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411 समाचार
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सामाजिक व्यवस्था

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सामाजिक व्यवस्था (Social Order) शब्द के दो अर्थ होते हैं। पहले अर्थ में यह किसी विशेष सामाजिक संरचना और संस्थान की प्रणाली को दर्शाता है। उदाहरण के लिए, प्राचीन, सामंतवादी और पूंजीवादी सामाजिक व्यवस्था। दूसरे अर्थ में, सामाजिक व्यवस्था को सामाजिक अराजकता या अव्यवस्था के विपरीत माना जाता है और यह उस स्थिर स्थिति को दर्शाती है जिसमें समाज की मौजूदा संरचना उसके सदस्यों द्वारा स्वीकार और बनाए रखी जाती है। "व्यवस्था की समस्या" या हॉब्सियन समस्या, जो कि अधिकांश समाजशास्त्र, राजनीतिक विज्ञान और राजनीतिक दर्शन में केंद्रीय है, यह प्रश्न है कि सामाजिक व्यवस्थाएँ वास्तव में कैसे और क्यों अस्तित्व में आती हैं। समाजशास्त्र थॉमस हॉब्स को इसे स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करने वाला पहला व्यक्ति माना जाता है, जिन्होंने इसके समाधान के लिए सामाजिक अनुबंध (Social Contract) की अवधारणा दी। सामाजिक सिद्धांतकारों (जैसे कि कार्ल मार्क्स, एमिल दुर्खाइम, टालकॉट पार्सन्स, और जुर्गन हाबर्मास) ने यह समझाने के लिए विभिन्न दृष्टिकोण दिए हैं कि सामाजिक व्यवस्था क्या है और इसका वास्तविक आधार क्या है। मार्क्स के अनुसार यह उत्पादन संबंध या आर्थिक संरचना है। दुर्खाइम के अनुसार यह साझा सामाजिक मानदंडों का समूह है। पार्सन्स के अनुसार यह सामाजिक संस्थाओं का ऐसा समूह है जो क्रियाओं के पैटर्न को नियंत्रित करता है और यह सांस्कृतिक मूल्यों के ढांचे पर आधारित है। हाबर्मास के अनुसार, यह सभी तत्वों के साथ-साथ संवादात्मक क्रियाओं (Communicative Action) पर भी आधारित है। व्यापकता का सिद्धांत सामाजिक व्यवस्था से जुड़ा एक और महत्वपूर्ण सिद्धांत है - 'व्यापकता का सिद्धांत'। इसका अर्थ है कि जितने अधिक मानदंड होते हैं और वे जितने महत्वपूर्ण होते हैं, उतना ही बेहतर वे समाज के समूह को जोड़ते और बनाए रखते हैं। उदाहरण के लिए, अमेरिका में छोटी धार्मिक समुदायों, जैसे आमिश (Amish), का जीवन। कई आमिश समुदाय एक साथ रहते हैं और समान धर्म व मूल्य साझा करते हैं। इसलिए उनके लिए अपने धर्म और दृष्टिकोण को बनाए रखना सरल होता है, क्योंकि उनकी जीवनशैली उनके समुदाय के लिए मानक होती है।https://books.google.com/books?id=Friw38mN7-kC&pg=PA51 Gender and Rural Development: Introduction Olanike F. Deji 2011 LIT Verlag Münster Google Books 978-3643901033 समूह और नेटवर्क प्रत्येक समाज में लोग विभिन्न समूहों से जुड़े होते हैं, जैसे व्यवसाय, परिवार, चर्च, खेल समूह या मोहल्ला। इन समूहों की संरचना समाज की पूरी संरचना को प्रतिबिंबित करती है। समूहों के बीच और भीतर नेटवर्क और संबंध होते हैं, जो सामाजिक व्यवस्था का निर्माण करते हैं। स्थिति समूह "Status groups" किसी व्यक्ति की विशेषताओं जैसे जाति, धर्म, लिंग, शैक्षणिक योग्यता, आयु आदि पर आधारित हो सकते हैं। इन्हें "ऐसी उपसंस्कृति जिसे समाज में विशिष्ट रैंक या स्थिति प्राप्त हो" कहा जाता है। उदाहरण के लिए, विश्वविद्यालय के प्रोफेसर की प्रतिष्ठा और कचरा कर्मचारी की तुलना।