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411 समाचार
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प्राचीन भारतीय विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी

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प्राचीन भारतीय विज्ञान तथा तकनीक को जानने के लिये प्राचीन साहित्य और पुरातत्व का सहारा लेना पड़ता है। प्राचीन भारत का साहित्य अत्यन्त विपुल एवं विविधता सम्पन्न है। इसमें धर्म, दर्शन, भाषा, शिक्षा आदि के अतिरिक्त गणित, ज्योतिष, सैन्य विज्ञान, आयुर्वेद, रसायन, धातुकर्म, आदि भी वर्ण्यविषय रहे हैं।Meera nda Hindutva's science envy http://www.frontline.in/science-and-technology/hindutvas-science-envy/article9049883.ece Frontline 16 September 2016 14 October 2016 https://web.archive.org/web/20170717173246/http://www.frontline.in/science-and-technology/hindutvas-science-envy/article9049883.ece 17 जुलाई 2017 live विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में प्राचीन भारत के कुछ योगदान निम्नलिखित हैं-http://www.crystalinks.com/indiascience.html Science, Medicine, Technology in Ancient India 1 मई 2016 https://web.archive.org/web/20160505045024/http://www.crystalinks.com/indiascience.html 5 मई 2016 live https://sites.google.com/site/akhandshastra/home अखण्ड शास्त्र 14 सितंबर 2016 https://web.archive.org/web/20161011120556/https://sites.google.com/site/akhandshastra/home 11 अक्तूबर 2016 live गणित - वैदिक साहित्य शून्य के कांसेप्ट, बीजगणित की तकनीकों तथा कलन-पद्धति, वर्गमूल, घनमूल के कांसेप्ट से भरा हुआ है। खेल - शतरंज, लुडो, साँप-सीढ़ी एवं ताश के खेलों का जन्म प्राचीन भारत में ही हुआ। ललित कला - वेदों का पाठ किया जाता था जो सस्वर एवं शुद्ध होना आवश्यक था। इसके फलस्वरूप वैदिक काल में ही ध्वनि एवं ध्वनिकी का सूक्ष्म अध्ययन आरम्भ हुआ। ज्योतिष - खगोलविज्ञान - ऋग्वेद (2000 ईसापूर्व) में खगोलविज्ञान का उल्लेख है। भौतिकी - ६०० ईसापूर्व के भारतीय दार्शनिक ने परमाणु एवं आपेक्षिकता के सिद्धान्त का स्पष्ट उल्लेख किया है। रसायन विज्ञान - इत्र का आसवन, गन्दहयुक्त द्रव, वर्ण एवं रंजकों (dyes and pigments) का निर्माण, शर्करा का निर्माण आयुर्विज्ञान एवं आयुर्वेद - लगभग ८०० ईसापूर्व भारत में चिकित्सा एवं शल्यकर्म पर पहला ग्रन्थ का निर्माण हुआ था। सैन्य विज्ञान सिविल इंजीनियरी एवं वास्तुशास्त्र - मोहनजोदड़ो एवं हड़प्पा से प्राप्त नगरीय सभ्यता उस समय में उन्नत सिविल इंजीनियरी एवं आर्किटेक्चर के अस्तित्व को प्रमाणित करती है। यांत्रिक एवं वाहन प्रौद्योगिकी - यान-निर्माण एवं नौवहन (Shipbuilding & navigation) - संस्कृत एवं पालि ग्रन्थों में अनेक क्रियाकलापों के उल्लेख मिलते हैं। This ship in the Indian Navy is stitched together without any nails, using 5th-century techniques धातुकर्म - ग्रीक इतिहासकारों ने लिखा है कि चौथी शताब्दी ईसापूर्व में भारत में कुछ धातुओं का प्रगलन (स्मेल्टिंग) की जाती थी। प्राचीन