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मेरी जंग

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मेरी जंग मेरी जंग.jpg मेरी जंग का पोस्टर सुभाष घई एन एन सिप्पी जावेद अख्तर अनिल कपूरमीनाक्षी शेषाद्रिनूतनजावेद जाफ़रीअमरीश पुरीपरीक्षत साहनी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल 1985 8 11 164 मिनट भारत हिन्दी मेरी जंग 1985 में बनी हिन्दी भाषा की फ़िल्म है। इस फ़िल्म का निर्देशन सुभाष घई ने किया है। एन एन सिप्पी इस फ़िल्म के निर्माता हैं। यह 11 अगस्त 1985 में सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई थी। इसमें अनिल कपूर मुख्य भूमिका में हैं। अन्य कलाकारों में मीनाक्षी शेषाद्रि, नूतन, अमरीश पुरी, जावेद जाफ़री (अपनी पहली फिल्म में), ए.के. हंगल, इफ़्तिखार, खुशबू और परीक्षत साहनी है। संक्षेप यह कहानी एक निम्न-मध्यम वर्गीय परिवार की है। जिसमें अरुण शर्मा (अनिल कपूर) 8 वर्ष का बालक और उनकी बहन कोमल वर्मा (खुशबू) 5 वर्ष की बालिका है। उनकी माता (नूतन) और पिता (गिरीश कर्नाड) हैं। वह सभी मिलकर शांति भरी जिंदगी जीते रहते हैं। उसके माता पिता उन्हें एक गाना "ज़िंदगी हर कदम एक नई जंग है, जीत जाएँगे हम, जीत जाएँगे हम तू अगर संग है' सिखाते हैं। जिससे वह जीवन में आने वाले सभी परेशानी का मुक़ाबला कर सकें। अरुण के पिता को एक झूठे मृत्यु के प्रकरण में फंसा लिया जाता है। उसे वकील जीडी ठकराल (अमरीश पुरी) गुनहगार साबित कर देता है। उसे न्यायालय फांसी की सजा दे देता है। जब उसके पति को फांसी हो जाती है तो उसकी पत्नी दिमागी रूप से सदमे में आ जाती है। बाद में अरुण को पता चलता है की ठकराल ने कानून तोड़ कर यह प्रकरण जीता था और उसके पिता को सजा दिलाई थी। अरुण के घर और सामान को बेच दिया गया। इसके बाद वह कहीं जाकर एक सफल वकील बनने की कोशिश करने लगा। वह ठकराल के सभी प्रकरण को अच्छी तरह से अध्ययन करता था। ताकि भविष्य में उसे हरा सके। एक दिन गीता श्रीवास्तव (मीनाक्षी शेषाद्री) उसके पास अपनी बहन के प्रकरण को लाती है। डॉ आशा माथुर (बीना) जिस पर एक मरीज को दवाई के द्वारा मारने का आरोप लगा होता है। पहले अरुण मना कर देता है। लेकिन जब गीता उसे वही बात कहती है जो उसके माँ ने कही थी। तो वह मान जाता है। वह आशा माथुर से मिलने पुलिस थाना जाता है। वह बताती है कि एक दिन उसके पास अस्पताल से कॉल आया था। आईसीयू में एक मरीज है। इसके बाद लेकिन उसके आते समय किसी ने दवाई कि बोतल की जगह विष रख दिया था। जिसके कारण मरीज कि मौत हो गई। आशा माथुर के पति दिनेश माथुर (परीक्षत साहनी) इस प्रकरण के लिए ठकराल से मिलते हैं। लेकिन वह मना कर देता है। अरुण दिनेश माथुर से मिलता है और कहता है कि वह इस प्रकरण को लड़ेगा। वह उससे विष के प्रभाव और समय के बारे में पूछता है। उसे पता लगता है कि इससे 2 से 15 मिनट में ही मौत हो सकती है। यह शरीर के प्रतिरोधक क्षमता पर निर्भर करता है। प्रकरण शुरू होता है। इसके बाद विपक्ष का वकील बताता है कि इस मरीज की मौत जहर के कारण ही हुई है। उसके बाद अरुण कहता है