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411 समाचार
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सत्यभूषण वर्मा

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सत्यभूषण वर्मा satyabhushan.jpg 200px 4 दिसंबर, 1932 रावलपिंडी, ब्रिटिश भारत 13 जनवरी, 2005 नई दिल्ली, भारत अध्यापक, लेखक, कवि भारतीय हिन्दी एवं जापानी कविता और अनुवाद सामाजिक भारतीय हाइकू आंदोलन के प्रणेता जापानी हिन्दी शब्दकोश http://www.amazon.in/Books-Satya-Bhushan-Verma/s?ie=UTF8&page=1&rh=n%3A976389031%2Cp_27%3ASatya%20Bhushan%20Verma जापानी हिन्दी शब्दकोश पुस्तक का विवरण 18 अप्रैल 2016 https://web.archive.org/web/20160425130004/http://www.amazon.in/Books-Satya-Bhushan-Verma/s?ie=UTF8&page=1&rh=n%3A976389031%2Cp_27%3ASatya%20Bhushan%20Verma 25 अप्रैल 2016 dead जापानी हाइकू कविता से http://www.abhivyakti-hindi.org/sansmaran/2005/satyabhushanverma.htm हाइकु कविताओं के देश में 18 अप्रैल 2016 https://web.archive.org/web/20160117033807/http://www.abhivyakti-hindi.org/sansmaran/2005/satyabhushanverma.htm 17 जनवरी 2016 dead डॉ॰ सत्यभूषण वर्मा (जन्म: 4 दिसम्बर 1932 रावलपिंडी मृत्यु:13 जनवरी 2005 दिल्ली), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय दिल्ली में जापानी भाषा के पहले प्रोफेसर थे। हिन्दी हाइकु का भारत में प्रचार-प्रसार करने में उनकी बड़ी भूमिका रही है। योगदान डॉ॰ सत्यभूषण वर्मा ने जापानी से सीधे हिन्दी में हाइकु कविताओं के अनुवाद किए। इससे पहले जो अनुवाद हाइकु कविताओं के किए गए वे सभी जापानी से अंग्रेजी उसके बाद अंग्रेजी से हिन्दी में किये जाते थे। १९७८ में उन्होंने भारतीय हाइकु क्लब की स्थापना की तथा फरवरी ७८ से अगस्त ८६ तक प्रकाशित 'हाइकु' के २६ अंकों ने हिन्दी ही नहीं अन्य भारतीय भाषाओं में भी हाइकु सृजन को आन्दोलन का स्वरूप प्रदान करने की आधार पीठिका तैयार की। जापान और वहाँ की संस्कृति उनके रोम-रोम में बसी थी और वर्ष में चार छ: जापान यात्राएँ उनकी नियमितचर्या का हिस्सा थीं। जापान से भारत आने वाले तथा भारत से जापान जाने वाले विभिन्न महत्वपूर्ण प्रतिनिधि मण्डलों में प्रो॰ वर्मा की हिस्सेदारी किसी न किसी रूप में अवश्य होती थी। वे सही अर्थों में भारत और जापान के बीच सांस्कृतिक सेतु की तरह थे और उनकी इसी छवि का संज्ञान लेते हुए वर्ष १९९६ में जापान सम्राट की ओर से नई दिल्ली में उन्हें 'दि आर्डर ऑफ राइजिंग सन: गोल्ड रेज विद रोसेट' नामक महत्वपूर्ण सम्मान से सम्मानित किया गया था। "मार्च 1974 में प्रोफेसर सत्य भूषण वर्मा ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में अपना कार्यभार संभाला। वे जेएनयू के भाषा स्कूल (SLL&CS) के अंतर्गत तत्कालीन 'सेंटर ऑफ अफ्रीकन एण्ड एशियन लेंग्वेजेज्ज' (CA&AL) के जापानी विभाग के मूल संस्थापक और चेयरमैन (Founder Chairman) थे। उनके ही प्रयासों से मार्च 1974 में भारत में पहली बार जापानी भाषा का पूर्णकालिक स्नातक (B.A. Honours) कोर्स शुरू किया गया। वर्तमान में जेएनयू के जापानी अध्ययन केंद्र (Centre for Japanese Studies - CJS) और जापानी भाषा शिक्षक संघ (JALTAI) के रूप में विख्यात इस पूरे शैक्षणिक ढांचे की नींव प्रोफेसर वर्मा ने ही रखी थी। वे 3 दिसंबर 1997 को जेएनयू से सेवानिवृत्त हुए। उनकी स्मृति में जेएनयू और JALTAI द्वारा हर वर्ष प्रतिष्ठित 'प्रोफेसर एस.बी. वर्मा मेमोरियल लेक्चर' का आयोजन किया जाता है। इंटरनेशनल मैन ऑफ द ईयर (1996/1997): शिक्षा और समाज के क्षेत्र में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए इंग्लैंड के कैम्ब्रिज स्थित 'इंटरनेशनल बायोग्राफिकल सेंटर' (IBC) द्वारा उन्हें वर्ष 1996/1997 के लिए 'इंटरनेशनल मैन ऑफ द ईयर' के रूप में चयनित किया गया था।