भारत के प्रमुख शास्त्र प्राचीन समय में न आफसेट प्रिंटिंग की मशीने थीं, न स्क्रिन प्रिटिंग की मशीनें। न ही इंटरनेट था जहां किसी भी विषय पर असंख्य सूचनाएं उपलब्ध होती हैं। फिर भी प्राचीन काल के ऋषि-मुनियों ने अपने पुरुषार्थ, ज्ञान और शोध की मदद से कई शास्त्रों की रचना की और उसे विकसित भी किया। इनमें से कुछ प्रमुख शास्त्रों का विवेचन प्रस्तुत है- आयुर्वेदशास्त्र आयुर्वेद शास्त्र का विकास उत्तरवैदिक काल में हुआ। इस विषय पर अनेक स्वतंत्र ग्रंथों की रचना हुई। भारतीय परम्परा के अनुसार आयुर्वेद की रचना सबसे पहले ब्रह्मा ने की। ब्रह्मा ने प्रजापति को, प्रजापति ने अश्विनी कुमारों को और फिर अश्विनी कुमारों ने इस विद्या को इन्द्र को प्रदान किया। इन्द्र के द्वारा ही यह विद्या सम्पूर्ण लोक में विस्तारित हुई। इसे चार उपवेदों में से एक माना गया है। कुछ विद्वानों के अनुसार यह ऋग्वेद का उपवेद है तो कुछ का मानना है कि यह ‘अथर्ववेद’ का उपवेद है। आयुर्वेद की मुख्य तीन परम्पराएं हैं- भारद्वाज, धनवन्तरि और काश्यप। आयुर्वेद विज्ञान के आठ अंग हैं- शल्य, शालाक्य, कायचिकित्सा, भूतविधा, कौमारमृत्य, अगदतन्त्रा, रसायन और वाजीकरण। चरक संहिता, सुश्रुत संहिता, काश्यप संहिता इसके प्रमुख ग्रंथ हैं जिन पर बाद में अनेक विद्वानों द्वारा व्याख्याएं लिखी गईं। आयुर्वेद के सबसे महत्वपूर्ण ग्रन्थ चरकसंहिता के बारे में ऐसा माना जाता है कि मूल रूप से यह ग्रन्थ आत्रेय पुनर्वसु के शिष्य अग्निवेश ने लिखा था। चरक ऋषि ने इस ग्रन्थ को संस्कृत में रूपांतरित किया। इस कारण इसका नाम चरक संहिता पड़ गया। बताया जाता है कि पतंजलि ही चरक थे। इस ग्रन्थ का रचनाकाल ईं. पू. पांचवी शताब्दी माना जाता है। रसायनशास्त्र रसायनशास्त्र का प्रारंभ वैदिक युग से माना गया है। प्राचीन ग्रंथों में रसायनशास्त्र के ‘रस’ का अर्थ होता था-पारद। पारद को भगवान शिव का वीर्य माना गया है। रसायनशास्त्र के अंतर्गत विभिन्न प्रकार के खनिजों का अध्ययन किया जाता था। वैदिक काल तक अनेक खनिजों की खोज हो चुकी थी तथा उनका व्यावहारिक प्रयोग भी होने लगा था। परंतु इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा काम नागार्जुन नामक बौद्ध विद्वान ने किया। उनका काल लगभग 280-320 ई. था। उन्होंने एक नई खोज की जिसमें पारे के प्रयोग से तांबा इत्यादि धातुओं को सोने में बदला जा सकता था। रसायनशास्त्र के कुछ प्रसिद्ध ग्रंथों में एक है रसरत्नाकर। इसके रचयिता नागार्जुन थे। इसके कुल आठ अध्याय थे परंतु चार ही हमें प्राप्त होते हैं। इसमें मुख्यत: धातुओं के शोधन, मारण, शुद्ध पारद प्राप्ति तथा भस्म बनाने की विधियों का वर्णन मिलता है। प्रसिद्ध रसायनशास्त्री श्री गोविन्द भगवतपाद जो शंकराचार्य के गुरु थे, द्वारा रचित ‘रसहृदयतन्त्र’ ग्रंथ भी काफी लोकप्रिय है। इसके अलावा रसेन्द्रचूड़ामणि, रसप्रकासुधाकर रसार्णव, रससार आदि ग्रन्थ भी रसायनशास्त्र के ग्रन्थों में ही गिने जाते हैं। ज्योतिषशास्त्र ज्योतिष वैदिक साहित्य का ही एक अंग है। इसमें सूर्य, चन्द्र, पृथ्वी, नक्षत्र, ऋतु, मास, अयन आदि की स्थितियों पर गंभीर अध्ययन किया गया है। इस विषय