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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

झूलेलाल

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Jhulelal hindu deity.jpg सिंध के इष्ट देव झूलेलाल/ दरिया लाल / उदेरो लाल / लाल साई / जिन्दा पीर / جهوللال sa झूलेलाल नदी/जल वरुण तलवार मछली और घोड़ा झूलेलाल सिन्धी हिन्दुओं के उपास्य देव हैं जिन्हें 'इष्ट देव' कहा जाता है। उनके उपासक उन्हें वरुण (जल देवता) का अवतार मानते हैं। वरुण देव को सागर के देवता, सत्य के रक्षक और दिव्य दृष्टि वाले देवता के रूप में सिंधी समाज भी पूजता है।I Am a Sindhi: The Glorious Sindhi Heritage - The Culture & Folklore of Sind http://www.sterlingpublishers.com/bookinfo.asp?na=9788120738072 Vaswani J.P. 2008 129–135 Sterling Publishers Pvt. Ltd. New Delhi, India 9788120738072 25 अगस्त 2014 https://web.archive.org/web/20120323111217/http://www.sterlingpublishers.com/bookinfo.asp?na=9788120738072 23 मार्च 2012 dead उनका विश्वास है कि जल से सभी सुखों की प्राप्ति होती है और जल ही जीवन है। जल-ज्योति, वरुणावतार, झूलेलाल सिंधियों के ईष्ट देव हैं जिनके बागे दामन फैलाकर सिंधी यही मंगल कामना करते हैं कि सारे विश्व में सुख-शांति, अमन-चैन, कायम रहे और चारों दिशाओं में हरियाली और खुशहाली बने रहे। "चेट्रीचंडु" जिसे झूलेलाल जयंती के नाम से भी जाना जाता है, यह सिंधी नव वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। यह तिथि हिंदू पंचांग पर आधारित है और चैत्र शुक्ल पक्ष के दूसरे दिन मनाई जाती है। (सिंधी भाषा में चैत्र को चेट्र कहते हैं) चेट्रीचंडु साईं उडेरोलाल का जन्मदिन भी है, जिन्हें झूलेलाल के नाम से जाना जाता है जो भगवान विष्णु के वरुणवतार माने जाते हैं। झूलेलाल जी के अवतरण दिवस को सिंधी समाज चेटीचंड के रूप में मनाता है। कुछ विद्वानों के अनुसार सिंध का शासक मिरखशाह अपनी प्रजा पर अत्याचार करने लगा था जिसके कारण सिंधी समाज ने कठिन जप, तप और साधना की। तब सिंधु नदी में से एक बहुत बड़े नर मत्स्य पर बैठे हुए भगवान झूलेलाल प्रकट हुए और कहा मैं 8 दिन बाद जन्म लेकर मिरखशाह के अत्याचारों से प्रजा को मुक्ति दिलाउंगा। चैत्र माह की द्वितीया को एक बालक ने जन्म लिया जिसका नाम उडेरोलाल रखा गया। अपने चमत्कारों के कारण बाद में उन्हें झूलेलाल, लालसांई, के नाम से सिंधी समाज और ख्वाजा खिज्र जिन्दह पीर के नाम से मुसलमान भी पूजने लगे। चेटीचंड के दिन श्रद्धालु बहिराणा साहिब बनाते हैं। शोभा यात्रा में ‘छेज’ (जो कि सिंध में डांडिया की तरह लोकनृत्य होता है) के साथ झूलेलाल की महिमा के गीत गाते हैं। ताहिरी (मीठे चावल), छोले (उबलेनमकीन चने) और शरबत का प्रसाद बांटा जाता है। शाम को बहिराणा साहिब का विसर्जन कर दिया जाता है।Cosmopolitan Connections:The Sindhi Diaspora, 1860-2000 (International Comparative Social Studies, Vol. 9) Falzon Mark-Anthony 2004 59 Brill Academic Publishers 9789004140080Mark-Anthony Falzon Cosmopolitan Connections: The Sindhi Diaspora, 1860-2000 http://books.google.com/books?id=ljbS-I5Y8WMC 1 फ़रवरी 2014 9 2004 Brill Academic Publishers 90-04-14008-5 59 https://web.archive.org/web/20140627084741/http://books.google.com/books?id=ljbS-I5Y8WMC 27 जून 2014 liveBoivin Michel 15 Oct 2008 76 Sindh through History and Representations: French Contributions to Sindhi Studies Oxford University Press 9780195475036 1 फ़रवरी 2014 सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ मानव उत्थान के लिए जन्में थे झूलेलाल चेटीचण्ड: सिन्धियों का सबसे बड़ा त्योहारजून 2020 InternetArchiveBot All About Sindhis Jhule Lal बाबा झूलेलाल की आरतीजून 2020 InternetArchiveBot श्रेणी:क्षेत्रीय हिंदू देवता श्रेणी:सिन्धी संस्कृति