411 REFERENCE · Wikipedia
देवनागरी
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
देवनागरी Devanagari letters.svg आबूगीदा अपभ्रंश, अवधी, भीली, भोजपुरी, बोड़ो, ब्रज, छत्तीसगढ़ी, डोगरी, गढ़वाली, हरियाणवी, हिंदी, हिंदुस्तानी, कश्मीरी, कोंकणी, कुमाऊँनी, मगही, मैथिली, मराठी, मारवाड़ी, बंजारा भाषा, मुंडारी, नेपाल (नेवारी), नेपाली, पालि, पहाड़ी, प्राकृत, राजस्थानी, सादरी (नागपुरी), संस्कृत, संताली, सराइकी, शेरपा, सिंधी, सूरजापुरी तथा अन्य और 11वीं शताब्दी ई. – वर्तमान *
मिस्री चित्रलिपिHimelfarb, Elizabeth J. "First Alphabet Found in Egypt", Archaeology 53, Issue 1 (January/February 2000): 21. आदि-सीनाईsem ब्राह्मी लिपि का सीनाई मूल पूरी दुनिया में नहीं माना जाता है। फ़ोनीशियाईsem अरामीSalomon 1996 378Salomon Richard On The Origin Of The Early Indian Scripts: A Review Article. Journal of the American Oriental Society 115.2 (1995), 271–279 https://indology.info/papers/salomon/ 27 March 2021 https://web.archive.org/web/20190522210705/https://www.indology.info/papers/salomon/ dead 22 May 2019sem ब्राह्मी गुप्त सिद्धमDaniels P.T. Language in South Asia https://archive.org/details/languageinsoutha0000unse January 2008 Cambridge University Press 9780521786539 B. Kachru Cambridge 285–308 Writing systems of major and minor languages 10.1017/CBO9780511619069.017 Y. Kachru S. SridharMasica Colin The Indo-Aryan languages 1993 143 नागरी नन्दिनागरीकैथीगुजरातीमोड़ी U+0900–U+097F Devanagari,U+A8E0–U+A8FF Devanagari Extended,U+11B00–11B5F Devanagari Extended-A,U+1CD0–U+1CFF Vedic Extensions Deva बाएँ से दाएँ
right|thumb|300px|देवनागरी लिपि में लिखी ऋग्वेद की पांडुलिपि।
देवनागरी लिपि भारतीय उपमहाद्वीप में प्रयुक्त एक प्रमुख लिपि है। इसका उपयोग मुख्य रूप से हिंदी, मराठी, संस्कृत, पालि, नेपाली, कोंकणी, मैथिली और बोड़ो जैसी भाषाओं को लिखने के लिए किया जाता है। कुछ अन्य भाषाएँ, जैसे सिंधी और पंजाबी, सीमित या वैकल्पिक रूप में भी देवनागरी में लिखी जाती हैं। यह लिपि प्राचीन ब्राह्मी लिपि पर आधारित है और बाएँ से दाएँ लिखी जाने वाली एक आबूगीदा प्रकार की लेखन प्रणाली है।https://scriptsource.org/cms/scripts/page.php?item_id=script_detail_use&key=Deva ScriptSource - Devanagari (Nagari) scriptsource.org 2022-05-21
देवनागरी लिपि में अधिकतम 52 अक्षर हो सकते हैं, जिनमें लगभग 14 स्वर और 38 व्यंजन शामिल हैं। यह संख्या भाषाओं पर निर्भर करती है (हिंदी में 11 स्वर व 33 मूल व्यंजन)। स्वर और व्यंजन के अतिरिक्त कई संयुक्त व्यंजन (ligatures) और आधुनिक ध्वनियाँ जैसे क़, ख़, ग़, ज़, फ़, ड़, ढ़ आदि भी प्रयोग में आते हैं।। यह लिपि आज 100 से अधिक भाषाओं को लिखने के लिए प्रयुक्त होती है। देवनागरी का विकास ब्राह्मी से होकर गुप्त लिपि और नागरी लिपि के माध्यम से हुआ। इसका स्पष्ट और नियमित उपयोग लगभग 7वीं शताब्दी ईस्वी से देखा जाता है।
इस लिपि की संरचना ध्वन्यात्मक है, अर्थात इसके अक्षर सामान्यतः भाषा के उच्चारण को दर्शाते हैं। रोमन लिपि के विपरीत देवनागरी में अक्षरों के बड़े और छोटे रूप (uppercase–lowercase) नहीं होते। देवनागरी की एक प्रमुख विशेषता अक्षरों के ऊपर चलने वाली क्षैतिज रेखा है, जिसे शिरोरेखा कहा जाता है।
देवनागरी लिपि का रूप सामान्यतः चौकोर ढाँचे और संतुलित गोल आकृतियों के कारण पहचाना जाता है। देखने में यह अन्य भारतीय लिपियों, जैसे पूर्वी नागरी लिपि और गुरमुखी लिपि, से अलग दिखाई देती है, किंतु इन लिपियों के साथ इसकी कई संरचनात्मक समानताएँ भी हैं क्योंकि इनका विकास भी प्राचीन ब्राह्मी परंपरा से ही हुआ है।
वर्तमान समय में देवनागरी का उपयोग मुख्यतः हिंदी, मराठी, संस्कृत, पालि, नेपाली, कोंकणी, मैथिली और बोड़ो जैसी भाषाओं को लिखने के लिए किया जाता है। इसके अतिरिक्त कुछ अन्य भाषाओं के लिए भी इसका सीमित या वैकल्पिक उपयोग किया जाता है, तथा ककबरक के लिए देवनागरी के उपयोग का प्रस्ताव भी दिया गया है।
परिचय
अधिकतर भाषाओं की तरह देवनागरी भी बाएँ से दाएँ लिखी जाती है। प्रत्येक शब्द के ऊपर एक रेखा खिंची होती है (कुछ वर्णों के ऊपर रेखा नहीं होती), जिसे शिरोरेखा कहते हैं। देवनागरी का विकास ब्राह्मी लिपि से हुआ है। यह एक ध्वन्यात्मक लिपि है, जो वर्तमान समय में प्रचलित लिपियों (रोमन, अरबी, चीनी आदि) में सबसे अधिक वैज्ञानिक मानी जाती है। इससे वैज्ञानिक और व्यापक लिपि शायद केवल अंतर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला (अंध्वव) है। भारत की कई लिपियाँ देवनागरी से बहुत मिलती-जुलती हैं, जैसे बांग्ला, गुजराती, गुरमुखी आदि। कंप्यूटर प्रोग्रामों की सहायता से भारतीय लिपियों का परस्पर परिवर्तन बहुत आसान हो गया है।
भारतीय भाषाओं के किसी भी शब्द या ध्वनि को देवनागरी लिपि में ज्यों का त्यों लिखा जा सकता है, और फिर लिखे पाठ को लगभग ‘हू-ब-हू’ उच्चारण किया जा सकता है। यह रोमन लिपि और अन्य कई लिपियों में सामान्यतः संभव नहीं होता, जब तक कि उनका विशेष मानकीकरण न किया जाए, जैसे आइट्राँस, हंटेरियन या अंतर्राष्ट्रीय संस्कृत लिप्यंतरण वर्णमाला।
इसमें कुल 52 अक्षर हैं, जिनमें लगभग 14 स्वर और 38 व्यंजन शामिल हैं। यह संख्या भाषाओं पर निर्भर करती है। अक्षरों की क्रम-विन्यास भी बहुत वैज्ञानिक है। स्वर, व्यंजन, कोमल–कठोर, महाप्राण और अल्पप्राण, अनुनासिक्य–अंतस्थ–उष्म आदि वर्गीकरण भी वैज्ञानिक हैं।
भारत तथा एशिया की अनेक लिपियों के संकेत देवनागरी से अलग हैं, लेकिन उच्चारण और वर्णक्रम आदि देवनागरी के समान हैं, क्योंकि वे सभी ब्राह्मी लिपि से उत्पन्न हुई हैं (उर्दू को छोड़कर)। इसलिए इन लिपियों का परस्पर लिप्यंतरण आसानी से किया जा सकता है। देवनागरी लेखन की दृष्टि से सरल, सौंदर्य की दृष्टि से सुंदर और वाचन की दृष्टि से सुपाठ्य है।
देवनागरी शब्द की व्युत्पत्ति
देवनागरी या नागरी नाम का प्रयोग "क्यों" प्रारंभ हुआ और इस का व्युत्पत्तिपरक प्रवृत्तिनिमित्त क्या था, यह अब तक पूर्णतः निश्चित नहीं है।
(क) 'नागर' अपभ्रंश या गुजराती 'नागर' ब्राह्मणों से उस का संबंध बताया गया है परंतु दृढ़ प्रमाण के अभाव में यह मत संदिग्ध है।
(ख) दक्षिण में इसका प्राचीन नाम "नंदिनागरी" था। हो सकता है कि "नंदिनागर" कोई स्थानसूचक हो और इस लिपि का उस से कुछ संबंध रहा हो।
(ग) यह भी हो सकता है कि "नागर" जन इस में लिखा करते थे, अत: "नागरी" अभिधान पड़ा और जब संस्कृत के ग्रंथ भी इस में लिखे जाने लगे तब "देवनागरी" भी कहा गया।
(घ) सांकेतिक चिह्नों या देवताओं की उपासना में प्रयुक्त त्रिकोण, चक्र आदि संकेतचिह्नों को "देवनागर" कहते थे। कालांतर में नाम के प्रथमाक्षरों का उन से बोध होने लगा और जिस लिपि में उन को स्थान मिला - वह 'देवनागरी' या 'नागरी' कही गई। इन सब पक्षों के मूल में कल्पना का प्राधान्य है, निश्चयात्मक प्रमाण अनुपलब्ध हैं।
इतिहास
देवनागरी का इतिहास
thumb| मुंबई के परेल नामक उपनगर में प्राप्त प्राचीन देवनागरी शिलालेख। यह सन् ११०९ ई॰ में बनाया गया था।
right|thumb|200px|वाराणसी में देवनागरी लिपि में लिखे विज्ञापन
thumb| मुंबई के सार्वजनिक यातायात के टिकट पर देवनागरी।
thumb| मेलबर्न ऑस्ट्रेलिया की एक ट्राम पर देवनागरी लिपि
देवनागरी, भारत, नेपाल, तिब्बत और दक्षिण पूर्व एशिया की लिपियों के ब्राह्मी लिपि परिवार का हिस्सा है।George Cardona and Danesh Jain (2003), The Indo-Aryan Languages, Routledge, 978-0415772945, pages 68–69A history of writing Steven Roger Fischer 2004 978-1-86189-167-9 Reaktion Books https://books.google.com/books?id=Ywo0M9OpbXoC (p. 110) "... an early branch of this, as of the fourth century CE, was the Gupta script, Brahmi's first main daughter. [...] The Gupta alphabet became the ancestor of most Indic scripts (usually through later Devanagari). [...] Beginning around AD 600, Gupta inspired the important Nagari, Sarada, Tibetan and Pāḷi scripts. Nagari, of India's northwest, first appeared around AD 633. Once fully developed in the eleventh century, Nagari had become Devanagari, or "heavenly Nagari", since it was now the main vehicle, out of several, for Sanskrit literature." 12 अप्रैल 2020 https://web.archive.org/web/20200307151643/https://books.google.com/books?id=Ywo0M9OpbXoC 7 मार्च 2020 live गुजरात से कुछ अभिलेख प्राप्त हुए हैं जिन की भाषा संस्कृत है और लिपि नागरी लिपि। ये अभिलेख पहली ईसवी से लेकर चौथी ईसवी के कालखंड के हैं।Gazetteer of the Bombay Presidency https://web.archive.org/web/20200315120215/https://books.google.com/books?id=0bkMAAAAIAAJ 15 मार्च 2020 at Google Books, Rudradaman’s inscription from 1st through 4th century CE found in Gujarat, India, Stanford University Archives, pages 30–45, particularly Devanagari inscription on Jayadaman's coins pages 33–34 ध्यातव्य है कि नागरी लिपि, देवनागरी से बहुत निकट है और देवनागरी का पूर्वरूप है। अतः ये अभिलेख इस बात के साक्ष्य हैं कि प्रथम शताब्दी में भी भारत में देवनागरी का उपयोग आरंभ हो चुका था। नागरी, सिद्धम और शारदा तीनों ही ब्राह्मी की वंशज हैं।