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मोहनलाल (अभिनेता)
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सितंबर 2018
मोहनलाल Mohanlal Viswanathan BNC.jpg 2015 में मोहनलाल मोहनलाल विश्वनाथन 1960 5 21 y पठनमठिला, केरल, भरत फ़िल्म अभिनेता, निर्देशक, वितरक, पार्श्वगायक, उद्यमी, नाटक कलाकार, लेखक, व्यवसायी 1978 - वर्तमान सुचित्रा (1988-अब तक) प्रणव मोहनलाल और विसमया मोहनलाल लालेट्टन, लाल thecompleteactor.com
मोहनलाल विश्वनाथन (जन्म 21 मई 1960)http://www.mohanlal.org/myself.htm Priyapetta मोहनलाल 25 .. Vayassu - सरकारी वेबसाइट 26 अप्रैल 2010 https://web.archive.org/web/20100309230331/http://www.mohanlal.org/myself.htm 9 मार्च 2010 dead , एक नाम मोहनलाल या लाल के नाम से जाने जाने वाले, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिलब्ध भारतीय फिल्म अभिनेता और निर्माता हैं, जो मलयालम सिनेमा का सब सबसे बड़ा नाम है।മോഹന്ലാല് चार बार राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता रहे मोहनलाल ने दो सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार, एक विशेष जूरी पुरस्कार और एक सर्वश्रेष्ठ फिल्म पुरस्कार (निर्माता के रूप में) जीता। 2001 में भारत सरकार ने उन्हें भारतीय सिनेमा के प्रति योगदान के लिए पद्मश्री से सम्मानित किया। सन 2009 में भारतीय प्रादेशिक सेना द्वारा उन्हें मानद लेफ्टिनेंट कर्नल का पद दिया गया,Lt.Col. प्रादेशिक सेना द्वारा - मानद उपाधि https://web.archive.org/web/20160303231727/http://pib.nic.in/release/release.asp?relid=50047 3 मार्च 2016 जो भारतीय सिनेमा के इतिहास में पहली बार हुआ था और श्री संकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय, कलादी, द्वारा मानद डॉक्टरेट प्रदान किया गया। मोहनलाल को फिल्म क्षेत्र मे उत्कृष्ट योगदान के लिए 2025 में 71 वाॅं प्रतिष्ठ दादा साहेब फाल्के आवर्ड दिया गया |
मोहनलाल के लिए डॉक्टरेट - मानद उपाधि https://web.archive.org/web/20120111142838/http://thecompleteactor.blogspot.com/2009/09/doctorate-for-mohanlal-from-sree.html 11 जनवरी 2012
अभिनय शैली
मोहनलाल भारत में अब तक के सबसे महान अभिनेता माने जाते हैं। उनकी अभिनय शैली दुर्लभ है, जो सहज (स्वाभाविक) अभिनय के रूप में जानी जाती है। इसने उन्हें भारत के ज़्यादातर दिग्गज निर्देशकों का पसंदीदा बनाया दिया। वह किरदार के अन्दर की उत्तेजना को वास्तविकता के साथ संतुलित तरीके से अभिनित करने में श्रेष्ठ हैं, जो हर बार निर्देशकों की उम्मीद से अधिक होता है। कहा जाता है कि उनमे समझने की एक महान क्षमता है, जो वानाप्रस्तम (Vanaprastham) में साबित हो गई, जिसमें उन्होंने अद्भुत और असाधारण ढंग से एक कथकली कलाकार की भूमिका निभाई और सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किये गए। यह कहा जाता है कि कथकली का अध्ययन और अभिनय, केवल 8 साल के अभ्यास से ही