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तुलसी पीठ
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तुलसी पीठ सेवा न्यास जानकी कुंड, चित्रकूट, मध्य प्रदेश में स्थित एक भारतीय धार्मिक और सामाजिक सेवा संस्था है। इसे हिंदू धार्मिक नेता जगद्गुरु रामभद्राचार्य द्वारा २ अगस्त १९८७ को स्थापित किया गया था। http://panchjanya.com/arch/2006/9/10/File28.htm जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य की अनूठी विकलांग सेवा राकेश उपाध्याय सेप्तेंबर १०, २००६ पंचजन्य नवम्बर २६, २०११ https://web.archive.org/web/20120430085651/http://panchjanya.com/arch/2006/9/10/File28.htm 30 अप्रैल 2012 deadसंवाददाता चित्रकूट ५ जनवरी २०११ http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_7135652.html प्रज्ञाचक्षु की आंख बन गई बुआ जी २४ जून २०११ https://web.archive.org/web/20110922155920/http://in.jagran.yahoo.com/news/local/uttarpradesh/4_1_7135652.html 22 सितंबर 2011 dead रामभद्राचार्य का मानना है कि जहाँ पर यह पीठ स्थित है, उस जगह रामायण के अनुसार, राम ने अपने भाई भरत को अपनी चरण पादुका (खड़ाऊ) दी थी।नागर २००२, प्र . ९१. यह प्रसिद्ध कवि संत तुलसीदास के नाम पर है।
तुलसी पीठ के परिसर में जगद्गुरूजी का पावन निवास, राघव सत्संग भवन नामक एक संलग्न सभामण्डप सहित काँच मंदिर नामक एक देवालय, एक छोटी गौशाला, नेत्रहीन विकलांग छात्रों के लिए एक विद्यालय, मानस मंदिर नामक एक देवालय जिसकी अंदरूनी दीवारों पर रामचरितमानस उत्कीर्ण है और जिसमे रामचरितमानस के 16 दृश्यों के चल-प्रतिरूप की प्रदर्शनी है।नागर २००२, प्र. ९२. वहाँ जगद्गुरु रामभद्राचार्य विकलांग विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए एक छात्रावास भी है। http://panchjanya.com/arch/2006/9/10/File28.htm जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य की अनूठी विकलांग सेवा राकेश उपाध्याय १० सेप्तेम्बर २००६ पंचजन्य २६ नवम्बर २०११ https://web.archive.org/web/20120430085651/http://panchjanya.com/arch/2006/9/10/File28.htm 30 अप्रैल 2012 live
तुलसी पीठ की गतिविधियों में संस्कृत और हिन्दी के हिंदू धार्मिक ग्रंथों का प्रसार और अध्ययन, गायों और साधुओं की सेवा, एक मासिक पत्रिका का प्रकाशन और विकलांग व्यक्तियों के लिए सहायता प्रदान शिविरों की व्यवस्था शामिल है। इस संस्थान ने रामभद्राचार्य द्वारा लिखित विभिन्न पुस्तकें को प्रकाशित किया है।नागर २००२, प्र. ८९–९०.दिनकर २००८, प्र. ४०–४३.
स्थापना
१९८३ में रामभद्राचार्य (उस समय रामभद्रादास) ने, केवल दूध और फल का आहार लेते हुए और केवल संस्कृत बोलते हुए, चित्रकूट के स्फटिक शिला में, अपना दूसरा छह-माह पायोव्रत रखा। चित्रकूट के युवराज हेमराज सिंह चतुर्वेदी रामभद्राचार्य से प्रभावित हुए और उन्हे जानकी कुंड में मंदाकिनी नदी के साथ ही स्थित एक ८० फीट × ६० फीट की भूमि दान की।दिनकर २००८, प्र. ३१–३२. गीता देवी, रामभद्रादास की ज्येष्ठ बहन, ने उन्हे उस भूखंड पर एक आश्रम बनाने के लिए सम्मत किया। रामभद्रादास ने वहाँ चार कमरों का निर्माण करवाया और वहाँ अक्सर जाना शुरू कर दिया। १९८६ में, उन्होंने इस नवनिर्मित आश्रम में नव-मास पायोव्रत रखा। उन्होंने यहाँ पर अपनी कथाएँ रखना भी शुरू कर दिया।
सन्दर्भ
टीप
उद्धृत ग्रंथ
दिनकर
डॉ॰ वागीश
श्रीभार्गवराघवीयम् मीमांसा
देशभारती प्रकाशन
दिल्ली, भारत
२००८
978-81-908276-6-9
नागर
शांति लाल
The Holy Journey of a Divine Saint: Being the English Rendering of Swarnayatra Abhinandan Granth
एक दिव्य संत की पवित्र यात्रा: स्वर्णयात्रा अभिनंदन ग्रंथ का अंग्रेजी प्रतिपादन
आचार्या दिवाकर
शर्मा
सिवा कुमार
गोयल
सुरेन्द्र शर्मा
सूसीला
बी. आर. प्रकाशन निगम
प्रथम, हार्डबैक
नव दिल्ली, भारत
२००२
८१-७६४६-२८८-८
बाहरी कड़ियाँ
Tulsi Peeth
http://www.jagadgururambhadracharya.org/ जगद्गुरु रामभद्राचार्य की आधिकारिक वेबसाइट, तुलसी पीठ सेवा न्यास द्वारा संचालित
iIA3ghPisfE तुलसी पीठ में प्रदर्शित मानस दर्शन
श्रेणी:सतना ज़िला