Steven Roger Fischer (2004), A history of writing https://web.archive.org/web/20200307151643/https://books.google.com/books?id=Ywo0M9OpbXoC 7 मार्च 2020, Reaktion Books, ISBN 978-1-86189-167-9, "(p. 110) "... an early branch of this, as of the fourth century CE, was the Gupta script, Brahmi's first main daughter. [...] The Gupta alphabet became the ancestor of most Indic scripts (usually through later Devanagari). [...] Beginning around AD ६००, Gupta inspired the important Nagari, Sarada, Tibetan and Pāḷi scripts. Nagari, of India's northwest, first appeared around AD ६३३. Once fully developed in the eleventh century, Nagari had become Devanagari, or "heavenly Nagari", since it was now the main vehicle, out of several, for Sanskrit literature."" रुद्रदमन के शिलालेखों का समय प्रथम शताब्दी का समय है और इस की लिपि की देवनागरी से निकटता पहचानी जा सकती हैं। जबकि देवनागरी का जो वर्तमान मानक स्वरूप है, वैसी देवनागरी का उपयोग १००० ई॰ के पहले आरंभ हो चुका था। Richard Salomon (2014), Indian Epigraphy, Oxford University Press, ISBN 978-0195356663, pages 40–42Krishna Chandra Sagar (1993), Foreign Influence on Ancient India, South Asia Books, ISBN 978-8172110284, page 137
मध्यकाल के शिलालेखों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि नागरी से संबंधित लिपियों का बड़े पैमाने पर प्रसार होने लगा था। कहीं कहीं स्थानीय लिपि और नागरी लिपि दोनों में सूचनाएँ अंकित मिलतीं हैं। उदाहरण के लिए, ७वीं–८वीं शताब्दी के पट्टदकल्लु मंदिर (कर्नाटक) के स्तंभ पर सिद्धमात्रिका और तेलुगु-कन्नड़ लिपि के आरंभिक रूप दोनों में ही सूचना लिखी हुई है। कांगड़ा (हिमाचल प्रदेश) के ज्वालामुखी अभिलेख में शारदा और देवनागरी दोनों में लिखा हुआ है। Richard Salomon (2014), Indian Epigraphy, Oxford University Press, ISBN 978-0195356663, page 71
७वीं शताब्दी तक देवनागरी का नियमित रूप से उपयोग होना आरंभ हो गया था और लगभग १००० ई॰ तक देवनागरी का पूर्ण विकास हो गया था।Kathleen Kuiper (2010), The Culture of India, New York: The Rosen Publishing Group, ISBN 978-1615301492, page 83Richard Salomon (2014), Indian Epigraphy, Oxford University Press, ISBN 978-0195356663, pages 40–42
डॉ॰ द्वारिका प्रसाद सक्सेना के अनुसार सर्वप्रथम देवनागरी लिपि का प्रयोग गुजरात के नरेश जयभट्ट (७००–८०० ई॰) के शिलालेख में मिलता है। आठवीं शताब्दी में चित्रकूट, नवीं में बड़ौदा के ध्रुवराज भी अपने राज्यादेशों में इस लिपि का उपयोग किया हैं।
७५८ ई॰ का राष्ट्रकूट राजा दंतिदुर्ग का सामगढ़ ताम्रपट मिलता है जिस पर देवनागरी अंकित है। शिलाहारवंश के गंडारादित्य प्रथम के उत्कीर्ण लेख की लिपि देवनागरी है। इस का समय बारहवीं शताब्दी हैं। ग्यारहवीं शताब्दी के चोलराजा राजेंद्र के सिक्के मिले हैं जिन पर देवनागरी लिपि अंकित है। राष्ट्रकूट राजा इंद्रराज (दसवीं शताब्दी) के लेख में भी देवनागरी का व्यवहार किया है। प्रतिहार राजा महेंद्रपाल (८९१–९०७ ई॰) का दानपत्र भी देवनागरी लिपि में है।
कनिंघम की पुस्तक में सबसे प्राचीन मुसलमानों सिक्के के रूप में महमूद गजनवी द्वारा चलाये गए चाँदी के सिक्के का वर्णन है जिस पर देवनागरी लिपि में संस्कृत अंकित है। मुहम्मद विनसाम (११९२ - १२०५) के सिक्कों पर लक्ष्मी की मूर्ति के साथ देवनागरी लिपि का व्यवहार हुआ है। शम्सुद्दीन इल्तुतमिश (१२१० - १२३५) तथा अकबर के सिक्कों पर भी देवनागरी अंकित है।
भाषाविज्ञान की दृष्टि से देवनागरी लिपि
आधुनिक भाषावैज्ञानिक दृष्टि से देवनागरी लिपि अक्षरात्मक (सिलैबिक) लिपि मानी जाती है। लिपि के विकाससोपानों की दृष्टि से "चित्रात्मक", "भावात्मक" और "भावचित्रात्मक" लिपियों के अनंतर "अक्षरात्मक" स्तर की लिपियों का विकास माना जाता है। भारतीय भाषाविज्ञानविज्ञों के मत और दृष्टि से लिपि की अक्षरात्मक अवस्था के बाद वर्णात्मक अवस्था का विकास हुआ। सबसे विकसित अवस्था ध्वन्यात्मक (फोनेटिक) लिपि की मानी गयी है। "देवनागरी" को अक्षरात्मक इसलिए कहा जाता है कि इसके वर्ण-अक्षर (सिलेबिल) हैं - स्वर भी और व्यंजन भी। "क", "ख" आदि व्यंजन सस्वर हैं - अकारयुक्त हैं। वे केवल ध्वनियाँ नहीं हैं अपितु सस्वर अक्षर हैं। अत: यूनानी, रोमन आदि वर्णमालाएँ हैं परंतु यहाँ यह ध्यान रखने की बात है कि भारत की "ब्राह्मी" या "भारती" वर्णमाला की ध्वनियों में व्यंजनों का "पाणिनि" ने वर्णसमाम्नाय के १४ सूत्रों में जो स्वरूप परिचय दिया है, उस के विषय में "पतंजलि" (द्वितीय शताब्दी ई॰ पू॰) ने यह स्पष्ट बता दिया है कि व्यंजनों में संनियोजित "अकार" स्वर का उपयोग केवल उच्चारण के उद्देश्य से है। वह तत्वतः वर्ण का अंग नहीं है। इस दृष्टि से विचार करते हुए कहा जा सकता है कि देवनागरी लिपि की वर्णमाला तत्वतः ध्वन्यात्मक है, अक्षरात्मक नहीं।
देवनागरी वर्णमाला
स्वर
निम्नलिखित स्वर आधुनिक मानक हिंदी के लिये दिए गए हैं। संस्कृत में इन के उच्चारण थोड़े अलग होते हैं।
वर्णाक्षर“प” के साथ मात्रा IPA उच्चारण"प्" के साथ उच्चारणIAST समतुल्य हिन्दी में वर्णन अप/ ə // pə /a बीच का मध्य प्रसृत स्वर आपा/ αː / या / aː // pɑː / या /paː/ā दीर्घ विवृत पश्व प्रसृत स्वर इपि/ ɪ // pɪ /i ह्रस्व संवृत अग्र प्रसृत स्वर ईपी/ iː // piː /ī दीर्घ संवृत अग्र प्रसृत स्वर उपु/ ʊ // pʊ /u ह्रस्व संवृत पश्व वर्तुल स्वर ऊपू/ uː // puː /ū दीर्घ संवृत पश्व वर्तुल स्वर एपे/ e: // pe: /e दीर्घ अर्धसंवृत अग्र प्रसृत स्वर ऐपै/ ɛ: // pɛ: /ai दीर्घ लगभग-विवृत अग्र प्रसृत स्वर ओपो/ ο: // pο: /o दीर्घ अर्धसंवृत पश्व वर्तुल स्वर औपौ/ ɔ: // pɔ: /au दीर्घ अर्धविवृत पश्व वर्तुल स्वर
संस्कृत में ऐ दो स्वरों का युग्म होता है और "अ-इ" या "आ-इ" की तरह बोला जाता है। इसी तरह औ "अ-उ" या "आ-उ" की तरह बोला जाता है।
इसके अलावा हिंदी और संस्कृत में—
ऋ — आधुनिक हिंदी में "रि" की तरह
ॠ — केवल संस्कृत में
ऌ — केवल संस्कृत में
ॡ — केवल संस्कृत में
अं — ङ्, ञ्, ण्, न्, म् के लिये या स्वर का नासिकीकरण करने के लिये
अँ — स्वर का नासिकीकरण करने के लिये
अः — अघोष "ह्" (निःश्वास) के लिये
ऍ और ऑ — इन का उपयोग मराठी और कभी कभी हिंदी में अंग्रेज़ी शब्दों का निकटतम उच्चारण तथा लेखन करने के लिए किया जाता है।
व्यंजन
जब किसी स्वर प्रयोग नहीं हो, तो वहाँ पर 'अ' (अर्थात श्वा का स्वर) माना जाता है। स्वर के न होने को हलंत् अथवा विराम से दर्शाया जाता है। जैसे कि क्, ख्, ग्, घ्। जिन वर्णो को बोलने के लिए स्वर की सहायता लेनी पड़ती है उन्हें व्यंजन कहते है। दूसरे शब्दो में, व्यंजन उन वर्णों को कहते हैं, जिन के उच्चारण में स्वर वर्णों की सहायता ली जाती है।
स्पर्श (Plosives)अल्पप्राणअघोषमहाप्राणअघोषअल्पप्राणघोषमहाप्राणघोषनासिक्यकंठ्यक / kə /ख /khə/ग / gə /घ /gɦə/ङ /ŋə/तालव्यच / tʃə /छ /tʃhə/ज /dʒə/झ /dʒɦə/ञ /ɲə/मूर्धन्यट / ʈə /ठ /ʈhə/ड / ɖə /ढ /ɖɦə/ण /ɳə/दंत्यत / t̪ə /थ /t̪hə/द / d̪ə /ध /d̪ɦə/न /nə/ओष्ठ्यप / pə /फ /phə/ब / bə /भ /bɦə/म /mə/
स्पर्शरहित (Non-Plosives)तालव्यमूर्धन्यदंत्यमूर्धन्य/वर्त्स्यकंठोष्ठ्य/काकल्यअंतस्थय /jə/र / rə /ल /lə/ळ /ɭə/व / ʋə /ऊष्म/संघर्षीश /ʃə/ष /ʂə/स /sə/ह /hə/ः /ɦə/
नोट करें—
इनमें से ळ (मूर्धन्य पार्श्विक अंतस्थ) एक अतिरिक्त व्यंजन है जिसका प्रयोग हिंदी में नहीं होता है। मराठी, वैदिक संस्कृत, कोंकणी, मेवाड़ी, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश की खड़ी बोली इत्यादि में इसका प्रयोग किया जाता है।
संस्कृत में ष का उच्चारण ऐसे होता था: जीभ की नोक को मूर्धा (मुँह की छत) की ओर उठाकर श जैसी आवाज़ करना। शुक्ल यजुर्वेद की माध्यंदिनी शाखा में कुछ वाक्यों में ष का उच्चारण श की तरह करना मान्य था। यदि यह 'ट्, ठ्, ड्, ढ्' ध्वनियों से पहले न आए तो इसका उच्चारण आजकल हिंदी में तालव्य (श) होता है।
हिंदी में ण का उच्चारण ज़्यादातर डँ की तरह होता है, यानि कि जीभ मुँह की छत को एक ज़ोरदार ठोकर मारती है। पर संस्कृत में ण का उच्चारण न की तरह बिना ठोकर मारे होता था, अंतर केवल इतना कि जीभ ण के समय मुँह की छत को छूती है।
नुक़्ता वाले व्यंजन
हिंदी भाषा में मुख्यतः अरबी और फ़ारसी भाषाओं से आए शब्दों को देवनागरी में लिखने के लिये कुछ वर्णों के नीचे बिंदु लगे वर्णों का प्रयोग किया जाता है (जैसे क़, ज़ आदि)। परंतु संस्कृत, मराठी, नेपाली एवं अन्य भाषाओं को देवनागरी में लिखने में भी बिंदु का प्रयोग नहीं किया जाता है।
