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दशम ग्रंथ का इतिहास
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अंगूठाकार|दशम ग्रंथ का निर्माण
दशम ग्रंथ को गुरु गोबिंद सिंह ने छोटी-छोटी पुस्तिकाओं के रूप में अलग-अलग समय पर रचा या सम्कलित किया था। दशम ग्रन्थ में से कुछ सिख मंगलाचरण हैं। गुरुजी के ही जीवनकाल में दशम ग्रंथ की पहली संयुक्त पांडुलिपियाँ बनाई गई थीं।Dasam Granth re-examined: an examination of the textual history with reference to key authors and commentators https://etheses.bham.ac.uk/id/eprint/4285/ यह भी कहा जाता है कि 1708 के बाद, दशम ग्रंथ को मणि सिंह खालसा द्वारा संकलित किया गया था और यह माता सुंदरी के प्रत्यक्ष निर्देश के तहत अन्य खालसा सैनिकों के योगदान से तैयार किया गया था। इस खंड को श्री दशम ग्रंथ साहिब के रूप में मान्यता प्राप्त है (मणि सिंह के एक पत्र के अनुसार) । वर्तमान समय के दशम ग्रंथ में जप साहब, अकाल उश्तत, बचितर नाटक, चंडी चरित उक्ति बिलास, चंडी चरित्र द्वितीय, चंडी दी वार, ज्ञान प्रबोध, चौबीस अवतार, रुद्र अवतार, 33 सवैये, खालसा महिमा, षष्ठी नाम माला पुराण, अथ पख्-यान चरित लिख्यते और जफरनामा शामिल हैं।
सन्दर्भ
श्रेणी:दशम ग्रंथ
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