संभव है! उन्होंने सिर्फ 6 महीने का अभ्यास किया। उनका प्रदर्शन दुनिया के प्रसिद्ध कथकली कलाकारों, जैसे रमणकुट्टी नायर और कलामंडलम गोपी द्वारा सराहा गया। उन्हें भारतीय सिनेमा के बेहतरीन नर्तकों में से एक माना जाता है, जो फिल्मों में भरतनाट्यम और कथक का प्रदर्शन बिना किसी ख़ास प्रशिक्षण के करते हैं। उन्होंने सिनेमाओं में कलारी (kalari) जैसे मार्शल आर्ट (युद्ध कला) का अत्यंत परिपूर्णता के साथ प्रदर्शन किया है। वह शास्त्रीय संगीत के अत्यधिक कठिन स्वरों सहित, फिल्मों में अपने होंठ हिलाने (lip movement) के लिए भी प्रसिद्ध हैं।
प्रारंभिक जीवन (1960-1977)
मोहनलाल का जन्म केरल के पतनमतिट्टा ज़िला के एलान्थूर में विश्वनाथन नायर जो एक वकील और सरकारी कर्मचारी थे और सान्ताकुमारी, के यहाँ हुआ था। उनका परिवार बाद में तिरुवनंतपुरम के मुदावंमुगल में स्थानांतरित हो गया, जो उनकी माँ का घर था। वह पहले मुदावंमुकल एल.पी.स्कूल जाने लगे और बाद में उन्होंने मॉडल स्कूल, तिरुवनंतपुरम में दाखिला ले लिया।http://www.hindu.com/2009/05/25/stories/2009052558020300.htm मॉडल स्कूल में मोहनलाल 8 अगस्त 2010 https://web.archive.org/web/20090530061910/http://www.hindu.com/2009/05/25/stories/2009052558020300.htm 30 मई 2009 live वह स्कूल में एक सामान्य छात्र थे, जो कला की दुनिया की तरफ खिंचे; वह स्कूल- नाटकों में भाग लिया करते थे। छठी कक्षा में, युवा मोहनलाल अपने स्कूल में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता चुने गए, जो पुरस्कार आम तौर पर दसवीं कक्षा के छात्रों द्वारा प्राप्त किया जाता था।
स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने अपनी बैचलर की डिग्री के लिए महात्मा गांधी कॉलेज, तिरुवनंतपुरम में दाखिला ले लिया। उन्होंने अभिनय का साथ जारी रखा और कई सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार जीता। यहाँ वह साथी छात्रों के एक समूह से मिले, जो थिएटर और फीचर फिल्मों के बारे में उत्साहित थे। इन साथियों ने उन्हें उनकी पहली सफलता दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, विशेष रूप से प्रियदर्शन और मनियन्पिल्ला राजू जो आगे जाकर लोकप्रिय फिल्म निर्देशक या अभिनेता बने।
उनकी सबसे उल्लेखनीय भूमिकाएं रहीं, सनमनसाउल्लवरक समादानम (sanmanassullavarkku Samadhanam) में गोपालकृष्ण पानिकर, टी.पि बालागोपालन एम् ए (T.P.Balagopalan M.A.) में बलागोपालन, नमकअ परकान मुन्तिरी तोप्पुकल (Namukku Parkkan Munthiri Thoppukal) में सोलोमन, नादोदिक्काट्टू (Nadodikkattu) में दसन, तूवानतुम्बिकल (Thoovanathumbikal) में जयकृष्णन, चित्रम (Chithram) में विष्णु, किरीडम (Kireedam) में सेतु माधवन, सदयम (Sadayam) में सथ्यनादन, भारतम (Bharatham) में गोपी, देवासुरम (Devaasuram) में मंगलास्सेरी नीलाकंदन, वानप्रस्तम (Vanaprastham) में कुन्हिकुत्तन और स्पदिकम (Spadikam) में थॉमस चक्कों (आडू थोमा) (Aadu Thoma).
