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411 समाचार
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लोकायुक्त

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लोकायुक्त (लोक + आयुक्त) भारत के राज्यों द्वारा गठित भ्रष्टाचाररोधी संस्था है। इसका गठन स्कैंडिनेवियन देशों में प्रचित 'अंबुड्समैन' (Ombudsman) की तर्ज पर किया गया था। लोकायुक्त का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है। 2018 में संसोधन द्वारा 8 वर्ष किया गया,जिसे 2019 में पुनः संसोधन द्वारा 8 से 5 वर्ष किया गया। लोकायुक्त को निर्वाचित प्रतिनिधियों, सरकारी कर्मचारियों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के कर्मचारियों सहित सार्वजनिक अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और कुप्रबंधन के आरोपों की जांच और मुकदमा चलाने का अधिकार है। लोकायुक्त के पास गवाहों को बुलाने, जांच करने और जिरह करने और भ्रष्ट आचरण के दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश करने की शक्ति है। लोकायुक्त अधिनियम उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के परामर्श से प्रदेश के राज्यपाल द्वारा लोकायुक्त की नियुक्ति का प्रावधान करता है और कार्यालय की योग्यता और कार्यकाल निर्धारित करता है। लोकायुक्त अधिनियम का उद्देश्य शासन में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना और राज्य के नागरिकों को सार्वजनिक सेवाओं की कुशल डिलीवरी सुनिश्चित करना है। लोकायुक्त राज्यों में लोक सेवकों के खिलाफ भ्रष्टाचार और कुशासन के आरोपों की जांच के लिए जिम्मेदार है। लोकायुक्त का उद्देश्य सरकार के कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देना और यह सुनिश्चित करना है कि लोक सेवक नागरिकों के सर्वोत्तम हित में कार्य करें। लोकायुक्त अधिनियम भ्रष्टाचार से प्रभावी ढंग से निपटने और सरकारी कामकाज में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था। यह कार्यालय भ्रष्टाचार, रिश्वतखोरी या सत्ता के दुरुपयोग के आरोपों के लिए सरकारी अधिकारियों और राजनेताओं के खिलाफ की गई शिकायतों की जांच करता है। लोकायुक्त के पास किसी भी सरकारी अधिकारी या लोक सेवक को पूछताछ के लिए बुलाने, किसी भी रिकॉर्ड का निरीक्षण करने और यहां तक कि यदि आवश्यक हो तो तलाशी और बरामदगी करने की शक्ति है। लोकायुक्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश भी कर सकता है, जिसमें दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ पद से हटाने और आपराधिक मुकदमा चलाने की भी सिफारिश की जा सकती है। लोकायुक्त अधिनियम के तहत कोई भी व्यक्ति भ्रष्टाचार या कदाचार के संदेह में किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ लोकायुक्त में शिकायत दर्ज करा सकता है। यह अधिनियम लोकायुक्त को यह भी अनुमति देता है कि यदि उसे लगता है कि विश्वसनीय सूचना के आधार पर जांच आवश्यक है तो वह स्वत: संज्ञान लेकर जांच शुरू कर सकता है। सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार को रोकने के लिए लोकायुक्त अधिनियम को एक प्रभावी कानून के रूप में व्यापक रूप से सराहा गया है। लोकायुक्त भ्रष्टाचार के कई मामलों का पर्दाफाश करने में सफल रहा है।हालांकि, प्रभावी ढंग से मामलों की जांच और मुकदमा चलाने के लिए लोकायुक्त के पास उपलब्ध संसाधनों और बुनियादी ढांचे की कमी के बारे में चिंता जताई गई है। भ्रष्टाचार को रोकने के लिए लोकायुक्त अधिनियम की प्रभावशीलता पर भी बहस हुई है। लोकायुक्त एक महत्वपूर्ण भ्रष्टाचार विरोधी संस्था है जो सरकारी कामकाज में भ्रष्टाचार से निपटने में सफल रहा है। इन्हें भी देखें लोकपाल बाहरी कड़ियाँ दिल्ली सरकार के लोकायुक्त का जालस्थल श्रेणी:भ्रष्टाचार