वर्णाक्षर (अंतर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला उच्चारण) उदाहरण हिंदी में वर्णन अंग्रेज़ी में वर्णन अशुद्ध उच्चारणक़ (/q/) क़म्ध अघोष अलिजिह्वीय स्पर्श Voiceless uvular stop क (/k/)ख़ (/qʰ/) ख़रीद अघोष अलिजिह्वीय या कण्ठ्य संघर्षी Voiceless uvular or velar fricative ख (/kh/) ग़ (/ɣ/) ग़ैर घोष अलिजिह्वीय या कण्ठ्य संघर्षी Voiced uvular or velar fricative ग (/g/) ज़ (/z/) ज़िंदगी घोष वर्त्स्य संघर्षी Voiced alveolar fricative ज (/ɟ/) झ़ (/ʒ/) अझ़दहा घोष तालव्य संघर्षी Voiced palatal fricative झ (/ɟʰ/) ड़ (/ ɽ /) पेड़ अल्पप्राण मूर्धन्य उत्क्षिप्त Unaspirated retroflex flap - ढ़ (/ɽʰ/) पढ़ना महाप्राण मूर्धन्य उत्क्षिप्त Aspirated retroflex flap - त़ (/θ/) उत़र अघोष दन्त्य संघर्षी Voiceless dental fricative त (/t̪/) द़ (/ð/) अद़ान घोष दन्त्य संघर्षी Voiced dental fricative द (/d̪/) फ़ (/f/) फ़र्क़ अघोष दन्त्यौष्ठ्य संघर्षी Voiceless labio-dental fricative फ (/ph/) य़ (/ʎ/) फुलाय़ घोष दन्त्यौष्ठ्य संघर्षी Voiced labio-dental fricative य (/y/)
थ़ का प्रयोग मुख्यतः पहाड़ी भाषाओं में होता है जैसे की डोगरी (की उत्तरी उपभाषाओं) में "आँसू" के लिए शब्द है "अथ़्रू"। हिंदी में ड़ और ढ़ व्यंजन फ़ारसी या अरबी से नहीं लिए गए हैं, न ही ये संस्कृत में पाये जाये हैं। असल में ये संस्कृत के साधारण ड/ट और ढ/ठ के बदले हुए रूप हैं।
विराम चिह्न, वैदिक चिह्न आदि
प्रतीकनामकार्य। डंडा / खड़ी पाई / पूर्ण विराम वाक्य का अंत बताने के लिए॥ दोहरा डंडा/ दोहरा दंड इसका इस्तेमाल छंदात्मक ग्रंथों में छंदों को परिसीमित करने के लिए किया जाता है। गद्य में, दोहरे दंड का इस्तेमाल किसी पैराग्राफ़, कहानी या अनुभाग के अंत को चिह्नित करने के लिए किया जाता है. पदों और श्लोकों में भी दो दंड का प्रयोग होता है।॰ लाघव चिह्न संक्षिप्तीकरण के लिये, जैसे— मो॰ क॰ गाँधीॐ प्रणव , ओम हिंदू धर्म का शुभ शब्दप॑ उदात्त उच्चारण बताने के लिए वैदिक संस्कृत के कुछ ग्रंथों में प्रयुक्तप॒ अनुदात्त उच्चारण बताने के लिए वैदिक संस्कृत के कुछ ग्रंथों में प्रयुक्त
देवनागरी अंक
देवनागरी अंक निम्न रूप में लिखे जाते हैं :
देवनागरी अंक ० १ २ ३ ४ ५ ६ ७ ८ ९ अंतर्राष्ट्रीय अंक 0 1 2 3 4 5 6 7 8 9
नोट: आधुनिक देवनागरी में मुख्य रूप से भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप (0–9) का प्रयोग किया जाता है; देवनागरी अंक छोटे-मोटे कामों या पारंपरिक लेखन में ही प्रयुक्त होते हैं।
देवनागरी संयुक्ताक्षर
देवनागरी लिपि में दो व्यंजन का संयुक्ताक्षर निम्न रूप में लिखा जाता है :
<div lang="und-Deva">
ka (IPA:kə) क no kha (IPA:kʰə) ख no ga (IPA:ɡə) ग no gha (IPA:ɡʱə) घ no ṅa (IPA:ŋə) ङ no ca (IPA:cə) च no cha (IPA:cʰə) छ no ja (IPA:ɟə) ज no jha (IPA:ɟʱə) झ no ña (IPA:ɲə) ञ no ṭa (IPA:ʈə) ट no ṭha (IPA:ʈʰə) ठ no ḍa (IPA:ɖə) ड no ḍha (IPA:ɖʱə) ढ no ṇa (IPA:ɳə) ण no ta (IPA:t̪ə) त no tha (IPA:t̪ʰə) थ no da (IPA:d̪ə) द no dha (IPA:d̪ʱə) ध no na (IPA:n̪ə) न no pa (IPA:pə) प no pha (IPA:pʰə) फ no ba (IPA:bə) ब no bha (IPA:bʱə) भ no ma (IPA:mə) म no ya (IPA:jə) य no ra (IPA:rə) र no la (IPA:lə) ल no va (IPA:və) व no śa (IPA:ʃə) श no ṣa (IPA:ʂə) ष no sa (IPA:sə) स no ha (IPA:hə) ह no ḷa (IPA:ɭə) ळ nok (IPA:k) क nokka (IPA:kkə) क्क nokkha (IPA:kkʰə) क्ख nokga (IPA:kɡə) क्ग nokgha (IPA:kɡʱə) क्घ nokṅa (IPA:kŋə) क्ङ nokca (IPA:kcɕə) क्च nokcha (IPA:kcɕʰə) क्छ nokja (IPA:kɟʝə) क्ज nokjha (IPA:kɟʝʱə) क्झ nokña (IPA:kɲə) क्ञ nokṭa (IPA:kʈə) क्ट nokṭha (IPA:kʈʰə) क्ठ nokḍa (IPA:kɖə) क्ड nokḍha (IPA:kɖʱə) क्ढ nokṇa (IPA:kɳə) क्ण nokta (IPA:kt̪ə) क्त noktha (IPA:kt̪ʰə) क्थ nokda (IPA:kd̪ə) क्द nokdha (IPA:kd̪ʱə) क्ध nokna (IPA:kn̪ə) क्न nokpa (IPA:kpə) क्प nokpha (IPA:kpʰə) क्फ nokba (IPA:kbə) क्ब nokbha (IPA:kbʱə) क्भ nokma (IPA:kmə) क्म nokya (IPA:kjə) क्य nokra (IPA:krə) क्र nokla (IPA:klə) क्ल nokva (IPA:kvə) क्व nokśa (IPA:kʃə) क्श nokṣa (IPA:kʂə) क्ष noksa (IPA:ksə) क्स nokha (IPA:khə) क्ह nokḷa (IPA:kɭə) क्ळ nokh (IPA:kʰ) ख nokhka (IPA:kʰkə) ख्क nokhkha (IPA:kʰkʰə) ख्ख nokhga (IPA:kʰɡə) ख्ग nokhgha (IPA:kʰɡʱə) ख्घ nokhṅa (IPA:kʰŋə) ख्ङ nokhca (IPA:kʰcɕə) ख्च nokhcha (IPA:kʰcɕʰə) ख्छ nokhja (IPA:kʰɟʝə) ख्ज nokhjha (IPA:kʰɟʝʱə) ख्झ nokhña (IPA:kʰɲə) ख्ञ nokhṭa (IPA:kʰʈə) ख्ट nokhṭha (IPA:kʰʈʰə) ख्ठ nokhḍa (IPA:kʰɖə) ख्ड nokhḍha (IPA:kʰɖʱə) ख्ढ nokhṇa (IPA:kʰɳə) ख्ण nokhta (IPA:kʰt̪ə) ख्त nokhtha (IPA:kʰt̪ʰə) ख्थ nokhda (IPA:kʰd̪ə) ख्द nokhdha (IPA:kʰd̪ʱə) ख्ध nokhna (IPA:kʰn̪ə) ख्न nokhpa (IPA:kʰpə) ख्प nokhpha (IPA:kʰpʰə) ख्फ nokhba (IPA:kʰbə) ख्ब nokhbha (IPA:kʰbʱə) ख्भ nokhma (IPA:kʰmə) ख्म nokhya (IPA:kʰjə) ख्य nokhra (IPA:kʰrə) ख्र nokhla (IPA:kʰlə) ख्ल nokhva (IPA:kʰvə) ख्व nokhśa (IPA:kʰʃə) ख्श nokhṣa (IPA:kʰʂə) ख्ष nokhsa (IPA:kʰsə) ख्स nokhha (IPA:kʰhə) ख्ह nokhḷa (IPA:kʰɭə) ख्ळ nog (IPA:ɡ) ग nogka (IPA:ɡkə) ग्क nogkha (IPA:ɡkʰə) ग्ख nogga (IPA:ɡɡə) ग्ग noggha (IPA:ɡɡʱə) ग्घ nogṅa (IPA:ɡŋə) ग्ङ nogca (IPA:ɡcɕə) ग्च nogcha (IPA:ɡcɕʰə) ग्छ nogja (IPA:ɡɟʝə) ग्ज nogjha (IPA:ɡɟʝʱə) ग्झ nogña (IPA:ɡɲə) ग्ञ nogṭa (IPA:ɡʈə) ग्ट nogṭha (IPA:ɡʈʰə) ग्ठ nogḍa (IPA:ɡɖə) ग्ड nogḍha (IPA:ɡɖʱə) ग्ढ nogṇa (IPA:ɡɳə) ग्ण nogta (IPA:ɡt̪ə) ग्त nogtha (IPA:ɡt̪ʰə) ग्थ nogda (IPA:ɡd̪ə) ग्द nogdha (IPA:ɡd̪ʱə) ग्ध nogna (IPA:ɡn̪ə) ग्न nogpa (IPA:ɡpə) ग्प nogpha (IPA:ɡpʰə) ग्फ nogba (IPA:ɡbə) ग्ब nogbha (IPA:ɡbʱə) ग्भ nogma (IPA:ɡmə) ग्म nogya (IPA:ɡjə) ग्य nogra (IPA:ɡrə) ग्र nogla (IPA:ɡlə) ग्ल nogva (IPA:ɡvə) ग्व nogśa (IPA:ɡʃə) ग्श nogṣa (IPA:ɡʂə) ग्ष nogsa (IPA:ɡsə) ग्स nogha (IPA:ɡhə) ग्ह nogḷa (IPA:ɡɭə) ग्ळ nogh (IPA:ɡʱ) घ noghka (IPA:ɡʱkə) घ्क noghkha (IPA:ɡʱkʰə) घ्ख noghga (IPA:ɡʱɡə) घ्ग noghgha (IPA:ɡʱɡʱə) घ्घ noghṅa (IPA:ɡʱŋə) घ्ङ noghca (IPA:ɡʱcɕə) घ्च noghcha (IPA:ɡʱcɕʰə) घ्छ noghja (IPA:ɡʱɟʝə) घ्ज noghjha (IPA:ɡʱɟʝʱə) घ्झ noghña (IPA:ɡʱɲə) घ्ञ noghṭa (IPA:ɡʱʈə) घ्ट noghṭha (IPA:ɡʱʈʰə) घ्ठ noghḍa (IPA:ɡʱɖə) घ्ड noghḍha (IPA:ɡʱɖʱə) घ्ढ noghṇa (IPA:ɡʱɳə) घ्ण noghta (IPA:ɡʱt̪ə) घ्त noghtha (IPA:ɡʱt̪ʰə) घ्थ noghda (IPA:ɡʱd̪ə) घ्द noghdha (IPA:ɡʱd̪ʱə) घ्ध noghna (IPA:ɡʱn̪ə) घ्न noghpa (IPA:ɡʱpə) घ्प noghpha (IPA:ɡʱpʰə) घ्फ noghba (IPA:ɡʱbə) घ्ब noghbha (IPA:ɡʱbʱə) घ्भ noghma (IPA:ɡʱmə) घ्म noghya (IPA:ɡʱjə) घ्य noghra (IPA:ɡʱrə) घ्र noghla (IPA:ɡʱlə) घ्ल noghva (IPA:ɡʱvə) घ्व noghśa (IPA:ɡʱʃə) घ्श noghṣa (IPA:ɡʱʂə) घ्ष noghsa (IPA:ɡʱsə) घ्स noghha (IPA:ɡʱhə) घ्ह noghḷa (IPA:ɡʱɭə) घ्ळ noṅ (IPA:ŋ) ङ noṅka (IPA:ŋkə) ङ्क noṅkha (IPA:ŋkʰə) ङ्ख noṅga (IPA:ŋɡə) ङ्ग noṅgha (IPA:ŋɡʱə) ङ्घ noṅṅa (IPA:ŋŋə) ङ्ङ noṅca (IPA:ŋcɕə) ङ्च noṅcha (IPA:ŋcɕʰə) ङ्छ noṅja (IPA:ŋɟʝə) ङ्ज noṅjha (IPA:ŋɟʝʱə) ङ्झ noṅña (IPA:ŋɲə) ङ्ञ noṅṭa (IPA:ŋʈə) ङ्ट noṅṭha (IPA:ŋʈʰə) ङ्ठ noṅḍa (IPA:ŋɖə) ङ्ड noṅḍha (IPA:ŋɖʱə) ङ्ढ noṅṇa (IPA:ŋɳə) ङ्ण noṅta (IPA:ŋt̪ə) ङ्त noṅtha (IPA:ŋt̪ʰə) ङ्थ noṅda (IPA:ŋd̪ə) ङ्द noṅdha (IPA:ŋd̪ʱə) ङ्ध noṅna (IPA:ŋn̪ə) ङ्न noṅpa (IPA:ŋpə) ङ्प noṅpha (IPA:ŋpʰə) ङ्फ noṅba (IPA:ŋbə) ङ्ब noṅbha (IPA:ŋbʱə) ङ्भ noṅma (IPA:ŋmə) ङ्म noṅya (IPA:ŋjə) ङ्य noṅra (IPA:ŋrə) ङ्र noṅla (IPA:ŋlə) ङ्ल noṅva (IPA:ŋvə) ङ्व noṅśa (IPA:ŋʃə) ङ्श noṅṣa (IPA:ŋʂə) ङ्ष noṅsa (IPA:ŋsə) ङ्स noṅha (IPA:ŋhə) ङ्ह noṅḷa (IPA:ŋɭə) ङ्ळ noc (IPA:cɕ) च nocka (IPA:cɕkə) च्क nockha (IPA:cɕkʰə) च्ख nocga (IPA:cɕɡə) च्ग nocgha (IPA:cɕɡʱə) च्घ nocṅa (IPA:cɕŋə) च्ङ nocca (IPA:cɕcɕə) च्च noccha (IPA:cɕcɕʰə) च्छ nocja (IPA:cɕɟʝə) च्ज nocjha (IPA:cɕɟʝʱə) च्झ nocña (IPA:cɕɲə) च्ञ nocṭa (IPA:cɕʈə) च्ट nocṭha (IPA:cɕʈʰə) च्ठ nocḍa (IPA:cɕɖə) च्ड nocḍha (IPA:cɕɖʱə) च्ढ nocṇa (IPA:cɕɳə) च्ण nocta (IPA:cɕt̪ə) च्त noctha (IPA:cɕt̪ʰə) च्थ nocda (IPA:cɕd̪ə) च्द nocdha (IPA:cɕd̪ʱə) च्ध nocna (IPA:cɕn̪ə) च्न nocpa (IPA:cɕpə) च्प nocpha (IPA:cɕpʰə) च्फ nocba (IPA:cɕbə) च्ब nocbha (IPA:cɕbʱə) च्भ nocma (IPA:cɕmə) च्म nocya (IPA:cɕjə) च्य nocra (IPA:cɕrə) च्र nocla (IPA:cɕlə) च्ल nocva (IPA:cɕvə) च्व nocśa (IPA:cɕʃə) च्श nocṣa (IPA:cɕʂə) च्ष nocsa (IPA:cɕsə) च्स nocha (IPA:cɕhə) च्ह nocḷa (IPA:cɕɭə) च्ळ noch (IPA:cɕʰ) छ nochka (IPA:cɕʰkə) छ्क nochkha (IPA:cɕʰkʰə) छ्ख nochga (IPA:cɕʰɡə) छ्ग nochgha (IPA:cɕʰɡʱə) छ्घ nochṅa (IPA:cɕʰŋə) छ्ङ nochca (IPA:cɕʰcɕə) छ्च nochcha (IPA:cɕʰcɕʰə) छ्छ nochja (IPA:cɕʰɟʝə) छ्ज nochjha (IPA:cɕʰɟʝʱə) छ्झ nochña (IPA:cɕʰɲə) छ्ञ nochṭa (IPA:cɕʰʈə) छ्ट nochṭha (IPA:cɕʰʈʰə) छ्ठ nochḍa (IPA:cɕʰɖə) छ्ड nochḍha (IPA:cɕʰɖʱə) छ्ढ nochṇa (IPA:cɕʰɳə) छ्ण