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411 समाचार
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411 REFERENCE · Wikipedia

सिद्ध (जैन धर्म)

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thumb|सिद्ध आत्मा को जैन मंदिरों में इस रूप में पूजा जाता हैं सिद्ध शब्द का प्रयोग जैन धर्म में भगवान के लिए किया जाता हैं। सिद्ध पद को प्राप्त कर चुकी आत्मा संसार (जीवन मरण के चक्र) से मुक्त होती है। अपने सभी कर्मों का क्षय कर चुके, सिद्ध भगवान अष्टग़ुणो से युक्त होते है।प्रमाणसागर २००८ १४८ वह सिद्धशिला जो लोक के सबसे ऊपर है, वहाँ विराजते है। पंच परमेष्ठी पंच परमेष्ठी thumb|left|पंच परमेष्ठी दर्शन जैन दर्शन के अनुसार पाँच पद स्थित जीव पूजनिय हैं। इन्हें पंच परमेष्ठी कहते हैं। सिद्ध इसमें अरिहंतों के बाद आते है। आठ मूल गुण जैन दर्शन के अनुसार सिद्धों के अनन्त गुण होते हैं जिसमें निम्नलिखित आठ गुण प्रधान होते हैं-प्रमाणसागर २००८ ३५९ क्षायिक समयक्त्व केवलज्ञान केवलदर्शन अनन्तवीर्य अवगाहनत्व सूक्ष्मत्व अगुरुलघुत्व अव्यबाधत्व इन्हें भी देखें जैन धर्म में भगवान मोक्ष (जैन धर्म) सन्दर्भ सन्दर्भ सूची प्रमाणसागर मुनि जैन तत्त्वविद्या २००८ भारतीय ज्ञानपीठ https://books.google.co.in/books?id=kKqDPzCrwf0C 978-81-263-1480-5 28 फ़रवरी 2016 https://web.archive.org/web/20160306195253/https://books.google.co.in/books?id=kKqDPzCrwf0C 6 मार्च 2016 live