में हमें ‘वेदांग ज्योतिष’ नामक ग्रंथ प्राप्त होता है। इसके रचना का समय 1200 ई. पू. माना गया है। आर्यभट्ट ज्योतिष गणित के सबसे बड़े विद्वान के रूप में माने जाते हैं। एक अनुमान के अनुसार इनका जन्म 476 ई. में पटना (कुसुमपुर) में हुआ था। मात्र 23 वर्ष की उम्र में इन्होंने ‘आर्यभट्टीय’ नामक प्रसिद्ध ज्योतिष ग्रंथ की रचना की। इस ग्रंथ में पूरे 121 श्लोक हैं। इसे चार खण्डों में बांटा गया है- गीतिकापाद, गणितपाद, कालक्रियापाद और गोलपाद। वराहमिहिर के उल्लेख के बिना तो भारतीय ज्योतिष की चर्चा अधूरी है। इनका समय छठी शताब्दी ई. के आरम्भ का है। इन्होंने चार प्रसिद्ध ग्रंथों की रचना की- पंचसिद्धान्तिका, वृहज्जातक, वृहद्यात्रा तथा वृहत्संहिता जो ज्योतिष को समझने में मदद करती हैं। गणितशास्त्र प्राचीन काल से ही भारत में गणितशास्त्र का विशेष महत्व रहा है। यह सभी जानते हैं कि शून्य एवं दशमलव की खोज भारत में ही हुई। यह भारत के द्वारा विश्व को दी गई अनमोल देन है। इस खोज ने गणितीय जटिलताओं को खत्म कर दिया। गणितशास्त्र को मुख्यत: तीन भागों में बांटा गया है। अंकगणित, बीजगणित और रेखागणित। वैदिक काल में अंकगणित अपने विकसित स्वरूप में स्थापित था। ‘यजुर्वेद’ में एक से लेकर 10 खरब तक की संख्याओं का उल्लेख मिलता है। इन अंकों को वर्णों में भी लिखा जा सकता था। बीजगणित का साधारण अर्थ है, अज्ञात संख्या का ज्ञात संख्या के साथ समीकरण करके अज्ञात संख्या को जानना। अंग्रेजी में इसे ही अलजेब्रा कहा गया है। भारतीय बीजगणित के अविष्कार पर विवाद था। कुछ विद्वानों का मानना था इसके अविष्कार का श्रेय यूनानी विद्वान दिये फान्तस को है। परंतु अब यह साबित हो चुका है कि भारतीय बीजगणित का विकास स्वतंत्र रूप से हुआ है और इसका श्रेय भारतीय विद्वान आर्यभट (446 ई.) को जाता है। रेखागणित का अविष्कार भी वैदिक युग में ही हो गया था। इस विद्या का प्राचीन नाम है- शुल्वविद्या या शुल्वविज्ञान। अनेक पुरातात्विक स्थलों की खुदाई में प्राप्त यज्ञशालाएं, वेदिकाएं, कुण्ड इत्यादि को देखने तथा इनके अध्ययन करने पर हम पाते हैं कि इनका निर्माण रेखागणित के सिद्धांत पर किया गया है। ब्रह्मस्फुट सिद्धांत, नवशती, गणिततिलक, बीजगणित, गणितसारसंग्रह, गणित कौमुदी इत्यादि गणित शास्त्र के प्रमुख ग्रन्थ हैं। कामशास्त्र भारतीय समाज में पुरुषार्थ का काफी महत्व है। पुरुषार्थ चार हैं- धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष। काम का इसमें तीसरा स्थान है। सर्वप्रथम नन्दी ने 1000 अध्यायों का ‘कामशास्त्र’ लिखा जिसे बाभ्रव्य ने 150 अध्यायों में संक्षिप्त रूप में लिखा। कामशास्त्र से संबंधित सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ है ‘कामसूत्र’ जिसकी रचना वात्स्यायन ने की थी। इस ग्रंथ में 36 अध्याय हैं जिसमें भारतीय जीवन पद्धति के बारे में बताया गया है। इसमें 64 कलाओं का रोचक वर्णन है। इसके अलावा एक और प्रसिद्ध ग्रंथ है ‘कुहनीमत’ जो एक लघुकाव्य के रूप में है। कोक्कक पंडित द्वारा रचित रतिरहस्य को भी बेहद पसंद किया जाता है। संगीतशास्त्र भारतीय परंपरा में भगवान शिव को संगीत तथा नृत्य का प्रथम