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थीसियस का जहाज
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थीसियस का जहाज जिसे थीसियस का विरोधाभास भी कहा जाता है, एक विरोधाभास है जो यह सवाल उठाता है कि क्या कोई वस्तु जिसके सभी घटकों को प्रतिस्थापित किया गया हो, मौलिक रूप से वही वस्तु रहती है? इस विरोधाभास को सबसे पहले पहली शताब्दी के उत्तरार्ध में प्लूटार्क द्वारा थीसियस का जीवन में दर्ज किया गया था। प्लूटार्क पूछता है कि यदि किसी जहाज के सभी लकड़ी के भागों को दूसरे लकड़ी के भागों से बदल दिया जाये तो क्या, तब भी यह जहाज वही पहले वाला जहाज बना रहेगा?
प्लूटार्क के लेखन से पूर्व इस विरोधाभास की चर्चा प्राचीन दार्शनिकों जैसे कि हेराक्लीटस, सुकरात और प्लूटो ने और अभी हाल के दार्शनिक जैसे कि थॉमस होब्स और जॉन लोके ने अपने लेखों में की है। इस विरोधाभास के कई प्रकार हैं, विशेष रूप से "दादा की कुल्हाड़ी" और ब्रिटेन का "ट्रिगर की झाड़ू" हैं। यह विचार प्रयोग "दार्शनिकों के लिए एक मॉडल" है, कुछ कहते हैं, "यह वही बना रहेगा," तो कुछ मानते हैं कि, "यह वही नहीं बना रहेगा"।
सन्दर्भ
श्रेणी:दर्शन