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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

जालिवाड़ा खुर्द

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जालिवाड़ा खुर्द hi JhaliwaraJaliwada जालिवाड़ा खुर्द गाँव India Rajasthan right Location in Rajasthan, India 26 24 47 N 73 35 58 E inline,title देश भारत राज्य राजस्थान ज़िला जोधपुर तहसील बिलाड़ा तहसील Metric 1092 2001 auto आईएसटी +5:30 दूरभाष संख्या जलवायु सूखी लोकसभा पाली विधानसभा बिलाड़ा जालिवाड़ा खुर्द एक गाँव है जो राजस्थान राज्य के जोधपुर ज़िले और बिलाड़ा तहसील के अंतर्गत आता है। यह एक ग्राम पंचायत भी है। 2011 Census Village code for Jaliwara Khurd = 085711, Reports of National Panchayat Directory: List of Census Villages mapped for: Nanan, Bilara, Jodhpur, Rajasthan Ministry of Panchayati Raj, Government of India http://panchayatdirectory.gov.in/adminreps/viewGPmapcvills.asp?gpcode=35711&rlbtype=V https://web.archive.org/web/20130520224626/http://panchayatdirectory.gov.in/adminreps/viewGPmapcvills.asp?gpcode=35711&rlbtype=V 20 मई 2013 15 जून 2016 dead यह पीपाड़ से लगभग ०८ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। March 1962 Ajmer, India, Sheet NG 43-06 Series U-502 United States Army Map Service topographic map, scale 1:250,000 http://www.lib.utexas.edu/maps/ams/india/ng-43-06a.jpg 15 जून 2016 https://web.archive.org/web/20160304111755/http://www.lib.utexas.edu/maps/ams/india/ng-43-06a.jpg 4 मार्च 2016 dead २०११ में भंवरी देवी हत्याकांड में पूर्व कांग्रेस नेता महिपाल मदेरणा ने भंवरी देवी को यहीं से अपहरण किया था। Bhanwari case: CBI grills former Rajasthan minister द हिन्दू 10 November 2011 http://www.thehindu.com/news/article2614684.ece https://web.archive.org/web/20111112140524/http://www.thehindu.com/news/article2614684.ece 12 नवंबर 2011 live 15 जून 2016 जालीवाड़ा खुर्द गांव १६७६ में महाराजा गज सिंह जी प्रथम द्वारा राजसिंह प्रतापमलोत को दिया गया था राजसिंह जी को ठाकुर की पदवी और ताज़ीम मिली हुई थी राजसिंह जी ने इस गाँव में १६८५ में एक तालाब खुदवाया था जिसका नाम जोधपुर महाराज गज सिंह जी प्रथम ने बालसमंद रखा जब वो राजसिंह जी के दाह संस्कार में पधारे थे तब सूरज प्रकाश में लिखा हुआ है की महाराजा गज सिंह ने राजसिंह के मृत्यूप्रांत ४ दोहे मर्सिये के कहे थे, महाराजा साहेब राजसिंह प्रतापमलोत को अपना अभिन्न मित्र मानते थे और भाई कहकर संबोधित करते थे, राजसिंह जी के मृत्यु के समाचार सुनकर महाराजा को बोहत दुख हुआ और उनकी उनकी अंतिम विधाई में सामिल होके ४ मर्सिये कहे !सूरज प्रकाश करणीदान कविया इन खूनी रहमान सू, परतन लागू पाँण ! रतन अमोलक ‘’ राजसी ‘’, जो किम दीजे जाण !! १ हथ जोड़ा रहिया हमे, गढ़वी काज ग्रन्थ ! ऊ ‘ राजड’ छत्रधारिया, गयो जोड़ावन हथ!! २ मन मारो लागे नहीं, किन सू करूँ में बात ! ‘ राजड’ हो सो गियोपरो, शूनो रह गयो साथ!! ३ रोहड़ रूपक रच्चणौ , मोह वस करणॊ मन! मूरधर रत्नायर माह, ‘राजड’ गयो रतन!! ४ राजसिंह जी पर उनके पिता और बेटो द्वारा एक विशाल १६ खंभों की छतरी कराई गई फिर महाराजा साहेब अजमेर जाते वक्त आए और राजसिंह के छतरी के खम्भे पर मरणोपरांत एक हाथी और पालकी बँधवाई गई और मित्र की याद में काफ़ी देर बैठे रहें राजसिंह के थड़े पर और हाथी को राजसिंह जी के गुरुद्वारा भेजा गया जो पालासनी है वहाँ भेट किया गया चिड़ियानाथ जी महाराज के धुनें पर सन्दर्भ श्रेणी:राजस्थान के गाँव श्रेणी:जोधपुर के गाँव