराकोरम रेंज की सबसे पूर्व में स्थित सासर कांगडी सबसे ऊंची चोटी है। इसकी ऊंचाई 7672 मीटर है। लद्दाख में 857 वर्ग किमी लंबी सीमा में से केवल 368 वर्ग किमी अंतरराष्ट्रीय सीमा है, और शेष 489 वर्ग किमी वास्तविक नियंत्रण रेखा है।https://indianexpress.com/article/opinion/columns/the-ladakh-warning-india-china-border-dispute-6427131/ As China intrudes across LAC, India must be alert to a larger strategic shift 3 जून 2020 https://web.archive.org/web/20200603091935/https://indianexpress.com/article/opinion/columns/the-ladakh-warning-india-china-border-dispute-6427131/ 3 जून 2020 livehttps://www.tribuneindia.com/news/comment/ladakh-concern-overrides-lac-dispute-90880 Ladakh concern overrides LAC dispute DBO Ladakh India DBO Ladakh Road India thumb|लेह का औसत मासिक तापमान लद्दाख रेंज में कोई प्रमुख चोटी नहीं है। पंगोंग रेंज चुशुल के पास से शुरू होकर पंगोंग झील के साथ साथ करीब 100 किलोमीटर तक लद्दाख रेंज के समानान्तर चलती है। इसमें श्योक नदी और नुब्रा नदी की घाटियां भी शामिल हैं जिसे नुब्रा घाटी कहते हैं। कराकोरम रेंज लद्दाख में उतनी ऊंची नहीं है जितनी बाल्टिस्तान में। कुछ ऊंची चोटियां इस प्रकार हैं- अप्सरासास समूह (सर्वोच्च चोटी 7245 मीटर), रीमो समूह (सर्वोच्च चोटी 7385 मीटर), तेराम कांगडी ग्रुप (सर्वोच्च चोटी 7464 मीटर), ममोस्टोंग कांगडी 7526 मीटर और सिंघी कांगडी 7751 मीटर। कराकोरम के उत्तर में कुनलुन है। इस प्रकार, लेह और मध्य एशिया के बीच में तीन श्रंखलाएं हैं- लद्दाख श्रंखला, कराकोरम और कुनलुन। फिर भी लेह और यारकन्द के बीच एक व्यापार मार्ग स्थापित था। लद्दाख एक उच्च अक्षांसीय मरुस्थल है क्योंकि हिमालय मानसून को रोक देता है। पानी का मुख्य स्रोत सर्दियों में हुई बर्फबारी है। पिछले दिनों आई बाढ (2010 में) के कारण असामान्य बारिश और पिघलते ग्लेशियर हैं जिसके लिये निश्चित ही ग्लोबल वार्मिंग जिम्मेदार है। द्रास, सूरू और जांस्कर में भारी बर्फबारी होती है और ये कई महीनों तक देश के बाकी हिस्सों से कटे रहते हैं। गर्मियां छोटी होती हैं यद्यपि फिर भी कुछ पैदावार हो जाती है। गर्मियां शुष्क और खुशनुमा होती हैं। गर्मियों में तापमान 3 से 35 डिग्री तक तथा सर्दियों में -20 से -35 डिग्री तक पहुंच जाता है। भूभाग का वर्गीकरण जिले का नामज़िला मुख्यालयक्षेत्रफल(किमी²)जनसंख्या 2001 जनगणनाजनसंख्या 2011 जनगणनाकारगिल जिलाकारगिललेह जिलालेहकुल जीव-जन्तु एवं वनस्पतियाँ यह क्षेत्र शुष्क होने के कारण वनस्पति विहीन है। यहां जानवरों के चरने के लिए कहीं-कहीं पर ही घास एवं छोटी-छोटी झाड़ियां मिलती है। घाटी में सरपत,विलो एवं पॉपलर के उपवन देखे जा सकते हैं। ग्रीष्म ऋतु में सेब,खुबानी एवं अखरोट जैसे पेड़ पल्लवित होते हैं। लद्दाख में पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां नजर आती हैं, इनमें रॉबिन, रेड स्टार्ट,तिब्बती स्नोकोक, रेवेन यहां खूब पाए जाने वाले सामान्य पक्षी है। लद्दाख के पशुओं में जंगली बकरी, जंगली भेड़ एवं याक,विशेष प्रकार के कुत्ते,आदि पाले जाते हैं।इन पशुओं को दूध,मांस,खाल प्राप्त करने के लिए पाला जाता है। टीका-टिप्पणी इन्हें भी देखें अक्साई चीन तिब्बत जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक, २०१९ लेह भारत का राजनीतिक एकीकरण सन्दर्भ 2 बाहरी कड़ियाँ लद्दाख की सामाजिक सांस्कृतिक यात्रा सीधे-सादे लोगों की धरती है लद्दाख श्रेणी:भारत के केन्द्र शासित प्रदेश श्रेणी:लद्दाख़