फिल्म कैरियर
प्रारंभिक वर्षें (1978-1985)
लाल की पहली फिल्म थी 'थिरनोत्तम" ("Thiranottam") (1978). फिल्म सेंसर बोर्ड की आपत्ति में फँस गयी और कभी रिलीज़ नहीं हुई। उन्हें पहली बार 1980 में सफलता मिली, जब वह मंजिल विरिन्या पूक्कल (Manjil Virinja Pookkal) में विरोधी की भूमिका के लिए चुने गए जो एक सफल ब्लोकबस्टर फिल्म साबित हुई। अगले कुछ वर्षों में बहुत सी फिल्मों में उन्होंने बढती महत्त्व की भूमिकाएं निभाईं. वर्ष 1983 में उन्होंने 25 से अधिक फीचर फिल्मों में नाम कमाया. प्रख्यात पटकथा लेखक एम् टी वासुदेवन नायर द्वारा लिखित और आई वी शशि द्वारा निर्देशित, धोखे और छल की कहानी उयारंगलिल (Uyarangalil), इस अवधि की सबसे महत्वपूर्ण फिल्म थी। इसके बाद उन्होंने अपने निदेशक मित्र और कॉलेज के साथी प्रियदर्शन की पहली फिल्म पूचक्कोरू मूक्कुत्ति (Poochakkoru Mookkuthi) में हास्य भूमिकाओं को उजागर किया।
स्वर्ण अवधि (1986-1995)
यह काल (1986 - 1995) व्यापक रूप से मलयालम सिनेमा का स्वर्ण काल माना जाता है, जब विशेष रूप से फिल्मों की विस्तृत पटकथाएँ, स्पष्ट अर्थ का वर्णन और ताजा विचारों ने कलात्मक और व्यावसायिक फिल्मों के बीच के अंतर को कम कर दिया। http://www.malayalamcinema.com/php/showContent.php?linkid=4 मलयालम सिनेमा के इतिहास 26 अप्रैल 2010 https://web.archive.org/web/20100228033110/http://www.malayalamcinema.com/php/showContent.php?linkid=4 28 फ़रवरी 2010 dead एक युवा प्रतिभा के रूप में कामयाबी की तरफ बढ़ते हुए, मोहनलाल ऐसी भूमिकाएं प्राप्त करने लगे जिसने उन्हें भावनाओं की विस्तृत श्रृंखला का प्रदर्शन करने के पर्याप्त अवसर दिए और मलयालम सिनेमा के बेहतर निर्देशकों और लेखकों के साथ उनका एक सफल संगठन शुरू हुआ।
1986 उनके लिए बेहतरीन सालों से एक था। साथ्याँ अन्थिकड़ की टी.पि बलागोपालन एम्.ए (T.P.Balagopalan M.A) ने उन्हें उनका पहला सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का केरल राज्य पुरस्कार दिलवाया. राजाविंते मकन (Rajavinte Makan) में अपराध जगत के डॉन (don) की उनकी भूमिका के बाद मलयालम सिनेमा के सुपरस्टार के रूप में मोहनलाल का उदय हुआ। उसी साल, उन्होंने थालावात्तोम में पागलखाने के मरीज़ की भूमिका निभाई, सनमनसाउल्लवरक समादानम (Sanmanassullavarku Samadhanam) में एक पीड़ित मकान मालिक, एम्.टी वासुदेवन नायर की फिल्म पंचगनी (Panchagni) में एक पत्रकार, नमकअ परकान मुन्तिरी तोप्पुकल (Namukku Parkkan Munthiri Thoppukal) में प्यार पड़े एक खेत के मालिक की, गाँधी नगर 2nd स्ट्रीट (Gandhi Nagar 2nd street) में गुरखा बनने पर मजबूर एक बेरोजगार युवक की भूमिकाएं निभाई.
लेखक-निर्देशक जोड़ी श्रीनिवासन और सत्यन अंतिकाड़, जो ज़बरदस्त व्यंगात्मक सामाजिक फिल्मे बनाने में माहिर थे, उनके साथ मोहनलाल ने नाडोडीकाट्टू (Nadodikkattu) बनाई, जिसमें उन्होंने एक बेरोजगार युवा की भूमिका निभाई और वरवेल्पू (Varavelpu) जिसमें उन्होंने खाड़ी से लौटे एक ऐसे इंसान की भूमिका निभाई जो लालची रिश्ते दारों और उद्योगपतियों के लिए प्रतिकूल वातावरण वाले राज्य में पहुँच जाता है। निर्देशक प्रियदर्शन की संगीतमय हास्य फिल्मे, विशेष रूप से चित्रम (Chithram) और किलुक्कम (Kilukkam) में वह भारतीय रोमांटिक हीरो की भूमिका में नज़र आए जिसने किशोर फिल्म प्रमियों में उनकी लोकप्रियता बढ़ा दी।