अचार्य कहा गया है। कहा जाता है के नारद ने भगवान शिव से ही संगीत का ज्ञान प्राप्त किया था। इस विषय पर अनेक ग्रंथ प्राप्त होते हैं जैसे नारदशिक्षा, रागनिरूपण, पंचमसारसंहिता, संगीतमकरन्द आदि। संगीतशास्त्र के प्रसिद्ध आचार्यों में मुख्यत: उमामहेश्वर, भरत, नन्दी, वासुकि, नारद, व्यास आदि की गिनती होती है। भरत के नाटयशास्त्र के अनुसार गीत की उत्पत्ति जहां सामवेद से हुई है, वहीं यजुर्वेद ने अभिनय (नृत्य) का प्रारंभ किया। धर्मशास्त्र प्राचीन काल में शासन व्यवस्था धर्म आधारित थी। प्रमुख धर्म मर्मज्ञों वैरवानस, अत्रि, उशना, कण्व, कश्यप, गार्ग्य, च्यवन, बृहस्पति, भारद्वाज आदि ने धर्म के विभिन्न सिद्धांतों एवं रूपों की विवेचना की है। पुरुषार्थ के चारों चरणों में इसका स्थान पहला है। उत्तर काल में लिखे गये संग्रह ग्रंथों में तत्कालीन समय की सम्पूर्ण धार्मिक व्यवस्था का वर्णन मिलता है। स्मृतिग्रंथों में मनुस्मृति, याज्ञवल्कय स्मृति, पराशर स्मृति, नारदस्मृति, बृहस्पतिस्मृति में लोकजीवन के सभी पक्षों की धार्मिक दृष्टिकोण से व्याख्या की गई है तथा कुछ नियम भी प्रतिपादित किये गये हैं। अर्थशास्त्र चार पुरुषार्थो में अर्थ का दूसरा स्थान है। महाभारत में वर्णित है कि ब्रह्मा ने अर्थशास्त्र पर एक लाख विभागों के एक ग्रंथ की रचना की। इसके बाद शिव (विशालाक्ष) ने दस हजार, इन्द्र ने पांच हजार, बृहस्पति ने तीन हजार, उशनस ने एक हजार विभागों में इसे संक्षिप्त किया। अर्थशास्त्र के अंतर्गत केवल वित्त संबंधी चर्चा का ही उल्लेख नहीं किया गया है। वरन राजनीति, दण्डनीति और नैतिक उपदेशों का भी वृहद वर्णन मिलता है। अर्थशास्त्र का सबसे प्रसिद्ध ग्रंथ है कौटिल्य का अर्थशास्त्र। इसकी रचना चाणक्य ने की थी। चाणक्य का जीवन काल चतुर्थ शताब्दी के आस-पास माना जाता है। कौटिल्य अर्थशास्त्र में धर्म, अर्थ, राजनीति, दण्डनीति आदि का विस्तृत उपदेश है। इसे 15 अधिकरणों में बांटा गया है। इसमें वेद, वेदांग, इतिहास, पुराण, धार्मशास्त्र, अर्थशास्त्र, ज्योतिष आदि विद्याओं के साथ अनेक प्राचीन अर्थशास्त्रियों के मतों के साथ विषय को प्रतिपादित किया गया है। इसके अलावा अन्य महत्वपूर्ण ग्रंथ है कामन्दकीय नीतिसार, नीतिवाक्यामृत, लघुअर्थनीति इत्यादि। प्रौद्योगिकी ग्रन्थ 'भृगुशिल्पसंहिता' में १६ विज्ञान तथा ६४ प्रौद्योगिकियों का वर्णन है। इंजीनियरी प्रौद्योगिकियों के तीन 'खण्ड' होते थे। 'हिन्दी शिल्पशास्त्र' नामक ग्रन्थ में कृष्णाजी दामोदर वझे ने ४०० प्रौद्योगिकी-विषयक ग्रन्थों की सूची दी है, जिसमें से कुछ निम्नलिखित हैं- विश्वमेदिनीकोश, शंखस्मृति, शिल्पदीपिका, वास्तुराजवल्लभ, भृगुसंहिता, मयमतम्, मानसार, अपराजितपृच्छा, समरांगणसूत्रधार, कश्यपसंहिता, वृहतपराशरीय-कृषि, निसारः, शिगृ, सौरसूक्त, मनुष्यालयचंद्रिका, राजगृहनिर्माण, दुर्गविधान, वास्तुविद्या, युद्धजयार्णव। प्रौद्योगिकी से सम्बन्धित १८ प्राचीन संस्कृत ग्रन्थों में से 'कश्यपशिल्पम्' सर्वाधिक प्राचीन मानी जाती है। प्राचीन खनन एवं खनिकी से सम्बन्धित संस्क्रित ग्रन्थ हैं- 'रत्नपरीक्षा', लोहार्णणव, धातुकल्प, लोहप्रदीप, महावज्रभैरवतंत्र तथा पाषाणविचार। 