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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

अघोरनाथ चट्टोपाध्याय

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अघोरनाथ चट्टोपाध्याय (1851-1915) एक भारतीय शिक्षाविद् और समाज सुधारक थे। History of Modern Telangana Bhukya Bhangi 2017 Orient Black Swan 9789386689887 First Hyderabad 43 डीएससी (डॉक्टर ऑफ साइंस) की डिग्री हासिल करने वाले पहले भारतीय थे । वे हैदराबाद के निज़ाम कॉलेज के पहले प्रिंसिपल बने। https://edglobal.egnyte.com/dl/ClrbYc2ppd/ Aghorenath Chattopadhyay edglobal.egnyte.com The University of Edinburgh 2020-09-03 । प्रख्यात कवि और भारतीय राजनीतिक कार्यकर्ता सरोजिनी नायडू उनकी सबसे बड़ी बेटी थीं। जीवन परिचय अघोरनाथ का जन्म ब्रामनगाँव, बिक्रमपुर बंगाल प्रेसीडेंसी में हुआ था। ढाका कॉलेजिएट स्कूल में अपनी प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद, उन्होंने उच्च अध्ययन के लिए गिलक्रिस्ट छात्रवृत्ति पर यूनिवर्सिटी ऑफ़ एडिनबर्ग जाने से पहले कोलकाता के प्रेसीडेंसी कॉलेज में साढ़े तीन साल बिताए। Sarojini Naidu: The Nightingale and the Freedom Fighter Kumar Anu 2014 Hachette Book 978935009816-5 Gurgaon, India 10-12 उन्होंने अपनी पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया और होप पुरस्कार और बैक्सटर छात्रवृत्ति प्राप्त की। http://uncover-ed.org/aghorenath-chattopadhyay/ Aghorenath Chattopadhyay-UncoverED Rangarajan Uttara uncover-ed.org The University of Edinburgh 2020-09-03 8 जनवरी 2020 https://web.archive.org/web/20200108192221/http://uncover-ed.org/aghorenath-chattopadhyay/ dead https://archive.org/details/sarojininaidubio00padm/page/n8/mode/1up Sarojini Naidu: A Biography Sengupta Padmini 1966 Asia Publishing House New York 12-19 हैदराबाद राज्य के निज़ाम से, वहाँ की शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने का निमंत्रण स्वीकार करके अघोरनाथ पत्नी के साथ हैदराबाद पहूंचा। उन्होंने एक अंग्रेजी माध्यम स्कूल से शुरुआत की। निज़ाम के समर्थन से उन्होंने हैदराबाद कॉलेज की स्थापना की और उस काॅलेज का पहला प्रिंसिपल बने जो बाद में निज़ाम कॉलेज बन गया। बाद में उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय के एक भाग के रूप में महिलाओं के लिए एक कॉलेज शुरू करने के प्रयास भी किए। उन्होंने हैदराबाद राज्य में विशेष विवाह अधिनियम 1872 को लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो पहले से ही ब्रिटिश भारत में प्रचलन में था। अघोरनाथ हैदराबाद के बुद्धिजीवियों के साथ सामाजिक राजनीतिक और साहित्यिक विषयों पर बहस की। इस समय के आसपास अघोरनाथ भी राजनीति में शामिल हो गएAutobiography of a Bengali Chemist Ray Prafulla Chandra Orient Book Company 1958 Calcutta 107। चंदा रेल परियोजना पर निजाम के साथ उनका मतभेद हुआ और नाराज निजाम ने उन्हें नौकरी से निलंबित कर दिया और 20 मई 1883 को हैदराबाद से बाहर निकाल दिया Sarojini Naidu: A Biography Sengupta Padmini Asia Publishing House 1966 New York 16।https://api.parliament.uk/historic-hansard/commons/1883/jul/09/railways-india-the-nizams-territory Railways (India)-The Nizam's territory and Chanda Railway(Hansard ) Deb HC 1883-07-09 api.parliament.uk https://web.archive.org/web/20210928112021/https://api.parliament.uk/historic-hansard/commons/1883/jul/09/railways-india-the-nizams-territory 28 सितंबर 2021 2020-09-10 dead । हालाँकि कुछ साल बाद उन्हें वापस बुला लिया और नौकरी भी वापस कर दिया गया। 1894 में अघोरनाथ की पुत्री सरोजिनी को इंग्लैंड में अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाने के लिए छात्रवृत्ति निजाम ने ही प्रदान की Sarojini Naidu: A Biography Sengupta Padmini Asia Publishing House 1966 New York 27। हैदराबाद में वापस आने के बाद अघोरनाथ ने अपनी राजनीतिक सक्रियता जारी रखी और इसलिए उन्हें जल्दी रिटायर होने और कोलकाता स्थानांतरित करने के लिए मजबूर किया गया। उन्होंने और उनकी पत्नी वरदा सुंदरी देवी ने कोलकाता लौटे और लवलॉक स्ट्रीट में धर लेलिया ।1915 जनुवरि 28 को उनका निधन हुआSarojin Naidu: A Biography Sengupta Padmini Asia Publishing House 1966 New York 91। सन्दर्भ श्रेणी:१९१५ में निधन श्रेणी:बंगाली लोग