nochta (IPA:cɕʰt̪ə) छ्त nochtha (IPA:cɕʰt̪ʰə) छ्थ nochda (IPA:cɕʰd̪ə) छ्द nochdha (IPA:cɕʰd̪ʱə) छ्ध nochna (IPA:cɕʰn̪ə) छ्न nochpa (IPA:cɕʰpə) छ्प nochpha (IPA:cɕʰpʰə) छ्फ nochba (IPA:cɕʰbə) छ्ब nochbha (IPA:cɕʰbʱə) छ्भ nochma (IPA:cɕʰmə) छ्म nochya (IPA:cɕʰjə) छ्य nochra (IPA:cɕʰrə) छ्र nochla (IPA:cɕʰlə) छ्ल nochva (IPA:cɕʰvə) छ्व nochśa (IPA:cɕʰʃə) छ्श nochṣa (IPA:cɕʰʂə) छ्ष nochsa (IPA:cɕʰsə) छ्स nochha (IPA:cɕʰhə) छ्ह nochḷa (IPA:cɕʰɭə) छ्ळ noj (IPA:ɟʝ) ज nojka (IPA:ɟʝkə) ज्क nojkha (IPA:ɟʝkʰə) ज्ख nojga (IPA:ɟʝɡə) ज्ग nojgha (IPA:ɟʝɡʱə) ज्घ nojṅa (IPA:ɟʝŋə) ज्ङ nojca (IPA:ɟʝcɕə) ज्च nojcha (IPA:ɟʝcɕʰə) ज्छ nojja (IPA:ɟʝɟʝə) ज्ज nojjha (IPA:ɟʝɟʝʱə) ज्झ nojña (IPA:ɟʝɲə) ज्ञ nojṭa (IPA:ɟʝʈə) ज्ट nojṭha (IPA:ɟʝʈʰə) ज्ठ nojḍa (IPA:ɟʝɖə) ज्ड nojḍha (IPA:ɟʝɖʱə) ज्ढ nojṇa (IPA:ɟʝɳə) ज्ण nojta (IPA:ɟʝt̪ə) ज्त nojtha (IPA:ɟʝt̪ʰə) ज्थ nojda (IPA:ɟʝd̪ə) ज्द nojdha (IPA:ɟʝd̪ʱə) ज्ध nojna (IPA:ɟʝn̪ə) ज्न nojpa (IPA:ɟʝpə) ज्प nojpha (IPA:ɟʝpʰə) ज्फ nojba (IPA:ɟʝbə) ज्ब nojbha (IPA:ɟʝbʱə) ज्भ nojma (IPA:ɟʝmə) ज्म nojya (IPA:ɟʝjə) ज्य nojra (IPA:ɟʝrə) ज्र nojla (IPA:ɟʝlə) ज्ल nojva (IPA:ɟʝvə) ज्व nojśa (IPA:ɟʝʃə) ज्श nojṣa (IPA:ɟʝʂə) ज्ष nojsa (IPA:ɟʝsə) ज्स nojha (IPA:ɟʝhə) ज्ह nojḷa (IPA:ɟʝɭə) ज्ळ nojh (IPA:ɟʝʱ) झ nojhka (IPA:ɟʝʱkə) झ्क nojhkha (IPA:ɟʝʱkʰə) झ्ख nojhga (IPA:ɟʝʱɡə) झ्ग nojhgha (IPA:ɟʝʱɡʱə) झ्घ nojhṅa (IPA:ɟʝʱŋə) झ्ङ nojhca (IPA:ɟʝʱcɕə) झ्च nojhcha (IPA:ɟʝʱcɕʰə) झ्छ nojhja (IPA:ɟʝʱɟʝə) झ्ज nojhjha (IPA:ɟʝʱɟʝʱə) झ्झ nojhña (IPA:ɟʝʱɲə) झ्ञ nojhṭa (IPA:ɟʝʱʈə) झ्ट nojhṭha (IPA:ɟʝʱʈʰə) झ्ठ nojhḍa (IPA:ɟʝʱɖə) झ्ड nojhḍha (IPA:ɟʝʱɖʱə) झ्ढ nojhṇa (IPA:ɟʝʱɳə) झ्ण nojhta (IPA:ɟʝʱt̪ə) झ्त nojhtha (IPA:ɟʝʱt̪ʰə) झ्थ nojhda (IPA:ɟʝʱd̪ə) झ्द nojhdha (IPA:ɟʝʱd̪ʱə) झ्ध nojhna (IPA:ɟʝʱn̪ə) झ्न nojhpa (IPA:ɟʝʱpə) झ्प nojhpha (IPA:ɟʝʱpʰə) झ्फ nojhba (IPA:ɟʝʱbə) झ्ब nojhbha (IPA:ɟʝʱbʱə) झ्भ nojhma (IPA:ɟʝʱmə) झ्म nojhya (IPA:ɟʝʱjə) झ्य nojhra (IPA:ɟʝʱrə) झ्र nojhla (IPA:ɟʝʱlə) झ्ल nojhva (IPA:ɟʝʱvə) झ्व nojhśa (IPA:ɟʝʱʃə) झ्श nojhṣa (IPA:ɟʝʱʂə) झ्ष nojhsa (IPA:ɟʝʱsə) झ्स nojhha (IPA:ɟʝʱhə) झ्ह nojhḷa (IPA:ɟʝʱɭə) झ्ळ noñ (IPA:ɲ) ञ noñka (IPA:ɲkə) ञ्क noñkha (IPA:ɲkʰə) ञ्ख noñga (IPA:ɲɡə) ञ्ग noñgha (IPA:ɲɡʱə) ञ्घ noñṅa (IPA:ɲŋə) ञ्ङ noñca (IPA:ɲcɕə) ञ्च noñcha (IPA:ɲcɕʰə) ञ्छ noñja (IPA:ɲɟʝə) ञ्ज noñjha (IPA:ɲɟʝʱə) ञ्झ noñña (IPA:ɲɲə) ञ्ञ noñṭa (IPA:ɲʈə) ञ्ट noñṭha (IPA:ɲʈʰə) ञ्ठ noñḍa (IPA:ɲɖə) ञ्ड noñḍha (IPA:ɲɖʱə) ञ्ढ noñṇa (IPA:ɲɳə) ञ्ण noñta (IPA:ɲt̪ə) ञ्त noñtha (IPA:ɲt̪ʰə) ञ्थ noñda (IPA:ɲd̪ə) ञ्द noñdha (IPA:ɲd̪ʱə) ञ्ध noñna (IPA:ɲn̪ə) ञ्न noñpa (IPA:ɲpə) ञ्प noñpha (IPA:ɲpʰə) ञ्फ noñba (IPA:ɲbə) ञ्ब noñbha (IPA:ɲbʱə) ञ्भ noñma (IPA:ɲmə) ञ्म noñya (IPA:ɲjə) ञ्य noñra (IPA:ɲrə) ञ्र noñla (IPA:ɲlə) ञ्ल noñva (IPA:ɲvə) ञ्व noñśa (IPA:ɲʃə) ञ्श noñṣa (IPA:ɲʂə) ञ्ष noñsa (IPA:ɲsə) ञ्स noñha (IPA:ɲhə) ञ्ह noñḷa (IPA:ɲɭə) ञ्ळ noṭ (IPA:ʈ) ट noṭka (IPA:ʈkə) ट्क noṭkha (IPA:ʈkʰə) ट्ख noṭga (IPA:ʈɡə) ट्ग noṭgha (IPA:ʈɡʱə) ट्घ noṭṅa (IPA:ʈŋə) ट्ङ noṭca (IPA:ʈcɕə) ट्च noṭcha (IPA:ʈcɕʰə) ट्छ noṭja (IPA:ʈɟʝə) ट्ज noṭjha (IPA:ʈɟʝʱə) ट्झ noṭña (IPA:ʈɲə) ट्ञ noṭṭa (IPA:ʈʈə) ट्ट no ṭṭha (IPA:ʈʈʰə) ट्ठ no ṭḍa (IPA:ʈɖə) ट्ड noṭḍha (IPA:ʈɖʱə) ट्ढ noṭṇa (IPA:ʈɳə) ट्ण noṭta (IPA:ʈt̪ə) ट्त noṭtha (IPA:ʈt̪ʰə) ट्थ noṭda (IPA:ʈd̪ə) ट्द noṭdha (IPA:ʈd̪ʱə) ट्ध noṭna (IPA:ʈn̪ə) ट्न noṭpa (IPA:ʈpə) ट्प noṭpha (IPA:ʈpʰə) ट्फ noṭba (IPA:ʈbə) ट्ब noṭbha (IPA:ʈbʱə) ट्भ noṭma (IPA:ʈmə) ट्म noṭya (IPA:ʈjə) ट्य noṭra (IPA:ʈrə) ट्र noṭla (IPA:ʈlə) ट्ल noṭva (IPA:ʈvə) ट्व noṭśa (IPA:ʈʃə) ट्श noṭṣa (IPA:ʈʂə) ट्ष noṭsa (IPA:ʈsə) ट्स noṭha (IPA:ʈhə) ट्ह noṭḷa (IPA:ʈɭə) ट्ळ noṭh (IPA:ʈʰ) ठ noṭhka (IPA:ʈʰkə) ठ्क noṭhkha (IPA:ʈʰkʰə) ठ्ख noṭhga (IPA:ʈʰɡə) ठ्ग noṭhgha (IPA:ʈʰɡʱə) ठ्घ noṭhṅa (IPA:ʈʰŋə) ठ्ङ noṭhca (IPA:ʈʰcɕə) ठ्च noṭhcha (IPA:ʈʰcɕʰə) ठ्छ noṭhja (IPA:ʈʰɟʝə) ठ्ज noṭhjha (IPA:ʈʰɟʝʱə) ठ्झ noṭhña (IPA:ʈʰɲə) ठ्ञ noṭhṭa (IPA:ʈʰʈə) ठ्ट noṭhṭha (IPA:ʈʰʈʰə) ठ्ठ no ṭhḍa (IPA:ʈʰɖə) ठ्ड noṭhḍha (IPA:ʈʰɖʱə) ठ्ढ noṭhṇa (IPA:ʈʰɳə) ठ्ण noṭhta (IPA:ʈʰt̪ə) ठ्त noṭhtha (IPA:ʈʰt̪ʰə) ठ्थ noṭhda (IPA:ʈʰd̪ə) ठ्द noṭhdha (IPA:ʈʰd̪ʱə) ठ्ध noṭhna (IPA:ʈʰn̪ə) ठ्न noṭhpa (IPA:ʈʰpə) ठ्प noṭhpha (IPA:ʈʰpʰə) ठ्फ noṭhba (IPA:ʈʰbə) ठ्ब noṭhbha (IPA:ʈʰbʱə) ठ्भ noṭhma (IPA:ʈʰmə) ठ्म noṭhya (IPA:ʈʰjə) ठ्य noṭhra (IPA:ʈʰrə) ठ्र noṭhla (IPA:ʈʰlə) ठ्ल noṭhva (IPA:ʈʰvə) ठ्व noṭhśa (IPA:ʈʰʃə) ठ्श noṭhṣa (IPA:ʈʰʂə) ठ्ष noṭhsa (IPA:ʈʰsə) ठ्स noṭhha (IPA:ʈʰhə) ठ्ह noṭhḷa (IPA:ʈʰɭə) ठ्ळ noḍ (IPA:ɖ) ड noḍka (IPA:ɖkə) ड्क noḍkha (IPA:ɖkʰə) ड्ख noḍga (IPA:ɖɡə) ड्ग noḍgha (IPA:ɖɡʱə) ड्घ noḍṅa (IPA:ɖŋə) ड्ङ noḍca (IPA:ɖcɕə) ड्च noḍcha (IPA:ɖcɕʰə) ड्छ noḍja (IPA:ɖɟʝə) ड्ज noḍjha (IPA:ɖɟʝʱə) ड्झ noḍña (IPA:ɖɲə) ड्ञ noḍṭa (IPA:ɖʈə) ड्ट noḍṭha (IPA:ɖʈʰə) ड्ठ noḍḍa (IPA:ɖɖə) ड्ड noḍḍha (IPA:ɖɖʱə) ड्ढ noḍṇa (IPA:ɖɳə) ड्ण noḍta (IPA:ɖt̪ə) ड्त noḍtha (IPA:ɖt̪ʰə) ड्थ noḍda (IPA:ɖd̪ə) ड्द noḍdha (IPA:ɖd̪ʱə) ड्ध noḍna (IPA:ɖn̪ə) ड्न noḍpa (IPA:ɖpə) ड्प noḍpha (IPA:ɖpʰə) ड्फ noḍba (IPA:ɖbə) ड्ब noḍbha (IPA:ɖbʱə) ड्भ noḍma (IPA:ɖmə) ड्म noḍya (IPA:ɖjə) ड्य noḍra (IPA:ɖrə) ड्र noḍla (IPA:ɖlə) ड्ल noḍva (IPA:ɖvə) ड्व noḍśa (IPA:ɖʃə) ड्श noḍṣa (IPA:ɖʂə) ड्ष noḍsa (IPA:ɖsə) ड्स noḍha (IPA:ɖhə) ड्ह noḍḷa (IPA:ɖɭə) ड्ळ noḍh (IPA:ɖʱ) ढ noḍhka (IPA:ɖʱkə) ढ्क noḍhkha (IPA:ɖʱkʰə) ढ्ख noḍhga (IPA:ɖʱɡə) ढ्ग noḍhgha (IPA:ɖʱɡʱə) ढ्घ noḍhṅa (IPA:ɖʱŋə) ढ्ङ noḍhca (IPA:ɖʱcɕə) ढ्च noḍhcha (IPA:ɖʱcɕʰə) ढ्छ noḍhja (IPA:ɖʱɟʝə) ढ्ज noḍhjha (IPA:ɖʱɟʝʱə) ढ्झ noḍhña (IPA:ɖʱɲə) ढ्ञ noḍhṭa (IPA:ɖʱʈə) ढ्ट noḍhṭha (IPA:ɖʱʈʰə) ढ्ठ noḍhḍa (IPA:ɖʱɖə) ढ्ड noḍhḍha (IPA:ɖʱɖʱə) ढ्ढ noḍhṇa (IPA:ɖʱɳə) ढ्ण noḍhta (IPA:ɖʱt̪ə) ढ्त noḍhtha (IPA:ɖʱt̪ʰə) ढ्थ noḍhda (IPA:ɖʱd̪ə) ढ्द noḍhdha (IPA:ɖʱd̪ʱə) ढ्ध noḍhna (IPA:ɖʱn̪ə) ढ्न noḍhpa (IPA:ɖʱpə) ढ्प noḍhpha (IPA:ɖʱpʰə) ढ्फ noḍhba (IPA:ɖʱbə) ढ्ब noḍhbha (IPA:ɖʱbʱə) ढ्भ noḍhma (IPA:ɖʱmə) ढ्म noḍhya (IPA:ɖʱjə) ढ्य noḍhra (IPA:ɖʱrə) ढ्र noḍhla (IPA:ɖʱlə) ढ्ल noḍhva (IPA:ɖʱvə) ढ्व noḍhśa (IPA:ɖʱʃə) ढ्श noḍhṣa (IPA:ɖʱʂə) ढ्ष noḍhsa (IPA:ɖʱsə) ढ्स noḍhha (IPA:ɖʱhə) ढ्ह noḍhḷa (IPA:ɖʱɭə) ढ्ळ noṇ (IPA:ɳ) ण noṇka (IPA:ɳkə) ण्क noṇkha (IPA:ɳkʰə) ण्ख noṇga (IPA:ɳɡə) ण्ग noṇgha (IPA:ɳɡʱə) ण्घ noṇṅa (IPA:ɳŋə) ण्ङ noṇca (IPA:ɳcɕə) ण्च noṇcha (IPA:ɳcɕʰə) ण्छ noṇja (IPA:ɳɟʝə) ण्ज noṇjha (IPA:ɳɟʝʱə) ण्झ noṇña (IPA:ɳɲə) ण्ञ noṇṭa (IPA:ɳʈə) ण्ट noṇṭha (IPA:ɳʈʰə) ण्ठ noṇḍa (IPA:ɳɖə) ण्ड noṇḍha (IPA:ɳɖʱə) ण्ढ noṇṇa (IPA:ɳɳə) ण्ण noṇta (IPA:ɳt̪ə) ण्त noṇtha (IPA:ɳt̪ʰə) ण्थ noṇda (IPA:ɳd̪ə) ण्द noṇdha (IPA:ɳd̪ʱə) ण्ध noṇna (IPA:ɳn̪ə) ण्न noṇpa (IPA:ɳpə) ण्प noṇpha (IPA:ɳpʰə) ण्फ noṇba (IPA:ɳbə) ण्ब noṇbha (IPA:ɳbʱə) ण्भ noṇma (IPA:ɳmə) ण्म noṇya (IPA:ɳjə) ण्य noṇra (IPA:ɳrə) ण्र noṇla (IPA:ɳlə) ण्ल noṇva (IPA:ɳvə) ण्व noṇśa (IPA:ɳʃə) ण्श noṇṣa (IPA:ɳʂə) ण्ष noṇsa (IPA:ɳsə) ण्स noṇha (IPA:ɳhə) ण्ह noṇḷa (IPA:ɳɭə) ण्ळ not (IPA:t̪) त notka (IPA:t̪kə) त्क notkha (IPA:t̪kʰə) त्ख notga (IPA:t̪ɡə) त्ग notgha (IPA:t̪ɡʱə) त्घ notṅa (IPA:t̪ŋə) त्ङ notca (IPA:t̪cɕə) त्च notcha (IPA:t̪cɕʰə) त्छ notja (IPA:t̪ɟʝə) त्ज notjha (IPA:t̪ɟʝʱə) त्झ notña (IPA:t̪ɲə) त्ञ notṭa (IPA:t̪ʈə) त्ट notṭha (IPA:t̪ʈʰə) त्ठ notḍa (IPA:t̪ɖə) त्ड notḍha (IPA:t̪ɖʱə) त्ढ notṇa (IPA:t̪ɳə) त्ण notta (IPA:t̪t̪ə) त्त nottha (IPA:t̪t̪ʰə) त्थ notda (IPA:t̪d̪ə) त्द notdha (IPA:t̪d̪ʱə) त्ध notna (IPA:t̪n̪ə) त्न notpa (IPA:t̪pə) त्प notpha (IPA:t̪pʰə) त्फ notba (IPA:t̪bə) त्ब notbha (IPA:t̪bʱə) त्भ notma (IPA:t̪mə) त्म notya (IPA:t̪jə) त्य notra (IPA:t̪rə) त्र no tla (IPA:t̪lə) त्ल notva (IPA:t̪və) त्व notśa (IPA:t̪ʃə) त्श notṣa (IPA:t̪ʂə) त्ष notsa (IPA:t̪sə) त्स notha (IPA:t̪hə) त्ह notḷa (IPA:t̪ɭə) त्ळ noth (IPA:t̪ʰ) थ nothka (IPA:t̪ʰkə) थ्क nothkha (IPA:t̪ʰkʰə) थ्ख nothga (IPA:t̪ʰɡə) थ्ग nothgha (IPA:t̪ʰɡʱə) थ्घ nothṅa (IPA:t̪ʰŋə) थ्ङ nothca (IPA:t̪ʰcɕə) थ्च nothcha (IPA:t̪ʰcɕʰə) थ्छ nothja (IPA:t̪ʰɟʝə) थ्ज nothjha (IPA:t̪ʰɟʝʱə) थ्झ nothña (IPA:t̪ʰɲə) थ्ञ nothṭa (IPA:t̪ʰʈə) थ्ट nothṭha (IPA:t̪ʰʈʰə) थ्ठ nothḍa (IPA:t̪ʰɖə) थ्ड nothḍha (IPA:t̪ʰɖʱə) थ्ढ nothṇa (IPA:t̪ʰɳə) थ्ण nothta (IPA:t̪ʰt̪ə) थ्त