एशिया - मेन एंड वूमेन ऑफ अचीवमेंट (2002): मलयेशिया के प्रतिष्ठित बायोग्राफिकल संस्थान 'रेगुएर्डन' द्वारा उनकी उल्लेखनीय जीवन उपलब्धियों को 'Asia - Men & Women of Achievement' की विशिष्ट जीवनी सूची में स्थायी रूप से शामिल किया गया।सेक्युलर इंडिया हारमोनी अवार्ड (1997): राष्ट्रीय अखंडता और सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए 'यूनाइटेड चिल्ड्रन्स मूवमेंट' द्वारा उन्हें प्रतिष्ठित 'सेक्युलर इंडिया हारमोनी अवार्ड-1997' से विभूषित किया गया था।अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मेलन (1990): अगस्त 1990 में मॉरीशस के महात्मा गांधी संस्थान में आयोजित 'छठे अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मेलन' में उन्होंने भारत की ओर से मुख्य प्रतिनिधि (Delegate) के रूप में भाग लिया था।" अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक आमंत्रण एवं 'ओमानी खंजर' सम्मान (1997/2001): प्रोफेसर वर्मा के वैश्विक शैक्षणिक प्रभाव के कारण उन्हें कई देशों से विशेष आमंत्रण मिले। मार्च 1997 में मॉस्को (रूस) के प्रसिद्ध 'मैक्सिम गोर्की इंस्टीट्यूट ऑफ लिटरेचर एंड क्रिएटिव राइटिंग' द्वारा उन्हें अनुवादकों और रूसी लेखकों के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में शामिल होने का न्यौता दिया गया। इसके अतिरिक्त, वर्ष 2001 में 'ओमान-जापान फ्रेंडशिप एसोसिएशन' (मस्कट, ओमान) के सेक्रेटरी जनरल के निमंत्रण पर उन्होंने ओमान की यात्रा की, जहाँ भारत, ओमान और जापान के सांस्कृतिक संबंधों पर विशेष चर्चा हुई। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान उनके उच्च शैक्षणिक कद के सम्मान में ओमान सरकार द्वारा उन्हें ओमान का सर्वोच्च सांस्कृतिक और शाही प्रतीक 'ओमानी खंजर' (Omani Khanjar) स्मृति चिह्न के रूप में सादर भेंट किया गया था। बहुभाषी विद्वत्ता: प्रोफेसर सत्य भूषण वर्मा केवल हिंदी और जापानी के ही नहीं, बल्कि कुल 11 भारतीय और विदेशी भाषाओं (जापानी, चीनी, रूसी, अंग्रेजी, अरबी, जर्मन, हिंदी, संस्कृत, बंगाली, पंजाबी और उर्दू) के असाधारण ज्ञाता (Polyglot) थे।" Look East: A new son rises पूरब की ओर देखो: एक नए सूरज का उदय हुआ है en दि हिन्दू http://www.thehindu.com/thehindu/mp/2002/09/19/stories/2002091900140300.htm 18 अप्रैल 21016 https://web.archive.org/web/20040116031735/http://www.thehindu.com/thehindu/mp/2002/09/19/stories/2002091900140300.htm 16 जनवरी 2004 live हाइकू इन इंडिया https://web.archive.org/web/20160425152409/http://shinku.nichibun.ac.jp/jpub/pdf/jr/IJ0302.pdf 25 अप्रैल 2016 (अँग्रेजी में) भारत में हाइकु की प्रस्तावना भारत में हाइकु कविता के प्रचार-प्रसार में उनकी महत्वपूर्ण और अत्यन्त उपयोगी भूमिका तथा दीर्घकालिक योगदान के लिए उन्हें दिसम्बर २००२ में जापान में हाइकु कविता के अन्तर्राष्ट्रीय सम्मान मासाओका शिकी अंतर्राष्ट्रीय हाइकु पुरस्कार से भी पुरस्कृत किया गया था। जापानी के साथ-साथ चीनी, उडिया, बाँगला, अंग्रेजी, हिन्दी आदि कई भाषाओं के विद्वान प्रो॰ वर्मा ने स्वयं हाइकु सृजन नहीं किया, लेकिन सीधे जापानी से भारतीय भाषाओं में हाइकु के अनुवाद का अत्यन्त महत्वपूर्ण कार्य करते हुए उन्होंने इस विधा से भारतीय रचनाकारों का साक्षात्कार कराया। उससे पूर्व हाइकु अंग्रेजी अनुवादों के माध्यम से ही लोगों तक पहुँचा था और उसकी कोई स्पष्ट छवि, शिल्प या दर्शन सुनिश्चित नहीं था। उनकी पुस्तक 'जापानी हाइकु और आधुनिक हिन्दी कविता' ने उनके हाइकु मिशन को पूरा करने में अत्यन्त महत्वूर्ण योगदान किया। उससे पूर्व उनकी अनूदित पुस्तक 'जापानी कविताएँ' वर्ष १९७७ में ही प्रकाशित हो चुकी थी। जापान में प्रकाशित पहले जापानी हिन्दी शब्दकोश की रचना करके उन्होंने दोनों भाषाओं के बीच एक सुदृढ़सेतु के निर्माण का भी उल्लेखनीय कार्य किया। अनुवाद के क्षेत्र में किए गए उनके कार्यों को अत्यन्त सम्मान से याद किया जाता है। प्रो॰ वर्मा भारत में हाइकु सम्बन्धी हर गतिविधि के केन्द्र १३ जनवरी २००५ को अपनी मृत्यु के ठीक पूर्व तक बने रहे। १९८८ में उनके द्वारा निर्मित हाइकु केन्द्रित लघु वृत्त चित्र 'स्माल इज़ द ब्यूटीफुल' विधा के लिए उनका एक अन्यतम योगदान रहा, जिसे जापान में पुरस्कृत भी किया गया था। उनकी प्रतिबद्धता और उनके प्रयासों का ही परिणाम था कि मेरठ तथा लखनऊ विश्वविद्यालयों में हाइकु केन्द्रित शोध हुए तथा अन्य कई विश्वविद्यालयों ने हाइकु को शोध के लिए चुना। 