तूवालतुम्बिकल (Thoovanathumbikal) जिसमें उन्होंने दोहरे प्रेम के बीच फंसे व्यक्ति की भूमिका निभाई, ने भारतीय फिल्मों की उस छवि को तोड़ दिया के एक मुख्य किरदार (व्यक्ति) एक औरत के इनकार के तुरंत बाद दूसरी औरत के साथ प्यार कर सकता है। अम्रितागमया (Amrithamgamaya) एक ऐसे आदमी की कहानी थी, जो उस लड़के के घर पहुँच जाता है जिसकी अनजाने में काल्लेज की रेगिंग सत्र के दौरान उसने हत्या कर दी थी। ताएवरम (Thazhvaram) इस अवधि की एक और उल्लेखनीय फिल्म थी।
लेखक लोहितादास और निदेशक सीबी मलयिल ने उनकी कुछ सबसे यादगार भूमिकाओं की रचना की। उन्होंने फिल्म किरीडम (Kireedam) में सेतु माधवन की भूमिका निभाई जो एक पुलिस अधिकारी बनने का सपना देखता है, परन्तु फिल्म के अंत तक एक अपराधी बन जाता है, जिसमें उन्हें एक विशेष जूरी पुरस्कार प्राप्त हुआ। भारतम (Bharatham) में वह एक शास्त्रीय गायक जो ईर्ष्या के बोझ और अंततः अपने गायक भाई की मौत से गुज़रता है, का पात्र निभाया जिसने उन्हें अगले वर्ष सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाने में मदद की।
90 के दशक में अधिक मनोरंजक फिल्मों के साथ उनकी सफलता जारी रही, जैसे हिज़ हाइनेस अब्दुल्ला (His Highness Abdullah), जहां उन्होंने एक मुस्लिम व्यक्ति का पात्र निभाया जो एक शाही शख्स की हत्या के लिए नम्बूदिरी का वेश धारण करता है। इस काल में उनकी अन्य महत्वपूर्ण व्यवसायिक फिल्मे थीं मिधुनाम (Midhunam), मिन्नारम (Minnaram), तेन्माविन कोम्वत्त (Thenmavin kombath) जिन्होंने साफ-सुथरी, अच्छी पटकथा और शानदार चरित्र वर्णों के साथ 80 के दशक की परंपरा को जारी रखा। रंजित द्वारा लिखित और आई.वि ससी द्वारा निर्देशित फिल्म देवासुरम (Devaasuram), मध्य केरल के सामंती वातावरण में स्थापित, विशेष रूप से मोहनलाल के उस अभिनय के लिए प्रसिद्ध हुई जिसमे उन्होंने एक घमंडी, अमीर और ढीठ युवक को चित्रित किया, जो धीरे धीरे कई घटनाओं की वजह से विनम्र हो जाता है। निर्देशक भद्रण की स्पदिकम (Spadikam) में जिस क्रांतिकारी अंदाज़ में स्टंट फिल्माए गए थे, उसकी वजह से यह फिल्म एक आदर्श पंथ बन गई। इस अवधि के दौरान, समीक्षकों द्वारा प्रशंसा पाने वाली फ़िल्में कुछ ही थीं और जो ज़्यादातर अर्ध मनोरंजक थीं जैसे मनिचित्रताए (Manichitrathazhu) जिसमे मुख्य महिला भूमिका निभाने वाली शोभना को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला।
यह समय ऐसा भी था जब पिता-पुत्र की जोड़ी तिलकन और मोहनलाल ने मलयालम फिल्म उद्योग और विशेष रूप से दोनों अभिनेताओं के प्रशंसकों पर शक्तिशाली प्रभाव डाला।
बाद के वर्ष (1996-वर्तमान)
