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सत्य रानी चड्ढा
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सत्य रानी चड्ढा (1933 ई० - 1 जुलाई 2014) एक महिला अधिकार कार्यकर्ता थीं। उन्होंने 1980 के दशक में अपने साथी कार्यकर्ता शाहजहां आपा के साथ मिलकर भारत में दहेज विरोधी आंदोलन आरम्भ किया था। ये दोनों महिलाएं ऐसी माताएँ थीं जिनकी बेटियों को दहेज के लिये मार दिया गया था। इन्होंने दशकों तक न्याय के लिए और भारत में दहेज प्रथा को समाप्त करने के लिये सरकार द्वारा प्रभावी कदम उठाने के लिए अभियान चलाया।https://www.anokhimedia.com/remembering-satya-rani-chadha-the-face-of-indias-anti-dowry-movement/ Remembering Satya Rani Chadha: The Face Of India's Anti-Dowry Movement - ANOKHI MEDIA 2014-07-14 ANOKHI MEDIA 2018-05-25 en-US 28 अगस्त 2018 https://web.archive.org/web/20180828023657/https://www.anokhimedia.com/remembering-satya-rani-chadha-the-face-of-indias-anti-dowry-movement/ deadhttps://www.livemint.com/Specials/ltOkZTJF9pkky8dWh8NarO/Satya-Rani-Chadha-The-face-of-Indias-antidowry-movement.html Satya Rani Chadha: The face of India's anti-dowry movement 2 July 2014 Namita Bhandare Livemint 24 May 2018 उन्होंने मिलकर "शक्ति शालिनी" नामक संगठन बनाया जो दिल्ली स्थित एक महिला अधिकार संगठन है और दहेज से संबंधित और लिंग आधारित हिंसा का मुकाबला करता है।https://sheroes.com/articles/celebrating-women-who-fought-the-much-needed-fight-against-dowry/NDI0Nw== Celebrating Women Who Fought The Much Needed Fight Against Dowry sheroes.com 2018-05-25 सत्य रानी चड्ढा को नीरजा भनोट पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। http://archive.indianexpress.com/news/battle-won-for-daughter-in-34yr-dowry-fight/1089618/ Battle won for daughter in 34-yr dowry fight 18 May 2018 Abantika Ghosh Indian Express 24 May 2018https://books.google.com/books?id=G4oDbma2Y0MC&pg=PA37 Women, Security, South Asia: A Clearing in the Thicket Farah Faizal Swarna Rajagopalan 3 October 2005 SAGE Publications 978-0-7619-3387-8 37– 24 May 2018https://books.google.com/books?id=hwanDAAAQBAJ&pg=PT32 Nine Degrees of Justice: New Perspectives on Violence against Women in India Bishakha Datta 31 December 2012 Zubaan 978-93-81017-34-0 32– 24 May 2018https://books.google.com/books?id=TSmZY__8QX8C&pg=PA25 Struggle for Gender Justice: Justice Sunanda Bhandare Memorial Lectures Murlidhar C. Bhandare Penguin Books India 2010 978-0-670-08426-5 25– 24 May 2018https://books.google.com/books?id=ahJbDwAAQBAJ&pg=PT243 Empowerment of Women for Promoting Health and Quality of Life Snehendu B. Kar 18 May 2018 Oxford University Press 978-0-19-938468-6 243– 24 May 2018
बेटी शशिबाला की हत्या और न्याय के लिए संघर्ष
1979 में, सत्य रानी चड्ढा की बीस वर्षीया बेटी, शशि बाला (जिसे कंचनबाला के नाम से भी जाना जाता है) की घर पर रहते हुए गंभीर रूप से जलने से मृत्यु हो गई। वस्तुतः यह ससुराल वालों द्वारा दुल्हन को जला कर मारने की घटना थी। उस समय शशिबाला के विवाह को एक वर्ष भी नहीं हुए थे और वह छह महीने की गर्भवती थी।https://www.theglobeandmail.com/news/world/after-34-years-a-measure-of-justice-in-india/article11729701/ After 34 years, a measure of justice in India 2018-05-25 उसके पति के परिवार वाले स्कूटर, टेलीविजन और रेफ्रिजरेटर आदि की मांग कर रहे थे जिसे सत्य रानी चड्ढा पूरा करने में असमर्थ थीं। फिर भी उन्होंने टेलीविजन के लिए कुछ पैसे दिये एवं रेफ्रिजरेटर भी दिया। फिर भी, उनकी बेटी की मृत्यु से दो दिन पहले, चड्ढा के दामाद सुभाष चंद्र ने उन्हें चेतावनी दी कि अगर बाकी स्कूटर की मांग पूरी नहीं की गई तो उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। सुभाष चन्द्र ने इस बात को स्वीकार नहीं किया कि वह शशिबाला को जलाकर मारने में शामिल है। लेकिन दहेज की मांग के अपूर्ण होने के कारण उनकी बेटी की हत्या का संदेह करते हुए, सत्य रानी ने इस घटना को हत्या के रूप में प्रस्तुत किया।https://www.theglobeandmail.com/news/world/after-34-years-a-measure-of-justice-in-india/article11729701/ After 34 years, a measure of justice in India 6 May 2013 STEPHANIE NOLEN The Globe and Mail 24 May 2018https://indiankanoon.org/doc/53595650/ Delhi High Court Subhash Chandra vs State on 7 March, 2013 Indian Kanoon 24 May 2018
पुलिस ने बुनियादी सबूत इकट्ठा करने में लापरवाही की और सुभाष चंद्र पर हत्या का नहीं, बल्कि दहेज निषेध अधिनियम के तहत अपराध का मुकद्दमा दर्ज किया। इसके कारण सर्वोच्च न्यायालय ने 1980 में फैसला सुनाया कि चूंकि सुभाष चंद्र की स्कूटर की मांग विवाह के दस महीने बाद आई थी, इसलिए इसे मौत से नहीं जोड़ा जा सकता। सत्य रानी ने इस मुकदमे की पैरवी जारी रखी, लेकिन अदालत में मामले की सुनवाई सन २००० के पहले नहीं हो पायी। अन्ततः सुभाष चंद्र को सन 2000 में 'आत्महत्या के लिए उकसाने' के आरोप में दोषी ठहराया गया। अपील पर 2013 में उनकी दोषसिद्धि को बरकरार रखा गया और उसे सात वर्ष का कारावास का दण्ड मिला।
शशिबाला का पति गिरफ्तारी से बचकर फरार हो गया पुलिस उसे कभी गिरफ्तार ही नहीं कर सकी। बाद में कुछ कानूनी तकनीकी बिंदुओं पर वह दोषसिद्ध नहीं हो पाया।
84 वर्ष की आयु में वर्ष 2014 में सत्यरानी चढ्ढा का निधन हो गया ।सत्यरानी चढ्ढा : दहेज विरोधी आंदोलन का मुखर चेहरा
सन्दर्भ
श्रेणी:२०१४ में निधन
श्रेणी:1929 में जन्मे लोग