Skip to main content

  | मौसम…

411 समाचार
Public archive edition · Attributed source reporting with original dates · AI drafts are excluded

411 REFERENCE · Wikipedia

तत्त्वचिन्तामणि

Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.

तत्त्वचिन्तामणि, आचार्य गंगेश उपाध्याय द्वारा रचित नव्यन्याय का प्रसिद्ध ग्रंथ है। तत्त्वचिन्तामणि के पश्चात् जितने न्यायग्रंथ लिखे गए वे सब नव्यन्याय के नाम से प्रख्यात हैं। उन्होंने गौतम के मात्र एक सूत्र प्रत्यक्षानुमानोपमान शब्दाः प्रमाणानि (प्रत्यक्ष, अनुमान, उपमान, शब्द, प्रमाण हैं) की व्याख्या में इस ग्रंथ की रचना की है। यह न्याय ग्रंथ चार खंडों में विभाजित है - प्रत्यक्षखण्ड, अनुमानखण्ड, उपमानखण्ड, शब्दखण्ड। इस में पूर्ववर्ती नैयायिकों की भांति १६ तत्त्वों का वर्णन नहीं किया गया है। इस में उन्होंने अवच्छेद्य अवच्छेदक, निरूप्य निरूपक, अनुयोगी प्रतियोगी आदि पारिभाषिक शब्दों का प्रयोग कर एक नई स्वतंत्र लेखन शैली को जन्म दिया जिस का अनुसरण परवर्ती अनेक दार्शनिकों ने किया है। तत्वचिंतामणि पर जितनी टीकाएँ, जितने विस्तार के साथ लिखी गई हैं उतनी किसी अन्य ग्रंथ पर नहीं लिखी गई। पहले इस की टीका पक्षधर मिश्र ने की; तदन्तर उन के शिष्य रुद्रदत्त ने एक अपनी टीका तैयार की और इन दोनों से भिन्न वासुदेव सार्वभौम, रघुनाथ शिरोमणि, गंगाधर, जगदीश, मथुरानाथ, गोकुलनाथ, भवानंद, शशधर, शितिकंठ, हरिदास, प्रगल्भ, विश्वनाथ, विष्णुपति, रघुदेव, प्रकाशधर, चंद्रनारायण, महेश्वर और हनुमान् कृत टीकाएँ हैं। इन टीकाओं की भी असंख्य टीकाएँ लिखी गई हैं। गंगेश उपाध्याय के पुत्र वर्धमान उपाध्याय भी महान् नैयायिक थे जिन्होंने तत्वचिन्तामणि का 'तत्वचिन्तामणिप्रकाश' नामक भाष्य लिखा। सामान्यनिरुक्ति, तत्त्वचिन्तामणि का एक महत्त्वपूर्ण अंश है। इस में हेत्वाभास एवं दुष्ट हेतुओं की विस्तार से चर्चा है। संक्षिप्त एवं सारगर्भित चिन्तामणि का व्याख्यान अनेक प्रतिष्ठित विद्वानों द्वारा किया गया है। रघुनाथ शिरोमणि ने तत्त्वचिन्तामणि के गूढ़ रहस्यों को विस्तार से समझाने के लिये दीधिति नाम की टीका लिखी। कालान्तर में दीधिति व्याख्या पर भी गदाधर भट्ट ने एक प्रसिद्ध विस्तृत टीका गादाधरी की रचना की। गादाधरी व्याख्या की गम्भीरता एवं जटिलता को धयान में रखते हुए बलदेव भट्टाचार्य ने बलदेवी नाम की टीका का प्रणयन किया। इस टीका में तत्त्वचिन्तामणि दीधिति एवं गादाधरी व्याख्या के समग्र अर्थ का अपूर्व विवेचन किया गया है। इन्हें भी देखें न्याय दर्शन नव्यन्याय गंगेश उपाध्याय हेत्वाभास बाहरी कड़ियाँ तत्त्वचिन्तामणिः (संस्कृत विकिस्रोत) तत्त्वचिन्तामणिः (राष्ट्रिय स्ंस्कृत संस्थान) तत्त्वचिन्तामणिः(शब्दखण्ड) Tattva-Chintamani Of Gangesa Upadhyaya, Volume 1(प्रत्यक्षखण्ड) गंगेशनिबद्धः तत्त्वचिन्तामणिः By Gaṅgeśa, Nagīna Jī Śāha हेत्वाभास की तत्त्वनिर्णय-विजयप्रयोजकता श्रेणी:संस्कृत ग्रन्थ