Sociology: Tenth Edition by Rodney Stark, 114 भिन्न स्थिति समूहों के सदस्य अक्सर विभिन्न जीवनशैली अपनाते हैं। उदाहरण के लिए, यहूदी परिवार Hanukkah (हनुक्का) मनाते हैं, जबकि ईसाई परिवार Christmas (क्रिसमस)। इसके अलावा भाषा और सांस्कृतिक रीति-रिवाज भी इन समूहों में भिन्नता प्रदर्शित करते हैं। मूल्य और मानदंड मूल्य (Values) को "आंतरिक मापदंड" कहा जा सकता है। व्यक्तिगत मूल्य और सामाजिक मूल्य होते हैं। सामाजिक मूल्य हमारे इच्छाओं को नैतिक सिद्धांतों या समूह के अनुसार संशोधित करते हैं। मानदंड (Norms) यह बताते हैं कि किसी स्थिति में व्यक्ति को क्या करना चाहिए। मूल्य के विपरीत, मानदंड बाहरी रूप से लागू होते हैं और पीढ़ी दर पीढ़ी संचरित हो सकते हैं। शक्ति और अधिकार मान्यताओं और मानदंडों के बावजूद, अविवेकपूर्ण व्यवहार (Deviant Behavior) सामाजिक व्यवस्था को चुनौती दे सकता है। इसलिए समाज में अधिकार या सत्ता का होना आवश्यक माना जाता है। सत्ता और अधिकार आमतौर पर ऊच्च वर्ग के पास होते हैं। विभिन्न वर्गों के सदस्य अलग मूल्य रखते हैं, जिससे नियमों के पालन में संघर्ष उत्पन्न हो सकता है। स्वाभाविक व्यवस्था सामाजिक व्यवस्था को हमेशा सरकार द्वारा नियंत्रित होने की आवश्यकता नहीं है। व्यक्ति अपने स्वार्थ का पालन करते हुए भी अनुमानित और स्थिर प्रणाली बना सकते हैं। हालांकि, यह हमेशा समूह की भलाई में योगदान नहीं देता। थॉमस शेलिंग ने पड़ोस में जातीय पृथक्करण का अध्ययन किया और पाया कि व्यक्तिगत पसंदों का पालन अक्सर समाज में एकीकरण के बजाय पृथक्करण पैदा करता है। सामाजिक सम्मान सामाजिक सम्मान (Social Honor) को सामाजिक स्थिति (Social Status) के रूप में भी देखा जा सकता है। यह प्रतिष्ठा, सम्मान और प्रशंसा का वितरण है जो व्यक्ति अपनी योग्यताओं या उपलब्धियों के कारण प्राप्त करता है। यह स्थिति 'अर्जित' (Achieved) या 'सौंपा गया' (Ascribed) हो सकती है। उदाहरण के लिए, Kate Middleton का सौंपा गया Status, जबकि Oprah Winfrey का अर्जित Status।Joseph R. Gusfield 1986 https://books.google.com/books?id=ERN-wKfXyoIC&pg=PA1 Symbolic crusade: status politics and the American temperance movement 978-0252013126 University of Illinois Press 14 Google Books प्राप्ति सामाजिक व्यवस्था की व्याख्या के दो सिद्धांत हैं। पहला यह कि यह बाहरी नियंत्रण और सुरक्षा के आदान-प्रदान से प्राप्त होती है। दूसरा यह कि व्यक्ति द्वारा आंतरिक रूप से अपनाए गए मान्यताओं और मानदंडों के आधार पर व्यवस्था स्थापित होती है। सन्दर्भ अतिरिक्त पठन Hechter M. Horne C. 2003 Theories of Social Order. A Reader Stanford University Press 9780804746113 https://books.google.com/books?id=KiGYZ6Mb1lYC Hobbes, T. Leviathan or The Matter, Forme and Power of a Common Wealth Ecclesiasticall and Civil. Stark Rodney Rodney Stark Sociology https://archive.org/details/sociology0000star_r3u2 2006 Cengage Learning 978-0495093442 10th Weber Max Max Weber 1968 Economy and Society Category:सामाजिक शास्त्र संबंधी शब्दावली Category:सांरचनात्मक कार्यात्मकता