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2022 मोरबी पुल हादसा
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2022 मोरबी पुल हादसा 30 अक्टूबर 2022 को गुजरात के मोरबी नामक शहर के मच्छु नदी में बने पूल टूटने पर हुआ था, जिससे अबतक 141 लोगों की मृत्यु हो गई है। पुल को नगरपालिका को बिना बताए ही तय समय से पूर्व बिना किसी फिटनेस प्रमाण पत्र लिए ही शुरू कर दिया गया था। एक हफ्ते पहले ही मेंटेनेंस के बाद यह आम लोगों के लिए खोला गया था फिर हादसे के वक्त यह पाया गया कि इसमें कई जगह जंग लगे हुए थे।
== परिचय ==
झुलतों पुल (गुजराती: ઝૂલતો પુલ; "झूलता पुल") 230-मीटर-लंबा (750 फीट), 1.25-मीटर-चौड़ा (4.1 फीट) मच्छु नदी पर बना एक पुल था। इसका निर्माण 19वीं सदी के दौरान शुरू हुआ था और 20 फरवरी 1879 को इसे शुरू किया गया था।
इसका स्वामित्व मोरबी नगर पालिका के पास है, जिसने इस पुल के रखरखाव और मरम्मत हेतु कुछ महीने पहले एक निजी ट्रस्ट ओरेवा (अजंता मैनुफेक्चुरिंग प्राइवेट लिमिटेड) को काम दिया था। ओरेवा को इस पुल के रखरखाव और मरम्मत हेतु 15 वर्षों का अनुबंध किया गया था।
इसे मरम्मत के कार्य हेतु लगभग 6 महीने तक बंद रखा गया था। मरम्मत पूर्ण होने के बाद इसे 26 अक्टूबर 2022 को गुजराती नववर्ष के अवसर पर पुनः शुरू किया गया था। इसमें आने के लिए हर वयस्क व्यक्ति को ₹17 और हर बच्चे के लिए ₹12 में टिकट प्रदान किया जाता है, जिसकी वैधता मात्र उसी दिन तक ही होती है। इसके अलावा यदि आप वहाँ से चले जाते हैं तो आपको पुनः आने के लिए दोबारा टिकट खरीदना पड़ेगा।
== हादसा ==
इसके मरम्मत के बाद दोबारा खोले जाने के चार दिन बाद 30 अक्टूबर 2022 की शाम 6:40 बजे यह पुल अचानक से टूट गया। इस घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें दिख रहा है कि कई लोग पुल में थे और कुछ लोग उसे हिलाने की कोशिश कर ही रहे थे कि अचानक से एक ओर का हिस्सा टूट गया और लोग नीचे गिर गए।
इसमें कम से कम 141 लोगों के मृत होने की पुष्टि की गई है और 180 से अधिक लोगों को बचाया जा चुका है।
== जांच ==
गुजरात सरकार द्वारा मामले की जांच हेतु पाँच सदस्यों की कमेटी का गठन किया गया। इस मामले की जांच में आठ लोगों से जांच की गई है और हादसे से जुड़े नौ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है।
इस मामले पर पुलिस द्वारा इसके रखरखाव और मरम्मत करने वाली एजेंसी के ऊपर आईपीसी की धारा 304, 308 और 114 के तहत मामला दर्ज किया गया है। इस हादसे में संसद सदस्य मोहन कुंदरिया की बहन के साथ परिवार के बारह सदस्य शामिल हैं। उनके अनुसार यह घटना पुल पर अत्यधिक भार के कारण हुआ है। द इंडियन एक्स्प्रेस को ओरेवा के प्रवक्ता के अनुसार पुल के मध्य हिस्से में कई लोग उसे हिलाने की कोशिश कर रहे थे।
जांच के बाद इस हादसे की वजह केबल का खराब हालत में होना सामने आया है। यदि पुल को संभालने वाले केबल को मरम्मत के दौरान बदला गया होता तो इस हादसे को टाला जा सकता था। जांच के दौरान एक पत्र भी प्राप्त हुआ है, जिसे ओरेवा कंपनी द्वारा जिला कलेक्टर को जनवरी 2020 में भेजा गया था। इस पत्र में ओरेवा कंपनी ने लिखा था कि जब तक उन्हें इस काम का स्थायी टेंडर नहीं मिलता, तब तक वे सिर्फ इसका अस्थाई मरम्मत ही करेंगे। इसमें यह भी लिखा गया था तब तक ओरेवा फर्म इसके मरम्मत हेतु सामग्री का ऑर्डर भी नहीं देगी। जनवरी 2020 में मिले इस पत्र के बाद मार्च 2020 में ओरेवा के साथ 15 वर्षों का अनुबंध किया गया, जिसकी अवधि 2037 को समाप्त होगी।
नगर पालिका के अधिकारी ने बताया कि ओरेवा ग्रुप ने अनुबंध के शर्तों का उल्लंघन किया है। कंपनी द्वारा किसी भी प्रकार के फिटनेस सर्टिफिकेट हेतु आवेदन नहीं किया गया है और पुल को भी बिना किसी सूचना दिये ही लोगों के लिए खोल दिया गया था।
== प्रतिक्रिया ==
केन्द्र एवं गुजरात सरकार द्वारा मृतक के परिवारों को क्रमशः ₹2 लाख और ₹4 लाख रुपये देने की घोषणा की। घायलों के लिए ₹50,000 की भी घोषणा की गई। राज्य सरकार द्वारा 2 नवम्बर 2022 के दिन राजकीय शोक मनाने की घोषणा की गई। इस दौरान सभी सरकारी कार्यालयों में ध्वज आधा झुका रहा और साथ ही सरकारी समारोह भी रद्द कर दिये गए।
== सन्दर्भ ==