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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

सत्येन्द्र दूबे

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सत्येन्द्र कुमार दूबे 1973 27 नवंबर 2003 (30 वर्ष की आयु में) गया, भारत हत्या भारतीय भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष और बलिदान भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय हिन्दू सत्येन्द्र कुमार दूबे का जन्म बिहार के सिवान जिले में हुआ था। वे भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण में परियोजना निदेशक के पद पर कार्यरत थे। सत्येन्द्र दूबे द्वारा स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना में व्याप्त भ्रष्टाचार को जनता के सामने लाये जाने के कारण उनकी हत्या 27 नवम्बर 2003 में गया जिले में हो गई थी। प्रारंभिक जीवन और शिक्षा सत्येन्द्र के पिता का नाम श्री बागेश्वरी दूबे और माता का नाम श्रीमती फूलमती देवी था। उनका जन्म बिहार प्रांत के सिवान जिले के शाहपुर ग्राम में हुआ था। मध्यम वर्गीय परिवार में जन्मे सत्येन्द्र ने 15 वर्ष की आयु तक की अपनी प्रारंभिक शिक्षा अपने गांव में ही प्राप्त की और उसके बाद आगे की शिक्षा के लिए इलाहाबाद चले आए। इलाहाबाद में इनका विद्यार्थी जीवन बड़ा ही संघर्षपूर्ण था। इसके पश्चात 1990 में इन्होंने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान के सिविल अभियांत्रिकी विभाग में प्रवेश लिया और 1994 में स्नातक की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके पश्चात इन्होंने काशी हिन्दू विश्वविद्यालय में परास्नातक में प्रवेश लिया और यह परीक्षा सम्मान के साथ उत्तीर्ण किया। बचपन से ही सत्येन्द्र की गणना प्रतिभाशाली विद्यार्थियों में होती थी। बाद का जीवन सत्येन्द्र ने भारतीय अभियांत्रिकी सेवा की परीक्षा उत्तीर्ण की जिसके परिणाम स्वरूप उन्हें सन् 2002 में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण में परियोजना निदेशक का पद मिला। इस पद पर काम करते समय उन्हें स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना में कार्य करने का मौका मिला। इस परियोजना में कार्य करते समय उन्हें बहुत बडे़ स्तर पर हो रहे भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमिताओं का पता चला। विभाग के ठेकेदारों और इंजिनियरों की साठ-गाठ से भ्रष्टाचार का धंधा खूब फल फूल रहा था। सत्येन्द्र ने अपने ही विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों और इंजीनियरों के खिलाफ कार्यवाही की और उन्हें निलंबित किया। भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष सत्येन्द्र ने इसके बाद भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मुहीम शुरू कर दी और अपने विभाग में हो रही दूसरी अनियमितताओं पर भी ध्यान केन्द्रित किया। उन्होंने इन अनियमितताओं के बारे में अपने विभाग के निदेशक और अन्य अधिकारियों को पत्र भी लिखा लेकिन किसी ने भी उनकी बातों पर ध्यान नहीं दिया। इन शिकायतों के परिणाम स्वरूप उनका स्थानांतरण गया जिले में कर दिया गया। गया जिले में भी उन्होंने अपनी भ्रष्टाचार के विरुद्ध मुहीम में कोई कमी नहीं आने दी। सत्येन्द्र को इन सभी के फलस्वरूप धमकियां भी मिली। प्रधानमंत्री को पत्र उच्च स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार को देखते हुए सत्येन्द्र ने इसकी शिकायत प्रधानमंत्री से करने का निर्णय लिया और एक विस्तृत पत्र लिखा। उस गोपनीय पत्र में सत्येन्द्र ने भ्रष्टाचार पर विधिवत प्रकाश डाला और उसे प्रधानमंत्री कार्यालय को भेज दिया। भ्रष्टाचार की गंभीरता को देखते हुए सत्येन्द्र ने उस पत्र में अपना नाम गोपनीय रखने का अनुरोध किया था। बाद में यह देखा गया कि सत्येन्द्र के अनुरोध के बाद भी कार्यालय अधिकारियों ने उस पत्र को सत्येन्द्र के नाम के साथ अलग अलग विभागों में अग्रसारित कर दिया। सत्येन्द्र की हत्या सत्येन्द्र की हत्या तब हो गई जब वे बनारस से एक विवाह समारोह के बाद घर लौट रहे थे। वे बनारस से गया तक ट्रेन द्वारा पहुंचे और उसके बाद गया स्टेशन से रिक्से द्वारा घर जाते समय रास्ते में गोली मार उनकी हत्या की गई। गया में जे.पी. कॉलोनी के रास्ते में उनका मृत शरीर पाया गया। सत्येन्द्र की मृत्यु ने लोक सभा तक को आंदोलित किया। देश में हो रहे विरोध प्रदर्शनों और सामान्य जनता के असंतोष को देखते हुए सरकार द्वारा उनकी मृत्यु की जांच केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंप दिया गया।http://news.bbc.co.uk/1/hi/world/south_asia/3306075.stm बी.बी.सी, 10 दिसम्बर 2003 19 अगस्त 2010 https://web.archive.org/web/20040726182942/http://news.bbc.co.uk/1/hi/world/south_asia/3306075.stm 26 जुलाई 2004 live भ्रष्टाचार के विरुद्ध आंदोलन सत्येन्द्र की हत्या से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर एक भूचाल आ गया। भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने वाली अन्य संस्थाओं ने इस मामले को उठाया। जिसके परिणामस्वरूप सरकार को नीतिगत स्तर पर भ्रष्टाचार को उजागर करने वाले लोगों की पहचान सुरक्षित रखने का नियम बनाना पड़ा। सत्येन्द्र के बलिदान का एक यह सबसे बड़ा परिणाम हुआ कि सरकारी विभागों के भ्रष्ट अधिकारी इमानदार लोगों से डरने लगे। बाद के वर्षों में आया सूचना का अधिकार अधिनियम इस दिशा में मील का एक पत्थर साबित हुआ। यह नियम भ्रष्टाचार को उजागर वाले व्यक्तियों के लिए एक हथियार साबित हुआ।http://www.indianexpress.com/story/243659.html इंडियन एक्सप्रेस में प्रकाशित 19 अगस्त 2010 https://web.archive.org/web/20080208025656/http://www.indianexpress.com/story/243659.html 8 फ़रवरी 2008 live सन्दर्भ वाह्य कड़ियां इंडियन एक्सप्रेस सत्येन्द्र दूबे सत्येन्द्र दूबे की जीवनी श्रेणी:भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के पूर्व छात्र श्रेणी:भारत में भ्रष्टाचार विरुद्ध आंदोलन श्रेणी:भारत में हत्याकांड श्रेणी:भारत के हत्याकांड