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चक्रासन
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चक्रासन
thumb|right|चक्रासन
पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ीए। एड़ीयां नितम्बों के समीप लगी हुई हों।
दोनों हाथों को उल्टा करके कंधों के पीछे थोड़े अन्तर पर रखें इससे सन्तुलन बना रह्ता है।
श्वास अन्दर भरकर कटिप्रदेश एवं छाती को ऊपर उठाइये।
धीरे-धीरे हाथ एवं पैरों को समीप लाने का प्रयत्न करें, जिससे शरीर की चक्र जैसी आकृति बन जाए।
आसन छोड़ते समय शरीर को ढीला करते हुए भुमि पर टिका दें। इस प्रकार 3-4 आवृति करें।
लाभ चक्रासन के बारे मे जानकारी
रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाकर वृध्दावस्था नहीं आने देता। जठर एवं आंतो को सक्रिय करता है।
शरीर में स्फूर्ति, शक्ति एवं तेज की वृध्दि करता है।
कटिपीड़ा, श्वास रोग, सिरदर्द, नेत्र विकारों, सर्वाइकल व स्पोंडोलाईटिस में विशेष हितकारी है।
हाथ पैरों कि मांसपेशियों को सबल बनाता है।
महिलाओं के गर्भाशय के विकारों को दूर करते हैं।
बाहरी कड़ियाँ
Yoga
श्रेणी:योगासन
श्रेणी:योग
कटिचक्रासन योग https://web.archive.org/web/20230528042556/https://www.bharatyog.in/2023/05/%20katichakraasan-yoga-karane-ka-sahi-tareeka-fayde-aur-savadhani.html 28 मई 2023