1991-92 में कोयातो जापान स्थित इण्टरनेशनल रिसर्च सेण्टर फॉर जापानीज़ स्टडीज़ के विजिटिंग प्रोफेसर रहे। http://www.worldhaiku.net/poetry/eng/india/verma_files/verma.html Dr. Satya Bhushan Verma,World Haiku Association [[हिन्दी]]: डॉ॰ सत्यभूषण वर्मा, वर्ल्ड हाइकू एसोसियेशन 18 जून 2013 https://web.archive.org/web/20130917223202/http://www.worldhaiku.net/poetry/eng/india/verma_files/verma.html 17 सितंबर 2013 dead She has earned laurels for writing poems in Haiku style वे हाइकू शैली में कविताएं लिखने के लिए ख्याति अर्जित की है en टाइम्स ऑफ इंडिया http://timesofindia.indiatimes.com/city/patna/She-has-earned-laurels-for-writing-poems-in-Haiku-style/articleshow/4401669.cms 18 अप्रैल 21016 https://web.archive.org/web/20160629024612/http://timesofindia.indiatimes.com/city/patna/She-has-earned-laurels-for-writing-poems-in-Haiku-style/articleshow/4401669.cms 29 जून 2016 live निधन डॉ. वर्मा की 13 जनवरी 2005 को नई दिल्ली में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई। उनके परिवार में उनकी पत्नी और पुत्र हैं। पुस्तकें जापानी-हिन्दी शब्दकोश (आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰: 8176463825,आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰-13:9788176463829) जापानी हाइकु और आधुनिक हिन्दी कविताhttp://ec2-50-16-192-254.compute-1.amazonaws.com/japani-haiku-aur-adhunik-hindi-kavita-dr-satyabhushan-verma-book-9788128804977 जापानी हाइकु और आधुनिक हिन्दी कविता पुस्तक की जानकारी 2 मई 2016 https://web.archive.org/web/20160701194056/http://ec2-50-16-192-254.compute-1.amazonaws.com/japani-haiku-aur-adhunik-hindi-kavita-dr-satyabhushan-verma-book-9788128804977 1 जुलाई 2016 dead http://rsaudr.org/show_artical.php?&id=4386 प्रो. सत्यभूषण वर्मा का प्रदेय एवं हाइकु की विकास-यात्रा के सोपान 18 अप्रैल 2016 https://web.archive.org/web/20160509142643/http://rsaudr.org/show_artical.php?&id=4386 9 मई 2016 dead जापानी कविताएँ http://kavitakosh.org/kk/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80_%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8_%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%80_%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80_%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%90%E0%A4%82 हिन्दी साहित्य में स्थान बनाती जापानी विधाऐं 18 अप्रैल 2016 https://web.archive.org/web/20160417075030/http://www.kavitakosh.org/kk/%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%80_%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82_%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8_%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%80_%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%80_%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%90%E0%A4%82 17 अप्रैल 2016 dead सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ डॉ॰ सत्यभूषण वर्मा का चित्र एवम उनसे सम्बन्धित जानकारी हाइकु: भारतीय परिप्रेक्ष्य में हाइकु कविता के ध्वजावाहक प्रो॰ सत्यभूषण वर्मा: कमलेश भट्ट कमल श्रेणी: लेखक श्रेणी:कवि श्रेणी:अनुवादक