उनके कैरियर की इस अवधि के दौरान, फिल्म निर्माताओं ने मोहनलाल को फिल्मों में अजय, अतिशयोक्तिपूर्ण नायक के रूप में चित्रित करके, केरला में उनकी विशाल लोकप्रियता का फायदा उठाया. आराम तम्बुरान (Aaram Thamburan), नरसिम्हम (Narasimham), रवानप्रभु (Ravanaprabhu), नरण (Naran) जैसी फिमों ने उनकी इस छवि का बड़े प्रभाविक स्थर पर इस्तेमाल किया जो ब्लाकबस्टर साबित हुईं. अपनी शुरुआती नवीनता के बाद, इन फिल्मों में यथार्थवाद की कमी और मोहनलाल के इर्द गिर्द ही फिल्मे बनाए जाने के कारण इन्हें कई हलकों से आलोचना का सामना करना पड़ा. प्रियदर्शन की कालापानी (Kalapani), जो अंग्रजों के खिलाफ भारत के आजादी की लड़ाई की कहानी थी, जो अंडमान द्वीपों के सेलुलर जेल पर केंद्रित थी और लोहितादास की कन्मदम (Kanmadam), 90 के दशक के अंतिम वर्षों के दौरान उनकी कुछ उल्लेखनीय फ़िल्में रहीं।
वो यह समय था जब मोहनलाल मलयालम भाषी दुनिया के बाहर पहचाने जाने लगे। उन्होंने अपनी पहली गैर मलयालम फिल्म में अभिनय किया, जब लोकप्रिय फिल्म निर्देशक मणिरत्नम ने उन्हें तमिल फिल्म इरुवर (Iruvar) के लिए अनुबंधित किया। इसमें मोहनलाल, MGR, के किरदार में नज़र आए जो पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में एक उपासना योग्य व्यक्ति माने जाते हैं। भारत-फ्रेंच, निर्मित वानाप्रस्तम (Vaanaprastham), जिसमें उन्होंने अपनी पहचान खोने की संकट में घिरे एक कथकली नृत्य कलाकार की भूमिका निभाई, जिसने उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए दूसरा राष्ट्रीय पुरस्कार दिलवाया और यह पहली फिल्म थी जिसमे उन्हें अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिली। यह फिल्म कान फिल्म समारोह के प्रतिस्पर्धा वर्ग के लिए चुनी गई और उनके प्रदर्शन को समीक्षकों द्वारा प्रशंसा मिली।
2002 में, मोहनलाल ने अपनी पहली बॉलीवुड फिल्म कंपनी (company) में अभिनय किया, जिसने उन्हें भारत में व्यापक हिन्दी भाषी दर्शकों के बीच पहचान दिलाई. यह एक महत्वपूर्ण एवं सफल व्यावसायिक फिल्म थी। उन्होंने इस भूमिका के लिए सर्वश्रेष्ठ समर्थक अभिनेता का आई आई एफ ए (IIFA) पुरस्कार, स्टार स्क्रीन पुरस्कार जीता। March 2010 वर्ष 2006 में फिल्म तन्मतरा (Thanmathra)("परमाणु") ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए केरल राज्य पुरस्कार जितवाया, जिसमे उन्होंने अल्जाइमर रोग से प्रभावित एक व्यक्ति को चित्रित किया। उनकी दूसरी बॉलीवुड फिल्म राम गोपाल वर्मा की आग (Ram Gopal Varma Ki Aag) थी, जो 1975 की ब्लोकबस्टर फिल्म शोले की रीमेक थी, जिसमें उन्होंने इंस्पेक्टर की भूमिका निभाई, जो मूल फिल्म में संजीव कुमार द्वारा निभाई गई थी। मोहनलाल ने फिल्म परदेसी (Paradesi) में वलियाकाटू मूसा की भूमिका में प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का 2007 केरल राज्य पुरस्कार जीता। मोहनलाल परदेसी (Paradesi) में अपने प्रदर्शन के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार एक वोट से हार गए। जनवरी 2010 2009 में मोहनलाल ने डॉ॰कमल हासन के साथ तमिल फिल्म उनियपोल उरूवन (Unnaipol Oruvan) में काम किया और इस प्रदर्शन के लिए तमिल दर्शकों ने उनकी काफी प्रशंसा की। उन्होंने वर्ष 2010 ki शुरुआत रोशन एन्द्रुस द्वारा निर्देशित एक सुपर हिट (सफल) सजीव पारिवारिक मनोरंजक फिल्म "इविडेम स्वरगमाणु" ('Ividam Swargamanu') के साथ की। जनवरी 2010