कि इसमें जहर नहीं है। इसे सत्यापित करने हेतु वह स्वयं ही जहर पी लेता है। न्यायालय गीता कि बहन को बेकसूर कहता है। माथुर उसे अस्पताल ले जाता है। तब यह पता चलता है कि वह जहर था और कुछ ही समय से उसकी जान बची है। डॉ माथुर उसे अपने घर में उसके काम के लिए एक खाली चेक देता है। लेकिन अरुण उसे नहीं लेता। अरुण को वहाँ एक पियानो मिलता है जो उसके बचपन के समय का होता है। वह उसके बदले में उस पियानो को मांगता है। वह उसे पियानो दे देता है और उससे उसकी कहानी बताने के लिए कहता है। वह कहता है कि पिता के मृत्यु के पश्चात उसने कभी अपनी माँ को नहीं देखा। ठकराल का बेटा विक्रम अरुण कि बहन कोमल को जाल में फँसाने के लिए चाल चलता है। उसे पता चलता है कि उसकी बहन भी उसी महाविद्यालय में पढ़ती है। वह उसे अपने नृत्य और अन्य प्रतिभाओं से पटाता है। उसकी यह चाल काम करती है और कोमल उससे प्यार करने लगती है। वह उसे भागने के लिए कहता है। जिससे उसके भाई कि इज्ज़त गिर जाये। लेकिन उस समय विक्रम कि एक पूर्व प्रेमिका विक्रम का वास्तविक चेहरा सामने ला देती है। विक्रम अपनी पूर्व प्रेमिका कि हत्या कर देता है जो माथुर परिवार कि गवाह होती है। एक दिन माथुर अरुण के घर पर उसकी माँ की तस्वीर देखता है। वह अरुण को उसके बारे में बताता है कि वह जीवित है। उसे ठीक करने हेतु वह उसे अपने घर ले आता है। वह उसे ज़िंदगी हर कदम नामक गाना सुनता है। जल्द ही वह समय भी आ जाता है जब अरुण ठकराल के विरुद्ध प्रकरण लड़ता है। ठकराल अपने बेटे को बचाने के लिए उसकी माँ का अपहरण कर लेता है। अरुण और ठकराल के मध्य लड़ाई के दौरान ठकराल द्वारा उसके मित्र के बेटे पर गोली चल जाती है। इसके बाद उसे और उसके बेटे को जेल हो जाती है। अपने बेटे को न बचाने के कारण वह पागल हो जाता है। मुख्य कलाकार अभिनेता / अभिनेत्री चरित्र अनिल कपूर अरुण वर्मा गिरीश कर्नाड दीपक वर्मा खुशबू कोमल नूतन आरती, अरुण और कोमल की मां मीनाक्षी शेषाद्री गीता श्रीवास्तव अमरीश पुरी जी. डी. ठकराल जावेद जाफ़री विक्रम ठकराल (विकी) ए के हंगल वकील गुप्ता विजू खोटे अरुण वर्मा का सहायक बीना बैनर्जी डॉ. आशा माथुर परीक्षत साहनी डॉ. दिनेश माथुर प्रदीप रावत सरकारी वकील संगीत संगीतकार - लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल गीतकार - आनंद बख्शी # शीर्षक गायक 1 "जिंदगी हर कदम" लता मंगेशकर, नितिन मुकेश 2 "जिंदगी हर कदम एक नई जंग है" - 1 लता मंगेशकर, शब्बीर कुमार 3 "बोल बेबी बोल रॉक-एन-रोल" किशोर कुमार, जावेद जाफ़री, एस जानकी 4 "हे मेरे ख्वाबों के शहजादे" अनुराधा पौडवाल 5 "जिंदगी हर कदम एक नई जंग है" - 2 लता मंगेशकर 6 "झूम ले झूम ले" लक्ष्मीकांत कुडलकर, सुभाष घई नामांकन और पुरस्कार फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार - अमरीश पुरी फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री पुरस्कार - नूतन सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ 0084324 मेरी जंग श्रेणी:1985 में बनी हिन्दी फ़िल्म श्रेणी:लक्ष्मीकांत–प्यारेलाल द्वारा संगीतबद्ध फिल्में