Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

कृषि (हिमाचल प्रदेश)

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

कृषि हिमाचल प्रदेश का प्रमुख व्‍यवसाय है। यह राज्‍य की अर्थव्‍यवस्‍था में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह 69 प्रतिशत कामकाजी आबादी को सीधा रोजगार मुहैया कराती है। कृषि और उससे संबंधित क्षेत्र से होने वाली आय प्रदेश के कुल घरेलू उत्‍पाद का 22.1 प्रतिशत है। कुल भौगोलिक क्षेत्र 55.673 लाख हेक्‍टेयर में से 9.79 लाख हेक्‍टेयर भूमि के स्‍वामी 9.14 लाख किसान हैं। मंझोले और छोटे किसानो के पास कुल भूमि का 86.4 प्रतिशत भाग है। राज्‍य में कृषि भूमि केवल 10.4 प्रतिशत है। लगभग 80 प्रतिशत क्षेत्र वर्षा-सिंचित है और किसान इंद्र देवता पर निर्भर रहते हैं। हिमाचल की प्रमुख फसलें हिमाचल प्रदेश में कुल फसल उत्पादन का 91 प्रतिशत खाद्यान्न है। इनमें से 85 प्रतिशत धान्य फसलें हैं तथा पांच या सात प्रतिशत दलहन फसले हैं। कुल उत्पादन का सात प्रतिशत सब्जियां व मसाले हैं तथा मात्र तीन प्रतिशत भाग में अखाद्य फसलों का उत्पादन होता है। इस प्रदेश में गेहूं, मक्का, जौ, व धान खाद्यान्न फसलें प्रमुख रूप से उत्पादित होती हैं। गेहूं – प्रदेश में बोए जाने वाले खाद्यान्नों में गेहूं का प्रथम स्थान है। रबी की यह फसल अक्तूबर-नवंबर में बोई जाती है और अप्रैल-मई में काटी जाती है। गेहूं लगभग सारे हिमाचल में बोई जाती है। कल्याण सोना, सोनालिका और आरआर गेहूं की नवीनतम उन्नत किस्में हैं। प्रदेश के कुल कृषि क्षेत्र के 20 से लेकर 40 प्रतिशत क्षेत्र तक में गेहूं की खेती की जाती है। कांगड़ा, मंडी व कुल्लू कुल गेहूं उत्पादन क्षेत्र का एक तिहाई भाग घेरते हैं। प्रदेश के कुल गेहूं क्षेत्र का 19 प्रतिशत मंडी, 18 प्रतिशत कुल्लू तथा दस प्रतिशत चंबा में है। गेहूं का उत्पादन लगभग सभी जिलों में होती है। केवल लाहुल व स्पीति जिला में इसका उत्पादन नहीं होता है। धान – धान हिमाचल प्रदेश की खरीफ की दूसरी मुख्य फसल है। धान को सीधा बोया जाता है तथा पौधा तैयार कर इसे 21 या 25 दिन की अवस्था में खेत में पानी लगाकर तथा जुताई कर रोपा जाता है। धान की खेती के लिए चिकनी व दोमट मिट्टी अच्छी मानी जाती है। धान की सीधी बुआई सिंचित क्षेत्र में जून के आरंभ में होती है जौः जौ रबी की दूसरी मुख्य फसल है। इसका उत्पादन किन्नौर और लाहुल-स्पीति में अधिक होता है। हिमाचल में जौ के कुल उत्पादन का 70 प्रतिशत लाहुल-स्पीति तथा किन्नौर जिला में उत्पादित होता है। कुल कृषि उत्पादन में जौ की भागीदारी पांच प्रतिशत है। प्रदेश के उच्च क्षेत्रों में प्रमुख रूप से जौ की खेती होती है। सामान्यतः इसे चारे की फसलों में रखा जाता है, किंतु वर्तमान में इसे खाद्यान की श्रेणी में भी रखा जाता है। हिमाचल प्रदेश में जौ का प्रयोग सत्तू या आटे के रूप में किया जाता है। मक्काः मक्का प्रमुख रूप से खरीफ की फसल है। यह मोटे अनाजों में मुख्य फसल है। प्रदेश में इस फसल का उत्पादन मानसूनी वर्षा के समय होता है। इसकी बुआई जून से लेकर मध्य जुलाई तक होती है। मक्का की फसल के लिए खेत में अधिक पानी जमा होना हानिकारक है। इसके लिए न्यूनतम 13०ष् तापमान की आवश्यकता होती है। मक्के का उत्पादन प्रदेश के शिमला, सोलन, हमीरपुर, कांगड़ा, ऊना, मंडी, कुल्लू जिला में होता है। लाहुल-स्पीति व किन्नौर जिलों में कहीं-कहीं का उत्पादन किया जाता है। गन्नाः हिमाचल प्रदेश में गन्ने का उत्पादन ऊना, सोलन, कांगड़ा व सिरमौर जिलों में किया जाता है। थोड़ी मात्रा में अन्य जिलों में भी इसका उत्पादन किया जाता है। गुड़ या शक्कर बनाने के अतिरिक्त अभी तक गन्ने का प्रदेश में कोई व्यवसायीकरण नहीं हुआ है। गन्ने के उत्पादन के लिए मिट्टी का उपयुक्त मान 7.00 होता है। कृषक प्रशिक्षण राज्‍य कृषि विभाग शिमला जिले में मशोबरा तथा मंडी जिले में सुंदरनगर में दो प्रशिक्षण केंद्र चलाता है। इसके अलावा, गांव, खंड तथा जिला स्‍तर पर कृ‍षक प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किए जाते है।http://bharat.gov.in/citizen/agriculture/farmers_training.php https://web.archive.org/web/20101121115715/http://bharat.gov.in/citizen/agriculture/farmers_training.php 21 नवंबर 2010 कृषि प्रशिक्षण केंद्रों की सूची कृषि विश्वविद्यालयों की सूची 1. हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय, पालमपुर, हिमाचल प्रदेश, पिन- 176062 2. यशवंत सिंह परमार यूनिवर्सिटी ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री, सोलन, हिमाचल प्रदेश, पिन- 173230 सन्दर्भ श्रेणी:हिमाचल प्रदेश