रंगमंच
ज़्यादातर दुसरे भारतीय सितारों की तरह, मोहनलाल के अभिनय कैरियर में भी थिएटर पृष्ठभूमि नहीं है। हालांकि, उन्होंने कुछ नाटकों में अभिनय किया है। उन्होंने पहली बार कर्ण (भारतीय महाकाव्य महाभारत का एक पात्र) के रूप में कर्नाभाराम, एक संस्कृत नाटक में काम किया, जो कि पहली बार नई दिल्ली में राष्ट्रीय रंगमंच महोत्सव में प्रदर्शित किया गया। इस नाटक में कुरुक्षेत्र युद्ध से एक दिन पहले कर्ण की मानसिक व्यथा को दिखाया गया, जब वह अपने अतीत और अपने विश्वास के बारे में सोचता है।Kavalam नारायण Panickkar - है मोहनलाल नए जुनून https://web.archive.org/web/20170215005226/http://www.rediff.com/entertai/2001/mar/13mohan.htm 15 फ़रवरी 2017
कधयात्तम, मोहनलाल द्वारा अधिनियमित प्रस्तुति थी, जिसमे उन्होंने मलयालम साहित्य से चुने गए, 10 अविस्मरणीय चरित्र और स्थितियों का चित्रण किया। उन्होंने कहा कि यह उनकी अपनी मातृभाषा को एक भेंट है। यह प्रस्तुति रंगमंच अभिनय, फिल्म अभिव्यक्ति, ध्वनि और प्रकाश व्यवस्था का संलयन था, जो फिल्म निदेशक टी के राजीव कुमार द्वारा नियोजित किया गया था।
मोहनलाल और मलयालम के प्रसिद्ध अभिनेता मुकेश के संयुक्त रूप से चलाए जाने वाले निर्माण संस्था (production house) 'कालिदास विसुअल मैजिक' के तले बनी छायामुखी (chayamukhi), मोहनलाल का नवीनतम नाटक है।थिएटर वापसी के लिए. मोहनलाल Keechakan के रूप में Bheeman और मुकेश की भूमिका प्रदर्शन करती है। खेलने के पहले thrichur 12 पर पर आयोजन किया गया था मार्च
वापस थिएटर https://web.archive.org/web/20091217065704/http://www.apunkachoice.com/scoop/downsouth/malayalam/20080201-0.html 17 दिसंबर 2009
व्यवसाय
विस्मयास मैक्स, फिल्म दत्त (post) निर्माण स्टूडियो और दुब्बिंग कलाकारों का कॉलेज, किन्फ्रा फिल्म और वीडियो पार्क, कज्हकूत्तम, त्रिवेन्द्रम.
'प्रणवम कला, फिल्म निर्माण कंपनी
प्रणवम, फिल्म वितरण कम्पनी (वर्तमान में निष्क्रिय)
उनी रॉयल मरीन निर्यात, कोझिकोड स्थित प्रमुख समुद्री-खाद्य निर्यात कंपनी के साथी और निदेशक.
दुबई में मोहनलाल टस्त्बड्स नामक रेस्तरां श्रृंखला.
त्रावणकोर कोर्ट, कोच्चि में एक 3 सितारा होटल.
फिल्म वितरण कंपनी मक्स्लाब सिनेमास एंड एन्तेर्तैन्मेंट्स के साथी।
बंगलूर में ड हार्बर मार्केट नामक रेस्तौरांत.
मोहनलाल तस्तेबुड्स'', एक अचार और करी पाउडर उत्पादन कंपनी के पार्टनर.भारत के टाइम्स: मोहनलाल पूर्वी समूह में स्वाद बेचता है https://web.archive.org/web/20110607161740/http://timesofindia.indiatimes.com/Mohanlal_sells_Taste_Buds_to_Eastern_group/rssarticleshow/2605816.cms 7 जून 2011
जोस थॉमस परफोर्मिंग आर्ट सेंटर JtPac के अध्यक्ष.
