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बर्था वॉन सटनर
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जुलाई 2026 बर्था वॉन सटनर Bertha von Suttner nobel.jpg नोबेल शांति पुरस्कार विजेता बर्था वॉन सटनर 9 जून 1843 प्राग, ऑस्ट्रियाई साम्राज्य 21 जून 1914 वियना, ऑस्ट्रिया-हंगरी ऑस्ट्रियाई शांतिवाद, साहित्य शांति आंदोलन, हथियार डाल दो (उपन्यास) नोबेल शांति पुरस्कार (1905)
बर्था सोफी फेलिसिटास वॉन सटनर (9 जून 1843 – 21 जून 1914) एक अत्यंत प्रख्यात ऑस्ट्रियाई लेखिका, उपन्यासकार और शांतिवादी समाज सुधारक थीं, जिन्हें वैश्विक शांति और युद्ध के विरोध में उनके ऐतिहासिक आंदोलनों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता हैनोबेल पुरस्कार समिति: बर्था वॉन सटनर की जीवनी और तथ्य। वर्ष 1905 में उन्हें वैश्विक शांति के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व और अत्यंत महत्वपूर्ण योगदान के लिए नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वह इस महान और सर्वोच्च सम्मान को प्राप्त करने वाली दुनिया की सबसे पहली महिला थीं और वर्ष 1903 में मैरी क्यूरी के बाद नोबेल जीतने वाली दूसरी महिला बनींएन्साइक्लोपीडिया ब्रिटानिका: बर्था वॉन सटनर का प्रामाणिक जीवन परिचय। इसके अतिरिक्त वह यह पुरस्कार जीतने वाली पहली ऑस्ट्रियाई नागरिक भी थीं। उनका यह अत्यंत महत्वपूर्ण साहित्य और शांति आंदोलन आधुनिक मानव अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय शांति संधियों को स्पष्ट रूप से समझने और स्थापित करने में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर माना जाता है।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
उनका जन्म 9 जून 1843 को ऑस्ट्रियाई साम्राज्य के प्राग नामक एक अत्यंत ऐतिहासिक नगर में एक प्रतिष्ठित कुलीन परिवार में हुआ था। उनके पिता एक ऑस्ट्रियाई सेनापति थे, जिनका निधन उनके जन्म से पूर्व ही 75 वर्ष की आयु में हो गया था और उनकी माता उनसे 45 वर्ष छोटी थींविश्व इतिहास में महिलाएं: उन्नीसवीं सदी की महान सामाजिक कार्यकर्ता। एक कुलीन सैन्य परिवार में जन्म लेने के बावजूद उनका बचपन अत्यंत आर्थिक कठिनाइयों के दौर में बीता था। बचपन से ही उनकी साहित्य, विदेशी भाषाओं और संगीत को समझने में अत्यधिक रुचि थी। उन्होंने घर पर ही अत्यंत उत्कृष्ट शिक्षा प्राप्त की और कई विदेशी भाषाओं (जैसे फ्रांसीसी, इतालवी और अंग्रेजी) में पूरी तरह से महारत हासिल कर ली थी। किशोरावस्था में उन्होंने एक ओपेरा गायिका बनने का भी गहन प्रयास किया था, परंतु मंच के अत्यधिक डर के कारण उन्हें इसमें सफलता प्राप्त नहीं हुईहिस्ट्री चैनल: इतिहास की महान महिलाएं और उनके योगदान।
पुरस्कार और सम्मान
साहित्य और वैश्विक शांति के क्षेत्र में उनके इस ऐतिहासिक और अभूतपूर्व अनुसंधान के लिए उन्हें वर्ष 1905 में नोबेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया। वे केवल एक लेखिका नहीं थीं, बल्कि उन्होंने ऑस्ट्रियाई शांति समाज की भी स्थापना की थी और वे अंतरराष्ट्रीय शांति सम्मेलनों की एक अत्यंत प्रमुख वक्ता थीं। वर्ष 1907 में हेग शांति सम्मेलन में भाग लेने वाली वे एकमात्र महिला थीं। 21 जून 1914 को 71 वर्ष की अत्यंत परिपक्व आयु में ऑस्ट्रिया की राजधानी वियना नगर में कैंसर के कारण उनका शांतिपूर्ण निधन हो गया। उनके निधन के ठीक सात दिन बाद ही प्रथम विश्व युद्ध प्रारंभ हो गया था, जिसकी विनाशकारी चेतावनी वे अपने पूरे जीवन काल में देती रही थीं। उनके सम्मान में आज भी यूरोप की कई सड़कों और सिक्कों पर उनका नाम और चित्र अंकित है।
इन्हें भी देखें
नोबेल शांति पुरस्कार
अल्फ्रेड नोबेल
शांतिवाद
ऑस्ट्रियाई साम्राज्य
मानवाधिकार
साहित्य में नोबेल पुरस्कार
महिला सशक्तिकरण
सन्दर्भ
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