411 REFERENCE · Wikipedia
पराठे वाली गली
Reference material by Wikipedia contributors. This retains its source identity and is not 411 news reporting.
thumb|१९०px|right|पराठे वाली गली जो कि प्रसिद्ध है सिर्फ परांठा के लिये Dec 2006.
पराठेhttp://www.dvat.gov.in/dvatonline/docs/zone_ward/zone2.htm Official name 16 मार्च 2012 https://web.archive.org/web/20080905124953/http://www.dvat.gov.in/dvatonline/docs/zone_ward/zone2.htm 5 सितंबर 2008 dead वाली गली य़ा गली पराठे वाली, एक सकरी गली चाँदनी चौक नामक प्रसिद्ध बाज़ार मे जो की दिल्ली में स्थित है। वहां काफी पुरानी पराठे बनाने वाली दुकाने हैं। यह एक भारतीय रोटी का विशिष्ट रूप है। यह व्यंजन उत्तर भारत में जितना लोकप्रिय है, लगभग उतना ही दक्षिण भारत में भी है, बस मूल फर्क ये है, कि जहां उत्तर में आटे का बनता है, वहीं दक्षिण में मैदे का बनता है। माना जाता है यहाँ के दुकानदार मुगलों के समय से पराठे बेच रहे हैं।http://www.chillibreeze.com/articles/ACulinaryCruise.asp Paranthe Wali Gali 16 मार्च 2012 https://web.archive.org/web/20131021021156/http://www.chillibreeze.com/articles/ACulinaryCruise.asp 21 अक्तूबर 2013 dead http://www.delhilive.com/paranthe_wali_gali_0 Parathe Wali gali 16 मार्च 2012 https://web.archive.org/web/20120215201202/http://www.delhilive.com/paranthe_wali_gali_0 15 फ़रवरी 2012 dead http://www.lifestyle.headlinesindia.com/restaurant/street-food.html India Street Food 16 मार्च 2012 https://web.archive.org/web/20090722121748/http://www.lifestyle.headlinesindia.com/restaurant/street-food.html 22 जुलाई 2009 dead
इतिहास
इतिहास के अनुसार सन १६५० में मुगल के बादशाह शाहजहाँ ने लाल किले कि स्थापना कि तभी चांदनी चौक भी बनवाया गया। पुराने समये मे ये चाँदी के बर्तनो के लिये प्रसिद्ध रह चुकी है। पराठे कि दुकाने यहाँ सन १८७० मे लाई गयी। यहा का जायका विश्व मे प्रसिद्ध है। हालांकि मुम्बई मे एक भोजनालय है जो कि सिर्फ पराठे बेचता है और अमेरिका का एक मेला नामक भोजनालय दिल्ली की इस प्रसिद्ध गली के माहौल की प्रतिलिपि बनाने की कोशिश की।
सन १९६० मे यहाँ करीब २० दुकानें थी (सभी एक ही परिवार के लोग थे) अब सिर्फ ३ ही दुकानें रह गयी हैं: पं॰ कन्हैयालाल दुर्गा प्रसाद दीक्षित (१८७५ estd), पं॰ दयानंद शिव चरण (१८८२ estd), पं॰ बाबूराम देवी दयाल पराठे वाले (१८८६ estd)। १९११ से, इस क्षेत्र को छोटा दरीबा या दरीबा कलां के रूप में जाना जाता है।
आजादी के बाद के वर्षों में, जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और विजया लक्ष्मी पंडित इस गली में उनके पराठे खाने के लिए आया करते था। "पंडित दयानंद शिव चरण" दुकान गर्व से नेहरू परिवार की तस्वीर दिखाता है। स्वर्गीय जयप्रकाश नारायण उनके एक नियमित आगंतुक थे।
भोजन
यहाँ पुराने जमाने कि तर्ज पर पारंपरिक रूप से भोजन पकाया जाता है जो कि शुद्ध शाकाहारी होता है और उसमे प्याज या लहसुन शामिल नहीं होता है। ऐसा इसलिये है क्योंकि इन दुकानों के मालिक ब्राह्मण हैं और पारंपरिक रूप से ग्राहकों के पड़ोस में जैन रहते थे। यहा पर विभिन्न किस्मों के काजू परांठा, बादाम परांठा, मटर परांठा, मिक्स परांठा, रबड़ी परांठा, खोया परांठा, गोभी परांठा, परत परांठा परोसे जाते हैं। परांठा आम तौर पर मीठी इमली की चटनी, पुदीना की चटनी, अचार और मिश्रित सब्जी, पनीर की सब्जी, आलू और मेथी की सब्जी और कद्दू की सब्जी (सीताफल) के साथ परोसा जाता है।
पेय
आमतौर पर यहां लोग पराठे के साथ लस्सी का उपयोग करते हैं। इस जगह की एक विशेष बात यह है कि, लस्सी परंपरागत तरीके में एक मिट्टी के कुल्हड़ में परोसी जाती है।
References
श्रेणी:दिल्ली का खाना
श्रेणी:दिल्ली के दर्शनीय स्थल
श्रेणी:दिल्ली में सड़कें