noththa (IPA:t̪ʰt̪ʰə) थ्थ nothda (IPA:t̪ʰd̪ə) थ्द nothdha (IPA:t̪ʰd̪ʱə) थ्ध nothna (IPA:t̪ʰn̪ə) थ्न nothpa (IPA:t̪ʰpə) थ्प nothpha (IPA:t̪ʰpʰə) थ्फ nothba (IPA:t̪ʰbə) थ्ब nothbha (IPA:t̪ʰbʱə) थ्भ nothma (IPA:t̪ʰmə) थ्म nothya (IPA:t̪ʰjə) थ्य nothra (IPA:t̪ʰrə) थ्र nothla (IPA:t̪ʰlə) थ्ल nothva (IPA:t̪ʰvə) थ्व nothśa (IPA:t̪ʰʃə) थ्श nothṣa (IPA:t̪ʰʂə) थ्ष nothsa (IPA:t̪ʰsə) थ्स nothha (IPA:t̪ʰhə) थ्ह nothḷa (IPA:t̪ʰɭə) थ्ळ nod (IPA:d̪) द nodka (IPA:d̪kə) द्क nodkha (IPA:d̪kʰə) द्ख nodga (IPA:d̪ɡə) द्ग nodgha (IPA:d̪ɡʱə) द्घ nodṅa (IPA:d̪ŋə) द्ङ nodca (IPA:d̪cɕə) द्च nodcha (IPA:d̪cɕʰə) द्छ nodja (IPA:d̪ɟʝə) द्ज nodjha (IPA:d̪ɟʝʱə) द्झ nodña (IPA:d̪ɲə) द्ञ nodṭa (IPA:d̪ʈə) द्ट nodṭha (IPA:d̪ʈʰə) द्ठ nodḍa (IPA:d̪ɖə) द्ड nodḍha (IPA:d̪ɖʱə) द्ढ nodṇa (IPA:d̪ɳə) द्ण nodta (IPA:d̪t̪ə) द्त nodtha (IPA:d̪t̪ʰə) द्थ nodda (IPA:d̪d̪ə) द्द noddha (IPA:d̪d̪ʱə) द्ध nodna (IPA:d̪n̪ə) द्न nodpa (IPA:d̪pə) द्प nodpha (IPA:d̪pʰə) द्फ nodba (IPA:d̪bə) द्ब nodbha (IPA:d̪bʱə) द्भ nodma (IPA:d̪mə) द्म nodya (IPA:d̪jə) द्य nodra (IPA:d̪rə) द्र nodla (IPA:d̪lə) द्ल nodva (IPA:d̪və) द्व nodśa (IPA:d̪ʃə) द्श nodṣa (IPA:d̪ʂə) द्ष nodsa (IPA:d̪sə) द्स nodha (IPA:d̪hə) द्ह nodḷa (IPA:d̪ɭə) द्ळ nodh (IPA:d̪ʱ) ध nodhka (IPA:d̪ʱkə) ध्क nodhkha (IPA:d̪ʱkʰə) ध्ख nodhga (IPA:d̪ʱɡə) ध्ग nodhgha (IPA:d̪ʱɡʱə) ध्घ nodhṅa (IPA:d̪ʱŋə) ध्ङ nodhca (IPA:d̪ʱcɕə) ध्च nodhcha (IPA:d̪ʱcɕʰə) ध्छ nodhja (IPA:d̪ʱɟʝə) ध्ज nodhjha (IPA:d̪ʱɟʝʱə) ध्झ nodhña (IPA:d̪ʱɲə) ध्ञ nodhṭa (IPA:d̪ʱʈə) ध्ट nodhṭha (IPA:d̪ʱʈʰə) ध्ठ nodhḍa (IPA:d̪ʱɖə) ध्ड nodhḍha (IPA:d̪ʱɖʱə) ध्ढ nodhṇa (IPA:d̪ʱɳə) ध्ण nodhta (IPA:d̪ʱt̪ə) ध्त nodhtha (IPA:d̪ʱt̪ʰə) ध्थ nodhda (IPA:d̪ʱd̪ə) ध्द nodhdha (IPA:d̪ʱd̪ʱə) ध्ध nodhna (IPA:d̪ʱn̪ə) ध्न nodhpa (IPA:d̪ʱpə) ध्प nodhpha (IPA:d̪ʱpʰə) ध्फ nodhba (IPA:d̪ʱbə) ध्ब nodhbha (IPA:d̪ʱbʱə) ध्भ nodhma (IPA:d̪ʱmə) ध्म nodhya (IPA:d̪ʱjə) ध्य nodhra (IPA:d̪ʱrə) ध्र nodhla (IPA:d̪ʱlə) ध्ल nodhva (IPA:d̪ʱvə) ध्व nodhśa (IPA:d̪ʱʃə) ध्श nodhṣa (IPA:d̪ʱʂə) ध्ष nodhsa (IPA:d̪ʱsə) ध्स nodhha (IPA:d̪ʱhə) ध्ह nodhḷa (IPA:d̪ʱɭə) ध्ळ non (IPA:n̪) न nonka (IPA:n̪kə) न्क nonkha (IPA:n̪kʰə) न्ख nonga (IPA:n̪ɡə) न्ग nongha (IPA:n̪ɡʱə) न्घ nonṅa (IPA:n̪ŋə) न्ङ nonca (IPA:n̪cɕə) न्च noncha (IPA:n̪cɕʰə) न्छ nonja (IPA:n̪ɟʝə) न्ज nonjha (IPA:n̪ɟʝʱə) न्झ nonña (IPA:n̪ɲə) न्ञ nonṭa (IPA:n̪ʈə) न्ट nonṭha (IPA:n̪ʈʰə) न्ठ nonḍa (IPA:n̪ɖə) न्ड nonḍha (IPA:n̪ɖʱə) न्ढ nonṇa (IPA:n̪ɳə) न्ण nonta (IPA:n̪t̪ə) न्त nontha (IPA:n̪t̪ʰə) न्थ nonda (IPA:n̪d̪ə) न्द nondha (IPA:n̪d̪ʱə) न्ध nonna (IPA:n̪n̪ə) न्न nonpa (IPA:n̪pə) न्प nonpha (IPA:n̪pʰə) न्फ nonba (IPA:n̪bə) न्ब nonbha (IPA:n̪bʱə) न्भ nonma (IPA:n̪mə) न्म nonya (IPA:n̪jə) न्य nonra (IPA:n̪rə) न्र nonla (IPA:n̪lə) न्ल nonva (IPA:n̪və) न्व nonśa (IPA:n̪ʃə) न्श nonṣa (IPA:n̪ʂə) न्ष nonsa (IPA:n̪sə) न्स nonha (IPA:n̪hə) न्ह nonḷa (IPA:n̪ɭə) न्ळ nop (IPA:p) प nopka (IPA:pkə) प्क nopkha (IPA:pkʰə) प्ख nopga (IPA:pɡə) प्ग nopgha (IPA:pɡʱə) प्घ nopṅa (IPA:pŋə) प्ङ nopca (IPA:pcɕə) प्च nopcha (IPA:pcɕʰə) प्छ nopja (IPA:pɟʝə) प्ज nopjha (IPA:pɟʝʱə) प्झ nopña (IPA:pɲə) प्ञ nopṭa (IPA:pʈə) प्ट nopṭha (IPA:pʈʰə) प्ठ nopḍa (IPA:pɖə) प्ड nopḍha (IPA:pɖʱə) प्ढ nopṇa (IPA:pɳə) प्ण nopta (IPA:pt̪ə) प्त noptha (IPA:pt̪ʰə) प्थ nopda (IPA:pd̪ə) प्द nopdha (IPA:pd̪ʱə) प्ध nopna (IPA:pn̪ə) प्न noppa (IPA:ppə) प्प noppha (IPA:ppʰə) प्फ nopba (IPA:pbə) प्ब nopbha (IPA:pbʱə) प्भ nopma (IPA:pmə) प्म nopya (IPA:pjə) प्य nopra (IPA:prə) प्र nopla (IPA:plə) प्ल nopva (IPA:pvə) प्व nopśa (IPA:pʃə) प्श nopṣa (IPA:pʂə) प्ष nopsa (IPA:psə) प्स nopha (IPA:phə) प्ह nopḷa (IPA:pɭə) प्ळ noph (IPA:pʰ) फ nophka (IPA:pʰkə) फ्क nophkha (IPA:pʰkʰə) फ्ख nophga (IPA:pʰɡə) फ्ग nophgha (IPA:pʰɡʱə) फ्घ nophṅa (IPA:pʰŋə) फ्ङ nophca (IPA:pʰcɕə) फ्च nophcha (IPA:pʰcɕʰə) फ्छ nophja (IPA:pʰɟʝə) फ्ज nophjha (IPA:pʰɟʝʱə) फ्झ nophña (IPA:pʰɲə) फ्ञ nophṭa (IPA:pʰʈə) फ्ट nophṭha (IPA:pʰʈʰə) फ्ठ nophḍa (IPA:pʰɖə) फ्ड nophḍha (IPA:pʰɖʱə) फ्ढ nophṇa (IPA:pʰɳə) फ्ण nophta (IPA:pʰt̪ə) फ्त nophtha (IPA:pʰt̪ʰə) फ्थ nophda (IPA:pʰd̪ə) फ्द nophdha (IPA:pʰd̪ʱə) फ्ध nophna (IPA:pʰn̪ə) फ्न nophpa (IPA:pʰpə) फ्प nophpha (IPA:pʰpʰə) फ्फ nophba (IPA:pʰbə) फ्ब nophbha (IPA:pʰbʱə) फ्भ nophma (IPA:pʰmə) फ्म nophya (IPA:pʰjə) फ्य nophra (IPA:pʰrə) फ्र nophla (IPA:pʰlə) फ्ल nophva (IPA:pʰvə) फ्व nophśa (IPA:pʰʃə) फ्श nophṣa (IPA:pʰʂə) फ्ष nophsa (IPA:pʰsə) फ्स nophha (IPA:pʰhə) फ्ह nophḷa (IPA:pʰɭə) फ्ळ nob (IPA:b) ब nobka (IPA:bkə) ब्क nobkha (IPA:bkʰə) ब्ख nobga (IPA:bɡə) ब्ग nobgha (IPA:bɡʱə) ब्घ nobṅa (IPA:bŋə) ब्ङ nobca (IPA:bcɕə) ब्च nobcha (IPA:bcɕʰə) ब्छ nobja (IPA:bɟʝə) ब्ज nobjha (IPA:bɟʝʱə) ब्झ nobña (IPA:bɲə) ब्ञ nobṭa (IPA:bʈə) ब्ट nobṭha (IPA:bʈʰə) ब्ठ nobḍa (IPA:bɖə) ब्ड nobḍha (IPA:bɖʱə) ब्ढ nobṇa (IPA:bɳə) ब्ण nobta (IPA:bt̪ə) ब्त nobtha (IPA:bt̪ʰə) ब्थ nobda (IPA:bd̪ə) ब्द nobdha (IPA:bd̪ʱə) ब्ध nobna (IPA:bn̪ə) ब्न nobpa (IPA:bpə) ब्प nobpha (IPA:bpʰə) ब्फ nobba (IPA:bbə) ब्ब nobbha (IPA:bbʱə) ब्भ nobma (IPA:bmə) ब्म nobya (IPA:bjə) ब्य nobra (IPA:brə) ब्र nobla (IPA:blə) ब्ल nobva (IPA:bvə) ब्व nobśa (IPA:bʃə) ब्श nobṣa (IPA:bʂə) ब्ष nobsa (IPA:bsə) ब्स nobha (IPA:bhə) ब्ह nobḷa (IPA:bɭə) ब्ळ nobh (IPA:bʱ) भ nobhka (IPA:bʱkə) भ्क nobhkha (IPA:bʱkʰə) भ्ख nobhga (IPA:bʱɡə) भ्ग nobhgha (IPA:bʱɡʱə) भ्घ nobhṅa (IPA:bʱŋə) भ्ङ nobhca (IPA:bʱcɕə) भ्च nobhcha (IPA:bʱcɕʰə) भ्छ nobhja (IPA:bʱɟʝə) भ्ज nobhjha (IPA:bʱɟʝʱə) भ्झ nobhña (IPA:bʱɲə) भ्ञ nobhṭa (IPA:bʱʈə) भ्ट nobhṭha (IPA:bʱʈʰə) भ्ठ nobhḍa (IPA:bʱɖə) भ्ड nobhḍha (IPA:bʱɖʱə) भ्ढ nobhṇa (IPA:bʱɳə) भ्ण nobhta (IPA:bʱt̪ə) भ्त nobhtha (IPA:bʱt̪ʰə) भ्थ nobhda (IPA:bʱd̪ə) भ्द nobhdha (IPA:bʱd̪ʱə) भ्ध nobhna (IPA:bʱn̪ə) भ्न nobhpa (IPA:bʱpə) भ्प nobhpha (IPA:bʱpʰə) भ्फ nobhba (IPA:bʱbə) भ्ब nobhbha (IPA:bʱbʱə) भ्भ nobhma (IPA:bʱmə) भ्म nobhya (IPA:bʱjə) भ्य nobhra (IPA:bʱrə) भ्र nobhla (IPA:bʱlə) भ्ल nobhva (IPA:bʱvə) भ्व nobhśa (IPA:bʱʃə) भ्श nobhṣa (IPA:bʱʂə) भ्ष nobhsa (IPA:bʱsə) भ्स nobhha (IPA:bʱhə) भ्ह nobhḷa (IPA:bʱɭə) भ्ळ nom (IPA:m) म nomka (IPA:mkə) म्क nomkha (IPA:mkʰə) म्ख nomga (IPA:mɡə) म्ग nomgha (IPA:mɡʱə) म्घ nomṅa (IPA:mŋə) म्ङ nomca (IPA:mcɕə) म्च nomcha (IPA:mcɕʰə) म्छ nomja (IPA:mɟʝə) म्ज nomjha (IPA:mɟʝʱə) म्झ nomña (IPA:mɲə) म्ञ nomṭa (IPA:mʈə) म्ट nomṭha (IPA:mʈʰə) म्ठ nomḍa (IPA:mɖə) म्ड nomḍha (IPA:mɖʱə) म्ढ nomṇa (IPA:mɳə) म्ण nomta (IPA:mt̪ə) म्त nomtha (IPA:mt̪ʰə) म्थ nomda (IPA:md̪ə) म्द nomdha (IPA:md̪ʱə) म्ध nomna (IPA:mn̪ə) म्न nompa (IPA:mpə) म्प nompha (IPA:mpʰə) म्फ nomba (IPA:mbə) म्ब nombha (IPA:mbʱə) म्भ nomma (IPA:mmə) म्म nomya (IPA:mjə) म्य nomra (IPA:mrə) म्र nomla (IPA:mlə) म्ल nomva (IPA:mvə) म्व nomśa (IPA:mʃə) म्श nomṣa (IPA:mʂə) म्ष nomsa (IPA:msə) म्स nomha (IPA:mhə) म्ह nomḷa (IPA:mɭə) म्ळ noy (IPA:j) य noyka (IPA:jkə) य्क noykha (IPA:jkʰə) य्ख noyga (IPA:jɡə) य्ग noygha (IPA:jɡʱə) य्घ noyṅa (IPA:jŋə) य्ङ noyca (IPA:jcɕə) य्च noycha (IPA:jcɕʰə) य्छ noyja (IPA:jɟʝə) य्ज noyjha (IPA:jɟʝʱə) य्झ noyña (IPA:jɲə) य्ञ noyṭa (IPA:jʈə) य्ट noyṭha (IPA:jʈʰə) य्ठ noyḍa (IPA:jɖə) य्ड noyḍha (IPA:jɖʱə) य्ढ noyṇa (IPA:jɳə) य्ण noyta (IPA:jt̪ə) य्त noytha (IPA:jt̪ʰə) य्थ noyda (IPA:jd̪ə) य्द noydha (IPA:jd̪ʱə) य्ध noyna (IPA:jn̪ə) य्न noypa (IPA:jpə) य्प noypha (IPA:jpʰə) य्फ noyba (IPA:jbə) य्ब noybha (IPA:jbʱə) य्भ noyma (IPA:jmə) य्म noyya (IPA:jjə) य्य noyra (IPA:jrə) य्र noyla (IPA:jlə) य्ल noyva (IPA:jvə) य्व noyśa (IPA:jʃə) य्श noyṣa (IPA:jʂə) य्ष noysa (IPA:jsə) य्स noyha (IPA:jhə) य्ह noyḷa (IPA:jɭə) य्ळ nor (IPA:r) र norka (IPA:rkə) र्क norkha (IPA:rkʰə) र्ख norga (IPA:rɡə) र्ग norgha (IPA:rɡʱə) र्घ norṅa (IPA:rŋə) र्ङ norca (IPA:rcɕə) र्च norcha (IPA:rcɕʰə) र्छ norja (IPA:rɟʝə) र्ज norjha (IPA:rɟʝʱə) र्झ norña (IPA:rɲə) र्ञ norṭa (IPA:rʈə) र्ट norṭha (IPA:rʈʰə) र्ठ norḍa (IPA:rɖə) र्ड norḍha (IPA:rɖʱə) र्ढ norṇa (IPA:rɳə) र्ण norta (IPA:rt̪ə) र्त northa (IPA:rt̪ʰə) र्थ norda (IPA:rd̪ə) र्द nordha (IPA:rd̪ʱə) र्ध norna (IPA:rn̪ə) र्न norpa (IPA:rpə) र्प norpha (IPA:rpʰə) र्फ norba (IPA:rbə) र्ब norbha (IPA:rbʱə) र्भ norma (IPA:rmə) र्म norya (IPA:rjə) र्य norra (IPA:rrə) र्र norla (IPA:rlə) र्ल norva (IPA:rvə) र्व norśa (IPA:rʃə) र्श norṣa (IPA:rʂə) र्ष norsa (IPA:rsə) र्स norha (IPA:rhə) र्ह norḷa (IPA:rɭə) र्ळ nol (IPA:l) ल nolka (IPA:lkə) ल्क nolkha (IPA:lkʰə) ल्ख nolga (IPA:lɡə) ल्ग nolgha (IPA:lɡʱə) ल्घ nolṅa (IPA:lŋə) ल्ङ nolca (IPA:lcɕə) ल्च nolcha (IPA:lcɕʰə) ल्छ nolja (IPA:lɟʝə) ल्ज noljha (IPA:lɟʝʱə) ल्झ nolña (IPA:lɲə) ल्ञ nolṭa (IPA:lʈə) ल्ट nolṭha (IPA:lʈʰə) ल्ठ nolḍa (IPA:lɖə) ल्ड nolḍha (IPA:lɖʱə) ल्ढ nolṇa (IPA:lɳə) ल्ण nolta (IPA:lt̪ə) ल्त noltha (IPA:lt̪ʰə) ल्थ nolda (IPA:ld̪ə) ल्द noldha (IPA:ld̪ʱə) ल्ध nolna (IPA:ln̪ə) ल्न nolpa (IPA:lpə) ल्प nolpha (IPA:lpʰə) ल्फ nolba (IPA:lbə) ल्ब nolbha (IPA:lbʱə) ल्भ nolma (IPA:lmə) ल्म nolya (IPA:ljə) ल्य nolra (IPA:lrə) ल्र nolla (IPA:llə) ल्ल nolva (IPA:lvə) ल्व nolśa (IPA:lʃə) ल्श nolṣa (IPA:lʂə) ल्ष nolsa (IPA:lsə) ल्स nolha (IPA:lhə) ल्ह nolḷa (IPA:lɭə) ल्ळ nov (IPA:v) व novka (IPA:vkə) व्क novkha (IPA:vkʰə) व्ख novga (IPA:vɡə) व्ग novgha (IPA:vɡʱə) व्घ novṅa (IPA:vŋə) व्ङ novca (IPA:vcɕə) व्च novcha (IPA:vcɕʰə) व्छ novja (IPA:vɟʝə) व्ज novjha (IPA:vɟʝʱə) व्झ novña (IPA:vɲə) व्ञ novṭa (IPA:vʈə) व्ट novṭha (IPA:vʈʰə) व्ठ novḍa (IPA:vɖə) व्ड novḍha (IPA:vɖʱə) व्ढ novṇa (IPA:vɳə) व्ण novta (IPA:vt̪ə) व्त novtha (IPA:vt̪ʰə) व्थ novda (IPA:vd̪ə) व्द novdha (IPA:vd̪ʱə) व्ध novna (IPA:vn̪ə) व्न novpa (IPA:vpə) व्प novpha (IPA:vpʰə) व्फ novba (IPA:vbə) व्ब novbha (IPA:vbʱə) व्भ novma (IPA:vmə) व्म novya (IPA:vjə) व्य novra (IPA:vrə) व्र novla (IPA:vlə) व्ल novva (IPA:vvə) व्व novśa (IPA:vʃə) व्श novṣa (IPA:vʂə) व्ष novsa (IPA:vsə) व्स novha (IPA:vhə) व्ह novḷa (IPA:vɭə) व्ळ noś (IPA:ʃ) श nośka (IPA:ʃkə) श्क nośkha (IPA:ʃkʰə) श्ख nośga (IPA:ʃɡə) श्ग nośgha (IPA:ʃɡʱə) श्घ nośṅa (IPA:ʃŋə) श्ङ nośca (IPA:ʃcɕə) श्च noścha (IPA:ʃcɕʰə) श्छ nośja (IPA:ʃɟʝə) श्ज nośjha (IPA:ʃɟʝʱə) श्झ nośña (IPA:ʃɲə) श्ञ nośṭa (IPA:ʃʈə) श्ट nośṭha (IPA:ʃʈʰə) श्ठ nośḍa (IPA:ʃɖə) श्ड nośḍha (IPA:ʃɖʱə) श्ढ nośṇa (IPA:ʃɳə) श्ण nośta (IPA:ʃt̪ə) श्त nośtha (IPA:ʃt̪ʰə) श्थ nośda (IPA:ʃd̪ə) श्द nośdha (IPA:ʃd̪ʱə) श्ध nośna (IPA:ʃn̪ə) श्न nośpa (IPA:ʃpə) श्प nośpha (IPA:ʃpʰə) श्फ nośba (IPA:ʃbə) श्ब nośbha (IPA:ʃbʱə) श्भ nośma (IPA:ʃmə) श्म nośya (IPA:ʃjə) श्य nośra (IPA:ʃrə) श्र nośla (IPA:ʃlə) श्ल nośva (IPA:ʃvə) श्व nośśa (IPA:ʃʃə) श्श nośṣa (IPA:ʃʃə) श्ष nośsa (IPA:ʃsə) श्स nośha (IPA:ʃhə) श्ह nośḷa (IPA:ʃɭə) श्ळ noṣ (IPA:ʂ) ष noṣka (IPA:ʃkə) ष्क noṣkha (IPA:ʃkʰə) ष्ख noṣga (IPA:ʃɡə) ष्ग noṣgha (IPA:ʃɡʱə) ष्घ noṣṅa (IPA:ʃŋə) ष्ङ noṣca (IPA:ʃcɕə) ष्च noṣcha (IPA:ʃcɕʰə) ष्छ noṣja (IPA:ʃɟʝə) ष्ज noṣjha (IPA:ʃɟʝʱə) ष्झ noṣña (IPA:ʃɲə) ष्ञ noṣṭa (IPA:ʃʈə) ष्ट noṣṭha (IPA:ʃʈʰə) ष्ठ noṣḍa (IPA:ʃɖə) ष्ड noṣḍha (IPA:ʃɖʱə) ष्ढ noṣṇa (IPA:ʃɳə) ष्ण noṣta (IPA:ʃt̪ə) ष्त noṣtha (IPA:ʃt̪ʰə) ष्थ noṣda (IPA:ʃd̪ə) ष्द noṣdha (IPA:ʃd̪ʱə) ष्ध noṣna (IPA:ʃn̪ə) ष्न noṣpa (IPA:ʃpə) ष्प noṣpha (IPA:ʃpʰə) ष्फ noṣba (IPA:ʃbə) ष्ब noṣbha (IPA:ʃbʱə) ष्भ noṣma (IPA:ʃmə) ष्म noṣya (IPA:ʃjə) ष्य noṣra (IPA:ʃrə) ष्र noṣla (IPA:ʃlə) ष्ल noṣva (IPA:ʃvə) ष्व noṣśa (IPA:ʃʃə) ष्श no\1ṣa (IPA:ʃʃə) ष्ष noṣsa (IPA:ʃsə) ष्स noṣha (IPA:ʃhə) ष्ह noṣḷa (IPA:ʃɭə) ष्ळ nos (IPA:s) स noska (IPA:skə) स्क noskha (IPA:skʰə) स्ख nosga (IPA:sɡə) स्ग nosgha (IPA:sɡʱə) स्घ nosṅa (IPA:sŋə) स्ङ nosca (IPA:scɕə) स्च noscha (IPA:scɕʰə) स्छ nosja (IPA:sɟʝə) स्ज nosjha (IPA:sɟʝʱə) स्झ nosña (IPA:sɲə) स्ञ nosṭa (IPA:sʈə) स्ट nosṭha (IPA:sʈʰə) स्ठ nosḍa (IPA:sɖə) स्ड nosḍha (IPA:sɖʱə) स्ढ nosṇa (IPA:sɳə) स्ण nosta (IPA:st̪ə) स्त nostha (IPA:st̪ʰə) स्थ nosda (IPA:sd̪ə) स्द nosdha (IPA:sd̪ʱə) स्ध nosna (IPA:sn̪ə) स्न nospa (IPA:spə) स्प nospha (IPA:spʰə) स्फ nosba (IPA:sbə) स्ब nosbha (IPA:sbʱə) स्भ nosma (IPA:smə) स्म nosya (IPA:sjə) स्य nosra (IPA:srə) स्र nosla (IPA:slə) स्ल nosva (IPA:svə) स्व nosśa (IPA:sʃə) स्श nosṣa (IPA:sʂə) स्ष nossa (IPA:ssə) स्स nosha (IPA:shə) स्ह nosḷa (IPA:sɭə) स्ळ noh (IPA:h) ह nohka (IPA:hkə) ह्क nohkha (IPA:hkʰə) ह्ख nohga (IPA:hɡə) ह्ग nohgha (IPA:hɡʱə) ह्घ nohṅa (IPA:hŋə) ह्ङ nohca (IPA:hcɕə) ह्च nohcha (IPA:hcɕʰə) ह्छ nohja (IPA:hɟʝə) ह्ज nohjha (IPA:hɟʝʱə) ह्झ nohña (IPA:hɲə) ह्ञ nohṭa (IPA:hʈə) ह्ट nohṭha (IPA:hʈʰə) ह्ठ nohḍa (IPA:hɖə) ह्ड nohḍha (IPA:hɖʱə) ह्ढ nohṇa (IPA:hɳə) ह्ण nohta (IPA:ht̪ə) ह्त nohtha (IPA:ht̪ʰə) ह्थ nohda (IPA:hd̪ə) ह्द nohdha (IPA:hd̪ʱə) ह्ध nohna (IPA:hn̪ə) ह्न nohpa (IPA:hpə) ह्प nohpha (IPA:hpʰə) ह्फ nohba (IPA:hbə) ह्ब nohbha (IPA:hbʱə) ह्भ nohma (IPA:hmə) ह्म nohya (IPA:hjə) ह्य nohra (IPA:hrə) ह्र nohla (IPA:hlə) ह्ल nohva (IPA:hvə) ह्व nohśa (IPA:hʃə) ह्श nohṣa (IPA:hʂə) ह्ष nohsa (IPA:hsə) ह्स nohha (IPA:hhə) ह्ह nohḷa (IPA:hɭə) ह्ळ noḷ (IPA:ɭ) ळ noḷka (IPA:ɭkə) ळ्क noḷkha (IPA:ɭkʰə) ळ्ख noḷga (IPA:ɭɡə) ळ्ग noḷgha (IPA:ɭɡʱə) ळ्घ noḷṅa (IPA:ɭŋə) ळ्ङ noḷca (IPA:ɭcɕə) ळ्च noḷcha (IPA:ɭcɕʰə) ळ्छ noḷja (IPA:ɭɟʝə) ळ्ज noḷjha (IPA:ɭɟʝʱə) ळ्झ noḷña (IPA:ɭɲə) ळ्ञ noḷṭa (IPA:ɭʈə) ळ्ट noḷṭha (IPA:ɭʈʰə) ळ्ठ noḷḍa (IPA:ɭɖə) ळ्ड noḷḍha (IPA:ɭɖʱə) ळ्ढ noḷṇa (IPA:ɭɳə) ळ्ण noḷta (IPA:ɭt̪ə) ळ्त noḷtha (IPA:ɭt̪ʰə) ळ्थ noḷda (IPA:ɭd̪ə) ळ्द noḷdha (IPA:ɭd̪ʱə) ळ्ध noḷna (IPA:ɭn̪ə) ळ्न noḷpa (IPA:ɭpə) ळ्प noḷpha (IPA:ɭpʰə) ळ्फ noḷba (IPA:ɭbə) ळ्ब noḷbha (IPA:ɭbʱə) ळ्भ noḷma (IPA:ɭmə) ळ्म noḷya (IPA:ɭjə) ळ्य noḷra (IPA:ɭrə) ळ्र noḷla (IPA:ɭlə) ळ्ल noḷva (IPA:ɭvə) ळ्व noḷśa (IPA:ɭʃə) ळ्श noḷṣa (IPA:ɭʂə) ळ्ष noḷsa (IPA:ɭsə) ळ्स noḷha (IPA:ɭhə) ळ्ह noḷḷa (IPA:ɭɭə) ळ्ळ no
ब्राह्मी परिवार की लिपियों में देवनागरी लिपि में सबसे अधिक संयुक्ताक्षर समर्थित हैं। डिजिटल उपकरणों पर छंदस फ़ॉन्ट देवनागरी में बहुत संयुक्ताक्षर समर्थन हैं।
250px|thumb| द् + ध् + र् + य संयुक्ताक्षर
पुरानी देवनागरी
पुराने समय में प्रयुक्त हुई जाने वाली देवनागरी के कुछ वर्ण आधुनिक देवनागरी से भिन्न हैं।
आधुनिक देवनागरी पुरानी देवनागरी 15px 15px 15px 15px 15px 15px 15px 15px
देवनागरी लिपि के गुण
भारतीय भाषाओं के लिये वर्णों की पूर्णता एवं संपन्नता (५२ वर्ण, न बहुत अधिक न बहुत कम)।
एक ध्वनि के लिये एक सांकेतिक चिह्न — जैसा बोलें वैसा लिखें।
लेखन और उच्चारण और में एकरुपता — जैसा लिखें, वैसे पढ़ें।
एक सांकेतिक चिह्न द्वारा केवल एक ध्वनि का निरूपण — जैसा लिखें वैसा पढ़ें।
उपरोक्त दोनों गुणों के कारण ब्राह्मी लिपि का उपयोग करने वाली सभी भारतीय भाषाएँ 'स्पेलिंग की समस्या' से मुक्त हैं।
स्वर और व्यंजन में तर्कसंगत एवं वैज्ञानिक क्रम-विन्यास — देवनागरी के वर्णों का क्रमविन्यास उनके उच्चारण के स्थान (ओष्ठ्य, दंत्य, तालव्य, मूर्धन्य आदि) को ध्यान में रखते हुए बनाया गया है। इसके अतिरिक्त वर्ण-क्रम के निर्धारण में भाषा-विज्ञान के कई अन्य पहलुओ का भी ध्यान रखा गया है। देवनागरी की वर्णमाला (वास्तव में, ब्राह्मी से उत्पन्न सभी लिपियों की वर्णमालाएँ) एक अत्यंत तर्कपूर्ण ध्वन्यात्मक क्रम (phonetic order) में व्यवस्थित है। यह क्रम इतना तर्कपूर्ण है कि अंतर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक संघ (IPA) ने अंतर्राष्ट्रीय ध्वन्यात्मक वर्णमाला के निर्माण के लिये मामूली परिवर्तनों के साथ इसी क्रम को अंगीकार कर लिया।
वर्णों का प्रत्याहार रूप में उपयोग : माहेश्वर सूत्र में देवनागरी वर्णों को एक विशिष्ट क्रम में सजाया गया है। इसमें से किसी वर्ण से आरंभ करके किसी दूसरे वर्ण तक के वर्णसमूह को दो अक्षर का एक छोटा नाम दे दिया जाता है जिसे 'प्रत्याहार' कहते हैं। प्रत्याहार का प्रयोग करते हुए संधि आदि के नियम अत्यंत सरल और संक्षिप्त ढंग से दिए गये हैं (जैसे, आद् गुणः)
देवनागरी लिपि के वर्णों का उपयोग संख्याओं को निरूपित करने के लिये किया जाता रहा है। (देखिए कटपयादि, भूतसंख्या तथा आर्यभट्ट की संख्यापद्धति)
मात्राओं की संख्या के आधार पर छंदों का वर्गीकरण : यह भारतीय लिपियों की अद्भुत विशेषता है कि किसी पद्य के लिखित रूप से मात्राओं और उनके क्रम को गिनकर बताया जा सकता है कि कौन सा छंद है। रोमन, अरबी एवं अन्य में यह गुण अप्राप्य है।
लिपि चिह्नों के नाम और ध्वनि में कोई अंतर नहीं (जैसे रोमन में अक्षर का नाम “बी” है और ध्वनि “ब” है)
लेखन और मुद्रण में एकरूपता (रोमन, अरबी और फ़ारसी में हस्तलिखित और मुद्रित रूप अलग-अलग हैं)
