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भारतीय ज्ञान प्रणाली में अनुवाद
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सामान्य परिचय
भारत एक बहुसंस्कृति वाला देश है। भारतीय संस्कृति की जड़ बहुत प्राचीन है, साथ ही इनमें विविधता के तत्व भी भरे पड़े हैं । इन विविधताओं में एकता स्थापित करने का कार्य अनुवाद के माध्यम से हुआ हैं । अनुवाद संस्कृति सेतु का कार्य करती है। अनुवाद कला-मर्मज्ञों का कहना है कि अनुवाद एक ऐसा कौशल का पर्याय है जो "एक प्रतीक-व्यवस्था द्वारा अभिव्यक्त अर्थ को दूसरी प्रतीक-व्यवस्था के द्वारा अभिव्यक्त करता है।"अनुवाद: सिद्धांत और प्रयोग जी. गोपीनाथ 1985 इलाहाबाद 9 इनके माध्यम से ही संस्कृति को संरक्षित रखा गया और ज्ञान परंपरा एक सुदीर्घ राह पर आगे बढ़ सका। जब हम भारतीय ज्ञान प्रणाली की बात करते हैं तो इतिहास के सबसे पुरातन विचार हमारे स्मृति पटल पर गूंज उठती हैं जिसकी प्रासंगिकता वर्तमान दौर में भी बनी हुई है। जैसे कि ऋग्वेद में लिखा है कि "भद्रायां सुमतौ यतेम" अर्थात हम उस ज्ञान के लिए प्रयास करें जो सभी को कल्याण की ओर ले जाए। https://iksindia.org/about.phpजुलाई 2026 InternetArchiveBot वर्तमान समय में उभरती वैश्विक विभीषिका के मध्य भारतीय ज्ञान प्रणाली का वृहद वैश्विक क्षितिज पर फैलना वैश्विक शांति के लिए अपरिहार्य हैं। और यह कार्य तभी क्रियान्वित हो पाएगा जब हम विश्व के अन्य भाषा में इसका अनुवाद करें। हालाँकि हम यहाँ भारतीय ज्ञान प्रणाली में अनुवाद किस तरह व्याप्त रहा है उसकी बात करेंगे।
भारतीय ज्ञान प्रणाली का विस्तार
भारत में ज्ञान परंपरा बहुत ही प्राचीन है। यह किसी नदी कि तरह प्रवाहमान है, जो वेद से प्रारंभ होकर उपनिषद और श्री अरविन्दों तक सतत रूप से प्रवाहमान रहा हैं, ज्ञान और (Jnana), तर्कशीलता और वैचारिक अन्वेषण प्रणाली के केंद्र में रहा हैं। India's Rebirth Arbindo sri 1905 14 भारतीय ज्ञान प्रणाली एक समृद्ध और विविधतापूर्ण इतिहास रखती है। इसके वृत में पारंपरिक ज्ञान, स्वदेशी ज्ञान, आदिवासियों द्वारा संरक्षित ज्ञान और अन्य स्थानीय समुदायों के द्वारा संरक्षित ज्ञान को शामिल करते हैं।बघेल डॉ। प्रदीप सिंह भारतीय ज्ञान परंपरा https://peoplesuniversity.edu.in/pu-uploads/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%AF-%E0%A4%9C%E0%A5%8D%E0%A4%9E%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BE-(%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%A4%20%E0%A4%AA%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%9A%E0%A4%AF).pdf भारतीय ज्ञान प्रणाली मौखिक माध्यम से संरक्षित हुआ है। जैसा कि भर्तृहरि ने कहा है कि ज्ञान हमारे अन्तर्जगत के द्वारा गठित होती है। इस प्रक्रिया में पहले हमारे इंद्रियों के द्वारा सूचना प्राप्त होती है फिर मस्तिष्क और बुद्धि उसका संश्लेषण करता है, तब जाकर ज्ञान का गठन होता है। जो हमारे चित्त को प्रभावित करती है । Indian Knowledge System Vol 1 Kapoor, Singh Kapil Avadhesh Kumar 2005 812460334 Shimla 12 एफ. मैक्समुलर ने लिखा है कि वर्तमान जो ऋग्वेद है वह कोई पांडुलिपि या ताम्रलेखन से संरक्षित नहीं है बल्कि मौखिक परंपरा के द्वारा इसे सहेज गया है, सबसे आश्चर्य की बात तो यह है कि यह कोई सिद्धांत या अवधारणा कि बात न करके तथ्य कि बात करता है। IN his India What can it teach us Manoharlal Munshiram 1991 Delhi 4 संक्षिप्त रूप से भारतीय ज्ञान प्रणाली के अंतर्गत शामिल विचार, दर्शन और ज्ञान के लिखित और मौखिक परंपरा निम्न है :-