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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

भारतीय महाकाव्य

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सितंबर 2012 thumb|भारतीय महाकाव्य रामचरितमानस thumb|भारतीय महाकाव्य महाभारत खंड 1 thumb|भारतीय Yashu patel खंड 2 भारत में संस्कृत तथा अन्य भाषाओं में अनेक महाकाव्यों की रचना हुई है। भारत के महाकाव्यों में वाल्मीकि रामायण, व्यास द्वैपायन रचित महाभारत, तुलसीदासरचित रामचरितमानस, आदि ग्रन्थ परमुख हैं। संस्कृत के महाकाव्य रामायण (वाल्मीकि) महाभारत (वेद व्यास) बुद्धचरित (अश्वघोष) कुमारसंभव (कालिदास) रघुवंश (कालिदास) किरातार्जुनीयम् (भारवि) शिशुपाल वध (माघ) नैषधीय चरित (श्रीहर्ष) रघुवंश, कुमारसम्भव, कीरातार्जुनीयम्, शिशुपालवध और नैषधचरित को 'पंचमहाकाव्य' कहा जाता है। रघुवंश=पात्र=(दिलिप,रघु,अज, दसरथ,राम) किरातार्जुनीयम्=पात्र=(किरात, शंकर भगवान, अर्जून) कुमारसंभवम्=पात्र=(कार्तिकेय,पार्वती,शंकर भगवान) शिशुपालवध=पात्र=(कृष्ण,शिशुपाल) नैषधचरित=पात्र=(नल, दमयंती,) प्राकृत और अपभ्रंश के महाकाव्य रावण वही (रावण वध) लीलाबई (लीलावती) सिरिचिन्हकव्वं (श्री चिन्ह काव्य) उसाणिरुद्म (उषानिरुद्ध) कंस वही (कंस वध) पउमचरिउ (पद्मचरित) रिट्थणेमिचरिउ (अरिष्टनेमिचरित) महापुराण नागकुमार चरित यशोधरा चरित हिन्दी के महाकाव्य हिंदी में पृथ्वीराज रासो (चंद बरदाई), पद्मावत (जायसी), रामचरितमानस (तुलसीदास), रामचंद्रिका (केशवदास), प्रियप्रवास (अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'), साकेत (मैथिलीशरण गुप्त), साकेत संत (डॉ॰ बलदेव प्रसाद मिश्र), कामायनी (जयशंकर प्रसाद), गांधी पारायण (अंबिका प्रसाद 'दिव्य'), दैत्यवंश (हरदयाल सिंह), हल्दीघाटी (श्याम नारायण पांडेय), कुरूक्षेत्र (रामधारी सिंह दिनकर), आर्यावर्त (मोहनलाल महतो), नूरजहां (गुरूभक्त सिंह), सुभाषचंद्र बोस, विवेक श्री, भगतसिंह आदि 12 महाकाव्य (श्रीकृष्ण सरल), कुणाल (सोहनलाल द्विवेदी), वर्धमान (महाकवि अनूप) ने उदात्त परम्परा को गति प्रदान की है। समय, रूचि तथा क्रियाशीलता के अभाव के बाद भी हिंदी साहित्य में महाकाव्य लेखन की परम्परा गति तथा विस्तार पा रही है। इस दशक के महाकाव्यों में डॉ॰ काबरा की 3 कृतियों के अतिरिक्त पुरूषोत्तम श्रीराम चरित व श्रीकृष्ण चरित (जगमोहन प्रसाद सक्सेना 'चंचरीक'), स्वयं धरित्री ही थी (रमाकांत श्रीवास्तव), वैज्ञानिक आध्यात्म व प्रकृति और पुरूष (जसपाल सिंह 'संप्राण'), देवयानी (वासुदेव प्रसाद खरे), सूतपुत्र व महामात्य (दयाराम गुप्त 'पथिक'), रत्नजा व भूमिजा (डॉ॰ सुशीला कपूर), वीरवर तात्या टोपे (वीरेंद्र अंशुमाली), वीरांगना दुर्गावती (गोविंद प्रसाद तिवारी), क्षत्राणी दुर्गावती (विमल), दधीचि (आचार्य भगवत दूबे), मानव (डॉ॰ गार्गीशरण 'मराल'), खजुराहो (डॉ॰ पूनम चंद्र तिवारी),श्रीमान मानव की विकास यात्रा व भीम-गाथा (नन्दलाल सिंह 'कांतिपति') ने महाकाव्य प्रासाद को जीवंतता प्रदान की है। हिंदी महाकाव्य सृजन की परंपरा में महाकाव्य के 3 तत्व कथावस्तु, नायक तथा रस मान्य हैं। कथावस्तु के 3 अंग विस्तार, विशालता व छंद वैविध्य, नायक के 3 अंग गुण धीरोदात्तता, शालीनता, प्रासंगिकता तथा रस के 3 गुण भाषा-शैली, अलंकार तथा भावानुभाव हैं। तमिल के महाकाव्य शिलप्पादिकारम मणिमेकलै जीवक चिन्तामणि वलैयापति कुण्डलकेसि कन्नड के महाकाव्य कन्नड के महाकाव्य मणिपुरी के महाकाव्य मेइतेइ भाषा के महकव्य इन्हें भी देखें महाकाव्य नाटक उपन्यास श्रेणी:भारतीय साहित्य