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क्लिफर्ड शूल
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क्लिफर्ड शूल Clifford Shull (cropped).jpg 1994 में शूल 1915 09 23 yes पिट्सबर्ग, पेन्सिलवेनिया 2001 03 31 1915 09 23 yes मेडफोर्ड, मैसाचुसेट्स भौतिक शास्त्र कार्नेगी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजीन्यूयॉर्क विश्वविद्यालय रिचर्ड टी. कॉक्स न्यूट्रॉन प्रकीर्णन ओलिवर ई. बकले संघनित पदार्थ पुरस्कार (1956)
ग्रेगोरी एमिनॉफ पुरस्कार (1993)
भौतिकी में नोबेल पुरस्कार (1994)
क्लिफोर्ड ग्लेनवुड शूल (23 सितंबर 1915 – 31 मार्च 2001) एक अमेरिकी भौतिक विज्ञानी थे,राइट पियर्स Clifford Shull https://www.theguardian.com/news/2001/apr/07/guardianobituaries.physicalsciences 10 अक्टूबर 2025 द गार्जियन 7 अप्रैल 2001चांग केनेथ Clifford G. Shull Dies at 85; Was Nobel Winner in Physics https://www.nytimes.com/2001/04/04/us/clifford-g-shull-dies-at-85-was-nobel-winner-in-physics.html 10 अक्टूबर 2025 दि न्यू यॉर्क टाइम्स 4 अप्रैल 2001 जिन्होंने पदार्थों की आंतरिक संरचना के अध्ययन के लिए न्यूट्रॉन प्रकीर्णन तकनीकों के विकास और प्रयोग में अग्रणी योगदान दिया।
जीवनी
क्लिफोर्ड ग्लेनवुड शुल ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा पिट्सबर्ग स्थित शेनली उच्च विद्यालय में प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने कार्नेगी प्रौद्योगिकी संस्थान से स्नातक की उपाधि अर्जित की और आगे चलकर न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की। छात्र जीवन के दौरान उनकी रुचि प्रायोगिक भौतिकी की ओर बढ़ी और उन्होंने इसी क्षेत्र में अध्ययन एवं अनुसंधान को आगे बढ़ाया।
द्वितीय विश्व युद्ध के वर्षों में शुल ने न्यूयॉर्क राज्य के बीकन नगर में स्थित टेक्सास कंपनी में कार्य किया, जहाँ उन्होंने वैज्ञानिक और तकनीकी अनुसंधान से जुड़े महत्त्वपूर्ण दायित्व निभाए। युद्ध के बाद वे क्लिंटन प्रयोगशाला से जुड़े, जिसे बाद में ओक रिज राष्ट्रीय प्रयोगशाला के नाम से जाना गया। यहीं उन्होंने न्यूट्रॉन प्रकीर्णन के क्षेत्र में अपने कई महत्त्वपूर्ण अनुसंधान कार्य प्रारम्भ किए, जिन्होंने आगे चलकर उन्हें अंतरराष्ट्रीय ख्याति दिलाई।
वर्ष 1955 में शुल मैसाचुसेट्स प्रौद्योगिकी संस्थान (एमआईटी) के संकाय में शामिल हुए। वहाँ उन्होंने तीन दशकों से अधिक समय तक अध्यापन और अनुसंधान कार्य किया तथा अनेक विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं का मार्गदर्शन किया। 1986 में वे औपचारिक रूप से सेवानिवृत्त हुए, किंतु विज्ञान के प्रति उनका जुड़ाव जीवन भर बना रहा।
31 मार्च 2001 को 85 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। अपने पीछे वे प्रायोगिक भौतिकी और न्यूट्रॉन प्रकीर्णन के क्षेत्र में ऐसी वैज्ञानिक विरासत छोड़ गए, जिसने पदार्थों की सूक्ष्म संरचना के अध्ययन को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया।
अनुसंधान
क्लिफोर्ड जी. शुल को वर्ष 1994 में कनाडाई भौतिक विज्ञानी बर्टराम ब्रोकहौस के साथ संयुक्त रूप से भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।http://web.mit.edu/newsoffice/2001/shull.html Clifford G. Shull, co-winner of 1994 Nobel Prize in physics, is dead at 85 2010-12-27 2001-04-02 एमआईटी-न्यूज़ मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी https://web.archive.org/web/20120522165928/http://web.mit.edu/newsoffice/2001/shull.html 2012-05-22 Professor Shull shared the 1994 Nobel Prize with Professor Bertram S. Brockhouse of McMaster University, Hamilton, Ontario, Canada। dead यह सम्मान उन्हें न्यूट्रॉन प्रकीर्णन तकनीकों के विकास और उन्हें वैज्ञानिक अनुसंधान का एक प्रभावी साधन बनाने में उनके अग्रणी योगदान के लिए दिया गया था। दोनों वैज्ञानिकों के कार्यों ने पदार्थों की आंतरिक संरचना के अध्ययन के लिए नए द्वार खोल दिए और संघनित पदार्थ भौतिकी के क्षेत्र में क्रांतिकारी प्रगति को संभव बनाया।
शुल ने विशेष रूप से न्यूट्रॉन प्रकीर्णन की उन विधियों को विकसित और परिष्कृत किया, जिनकी सहायता से किसी पदार्थ के भीतर परमाणुओं की स्थिति, उनकी व्यवस्था तथा उनके चुंबकीय गुणों का अत्यंत सूक्ष्म स्तर पर अध्ययन किया जा सकता है। उनकी यह तकनीक इस अर्थ में अद्वितीय थी कि वह पदार्थ के भीतर छिपी संरचनाओं को उसी प्रकार उजागर करती है, जैसे अंधकार में किसी वस्तु से टकराकर लौटने वाली गोलियों की दिशा से उसके स्वरूप और स्थिति का अनुमान लगाया जा सकता है।
संघनित पदार्थ भौतिकी में उनके अनुसंधानों ने वैज्ञानिकों को ठोस पदार्थों, द्रवों, चुंबकीय पदार्थों और अन्य जटिल प्रणालियों के व्यवहार को समझने में नई दृष्टि प्रदान की। उनके योगदान ने न केवल मूलभूत विज्ञान को समृद्ध किया, बल्कि पदार्थ विज्ञान, रसायन विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अनेक क्षेत्रों में भी दूरगामी प्रभाव डाला। इसी कारण क्लिफोर्ड शुल को 20वीं शताब्दी के सबसे प्रभावशाली प्रायोगिक भौतिकविदों में गिना जाता है।
सन्दर्भ
श्रेणी:1915 में जन्मे लोग
श्रेणी:२००१ में निधन
श्रेणी:नोबेल पुरस्कार विजेता भौतिक विज्ञानी