देवनागरी, 'स्माल लेटर" और 'कैपिटल लेटर' की अवैज्ञानिक व्यवस्था से मुक्त है।
मात्राओं का प्रयोग
thumb|600px|center|क के उपर विभिन्न मात्राएँ लगाने के बाद का स्वरूप
अर्ध-अक्षर के रूप की सुगमता : खड़ी पाई को हटाकर, दायें से बायें क्रम में लिखकर तथा अर्द्ध अक्षर को ऊपर तथा उसके नीचे पूर्ण अक्षर को लिखकर, ऊपर नीचे क्रम में संयुक्ताक्षर बनाने की दो प्रकार की रीति प्रचलित है।
अन्य - बायें से दायें, शिरोरेखा, संयुक्ताक्षरों का प्रयोग, अधिकांश वर्णों में एक उर्ध्व-रेखा की प्रधानता, अनेक ध्वनियों को निरूपित करने की क्षमता आदि।http://www.dsource.in/resource/devanagari-letterforms-history/devanagari_letterforms/characteristics_of_devanagari.html History of Devanagari Letterforms 10 अप्रैल 2015 https://web.archive.org/web/20150414182327/http://www.dsource.in/resource/devanagari-letterforms-history/devanagari_letterforms/characteristics_of_devanagari.html 14 अप्रैल 2015 dead
भारतवर्ष के साहित्य में कुछ ऐसे रूप विकसित हुए हैं जो दायें-से-बायें अथवा बाये-से-दायें पढ़ने पर समान रहते हैं। उदाहरणस्वरूप केशवदास का एक सवैया लीजिए :
माँ सस मोह सजै बन बीन, नवीन बजै सह मोस समा।
मार लतानि बनावति सारि, रिसाति वनाबनि ताल रमा ॥
मानव ही रहि मोरद मोद, दमोदर मोहि रही वनमा।
माल बनी बल केसबदास, सदा बसकेल बनी बलमा ॥
इस सवैया की किसी भी पंक्ति को किसी ओर से भी पढिये, कोई अंतर नहीं पड़ेगा।
सदा सील तुम सरद के दरस हर तरह खास।
सखा हर तरह सरद के सर सम तुलसीदास॥
देवनागरी लिपि के दोष
right|thumb|300px|लेकिन लगभग सभी भारतीय लिपियों में छोटी इ या छोटी ए (ऎ) की मात्रा व्यंजन के पहले ही लगती है।
(१) कुल मिलाकर 403 टाइप होने के कारण टंकण, मुद्रण में कठिनाई। किंतु आधुनिक मुद्रक तकनीक के लिए यह कोई समस्या नहीं है।
(२) कुछ लोग शिरोरेखा का प्रयोग अनावश्यक मानते हैं।
(३) अनावश्यक वर्ण (ऋ, ॠ, लृ, ॡ, ष)— बहुत से लोग इनका शुद्ध उच्चारण नहीं कर पाते।
(४) द्विरूप वर्ण (अ, ज्ञ, क्ष, त्र, छ, झ, ण, श) आदि को दो-दो प्रकार से लिखा जाता है।
(५) समरूप वर्ण (ख में र+व का, घ में ध का, म में भ का भ्रम होना)।
(६) वर्णों के संयुक्त करने की व्यवस्था एकसमान नहीं है।
(७) अनुस्वार एवं अनुनासिका के प्रयोग में एकरूपता का अभाव।
(८) त्वरापूर्ण लेखन नहीं क्योंकि लेखन में हाथ बार-बार उठाना पड़ता है।
(९) वर्णों के संयुक्तीकरण में र के प्रयोग को लेकर अनेक लोगों को भ्रम की स्थिति।
(११) इ की मात्रा (ि) का लेखन वर्ण के पहले, किंतु उच्चारण वर्ण के बाद।
देवनागरी पर महापुरुषों के विचार
आचार्य विनोबा भावे संसार की अनेक लिपियों के जानकार थे। उनकी स्पष्ट धारणा थी कि देवनागरी लिपि भारत ही नहीं, संसार की सर्वाधिक वैज्ञानिक लिपि है। अगर भारत की सब भाषाओं के लिए इसका व्यवहार चल पड़े तो सारे भारतीय एक दूसरे के बिल्कुल नज़दीक आ जाएँगे। हिंदुस्तान की एकता में देवनागरी लिपि हिंदी से ही अधिक उपयोगी हो सकती है। मदभुशी अनंतशयनम अयंगार तो दक्षिण भारतीय भाषाओं के लिए भी देवनागरी की संभावना स्वीकार करते थे। सेठ गोविंद दास इसे राष्ट्रीय लिपि घोषित करने के पक्ष में थे।
(१) हिंदुस्तान की एकता के लिये हिंदी भाषा जितना काम देगी, उससे बहुत अधिक काम देवनागरी लिपि दे सकती है।
— आचार्य विनोबा भावे
(२) देवनागरी किसी भी लिपि की तुलना में अधिक वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित लिपि है।
— सर विलियम जोन्स
(३) मानव मस्तिष्क से निकली हुई वर्णमालाओं में नागरी सबसे अधिक पूर्ण वर्णमाला है।
— जान क्राइस्ट
(४) उर्दू लिखने के लिये देवनागरी लिपि अपनाने से उर्दू उत्कर्ष को प्राप्त होगी।
— ख़ुशवंत सिंह
(५) The Devanagari alphabet is a splendid monument of phonological accuracy, in the sciences of language.
— मोहन लाल विद्यार्थी - Indian Culture Through the Ages, p. 61
(६) एक सर्वमान्य लिपि स्वीकार करने से भारत की विभिन्न भाषाओं में जो ज्ञान का भंडार भरा है उसे प्राप्त करने का एक साधारण व्यक्ति को सहज ही अवसर प्राप्त होगा। हमारे लिए यदि कोई सर्व-मान्य लिपि स्वीकार करना संभव है तो वह देवनागरी है।
— महोम्मेदाली करीम छागला
(७) प्राचीन भारत के महत्तम उपलब्धियों में से एक उसकी विलक्षण वर्णमाला है जिसमें प्रथम स्वर आते हैं और फिर व्यंजन जो सभी उत्पत्ति क्रम के अनुसार अत्यंत वैज्ञानिक ढंग से वर्गीकृत किये गए हैं। इस वर्णमाला का अविचारित रूप से वर्गीकृत तथा अपर्याप्त रोमन वर्णमाला से, जो तीन हजार वर्षों से क्रमशः विकसित हो रही थी, पर्याप्त अंतर है।
— आर्थर लेवेलिन बाशम, "द वंडर दैट वाज इंडिया" के लेखक और इतिहासविद्
भारत के लिये देवनागरी का महत्त्व
भारत के लिये देवनागरी का महत्व
बहुत से लोगों का विचार है कि भारत में अनेकों भाषाएँ होना कोई समस्या नहीं है जबकि उनकी लिपियाँ अलग-अलग होना बहुत बड़ी समस्या है। न्यायमूर्ति शारदा चरण मित्र (१८४८–१९१७) ने भारत जैसे विशाल बहुभाषा-भाषी और बहुजातीय राष्ट्र को एक सूत्र में बाँधने के उद्देश्य से ‘एक लिपि विस्तार परिषद’ की स्थापना की थी और परिषद की ओर से १९०७ में ‘देवनागर’ नामक मासिक पत्र निकाला था जो बीच में कुछ व्यवधान के बावजूद उनके जीवन पर्यंत अर्थात् सन् १९१७ तक निकलता रहा।
गाँधीजी ने १९४० में गुजराती भाषा की एक पुस्तक को देवनागरी लिपि में छपवाया और इसका उद्देश्य बताया था कि मेरा सपना है कि संस्कृत से निकली हर भाषा की लिपि देवनागरी हो।https://www.shabdankan.com/2017/09/jindi-diwas-gandhi-on-devanagari.html देवनागरी की महत्ता पर बापू का पत्र 17 मई 2018 https://web.archive.org/web/20180517223405/https://www.shabdankan.com/2017/09/jindi-diwas-gandhi-on-devanagari.html 17 मई 2018 live
इस संस्करण को हिंदी में छापने के दो उद्देश्य हैं। मुख्य उद्देश्य यह है कि मैं जानना चाहता हूँ कि, गुजराती पढ़ने वालों को देवनागरी लिपि में पढ़ना कितना अच्छा लगता है। मैं जब दक्षिण अफ़्रीका में था तब से मेरा स्वप्न है कि संस्कृत से निकली हर भाषा की एक लिपि हो, और वह देवनागरी हो। पर यह अभी भी स्वप्न ही है। एक-लिपि के बारे में बातचीत तो खूब होती हैं, लेकिन वही ‘बिल्ली के गले में घंटी कौन बाँधे’ वाली बात है। कौन पहल करे! गुजराती कहेगा ‘हमारी लिपि तो बड़ी सुंदर सलोनी आसान है, इसे कैसे छोडूँगा?’ बीच में अभी एक नया पक्ष और निकल के आया है, वह ये, कुछ लोग कहते हैं कि देवनागरी ख़ुद ही अभी अधूरी है, कठिन है; मैं भी यह मानता हूँ कि इसमें सुधार होना चाहिए। लेकिन अगर हम हर चीज़ के बिलकुल ठीक हो जाने का इंतज़ार करते रहेंगे तो सब हाथ से जायेगा, न जग के रहोगे न जोगी बनोगे। अब हमें यह नहीं करना चाहिए। इसी आजमाइश के लिए हमने यह देवनागरी संस्करण निकाला है। अगर लोग यह (देवनागरी में गुजराती) पसंद करेंगे तो ‘नवजीवन पुस्तक’ और भाषाओं को भी देवनागरी में प्रकाशित करने का प्रयत्न करेगा।
इस साहस के पीछे दूसरा उद्देश्य यह है कि हिंदी पढ़ने वाली जनता गुजराती पुस्तक देवनागरी लिपि में पढ़ सके। मेरा अभिप्राय यह है कि अगर देवनागरी लिपि में गुजराती किताब छपेगी तो भाषा को सीखने में आने वाली आधी दिक्कतें तो ऐसे ही कम हो जाएँगी।
इस संस्करण को लोकप्रिय बनाने के लिए इसकी कीमत बहुत कम रखी गयी है, मुझे उम्मीद है कि इस साहस को गुजराती और हिंदी पढ़ने वाले सफल करेंगे।इसी प्रकार विनोबा भावे का विचार था कि
हिंदुस्तान की एकता के लिये हिंदी भाषा जितना काम देगी, उससे बहुत अधिक काम देवनागरी लिपि देगी। इसलिए मैं चाहता हूँ कि सभी भाषाएँ देवनागरी में भी लिखी जाएँ। सभी लिपियाँ चलें लेकिन साथ-साथ देवनागरी का भी प्रयोग किया जाये। विनोबा जी "नागरी ही" नहीं "नागरी भी" चाहते थे। उन्हीं की सद्प्रेरणा से 1975 में नागरी लिपि परिषद की स्थापना हुई।''
विश्वलिपि के रूप में देवनागरी
बौद्ध संस्कृति से प्रभावित क्षेत्र नागरी के लिए नया नहीं है। चीन और जापान चित्रलिपि का व्यवहार करते हैं। इन चित्रों की संख्या बहुत अधिक होने के कारण भाषा सीखने में बहुत कठिनाई होती है। देववाणी की वाहिका होने के नाते देवनागरी भारत की सीमाओं से बाहर निकलकर चीन और जापान के लिए भी समुचित विकल्प दे सकती है। भारतीय मूल के लोग संसार में जहाँ-जहाँ भी रहते हैं, वे देवनागरी से परिचय रखते हैं, विशेषकर मॉरिशस, सूरीनाम, फ़िजी, गुयाना, त्रिनिदाद, टोबेगो आदि के लोग। इस तरह देवनागरी लिपि न केवल भारत के अंदर सारे प्रांतवासियों को प्रेम-बंधन में बाँधकर सीमोल्लंघन कर दक्षिण-पूर्व एशिया के पुराने वृहत्तर भारतीय परिवार को भी ‘बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय’ अनुप्राणित कर सकती है तथा विभिन्न देशों को एक अधिक सुचारू और वैज्ञानिक विकल्प प्रदान कर ‘विश्व नागरी’ की पदवी का दावा इक्कीसवीं सदी में कर सकती है। उस पर प्रसार लिपिगत साम्राज्यवाद और शोषण का माध्यम न होकर सत्य, अहिंसा, त्याग, संयम जैसे उदात्त मानवमूल्यों का संवाहक होगा, असत् से सत्, तमस् से ज्योति तथा मृत्यु से अमरता की दिशा में। देवनागरी एक भारतीय लिपि है जिसमें अनेक भारतीय भाषाएँ तथा कई विदेशी भाषाएँ लिखी जाती हैं। यह बायें से दायें लिखी जाती है। इसकी पहचान एक क्षैतिज रेखा से है जिसे ‘शिरोरेखा’ कहते हैं। संस्कृत, पालि, हिंदी, मराठी, कोंकणी, सिंधी, कश्मीरी, हरियाणवी, डोगरी, खस, नेपाल भाषा (तथा अन्य नेपाली भाषाएँ), तमांग भाषा, गढ़वाली, बोड़ो, अंगिका, मगही, भोजपुरी, नागपुरी, मैथिली, संथाली, राजस्थानी बघेली आदि भाषाएँ और स्थानीय बोलियाँ भी देवनागरी में लिखी जाती हैं।
