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सफ़वी कला

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300px|thumb|नक्शे-जहाँ स्क्वायर, इस्फ़हान सफ़वी कला (सन् 1501 से 1722 तक) ईरानी सफ़वी राजवंश की कला है, जिसमें ईरान और काकेशस और मध्य एशिया के कुछ हिस्से शामिल थे। यह फ़ारसी लघुचित्र और वास्तुकला के लिए बहुत अच्छा समय था। इस समय में सिरेमिक, धातु, काँच और गार्डन भी शामिल थे। सफ़वी काल की कलाएँ ईरानी कला के किसी भी दूसरे दौर की तुलना में कहीं ज़्यादा एक जैसा विकास दिखाती हैं। सफ़वी साम्राज्य ईरान के सबसे अहम शासक राजवंशों में से एक था। उन्होंने फ़ारस पर मुस्लिम जीत के बाद सबसे बड़े फ़ारसी साम्राज्यों में से एक पर राज किया और इसके साथ ही, साम्राज्य ने कई कलात्मक उपलब्धियाँ हासिल कीं।http://www.iranicaonline.org/articles/art-in-iran-ix-safavid ART IN IRAN ix. SAFAVID To Qajar Periods iranicaonline.orgHelen Chapin Metz, ed., Iran, a Country study. 1989. University of Michigan, p. 313.Emory C. Bogle. Islam: Origin and Belief. University of Texas Press. 1989, p. 145.Stanford Jay Shaw. History of the Ottoman Empire. Cambridge University Press. 1977, p. 77.Andrew J. Newman, Safavid Iran: Rebirth of a Persian Empire, IB Tauris (March 30, 2006). पुस्तक की कला सफ़वी राजवंश के अधीन विशेष रूप से फ़ारसी लघु चित्रकला कला का मूल प्रेरक बल बनी रही। तात्कालिक शाही पुस्तकालय-कार्यशाला केताब ख़ानेह कालीनों, मिट्टी के बर्तनों या धातु वस्तुओं जैसे वस्तुओं के लिए अधिकांश प्रेरणा स्रोत प्रदान करती थी। विभिन्न प्रकार की पुस्तकें नक़ल की जातीं, अलंकृत की जातीं, बाँधी जातीं और कभी-कभी चित्रित भी की जातीं। इनमें धार्मिक पुस्तकें तथा फ़ारसी साहित्य भी शामिल हैं। धार्मिक पुस्तकों में क़ुरान, पवित्र ग्रंथ पर टीकाएँ और अन्य धार्मिक ग्रंथ शामिल है जब फ़ारसी साहित्य की पुस्तकों में शाहनामा, निज़ामी का ख़म्सा, रशीद-अल-दीन हमदानी द्वारा जामी अल-तवारीख़, तैमूर नामा, विश्वकोश और सूफ़ीवाद के वैज्ञानिक ग्रंथ शामिल हैं। काग़ज़ का आविष्कार चीन में हुआ जो 13वीं सदी के पूर्वार्द्ध में ही ईरान पहुँच गया था अतः इसका हमेशा इस्तेमाल होता था। कभी-कभी हाशियों में रंगीन या सोने की पत्ती से सजाया जाता था। सन् 1540 के आसपास संगमरमरी कागज़ भी आया, हालांकि वो जल्दी ही ग़ायब हो गया। सन्दर्भ श्रेणी:ईरानी वास्तुकला श्रेणी:कला