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अंजलिकास्त्र
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जनवरी 2021
अंजलिकास्त्र इन्द्र का अस्त्र है। पुराणों के अनुसार इस अस्त्र के माध्यम से शत्रू के माथे को उसके शरीर से अलग किया जा सकता है।
रामायण
कहा जाता है कि अंजलिकास्त्र का प्रयोग करके लक्ष्मण ने रावण के पुत्र इंन्द्रजीत का वध किया था परंतु इस विषय में मतभेद है।
परमपिता ब्र्ह्मा ने मेघनाद को आशीर्वाद दिया था कि देवी प्रत्यङ्गिरा के लिए यज्ञ की समाप्ती के पश्चात उसे एक दिव्य रथ प्राप्त होगा। इस रथ के रहने से कोई भी प्राणी उसे पराजित नहीं कर सकता। परंतु इस आशीर्वाद को पूर्ण करने के लिए यज्ञ में किसी भी प्रकार का व्यवधान नहीं होना चाहिए था। मेघनाद ने परमपिता से एक दूसरा वरदान मांगा - उसका वध केवल वही कर सकता है जिसे बारह वर्ष से लगातार नींद नहीं आई थी।
इस रीति से लक्ष्मण ही ऐसा मनुष्य था जो मेघनाद का वध कर सकता था। विभीषण के र्निर्देशानुसार लक्ष्मण ने मेघनाद के यज्ञ को रोका एवं अंजलिकास्त्र से मेघनाद का वध किया।
महाभारत
अंगूठाकार|362x362पिक्सेल|अंजलिकास्त्र से अर्जुन कर्ण का वध करता है।
कुरुक्षेत्र युद्ध के सत्रहवे दिन को इन्द्रपुत्र अर्जुन एवं सूर्यपुत्र कर्ण का युद्ध हुआ। अर्जुन के सारथि श्रीकृष्ण थें एवं कर्ण के सारथि मद्रनरेश शल्य थें।
जब कर्ण ने आगे बढ़ने का प्रयत्न किया, भूदेवी के दिए गए शाप से उसके रथ का पहिया कीचड़ में अटक गया। उसने ब्रह्मास्त्र प्रयोग में लाना चाहा परंतु परशुराम के दिए गए शाप के कारण यह भी संभव नहीं हो पाया। अंत में विवश होकर उसने पहिए को कीचड़ से निकालने का प्रयत्न किया।
कर्ण के हाथों में न अस्त्र थे, न शस्त्र। श्रीकृष्ण के र्निर्देशानुसार ठीक इसी समय अर्जुन ने अंजलिकास्त्र का प्रयोग करके कर्ण का वध किया।
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