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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

पुरुषार्थ सिद्धयुपाय

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पुरुषार्थसिद्धयुपाय (= पुरुषार्थसिद्धि + उपाय = पुरुषार्थ की सिद्धि का उपाय) एक प्रमुख जैन ग्रन्थ है जिसके रचियता आचार्य अमृत्चंद्र (९०५ - ९५५ ई०) हैं।Jain 2012 xiii https://books.google.co.in/books?id=Ae4nAAAAYAAJ The archeology of world religions Finegan Jack 1952-08-01 205 आचार्य अमृत्चंद्र दसवीं सदी (विक्रम संवत) के प्रमुख दिगम्बर आचार्य थे। पुरुषार्थ सिद्धयुपाय में श्रावक के द्वारा धारण किये जाने वाले अणुव्रत आदि का वर्णन हैंJain 2012 xiv पुरुषार्थ सिद्धयुपाय में अहिंसा के सिद्धांत भी समझाया गया हैं   http://books.google.com/?id=cj2PZR_vsKkC&q=amritchandra&dq=amritchandra Studies in Jainism 9780962610523 Duli C Jain 1997-06-01 26 यह ग्रन्थ संस्कृत छन्दबद्ध ग्रंथ है। इसमें 243 श्लोक हैं। इस पर पं० टोडरमल (1766 ई० ) ने भाषा में टीका लिखी है परन्तु उसे पूरी करने से पहले ही उनका निधन हो गया। इस अधूरी टीका को उनके पीछे पं० दौलतराम (1770 ई०) ने पूरा किया। पुरुषार्थसिद्धयुपाय में आया ‘पुरुष’ शब्द पुल्लिंग-पुरुष का प्रतीक न होकर आत्मा का प्रतीक है जिसका प्रकट रूप हमें पुरुषार्थसिद्धयुपाय श्लोक संख्या-9 में मिलता है।पुरुषार्थसिद्धयुपाय में वर्णित पुरुष और पुरुषार्थ इसमें अहिंसा के सिद्धान्त को विस्तार से समझाया गया हैं Jain 2012 33-34 इसमें श्रावक को हिंसा आदिक पापों से सावधान भी किया गया हैं।Jain 2012 55-60 इन्हें भी देखें तत्त्वार्थ सूत्र पुरुषार्थ बाहरी कड़ियाँ अमृतचन्द्र द्वारा विरचित पुरुषार्थसिद्ध्युपाय (पं० टोडरमल कृत हिन्दी रूपान्तर सहित) पुरुषार्थसिद्ध्युपायः (संस्कृत विकिस्रोत) सन्दर्भ सन्दर्भ ग्रन्थ http://books.google.com/?id=CLEVAQAAIAAJ The Sacred Books of the Jainas Uggar Sain Sital Prasad (Brahmachari) 1931 http://books.google.com/?id=4iyUu4Fc2-YC&pg=PR14 Acharya Amritchandra's Purushartha Siddhyupaya 9788190363945 Jain Vijay K. 2012 श्रेणी:जैन ग्रंथ