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411 समाचार
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शृंखला की कड़ियाँ

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शृंखला की कड़ियाँ Shrinkhala.jpg 120px मुखपृष्ठ महादेवी वर्मा राधाकृष्ण प्रकाशन 1942 हिंदी भारत गद्य साहित्य निबंध लेख संग्रह HB-01889 शृंखला की कड़ियाँ महादेवी वर्मा के समस्या मूलक निबंधों का संग्रह है। स्त्री-विमर्श इनमें प्रमुख हैं। डॉ॰ हृदय नारायण उपाध्याय के शब्दों में, "आज स्त्री-विमर्श की चर्चा हर ओर सुनाई पड़ रही है। महादेवी ने इसके लिए पृष्ठभूमि बहुत पहले तैयार कर दी थी। सन्‌ १९४२ में प्रकाशित उनकी कृति शृंखला की कड़ियाँ सही अर्थों में स्त्री-विमर्श की प्रस्तावना है, जिसमें तत्कालीन सामाजिक परिस्थितियों में नारी की दशा, दिशा एवं संघर्षों पर महादेवी ने अपनी लेखनी चलायी है।" http://www.sahityakunj.net/LEKHAK/H/HridyaNarayanUpadhyay/mahadevi_verma_divy_anubhutiyon.htm महादेवी वर्मा: दिव्य अनुभूतियों की निर्धूम दीपशिखा 10 जुलाई 2007 एचटीएम साहित्य कुंज https://web.archive.org/web/20071008100011/http://www.sahityakunj.net/LEKHAK/H/HridyaNarayanUpadhyay/mahadevi_verma_divy_anubhutiyon.htm 8 अक्तूबर 2007 dead इसमें ऐसे निबंध संकलिक किये गये हैं जिनमें भारतीय नारी की विषम परिस्थिति को अनेक दृष्टि-बिन्दुओं से देखने का प्रयास किया गया है। http://www.pustak.org/bs/home.php?bookid=3273 शृंखला की कड़ियाँ 10 जुलाई 2007 पीएचपी पुस्तक डॉट ऑर्ग https://web.archive.org/web/20070927015221/http://www.pustak.org/bs/home.php?bookid=3273 27 सितंबर 2007 dead युद्ध और नारी नामक लेख में उन्होंने युद्ध स्त्री और पुरुष के मनोविज्ञान पर गंभीर, वैश्विक और मौलिक चिंतन व्यक्त किया है। इसी प्रकार नारीत्व और अभिशाप में वे पौराणिक प्रसंगों का विवरण देते हुए आधुनिक नारी के शक्तिहीन होने के कारणों की विवेचना करती हैं। http://www.sahityakunj.net/LEKHAK/M/MadhuSandhu/Mahdevi_verma_aur_naari_vimarsh.htm गद्यकार महादेवी वर्मा और नारी विमर्श 10 जुलाई 2007 एचटीएम साहित्यकुंज https://web.archive.org/web/20071011134811/http://www.sahityakunj.net/LEKHAK/M/MadhuSandhu/Mahdevi_verma_aur_naari_vimarsh.htm 11 अक्तूबर 2007 dead thumb|left|100px|अंग्रेज़ी अनुवाद का मुखपृष्ठ पुस्तक से कुछ पंक्तियाँ- ‘‘भारतीय नारी जिस दिन अपने सम्पूर्ण प्राण-आवेग से जाग सके, उस दिन उसकी गति रोकना किसी के लिए सम्भव नहीं। उसके अधिकारों के सम्बन्ध में यह सत्य है कि वे भिक्षावृत्ति से न मिले हैं, न मिलेंगे, क्योंकि उनकी स्थिति आदान-प्रदान योग्य वस्तुओं से भिन्न है। समाज में व्यक्ति का सहयोग और विकास की दिशा में उसका उपयोग ही उसके अधिकार निश्चित करता रहता है। किन्तु अधिकार के इच्छुक व्यक्ति को अधिकारी भी होना चाहिए। सामान्यतः भारतीय नारी में इसी विशेषता का अभाव मिलेगा। कहीं उसमें साधारण दयनीयता और कहीं असाधारण विद्रोह है, परंतु संतुलन से उसका जीवन परिचित नहीं।..."वर्मा महादेवी शृंखला की कड़ियाँ राधाकृष्ण प्रकाशन नई दिल्ली, भारत HB-01889 editor: 10 जुलाई 2007 सोहनी नीरा कुकरेजा द्वारा इसका अंग्रेज़ी अनुवाद लिंक्स इन द चेन नाम से किया गया है।http://www.gobookshopping.com/bookdetails.asp?bookid=217061 लिंक्स इन द चेन 10 जुलाई 2007 एएसपी गो बुक्श शॉपिंग अंग्रेज़ी https://web.archive.org/web/20070726092542/http://www.gobookshopping.com/bookdetails.asp?bookid=217061 26 जुलाई 2007 live सन्दर्भ श्रेणी:साहित्य श्रेणी:गद्य श्रेणी:महादेवी वर्मा श्रेणी:हिन्दी साहित्य