वह दक्षिण भारत के सबसे सफल और महंगा ब्रांड अम्बस्सिदर माना जाता है। वह 7 उत्पाद / उपक्रमों का विज्ञापन करते हैं।
आलोचना
2007 में एक शराब ब्रांड के विज्ञापन में प्रदर्शित होने की वजह से उन्हें केरल में शराब निषेध कार्यकर्ताओं से आलोचना का सामना करना पड़ा.बीबीसी समाचार - शराब के विज्ञापनों पर संकट brews https://web.archive.org/web/20110525140434/http://news.bbc.co.uk/2/hi/south_asia/6364165.stm 25 मई 2011
भारत में शराब के विज्ञापन पर प्रतिबंध है। विक्रेता विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल करके प्रतिबंद से बच निकलते हैं, उदाहरण के लिए शराब के समान लेबल वाली, बिना शराब की मादक पेयों को बढ़ावा देकर. इस विज्ञापन विशेष में जो व्यापक रूप से स्थानीय टीवी चैनलों और सिनेमाघरों पर प्रचारित किया गया था, मोहनलाल केले के चिप्स का विज्ञापन करते नज़र आए जो शराब का भी ब्रांड नाम था।
मोहनलाल अपनी फिल्मों के चयन ज्यादातर प्रवृत्ति पर करते हैं और चाहते हैं कि चीज़ें जैसे चलती हैं चलें.सीएनएन-आइबीएन - मोहनलाल होने के नाते https://web.archive.org/web/20080607080753/http://www.ibnlive.com/news/being-mohanlal-keralas-pride/11060-8-0.html 7 जून 2008 वह मलयालम फिल्म उद्योग में कुछ नजदीकी लोगों के साथ ही काम करना पसंद करते हैं, जिन्हें वह अपने काम के शुरूआती वख्त से जानते हैं और उसी में उन्हें आनंद मिलता है।मोहनलाल - मैं कोई जड़ है https://web.archive.org/web/20090922015507/http://www.rediff.com/entertai/2000/aug/29mohan.htm 22 सितंबर 2009 उनके बहुत से पसंदीदा स्कूल और कॉलेज के साथी उनके साथ फिल्म उद्योग में हैं। इनमे निर्देशक प्रियदर्शन, गायक एमजी श्रीकुमार, अभिनेता राजू और निर्माता सुरेश कुमार शामिल हैं।
वह अन्य भाषाओं में काम करने में असहज महसूस करते हैं और उन भाषाओं की जटिलताओं पर काबू की कमी को जिम्मेदार बताते हैं।
पुरस्कार और उपलब्धियाँ
List of awards and nominations received by Mohanlal
मोहनलाल फिल्म गुरु को ऑस्कर के लिए भारत की आधिकारिक प्रविष्टि के रूप में, 1997 की सर्वश्रेष्ठ विदेशी फिल्म में नामांकन के लिए चुनी गई।
मोहनला ने चार बार राष्ट्रीय पुरस्कार जीता है, (1)विशेष जूरी पुरस्कार (अभिनेता), (2)सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, (3)सर्वश्रेष्ठ अभिनेता, (4)सर्वश्रेष्ठ फिल्म (निर्माता) का.
मोहनलाल को सन 2001 में भारत सरकार द्वारा पद्म श्री से सम्मानित किया गया।
मोहनलाल की फिल्म 1999 के कान फिल्म समारोह के अन सर्टेन रिगार्ड विभाग में दिखाई गई।http://www.festival-cannes.com/en/archives/ficheFilm/id/3150715/year/1999.html Festival de Cannes: Vanaprastham 2009-11-03 festival-cannes.com https://web.archive.org/web/20131226222220/http://www.festival-cannes.com/en/archives/ficheFilm/id/3150715/year/1999.html 26 दिसंबर 2013 live
2006 में CNN-IBN द्वारा कराए गए सर्वेक्षण में मोहनलाल सर्वाधिक लोकप्रिय केरल निवासी के रूप में चुने गए।
मोहनलाल को 2009 में भारतीय प्रादेशिक सेना में मानद लेफ्टिनेंट कर्नल का पद दिया गया।
सन 2009 में मोहनलाल को श्री संकराचार्य संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा मानद डॉक्टरेट प्रदान किया गया।
मोहनलाल वह अभिनेता हैं जिनका सबसे अधिक, 9 बार सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी में राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए नामांकन हुआ है।
विश्व प्रसिद्ध छायाकार Renato Berta
जिन्होंने फिल्म वनाप्रस्थं (Vanaprastham), में काम किया, कहते हैं "उन्होंने दुनिया के गलत हिस्से में जन्म लिया"' .उनका मतलब था कि मोहनलाल को ठीक से मान्यता प्राप्त नहीं हुई और यहाँ उनकी क्षमता के हिसाब से उनका शोषण हुआ।
फ़िल्मोग्राफ़ी फ़िल्म
मोहनलाल फिल्मोग्राफी
मोहनलाल ने करीब 300 फिल्मों में अभिनय किया है और अब भी मलयालम, हिंदी, तेलुगु, तमिल और कन्नड़ भाषाओं में जारी है। उन्होंने 12 फिल्मों का निर्माण/सह निर्माण किया है।
इन्हें भी देखें
ब्रो डैडी
सन्दर्भ
बाहरी कड़ियाँ
0482320 Mohanlal
आधिकारिक वेबसाइट मोहनलाल द्वारा प्राधिकृत
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