इसके अतिरिक्त कुछ स्थितियों में गुजराती, पंजाबी, बिष्णुपुरिया मणिपुरी, रोमानी और उर्दू भाषाएँ भी देवनागरी में लिखी जाती हैं। देवनागरी विश्व में सर्वाधिक प्रयुक्त लिपियों में से एक है। यह दक्षिण एशिया की १७० से अधिक भाषाओं को लिखने के लिए प्रयुक्त हो रही है।
लिपि-विहीन भाषाओं के लिये देवनागरी
लिपिविहीन भाषाओं के लिये देवनागरी
दुनिया की कई भाषाओं के लिये देवनागरी सबसे अच्छा विकल्प हो सकती है क्योंकि यह यह बोलने की पूरी आज़ादी देता है। दुनिया की और किसी भी लिपि में यह नहीं हो सकता है। इंडोनेशिया, वियतनाम, अफ़्रीका आदि के लिये तो यही सबसे सही रहेगा। अष्टाध्यायी को देखकर कोई भी समझ सकता है की दुनिया में इससे अच्छी कोई भी लिपि नहीं है। अगर दुनिया पक्षपातरहित हो तो देवनागरी ही दुनिया की सर्वमान्य लिपि होगी क्योंकि यह पूर्णत: वैज्ञानिक है। अंग्रेज़ी भाषा में वर्तनी (स्पेलिंग) की विकराल समस्या के कारगर समाधान के लिये देवनागरी पर आधारित देवग्रीक लिपि प्रस्तावित की गयी है।
देवनागरी लिपि में सुधार
देवनागरी का विकास उस युग में हुआ था जब लेखन हाथ से किया जाता था और लेखन के लिए शिलाएँ, ताड़पत्र, चर्मपत्र, भोजपत्र, ताम्रपत्र आदि का ही प्रयोग होता था। किंतु लेखन प्रौद्योगिकी ने बहुत अधिक विकास किया और प्रिंटिंग प्रेस, टाइपराइटर आदि से होते हुए वह कंप्यूटर युग में पहुँच गयी है जहाँ बोलकर भी लिखना संभव हो गया है।
जब प्रिंटिंग एवं टाइपिंग का युग आया तो देवनागरी के यंत्रीकरण में कुछ अतिरिक्त समस्याएँ सामने आयी जो रोमन में नहीं थीं। उदाहरण के लिए रोमन टाइपराइटर में अपेक्षाकृत कम कुंजियों की आवश्यकता पड़ती थी। देवनागरी में संयुक्ताक्षर की अवधारणा होने से भी बहुत अधिक कुंजियों की आवश्यकता पड़ रही थी। ध्यातव्य है कि ये समस्याएँ केवल देवनागरी में नहीं थी बल्कि रोमन और
सिरिलिक को छोड़कर लगभग सभी लिपियों में थी। चीनी और उस परिवार की अन्य लिपियों में तो यह समस्या अपने गंभीरतम रूप में थी।
इन सामयिक समस्याओं को ध्यान में रखते हुए अनेक विद्वानों और मनीषियों ने देवनागरी के सरलीकरण और मानकीकरण पर विचार किया और अपने सुझाव दिए। इनमें से अनेक सुझावों को क्रियान्वित नहीं किया जा सका या उन्हें अस्वीकार कर दिया गया। कहने की आवश्यकता नहीं है कि कंप्यूटर युग आने से (या प्रिंटिंग की नई तकनीकी आने से) देवनागरी से संबंधित सारी समस्याएँ स्वयं समाप्त हों गयीं।
भारत के स्वाधीनता आंदोलनों में हिंदी को राष्ट्रभाषा का दर्जा प्राप्त होने के बाद लिपि के विकास व मानकीकरण हेतु कई व्यक्तिगत एवं संस्थागत प्रयास हुए। सर्वप्रथम बंबई (मुंबई) के महादेव गोविंद रानाड़े ने एक लिपि सुधार समिति का गठन किया। तदनंतर महाराष्ट्र साहित्य परिषद पुणे ने सुधार योजना तैयार की। सन १९०४ में बाल गंगाधर तिलक ने अपने केसरी पत्र में देवनागरी लिपि के सुधार की चर्चा की। परिणामस्वरूप देवनागरी के टाइपों की संख्या १९० निर्धारित की गयी और इन्हें 'केसरी टाइप' कहा गया।https://www.hindisahity.com/devnagri-lipi-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%AA%E0%A4%BF-%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B8/ देवनागरी लिपि का विकास 15 जून 2020 https://web.archive.org/web/20190607034811/https://www.hindisahity.com/devnagri-lipi-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b5%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%b2%e0%a4%bf%e0%a4%aa%e0%a4%bf-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b8/ 7 जून 2019 live
आगे चलकर सावरकर बंधुओं ने 'अ' की बारहखड़ी प्रयोग करने का सुझाव दिया ( अर्थात् 'ई' न लिखकर अ पर बड़ी ई की मात्रा लगायी जाय)। डॉ॰ गोरख प्रसाद ने सुझाव दिया कि मात्राओं को व्यंजन के बाद दाहिने तरफ अलग से रखा जाय। डॉ॰ श्यामसुंदर दास ने अनुस्वार के प्रयोग को व्यापक बनाकर देवनागरी के सरलीकरण के प्रयास किये (पंचमाक्षर के बदले अनुस्वार के प्रयोग)। इसी प्रकार श्रीनिवास का सुझाव था कि महाप्राण वर्ण के लिए अल्पप्राण के नीचे ऽ चिह्न लगाया जाय। १९४५ में काशी नागरी प्रचारिणी सभा द्वारा अ की बारहखड़ी और श्रीनिवास के सुझाव को अस्वीकार करने का निर्णय लिया गया।Hindi for Competitive Examinations, पृष्ठ ५१ से ५६
देवनागरी के विकास में अनेक संस्थागत प्रयासों की भूमिका भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण रही है। १९३५ में हिंदी साहित्य सम्मेलन ने नागरी लिपि सुधार समितिNotes on the works of Script Reformsजून 2020 InternetArchiveBot के माध्यम से 'अ' की बारहखड़ी और शिरोरेखा से संबंधित सुधार सुझाए। इसी प्रकार, १९४७ में आचार्य नरेंद्र देव की अध्यक्षता में गठित एक समिति ने बारहखड़ी, मात्रा व्यवस्था, अनुस्वार व अनुनासिक से संबंधित महत्त्वपूर्ण सुझाव दिये। देवनागरी लिपि के विकास हेतु भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने कई स्तरों पर प्रयास किये हैं। सन् १९६६ में मानक देवनागरी वर्णमाला प्रकाशित की गई और १९६७ में ‘हिंदी वर्तनी का मानकीकरण’ प्रकाशित किया गया। १९८३ में ‘देवनागरी लिपि तथा हिंदी की वर्तनी का मानकीकरण’ प्रकाशित किया गया।
देवनागरी के संपादक व अन्य सॉफ़्टवेयर
इंटरनेट पर हिंदी के साधन देखिये।
देवनागरी से अन्य लिपियों में रूपांतरण
ITRANS (iTrans) निरूपण, देवनागरी को लैटिन (रोमन) में परिवर्तित करने का आधुनिकतम और अक्षत (lossless) तरीका है। (Online Interface to iTrans)
आजकल अनेक कंप्यूटर प्रोग्राम उपलब्ध हैं जिनकी सहायता से देवनागरी में लिखे पाठ को किसी भी भारतीय लिपि में बदला जा सकता है। अक्षरमुख https://web.archive.org/web/20190824135537/http://aksharamukha.appspot.com/converter 24 अगस्त 2019 (लिपि परिवर्तक)
कुछ ऐसे भी कंप्यूटर प्रोग्राम हैं जिनकी सहायता से देवनागरी में लिखे पाठ को लातिनी (लैटिन), अरबी, चीनी, क्रिलिक, आईपीए (IPA) आदि में बदला जा सकता है। (ICU Transform Demo)
यूनिकोड के पदार्पण के बाद देवनागरी का रोमनीकरण (romanization) अब अनावश्यक होता जा रहा है, क्योंकि धीरे-धीरे कंप्यूटर, स्मार्टफ़ोन तथा अन्य डिजिटल युक्तियों पर देवनागरी को (और अन्य लिपियों को भी) पूर्ण समर्थन मिलने लगा है।
संगणक कुंजीपटल पर देवनागरी
देवनागरी टंकण
center|600px|thumb|इंस्क्रिप्ट कुंजीपटल पर देवनागरी वर्ण (Windows, Solaris, Java)
Ram Narayan Ray
देवनागरी यूनिकोड
देवनागरी यूनिकोड खंड
0 1 2 3 4 5 6 7 8 9 A B C D E F U+090x ऀ ँ ं ः ऄ अ आ इ ई उ ऊ ऋ ऌ ऍ ऎ ए U+091x ऐ ऑ ऒ ओ औ क ख ग घ ङ च छ ज झ ञ ट U+092x ठ ड ढ ण त थ द ध न ऩ प फ ब भ म य U+093xर ऱ ल ळ ऴ व श ष स ह ऺ ऻ ़ ऽ ा ि U+094xी ु ू ृ ॄ ॅ ॆ े ै ॉ ॊ ो ौ ् ॎ ॏ U+095xॐ ॑ ॒ ॓ ॔ ॕ ॖ ॗ क़ख़ग़ज़ड़ढ़फ़य़ U+096xॠ ॡ ॢ ॣ । ॥ ० १ २ ३ ४ ५ ६ ७ ८ ९ U+097x॰ ॱ ॲ ॳ ॴ ॵ ॶ ॷ ॸ ॹ ॺ ॻ ॼ ॽ ॾ ॿ
संदर्भ
इन्हें भी देखें
देवनागरी वर्णमाला
देवनागरी का इतिहास
देवनागरी यूनिकोड खंड
नागरी प्रचारिणी सभा
नागरी संगम पत्रिका
नागरी एवं भारतीय भाषाएँ
गौरीदत्त - देवनागरी के महान प्रचारक
देवनागरी टंकण
हिंदी के साधन इंटरनेट पर
हंटेरियन लिप्यन्तरण
इंस्क्रिप्ट
इस्की (ISCII)
ब्राह्मी लिपि
ब्राह्मी परिवार की लिपियाँ
भारतीय लिपियाँ
नंदिनागरी
पूर्वी नागरी लिपि
भारतीय संख्या प्रणाली
श्वा (Schwa)
बाहरी कड़ियाँ
देवनागरी
ब्राह्मी-लिपि परिवार का वृक्ष — इसमें ब्राह्मी से उत्पन्न लिपियों की समय-रेखा का चित्र दिया हुआ है।
पहलवी-ब्राह्मी लिपि से उत्पन्न दक्षिण-पूर्व एशिया की लिपियों की समय-रेखा
हर ढाँचे में आसानी से ढल जाती है नागरी (डॉ॰ जुबैदा हाशिम मुल्ला; 02 मई 2012)
Unicode Entity Codes for the Devanāgarī Script
https://web.archive.org/web/20030801223449/http://www.ancientscripts.com/devanagari.html
https://web.archive.org/web/20140901145421/http://www.unicode.org/charts/PDF/U0900.pdf
Language Independent Speech Compression using Devanagari Phonetics
राजभाषा हिंदी (गूगल पुस्तक ; लेखक - भोलानाथ तिवारी)
अंग्रेज़ी भी देवनागरी में लिखेंअक्तूबर 2023 InternetArchiveBot
Devanagari character picker v11
The Influence of Sanskrit on the Japanese Sound System (James H. Buck, University of Georgia)
देवनागरी लिपि एवं संगणक (अंबा कुलकर्णी, विभागाध्यक्ष, संस्कृत अध्ययन विभाग, हैदराबाद विश्वविद्यालय)
देवनागरी लिपि एवं हिंदी वर्तनी का मानकीकरणमई 2026 InternetArchiveBot
श्रेणी:देवनागरी
श्रेणी:लिपि
श्रेणी:हिंदी
श्रेणी:हिन्दी
श्रेणी:ब्राह्मी परिवार की लिपियाँ