Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

भरथरी

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

भारतीय ऐतिहासिक लोककथाओं में राजा भरथरी बहुत प्रसिद्ध है। भरथरी या संस्कृत के महान् कवि भर्तृहरि को गोरख वंश के योगियों में गिना जाता है। इनकी कहानियाँ बंगाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, छत्तीसगढ़, राजस्थान में लोकप्रिय है। छतीसगढ़ राज्य में रामायण, महाभारत, श्रीमद्भागवद्गीता की तरह ही भरथरी चरित भी काफी प्रचलित है। यह कथा गांवों में बुजुर्गों के मुख से पीढ़ी दर पीढ़ी स्थानांतरित हो रही है। भर्तृहरि की कथा के कम से कम दो रूप मिलते हैं- (१) एक कथा यह है कि भर्तृहरि की पत्नी पिंगला जब किसी और पुरुष से प्यार करने लगती है तब भरथरी सन्यासी बनकर राज्य छोड़कर दूर चले जाते हैं। (२) दूसरी कथा पहली कथा के उल्टी है। रानी पिंगला पति से बेहद प्रेम करती है। राजा भर्तृहरि एक बार शिकार खेलने गए थे। उन्होंने वहाँ देखा कि एक पत्नी ने अपने मृत पति की चिता में कूद कर अपने प्राण त्याग दिए। राजा भरथरी बहुत ही आश्चर्यचकित हुए और सोचने लगे कि क्या मेरी रानी भी मुझसे इतना प्यार करती है। अपने महल में वापस आकर राजा भरथरी जब ये घटना रानी पिंगला से कहते हैं तो पिंगला कहती है कि वह तो यह समाचार सुनने से ही मर जाएगी। चिता में कूदने के लिए भी वह जीवित नहीं रहेगी। राजा भरथरी सोचते हैं कि वे रानी पिंगला की परीक्षा लेकर देखेंगे कि ये बात सच है या नहीं। फिर से भरथरी शिकार खेलने जाते हैं और वहाँ से समाचार भेजते हैं कि राजा भरथरी की मृत्यु हो गई। ये खबर सुनते ही रानी पिंगला मर जाती है। राजा भरथरी बिल्कुल टूट जाते है, अपने आप को दोषी ठहराते हैं और विलाप करते हैं। पर गोरखनाथ की कृपा से रानी पिंगला जीवित हो जाती है और इस घटना के बाद राजा भरथरी गोरखनाथ के शिष्य बनकर चले जाते हैं। समाधी: बाबा भर्तृहरि की पूज्य समाधि राजस्थान के अलवर जिले में अरावली पर्वत श्रेणी में स्थित है। जहां पर प्रतिवर्ष भाद्रपद मास की शुक्ल अष्टमी को लक्खी मेला लगता है। इन्हें भी देखें भर्तृहरि भरथरी लोकगाथा भरथरी गायन बाहरी कडियाँ भरथरी लोकगाथा श्रेणी:हिन्दू सन्त श्रेणी:भारतीय राजा श्रेणी:लोक गायन