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कानून की आवाज़ (1989 फ़िल्म)

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कानून की आवाज़ कानून की आवाज़.jpg कानून की आवाज़ का पोस्टर असरानी, प्रेम चोपड़ा, बॉब क्रिस्टो, लीना दास, अरुणा ईरानी, मानिक ईरानी, जयाप्रदा, मनमौजी, गुर बच्चन सिंह, शत्रुघन सिन्हा, शेखर सुमन, 1989 भारत हिन्दी कानून की आवाज़ 1989 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। संक्षेप 'कानून की आवाज' (Kaanoon Ki Awaaz) 1989 में आई एक बॉलीवुड ड्रामा-एक्शन फिल्म है, जिसमें शत्रुघ्न सिन्हा, जया प्रदा, शेखर सुमन और प्रेम चोपड़ा मुख्य भूमिकाओं में हैं। इस फिल्म का निर्देशन पी. चंद्रशेखर, आर. कुमार और बलवंत दुल्लत ने किया है, और इसकी कहानी कानूनी फर्ज, पारिवारिक रिश्तों और बदले के इर्द-गिर्द घूमती है। फिल्म की मुख्य कहानी और प्लॉट इस प्रकार है: 1. शुरुआत और मुख्य टकराव कहानी रघुनाथ प्रसाद राय (शत्रुघ्न सिन्हा) और जानकी राय (जया प्रदा) से शुरू होती है, जो एक शादीशुदा जोड़ा हैं। जानकी एक बेहद काबिल और ईमानदार वकील (बाद में जज) है, जबकि रघुनाथ एक स्वाभिमानी इंसान है जो अपनी पत्नी की कामयाबी और पहचान के साए में थोड़ा असहज महसूस करता है। शहर का एक बड़ा और रसूखदार गैंगस्टर दर्शन लाल (प्रेम चोपड़ा) है, जिसका बेटा एक मर्डर के केस में फंस जाता है। रघुनाथ इस मर्डर का इकलौता गवाह बनता है। जानकी कोर्ट में इस केस को लड़ती है और दर्शन लाल के बेटे को फांसी की सजा दिलवा देती है। 2. कहानी में मोड़ और जुदाई बेटे की मौत से बौखलाया दर्शन लाल बदला लेने की ठान लेता है। वह रघुनाथ को अपने जाल में फंसा लेता है। इसी बीच एक एक्सीडेंट या साजिश के तहत यह खबर फैलती है कि रघुनाथ की मौत हो चुकी है।   पति की 'मौत' के बाद जानकी अकेली हो जाती है। चूंकि उनकी अपनी कोई संतान नहीं थी, इसलिए वह रघुनाथ के छोटे भाई सुनील (शेखर सुमन) को अपने बेटे की तरह पालती है और उसे एक ईमानदार पुलिस ऑफिसर बनाती है। जानकी खुद एक जज बन जाती है और सफेद साड़ी में एक विधवा की तरह जिंदगी बिताती है। 3. रघुनाथ की वापसी और नया टकराव ट्विस्ट यह आता है कि रघुनाथ मरा नहीं था, बल्कि वह दर्शन लाल के चंगुल में फंसकर और हालातों से मजबूर होकर खुद अपराध की दुनिया (Outlaw) का हिस्सा बन चुका था और बहुत अमीर हो चुका था।   कई सालों बाद, जब दर्शन लाल के गैर-कानूनी धंधों को रोकने की जिम्मेदारी पुलिस ऑफिसर सुनील (रघुनाथ के छोटे भाई) को मिलती है, तो टकराव की स्थिति पैदा होती है। दर्शन लाल मामले को उलझाने के लिए सुनील की मंगेतर रश्मि (मेनका बब्बर) को किडनैप कर लेता है। 4. क्लाइमेक्स जब रघुनाथ को यह पता चलता है कि जिस पुलिस वाले से उसका सामना है, वो कोई और नहीं बल्कि उसका अपना छोटा भाई सुनील है, तो कहानी में बड़ा इमोशनल टर्न आता है। क्या रघुनाथ अपने भाई और उसकी मंगेतर को दर्शन लाल से बचाता है? क्या सुनील कानून का पालन करते हुए अपने ही बड़े भाई को गिरफ्तार करता है? और सबसे बढ़कर, जब यह मामला अदालत में जज जानकी के सामने आता है, तो एक पत्नी और एक जज के रूप में वह क्या फैसला सुनाती है? फिल्म का अंत इसी इमोशनल ड्रामा, एक्शन और 'कानून के न्याय' के साथ होता है, जहां आखिरकार बुराई का खात्मा होता है और कानून की जीत होती है। मुख्य कलाकार शत्रुघ्न सिन्हा - रघुनाथ प्रसाद राय जया प्रदा वकील/न्यायाधीश जानकी राय के रूप में प्रेम चोपड़ा दर्शन लाल के रूप में हवलदार श्रीमती बनारसी के रूप में अरुणा ईरानी हवलदार मिस्टर बनारसी के रूप में माणिक ईरानी हवलदार भोजा बनारसी के रूप में असरानी शेखर सुमन मेनका बब्बर वकील रेशमी मिश्रा के रूप में बॉब क्रिस्टो लीना दास ममौजी गुरबचन सिंह जया प्रदा वकील/न्यायाधीश जानकी राय के रूप में दल संगीत गानागायक"साजन मेरे साजन"कुमार सानू , चित्रा सिंह"सिंदूर की होवे"लता मंगेशकर"आँखों ही आँखों में"आशा भोसले"पीर हुंडी ओये"शुभा जोशी रोचक तथ्य परिणाम बौक्स ऑफिस समीक्षाएँ नामांकन और पुरस्कार बाहरी कड़ियाँ 0378177 कानून की आवाज़ श्रेणी:1989 में बनी हिन्दी फ़िल्म