'नारदशिल्पशास्त्रम' शिल्पशास्त्र का ग्रन्थ है। अन्य शास्त्र न्यायशास्त्र, योगशास्त्र, वास्तुशास्त्र, नाट्यशास्त्र, काव्यशास्त्र, अलंकारशास्त्र, नीतिशास्त्र आदि। प्राचीन भारतीय विद्याएँ/कलाएँ भारतीय तकनीकी ज्ञान का अनुमान प्राचीन साहित्य में वर्णित विद्याओं एवं कलाओं की सूचियों से स्पष्ट होता है। इनमें से कुछ नीचे दी गयीं हैं- अग्निकर्म - आग पैदा करना जलवाय्वग्निसंयोगनिरोधैः क्रिया - जल, वायु, अग्नि का संयोग, पृथक करना, नियंत्रण छेद्यम्‌ - भिन्न-भिन्न आकृतियां काट कर बनाना मणिभूमिका कर्म - गच में मणि बिठाना अनेकरूपाविर्भावकृतिज्ञानम्‌ - पत्थर, लकड़ी पर आकृतियां बनाना स्वर्णादीनान्तु यथार्थ्यविज्ञानम्‌ - स्वर्ण परीक्षण कृत्रिमस्वर्णरत्नादिक्रियाज्ञानम्‌ - नकली सोना, रत्न आदि बनाना रत्नानां वेधादिसदसज्ज्ञानम्‌ - रत्नों की परीक्षा, उन्हें काटना, छेदना मणिरागः - कीमती पत्थरों को रंगना स्वर्णाद्यलंकारकृतिः - सोने आदि का गहना बनाना लेपादिसत्कृतिः - मुलम्मा, पानी चढ़ाना तक्षकर्माणि - सोने चांदी के गहनों और बर्तन पर काम रूपम्‌ - लकड़ी, सोना आदि में आकृति बनाना धातुवादः - धातु शोधन व मिश्रण पाषाणधात्वादिदृतिभस्मकरणम्‌ - पत्थर, धातु गलाना तथा भस्म बनाना धात्वोषधीनां संयोगाक्रियाज्ञानम्‌ - धातु व औषध के संयोग से रसायन तैयार करना चित्रयोगा - विचित्र औषधियों के प्रयोग की जानकारी शल्यगूढ़ाहृतौ सिराघ्रणव्यधे ज्ञानम्‌ - शरीर में चुभे बाण आदि को निकालना दशनवसनागरागः - शरीर, कपड़े और दांतों पर रंग चढ़ाना वस्त्रराग - कपड़ा रंगना सूचीवानकर्माणि - सीना, पिरोना, जाली बुनना मृत्तिकाकाष्ठपाषाणधातुमाण्डादिसत्क्रिया - मिट्‌टी, लकड़ी, पत्थर के बर्तन बनाना पटि्‌टकावेत्रवानविकल्पाः - बेंत और बांस से वस्तुएं बनाना तक्षणम्‌ - बढ़ईगिरी/ वास्तुविद्या आवास निर्माण कला नौकारथादियानानां कृतिज्ञानम्‌ - नौका, रथ आदि वाहन बनाना जतुयन्त्रम्‌ - लाख के यंत्र बनाना घट्‌याद्यनेकयन्त्राणां वाद्यानां कृतिः - वाद्ययंत्र तथा पवनचक्की जैसी मशीन बनाना मधूच्छ्रिष्टकृतम - मोम का काम गंधयुक्ति - पदार्थों के मिश्रण से सुगंधि तैयार करना वेणुतृणादिपात्राणां कृतिज्ञानम्‌ - बांस, नरकुल आदि से बर्तन बनाना काचपात्रादिकरणविज्ञानम्‌ - शीशे का बर्तन बनाना लोहाभिसारशस्त्रास्त्रकृतिज्ञानम्‌ - धातु का हथियार बनाना वृक्षायुर्वेदयोगाः - वृक्ष चिकित्सा और उसे इच्छानुसार छोटा-बड़ा (बोनसाई?) करना वृक्षादिप्रसवारोपपालनादिकृतिः - बागवानी जलानां संसेचनं संहरणम् - जल लाना, सींचना सीराद्याकर्षणे ज्ञानम्‌ - जोतना आदि खेती का काम । प्राचीन भारतीय गणित, विज्ञान और प्रौद्योगिकी पर अनुसन्धान प्राचीन भारतीय ग्रन्थों में ऐसे ग्रन्थों की संख्या लाखों में है जिनका सम्बन्ध धर्म या आध्यात्म से न होकर मानव के दैनन्दिन जीवन तथा उससे जुड़े गणित, विज्ञान और प्रौद्योगिकी से है। इसी तथ्य को देखते हुए कई संस्थानों ने इस दिशा में अनुसन्धान कार्य आरम्भ किया है। मई २०१८ में आई आई टी खडगपुर ने एक ऐसा ही पाठ्यक्रम आरम्भ किया है।https://www.thebetterindia.com/139934/iit-kharagpur-course-ancient-india-modern-science/ IIT Kharagpur Is Connecting The Dots Between Ancient India And Modern Science! 