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हसीना मान जायेगी (1968 फ़िल्म)

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हसीना मान जायेगी हसीना मान जायेगी1.jpg फ़िल्म का पोस्टर प्रकाश मेहरा इन्दु भूषण एस॰ एम॰ अब्बास शशि कपूर, बबीता, अमीता, जॉनी वॉकर कल्याणजी-आनंदजी 1968 मिनट भारत हिन्दी हसीना मान जायेगी 1968 में बनी हिन्दी भाषा की फिल्म है। ये प्रकाश मेहरा द्वारा निर्देशित है और इसमें शशि कपूर, बबीता, अमीता, युनुस परवेज़ और जॉनी वॉकर ने अभिनय किया है।पुण्यतिथि: प्रकाश मेहरा न होते तो अमिताभ बच्चन आज ‘बिग बी’ न होते, जानिये दिलचस्प बातें https://www.jagran.com/entertainment/bollywood-vishesh-prakash-mehra-death-anniversary-special-known-for-amitabh-bachchan-break-in-zanjeer-and-lesser-known-facts-17964404.html दैनिक जागरण 17 जनवरी 2019 hi 18 मई 2018 https://web.archive.org/web/20190119121118/https://www.jagran.com/entertainment/bollywood-vishesh-prakash-mehra-death-anniversary-special-known-for-amitabh-bachchan-break-in-zanjeer-and-lesser-known-facts-17964404.html 19 जनवरी 2019 live कल्याणजी आनंदजी द्वारा फिल्म के गीत रचित किये गए हैं, जो काफी यादगार रहे हैं, जिनमें रफी-लता का युगल गीत "बेखुदी में सनम" सब में सबसे लोकप्रिय है। यह फिल्म वर्ष 1968 के बॉक्स ऑफिस संग्रह में 9वें स्थान पर रही। संक्षेप अर्चना (बबीता) अपने पिता के साथ एक नए शहर में रहने आती है। कॉलेज में उसकी मुलाक़ात राकेश (शशि कपूर) से होती है, जो उसके पिता के दोस्त का बेटा है। वो उसे हमेशा तंग करते रहता है, इस कारण वो उसकी शिकायत अपने प्राचार्य से करती है। पर गलती से वो कमल (शशि कपूर) की शिकायत कर देती है, जो बिलकुल राकेश की तरह दिखते रहता है। कमल बहुत ही सीधा और अनाथ लड़का है। बाद में जब अर्चना को इस बात का पता चलता है तो उसे अपनी गलती का एहसास हो जाता है और उसके बाद कमल और अर्चना एक दूसरे के काफी करीब आ जाते हैं। लेकिन राकेश उन दोनों के बीच बार बार आ जाते रहता है और अर्चना को उससे शादी करने के लिए मजबूर करते रहता है। अंत में अर्चना अपने पिता से कमल के साथ शादी करने की बात कर देती है। कमल और अर्चना की शादी तय हो जाती है और राकेश उससे शादी करने के लिए कमल का अपहरण करने की सोचता है, पर उसके गुंडे गलती से राकेश को ही कमल समझ कर अपहरण कर लेते हैं। अर्चना और कमल की शादी हो जाती है। जल्द ही जंग शुरू हो जाता है और कमल को जंग में शामिल होने के लिए जाना पड़ता है। राकेश भी उसी बटालियन का हिस्सा होता है। एक दिन दोनों अकेले रहते हैं और दोनों में लड़ाई हो जाती है, और लड़ते हुए वे दोनों पानी में गिर जाते हैं और लापता हो जाते हैं। उनमें से एक अर्चना के पास वापस आ जाता है और पहले की तरह वे लोग जीवन जीने लगते हैं। एक दिन कमल के ऊपर का एक अफसर उसके पास आता है और कहता है कि कमल मर चुका है। अर्चना उलझन में पड़ जाती है, क्योंकि उसका पति, कमल तो उसके साथ ही पूरे समय था। उसे थोड़ा सा शक हो जाता है और वो परीक्षा लेकर ये जानने की कोशिश करती है कि वो वाकई कमल है या राकेश है, जो कमल बन कर उसके साथ रह रहा है। परीक्षा में वो विफल हो जाता है, पर वो कहता है कि वो कमल ही है, पहले उसे लग रहा था कि उसने ही राकेश को मारा है, पर अब उसे पता चला है कि राकेश युद्ध के दौरान मारा गया था। लेकिन कोई भी उसकी बातों पर विश्वास नहीं करता है और उसे गिरफ्तार कर लिया जाता है। उस पर धोका और बलात्कार का मुकदमा चलाया जाता है और उसे दस साल की जेल हो जाती है। अंत में असल राकेश बाहर आता है और सिद्ध भी कर देता है कि वही असल राकेश है। इसके बाद सब कुछ सामान्य हो जाता है। कमल और अर्चना वापस मिल जाते हैं और वे दोनों राकेश को उसके पिछले गलत कामों के लिए माफ कर देते हैं। बाद में कमल उसे बताता है कि वो उसके परीक्षण में इस कारण विफल हो गया था, क्योंकि वो डरा हुआ था कि उसने राकेश को मार दिया है। इसी के साथ कहानी समाप्त हो जाती है। मुख्य कलाकार शशि कपूर — कमल / राकेश बबीता — अर्चना जॉनी वॉकर — घस्तीराम आशिक अमीता — लाली मनमोहन कृष्ण — प्रोफेसर निरंजन शर्मा — महावीर (अर्चना के पिता) युनुस परवेज़ — लाली के पिता हरि शिवदासानी — वकील रणधीर सप्रू — प्रिसिंपल संगीत गीत गायक कल्याणजी-आनंदजी बेखुदी मैं सनम उठ लता मंगेशकर, मोहम्मद रफी 5:31 अख्तर रूमानी ओ दिलबर जानिये मोहम्मद रफी 5:21 प्रकाश मेहरा चले थे साथ मिलकर मोहम्मद रफी 3:24 अख्तर रूमानी दिलबर दिलबर कहते मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर 5:35 क़मर जलालाबादी मेरे महबूब मुझको मन्ना डे, आशा भोंसले 6:28 क़मर जलालाबादी सुनो सुनो कन्याओं मोहम्मद रफी, महेश कुमार 8:31 प्रकाश मेहरा सन्दर्भ बाहरी कड़ियाँ 0053706 हसीना मान जायेगी श्रेणी:1968 में बनी हिन्दी फ़िल्म श्रेणी:कल्याणजी–आनंदजी द्वारा संगीतबद्ध फिल्में