26 मई 2018 https://web.archive.org/web/20180527023556/https://www.thebetterindia.com/139934/iit-kharagpur-course-ancient-india-modern-science/ 27 मई 2018 live सन्दर्भ ग्रन्थ प्रियंका चौहान वैदिक वाड्मय में विज्ञान और प्रौद्योगिकी http://www.amazon.in/Vedic-Wandmaya-vigyan-prodhogiki-Hindi/dp/8179774430/ref=sr_1_1?ie=UTF8&qid=1461729862&sr=8-1&keywords=priyanka+chohan 2012 बरेली: प्रकाश बुक डिपो 978-8179774434 सन्दर्भ इन्हें भी देखें भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का इतिहास प्राचीन भारत के वैज्ञानिक भारतीय गणितज्ञ सूची भारतीय गणित रसविद्या आयुर्वेद धनुर्वेद वैमानिक शास्त्र भारतीय स्थापत्यकला बाहरी कड़ियाँ संस्कृत के तकनीकी शब्द भारत का वैज्ञानिक चिन्तन (प्राचीन एवं मध्यकालीन भारत की वैज्ञानिक उपलब्धियों को प्रकाशित करता हिन्दी चिट्ठा) Math, Science, and Technology in India: From the Ancient to the Recent (Dr Roddam Narasimha) A brief introduction to technological brilliance of Ancient India (इण्डियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंटिफिक हेरिटेज) प्राचीन भारत के वैज्ञानिक कर्णधार (गूगल पुस्तक ; लेखक - स्वामी सत्यप्रकाश सरस्वती) प्राचीन भारत में रसायन का विकास (गूगल पुस्तक; लेखक - स्वामी सत्यप्रकाश सरस्वती) भारतीय वैज्ञानिक (गूगल पुस्तक ; लेखक - के एल एम श्रीवास्तव) गणित शास्त्र के विकास की भारतीय परम्परा (गूगल् पुस्तक ; लेखक - सुद्युम्न आचार्य) भारत और विश्व विज्ञान - कहॉं है हमारा स्थान? e-Anveshan attempt to explore great Indian ancient sciences Advanced Scientific Concepts in Hindu Literature (Hindu wisdom) Science and Technology in Ancient India (Dr VS Prasad's blog) Ancient India's Contribution to Our World's Material (Temporal) Culture भारत में गणित का इतिहास प्राचीन भारत में भौतिकी विश्व को भारत की वैज्ञानिक देन (स्टार न्यूज एजेंसी) History of the Physical Sciences in India कौटिल्य के अर्थशास्त्र में सैन्य विज्ञान Science and Technology in Ancient India India: Science and technology, U.S. Library of Congress. Pursuit and promotion of science: The Indian Experience, Indian National Science Academy. आश्चर्यचकित करतीं हैं भारतीय भट्ठियाँ (पाञ्चजन्य ; डॉ ओम प्रभात अग्रवाल) जैनधर्म में विज्ञान (गूगल पुस्तक ; नारायण लाल कछारा) भारत में भौतिक विज्ञानों का इतिहास (संचिका) PRIDE OF INDIAसितंबर 2021 InternetArchiveBot (A Glimpse into India's Scientific Heritage) - २१० पृष्ट का विस्तृत विवरण हमारे पूर्वजों की उपलब्धियां : एक नजर में (हिन्दी में) Landmarks of Science in Early India Bibliography: sourced from "Science and Technology in Ancient India" article -- प्राचीन भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर शोधपत्रों का संकलन श्रेणी:विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी